पाठ 1 / 1 | सामान्य विज्ञान / प्रकाश और परावर्तन
Light: Reflection and Mirrors
1 practice test
प्रकाश: परावर्तन और दर्पण
प्रकाश ऊर्जा का एक रूप है जिसकी सहायता से हम वस्तुएँ देखते हैं। RRB ग्रुप D में इस अध्याय से नियमित रूप से 2–4 प्रश्न पूछे जाते हैं।
मुख्य तथ्य
- प्रकाश सीधी रेखा में चलता है (ऋजुरेखीय संचरण)।
- निर्वात में प्रकाश की चाल ≈ 3 × 10⁸ मी/से; पानी और काँच में यह धीमी होती है।
- सूर्य से प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने में लगभग 8 मिनट 20 सेकंड लगते हैं।
परावर्तन के नियम
- आपतन कोण = परावर्तन कोण (∠i = ∠r)।
- आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब तीनों एक ही तल में होते हैं।
दर्पणों के प्रकार और उपयोग
| दर्पण | प्रतिबिंब | सामान्य उपयोग |
|---|---|---|
| समतल | आभासी, सीधा, समान आकार, पार्श्व उल्टा | श्रृंगार दर्पण |
| अवतल (अभिसारी) | वास्तविक या आभासी; बड़ा हो सकता है | टॉर्च/हेडलाइट परावर्तक, दाढ़ी बनाने व दंत चिकित्सक का दर्पण, सौर कुकर |
| उत्तल (अपसारी) | सदैव आभासी, सीधा, छोटा | वाहनों में पीछे देखने वाला दर्पण, दुकानों के सुरक्षा दर्पण |
याद रखने योग्य सूत्र
- फोकस दूरी f = R / 2 (R = वक्रता त्रिज्या)।
- दर्पण सूत्र: 1/f = 1/v + 1/u।
परीक्षा सुझाव
- "अधिक दृष्टि क्षेत्र" → उत्तल दर्पण।
- "पास रखने पर बड़ा प्रतिबिंब" → अवतल दर्पण।
- समतल दर्पण में प्रतिबिंब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है जितनी दूरी पर वस्तु सामने है।
उदाहरण से समझें
दर्पण से टकराते प्रकाश को चिकनी दीवार से उछलती क्रिकेट गेंद की तरह समझिए। यदि आप गेंद को दीवार पर किसी कोण से फेंकें, तो वह दूसरी ओर उसी कोण पर लौटती है — यही परावर्तन का नियम है। अवतल दर्पण एक डिश एंटीना जैसा है जो संकेतों को एक बिंदु पर इकट्ठा करता है, जबकि उत्तल दर्पण बस ड्राइवर के साइड मिरर जैसा है जो दृश्य को फैलाकर सड़क का अधिक भाग दिखाता है।