पाठ 1 / 1 | गणित / साधारण ब्याज
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साधारण ब्याज (SI)
साधारण ब्याज केवल मूल राशि (मूलधन) पर लगता है, पहले से मिले ब्याज पर कभी नहीं। RRB ग्रुप D के गणित खंड में 1–3 प्रश्न साधारण ब्याज से आते हैं।
मुख्य शब्द
- मूलधन (P): उधार ली या जमा की गई राशि
- दर (R): प्रति ₹100 प्रति वर्ष ब्याज (% वार्षिक)
- समय (T): वर्षों में (महीनों को 12 से भाग दें)
- मिश्रधन (A): P + SI
मूल सूत्र
- SI = (P × R × T) / 100
- A = P + SI = P (1 + RT/100)
- P = (SI × 100) / (R × T)
- R = (SI × 100) / (P × T)
- T = (SI × 100) / (P × R)
हल किया गया उदाहरण
₹2,000 पर 5% वार्षिक दर से 3 वर्ष: SI = 2000 × 5 × 3 / 100 = ₹300; मिश्रधन = ₹2,300।
शॉर्टकट
- T वर्षों में राशि दोगुनी → R = 100 / T। (10 वर्ष में दोगुनी → 10%।)
- T वर्षों में राशि n गुनी → R = (n − 1) × 100 / T।
- 1 वर्ष का SI = P × R / 100 — फिर वर्षों की संख्या से गुणा करें।
सामान्य गलतियाँ
- समय महीनों में दिया हो — 12 से भाग दें।
- प्रश्न मिश्रधन पूछे, SI नहीं — मूलधन जोड़ना न भूलें।
उदाहरण से समझें
साधारण ब्याज को साइकिल किराये पर देने की तरह समझिए। हर साल किरायेदार उसी साइकिल के लिए आपको एक समान निश्चित किराया देता है — किराया कभी नहीं बढ़ता क्योंकि साइकिल (मूलधन) वही रहती है। 3 साल बाद आपको अपनी साइकिल वापस मिलती है और साथ में 3 बराबर किराये। यही निश्चित, दोहराया जाने वाला किराया साधारण ब्याज है।