पाठ 48 / 100 | Quantitative Aptitude / Partnership / साझेदारी
साझेदारों का जुड़ना, अलग होना या निवेश बदलना
सीखने का लक्ष्य
साझेदारों के जुड़ने, अलग होने या अपनी पूँजी बदलने पर लाभ का सही वितरण करना।
अवधारणा और मान्यताएँ
लेखा-अवधि 12 महीने लें। k महीने पूरे होने के बाद 12 − k महीने शेष रहते हैं। अलग होने वाला साझेदार अपनी पूरी पूँजी निकाल लेता है और उसके बाद उसका योगदान शून्य होता है।
लाभ का वितरण पूँजी-अवधि के भारों के अनुपात में होता है। जब तक बताया न गया हो, कोई वेतन या कमीशन नहीं दिया जाता। लाभ को दोबारा निवेश नहीं किया जाता।
भार = प्रत्येक समय-खंड में पूँजी × उस खंड के महीनों की संख्या; फिर सभी खंडों का योग।
समय को ऐसे खंडों में बाँटें कि कोई अवधि छूटे नहीं और कोई अवधि दो बार न गिनी जाए। पूँजी जोड़ने से आगे की पूँजी बढ़ती है; निकासी से घटती है। खंडों के भार इसलिए जोड़े जाते हैं क्योंकि प्रत्येक खंड अपना पूँजी-अवधि योगदान देता है।
लाभ का हिस्सा = बाँटने योग्य लाभ × व्यक्तिगत भार ÷ कुल भार।
तय वेतन पहले तभी घटाएँ जब ऐसा निर्देश हो; फिर उसे संबंधित साझेदार के लाभ में जोड़ें। केवल वर्ष के अंत की पूँजी पूरे वर्ष का योगदान नहीं बता सकती।
हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1 — बाद में जुड़ना। A पूरे वर्ष ₹60,000 लगाता है। B, 4 महीने पूरे होने के बाद ₹90,000 लगाता है और वर्ष के अंत तक रहता है। ₹64,000 बाँटिए।
B की अवधि = 12 − 4 = 8 महीने। भार: A = 60,000 × 12 = 720,000; B = 90,000 × 8 = 720,000। अनुपात = 1:1। प्रत्येक को 64,000 ÷ 2 = ₹32,000 मिलते हैं।
उदाहरण 2 — जुड़ना और अलग होना। A पूरे वर्ष ₹50,000 लगाता है। B शुरुआत में ₹80,000 लगाता है, लेकिन 9 महीने पूरे होने पर अलग हो जाता है। C, 6 महीने पूरे होने के बाद ₹60,000 लगाता है। लाभ ₹70,000 है।
C की निवेश-अवधि = 12 − 6 = 6 महीने। भार = (50,000 × 12):(80,000 × 9):(60,000 × 6) = 600,000:720,000:360,000 = 5:6:3। कुल भाग = 14; एक भाग = 70,000 ÷ 14 = 5,000। A = 5 × 5,000 = ₹25,000; B = 6 × 5,000 = ₹30,000; C = 3 × 5,000 = ₹15,000।
उदाहरण 3 — बदलती पूँजी और वेतन। A शुरुआत में ₹80,000 लगाता है और महीना 4 शुरू होते ही ₹40,000 जोड़ता है। B शुरुआत में ₹100,000 लगाता है और महीना 7 शुरू होते ही ₹40,000 निकालता है। C, महीना 5 शुरू होते ही ₹60,000 के साथ जुड़ता है। इसके बाद सभी वर्ष के अंत तक बने रहते हैं। A का तय वार्षिक वेतन देने से पहले लाभ ₹138,000 है; पहले A को ₹23,000 दें।
A का भार = 80,000 × 3 + 120,000 × 9 = 1,320,000। B का भार = 100,000 × 6 + 60,000 × 6 = 960,000। C का भार = 60,000 × 8 = 480,000। अनुपात = 11:8:4; कुल भाग = 23। बाँटने योग्य लाभ = 138,000 − 23,000 = 115,000। एक भाग = 115,000 ÷ 23 = 5,000। लाभ के हिस्से: A = 11 × 5,000 = ₹55,000; B = 8 × 5,000 = ₹40,000; C = 4 × 5,000 = ₹20,000। A की कुल प्राप्ति = 55,000 + 23,000 = ₹78,000; B को ₹40,000 और C को ₹20,000 मिलते हैं।
आम गलतियाँ
महीनों की गलत गिनती करना; जोड़ी गई पूँजी को ही नई कुल पूँजी मान लेना; अलग होने के बाद भी पूँजी का योगदान गिनना; बिना बताए वेतन मान लेना; वेतन देने के बाद भी वेतन-पूर्व पूरा लाभ दोबारा बाँटना।
अभ्यास प्रश्न
- A पूरे वर्ष ₹40,000 लगाता है; B, 6 महीने पूरे होने के बाद ₹60,000 लगाता है। ₹42,000 बाँटिए।
- A पूरे वर्ष ₹60,000 लगाता है; B शुरुआत में ₹80,000 लगाता है और 6 महीने पूरे होने पर अलग हो जाता है। ₹50,000 बाँटिए।
- A शुरुआत में ₹50,000 लगाता है और 4 महीने पूरे होने के बाद ₹30,000 जोड़ता है। B पूरे वर्ष ₹60,000 लगाता है। ₹78,000 बाँटिए।
- A पूरे वर्ष ₹60,000 लगाता है; B, 6 महीने पूरे होने के बाद ₹90,000 लगाता है। A का तय वार्षिक वेतन ₹14,000 देने से पहले लाभ ₹98,000 है। पहले वेतन दें और दोनों की कुल प्राप्तियाँ निकालें।
चरणबद्ध हल
- B की अवधि = 6 महीने। भार = 480,000:360,000 = 4:3। A = 42,000 × 4/7 = ₹24,000; B = 42,000 × 3/7 = ₹18,000।
- भार = 60,000 × 12 : 80,000 × 6 = 720,000:480,000 = 3:2। हिस्से = 50,000 × 3/5 = ₹30,000 और 50,000 × 2/5 = ₹20,000।
- A का भार = 50,000 × 4 + 80,000 × 8 = 840,000। B का भार = 60,000 × 12 = 720,000। अनुपात = 7:6। हिस्से = 78,000 × 7/13 = ₹42,000 और 78,000 × 6/13 = ₹36,000।
- भार = 720,000:540,000 = 4:3। बाँटने योग्य लाभ = 98,000 − 14,000 = 84,000। A का लाभ = 84,000 × 4/7 = 48,000; कुल प्राप्ति = 48,000 + 14,000 = ₹62,000। B को 84,000 × 3/7 = ₹36,000 मिलते हैं।