पाठ 1 / 2 | भूगोल / भारतीय भू-आकृति की मूल बातें
Indian Physiography basics
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भारतीय भू-आकृति की मूल बातें
भारत की भू-आकृति (स्थलरूपों) को सामान्यतः छह प्रमुख भागों में बाँटा जाता है। UPSC प्रारंभिक परीक्षा में इनकी स्थिति, निर्माण और विशेषताएँ पूछी जाती हैं।
मुख्य बिंदु
- हिमालय (उत्तरी पर्वत): भारतीय और यूरेशियाई प्लेटों के टकराव से बने नवीन वलित पर्वत; तीन समानांतर श्रेणियाँ — हिमाद्रि (महान), हिमाचल (लघु) और शिवालिक (बाह्य)।
- उत्तरी मैदान: सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र की जलोढ़ मिट्टी से निर्मित; भाबर, तराई, बांगर (पुराना जलोढ़) और खादर (नया जलोढ़) में विभाजित।
- प्रायद्वीपीय पठार: सबसे प्राचीन भूभाग, प्राचीन क्रिस्टलीय चट्टानों से बना; इसमें मध्य उच्चभूमि और दक्कन का पठार शामिल हैं।
- भारतीय मरुस्थल (थार): अरावली के पश्चिम में; कम वर्षा, बालू के टीले (बरखान)।
- तटीय मैदान: पश्चिमी तट (संकरा; कोंकण, कन्नड़, मालाबार) और पूर्वी तट (चौड़ा; महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी के डेल्टा)।
- द्वीप समूह: अंडमान-निकोबार (ज्वालामुखीय/विवर्तनिक उत्पत्ति) और लक्षद्वीप (प्रवाल उत्पत्ति)।
उदाहरण
प्रश्न: भारत का सबसे प्राचीन भू-आकृतिक विभाग कौन-सा है? उत्तर: प्रायद्वीपीय पठार — प्राचीन गोंडवानालैंड का भाग।
सुझाव: तलहटी से नदियों की ओर जाते हुए क्रम याद रखें: "भाबर → तराई → बांगर → खादर"।
उदाहरण से समझें
उपमा: भारत एक बड़ा घर
भारत की भू-आकृति को एक बड़े घर की तरह देखें:
- हिमालय उत्तर में ऊँची छत और चारदीवारी है — नवीन, ऊँचा और अब भी ऊपर उठता हुआ।
- उत्तरी मैदान उपजाऊ आँगन का बगीचा है, जिसकी मिट्टी नदियाँ लगातार लाती रहती हैं।
- प्रायद्वीपीय पठार घर की पुरानी पत्थर की नींव है — सबसे प्राचीन और सबसे कठोर भाग।
- थार मरुस्थल पश्चिम में अरावली की दीवार के पीछे सूखा भंडार-कक्ष है।
- तटीय मैदान पूर्व और पश्चिम के बरामदे हैं — पश्चिम में संकरे, पूर्व में चौड़े।
- द्वीप समूह समुद्र में बने बगीचे के कमरे हैं — अंडमान-निकोबार ज्वालामुखीय/विवर्तनिक चट्टानों से, लक्षद्वीप प्रवाल से बना।
याद रखें: छत = सबसे नवीन (हिमालय), नींव = सबसे प्राचीन (पठार)।