पाठ 1 / 2 | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II (राजव्यवस्था, शासन, अंतर्राष्ट्रीय संबंध) / संविधान, संघवाद और शक्तियों का पृथक्करण
Features of Indian Federalism
एकात्मक झुकाव वाला संघ
संविधान में "फ़ेडरेशन" शब्द नहीं है; अनुच्छेद 1 भारत को "राज्यों का संघ" कहता है। के. सी. व्हेयर ने इसे अर्ध-संघीय कहा।
संघीय विशेषताएँ
- द्वैध शासन (संघ और राज्य)।
- शक्तियों का विभाजन — सातवीं अनुसूची: संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची।
- लिखित, आंशिक रूप से कठोर संविधान; संविधान की सर्वोच्चता।
- केंद्र–राज्य विवाद सुलझाने हेतु स्वतंत्र न्यायपालिका (अनुच्छेद 131)।
- राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाली राज्यसभा सहित द्विसदनीय संसद।
एकात्मक विशेषताएँ
- मज़बूत केंद्र; अवशिष्ट शक्तियाँ संसद के पास (अनुच्छेद 248)।
- संसद राज्यों की सीमाएँ बदल सकती है (अनुच्छेद 3)।
- आपातकालीन प्रावधान (अनुच्छेद 352, 356, 360)।
- एकल नागरिकता, एकीकृत न्यायपालिका, अखिल भारतीय सेवाएँ।
- केंद्र द्वारा नियुक्त राज्यपाल।
सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद
- सहकारी: GST परिषद (अनुच्छेद 279A), नीति आयोग, अंतर-राज्य परिषद (अनुच्छेद 263)।
- प्रतिस्पर्धी: राज्य व्यापार-सुगमता रैंकिंग के माध्यम से निवेश के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।
मुख्य परीक्षा के कोण
राजकोषीय संघवाद (वित्त आयोग, GST क्षतिपूर्ति), अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग (एस. आर. बोम्मई मामला, 1994), राज्यपालों की भूमिका।
उदाहरण से समझें
भारतीय संघवाद एक मज़बूत मुखिया वाले संयुक्त परिवार जैसा है। हर घर (राज्य) अपनी रसोई और बजट चलाता है, पर आपात स्थिति में अंतिम निर्णय मुखिया (संघ) का होता है, वह कमरे फिर से बाँट सकता है और बची हुई चाबियाँ (अवशिष्ट शक्तियाँ) रखता है। यह तब सबसे अच्छा चलता है जब सब एक मेज़ पर बैठते हैं — GST परिषद जैसा सहकारी संघवाद।