पाठ 1 / 2 | आधुनिक भारत / स्वतंत्रता संघर्ष (1857–1947)
1857 का विद्रोह और प्रारंभिक राष्ट्रीय आंदोलन
1857 का विद्रोह
- तात्कालिक कारण: एनफ़ील्ड राइफ़ल का प्रयोग, जिसके कारतूसों पर गाय और सूअर की चर्बी लगी होने की अफ़वाह थी।
- मंगल पांडे ने बैरकपुर में अधिकारियों पर हमला किया (मार्च 1857); विद्रोह 10 मई 1857 को मेरठ से शुरू हुआ।
- विद्रोही दिल्ली पहुँचे और बहादुर शाह ज़फ़र को सम्राट घोषित किया।
| केंद्र | नेता |
|---|---|
| दिल्ली | बहादुर शाह ज़फ़र, बख़्त ख़ान |
| कानपुर | नाना साहब, तात्या टोपे |
| लखनऊ | बेगम हज़रत महल |
| झाँसी | रानी लक्ष्मीबाई |
| बिहार (आरा) | कुँवर सिंह |
परिणाम: भारत सरकार अधिनियम, 1858 से कंपनी शासन समाप्त हुआ; सत्ता ब्रिटिश क्राउन को मिली; गवर्नर-जनरल वायसराय कहलाया; महारानी विक्टोरिया की घोषणा (1858) ने धर्म में हस्तक्षेप न करने का वादा किया।
संगठित राष्ट्रवाद का उदय
- प्रारंभिक संगठन: ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन (1851), सुरेंद्रनाथ बनर्जी की इंडियन एसोसिएशन (1876)।
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना दिसंबर 1885 में बंबई में हुई; ए.ओ. ह्यूम प्रमुख संस्थापक; पहले अध्यक्ष डब्ल्यू.सी. बनर्जी।
उदारवादी (1885–1905)
- नेता: दादाभाई नौरोजी, गोपाल कृष्ण गोखले, फ़िरोज़शाह मेहता।
- तरीके: संवैधानिक सीमाओं में याचिका, प्रार्थना और विरोध।
- धन निष्कासन सिद्धांत: दादाभाई नौरोजी, पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया।
बंगाल विभाजन और स्वदेशी (1905)
- लॉर्ड कर्ज़न ने बंगाल का विभाजन किया (1905); इसके बाद स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन चला।
- सूरत विभाजन (1907): कांग्रेस उदारवादियों और उग्रवादियों (लाल-बाल-पाल: लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल) में बँट गई।
- मुस्लिम लीग की स्थापना 1906 में ढाका में। विभाजन 1911 में रद्द हुआ।
प्रीलिम्स टिप्स
- 1857 के केंद्रों का नेताओं से मिलान करें।
- कालक्रम याद रखें: 1885 कांग्रेस → 1905 विभाजन → 1906 लीग → 1907 सूरत विभाजन।
उदाहरण से समझें
प्रारंभिक राष्ट्रीय आंदोलन को प्रधानाचार्य के पास जाती छात्र परिषद की तरह समझें। उदारवादियों ने प्रधानाचार्य की न्यायप्रियता पर भरोसा करके विनम्र पत्र और याचिकाएँ लिखीं। जब प्रधानाचार्य (कर्ज़न) ने कक्षा को दो भागों में बाँट दिया, तो एक मुखर समूह (उग्रवादी) ने माँगना छोड़कर कैंटीन का बहिष्कार (स्वदेशी) शुरू कर दिया — लक्ष्य वही, तरीके बिल्कुल अलग।