प्रारंभिक राजस्थान: 20-अंकीय तुलनात्मक अभ्यास
किसी एक भाषा, हिंदी या अंग्रेजी, में तीनों प्रश्न करें। प्रश्न 1–2 प्रत्येक 5 अंक के हैं, हर उत्तर अधिकतम 50 शब्दों में; प्रश्न 3 के 10 अंक हैं, उत्तर अधिकतम 150 शब्दों में दें। कुल 20 अंक। अभ्यास के लिए सुझाया समय 25 मिनट है; इसके बाद स्वमूल्यांकन करें। शब्द-सीमा के प्रारूप आरपीएससी की 9 जनवरी 2026 योजना से लिए गए हैं; इस मौलिक अभ्यास के कुल अंक और सुझाया समय शिक्षण के लिए तय किए गए हैं। यह आधिकारिक प्रश्नपत्र नहीं है। मॉडल पढ़ने से पहले प्रयास करें। समर्थित अन्य उत्तर भी अंक पा सकते हैं; दोनों भाषाओं में करने से अंक दोगुने नहीं होते।
अभ्यास के प्रश्न
प्रश्न 1 · 5 अंक · 50 शब्द अधिकतम
आहड़ और गणेश्वर से ताँबे से संबंधित एक-एक प्रमुख खोज बताइए। स्पष्ट कीजिए कि ये खोजें प्रारंभिक राजस्थान के अध्ययन में क्या योगदान देती हैं।
प्रश्न 2 · 5 अंक · 50 शब्द अधिकतम
दो प्रकार के साक्ष्य के आधार पर प्रारंभिक ऐतिहासिक स्थल के रूप में बैराठ का महत्त्व स्पष्ट कीजिए। इन साक्ष्यों को विराट–पांडव परंपरा से अलग कीजिए।
प्रश्न 3 · 10 अंक · 150 शब्द अधिकतम
प्रारंभिक राजस्थान में बस्ती के संगठन और आर्थिक गतिविधियों को समझने के स्रोतों के रूप में कालीबंगा और गिलूंड की तुलना कीजिए। संबंधित अवस्थाओं की विशेषताओं का उपयोग कीजिए और तुलना की एक सीमा स्पष्ट कीजिए।
संकेतात्मक उत्तर और स्वमूल्यांकन
प्रश्न 1
आहड़ का ताँबे से जुड़ा धातुमल धातुकार्य की जाँच में सहायक है; गणेश्वर के ताम्र-बाणाग्र बाद की अवस्थाओं की ताम्र-तकनीक का साक्ष्य हैं। मृद्भांडों, परतों और अन्य खोजों के साथ ये क्षेत्रीय तकनीक तथा गतिविधियाँ समझाते हैं। अकेली खोज पूरी संस्कृति या स्थलों के बीच प्रत्यक्ष आपूर्ति सिद्ध नहीं करती।
- आहड़ की खोज और प्रासंगिक महत्त्व: 2 अंक
- गणेश्वर की खोज और प्रासंगिक महत्त्व: 2 अंक
- स्पष्ट तुलनात्मक निष्कर्ष: 1 अंक
उचित व्याख्या के साथ अन्य विशिष्ट, समर्थित ताम्र-खोजें भी स्वीकारें, जैसे आहड़ की ताँबे की कुल्हाड़ी या गणेश्वर का मछली पकड़ने का काँटा। तैयार वस्तु अकेले निर्माण के हर चरण का स्थान नहीं बताती। दोनों स्थलों पर ताँबा मिलने से प्रत्यक्ष व्यापार-मार्ग न निकालें।
प्रश्न 2
बैराठ के अशोक-अभिलेख और विहार-कक्षों सहित उत्खनित वृत्ताकार स्तूपयुक्त उपासना-स्थल मौर्यकालीन प्रारंभिक ऐतिहासिक संदर्भ देते हैं। लिखित तथा स्थापत्य साक्ष्य संचार और बौद्ध संस्थाएँ समझाते हैं। विराट–पांडव संबंध परंपरा है; ये मौर्य अवशेष उस कथा को उत्खनन-सिद्ध तथ्य नहीं बनाते।
- सही मौर्य या अशोक का संदर्भ: 1 अंक
- दो समर्थित साक्ष्य-प्रकार: 2 अंक
- संबद्ध ऐतिहासिक महत्त्व: 1 अंक
- परंपरा और स्थापित पुरातात्त्विक साक्ष्य का भेद: 1 अंक
निर्माण का सटीक वर्ष जरूरी नहीं और स्थल-विवरण वह नहीं देता। परंपरा को उत्खनन से अलग करने के लिए परंपरा के हर भाग पर व्यापक दावा करना जरूरी नहीं।
प्रश्न 3
कालीबंगा में प्रारंभिक और परिपक्व हड़प्पा क्रम है; गिलूंड आहड़–बनास ताम्रपाषाण संदर्भ देता है। कालीबंगा की परस्पर काटती हल-रेखाएँ प्रारंभिक हड़प्पा की खेती का साक्ष्य हैं, जबकि बाद के परकोटे वाले भाग और व्यवस्थित सड़कें बस्ती-समन्वय समझाती हैं। गिलूंड में कच्ची ईंटों की समानांतर दीवारें तथा कोष्ठ में 100 से अधिक मुहरछापें भंडारण और वस्तु-प्रबंधन की जाँच में सहायक हैं। दोनों स्थल आर्थिक गतिविधि और स्थान के संगठित उपयोग को समझाते हैं, लेकिन कुछ अलग साक्ष्यों से। खोज-सूचियाँ परस्पर बदलने के बजाय खेती की भंडारण से और बस्ती-योजना की भवन-कार्य से तुलना करें। व्यापक कालक्रम में समान समय होने से गिलूंड हड़प्पा उपनिवेश या उसका प्रत्यक्ष उत्तराधिकारी सिद्ध नहीं होता। एक सीमा यह है कि भवनों और मुहरछापों से अनुमानित भंडारण किसी निश्चित कर-व्यवस्था की पहचान नहीं करता। सकारात्मक निष्कर्ष उत्खनित विशेषता और अवस्था से जुड़े रहें।
- सही संदर्भ और अवस्थाओं का भेद: 2 अंक
- प्रश्न से जुड़ा सही कालीबंगा-साक्ष्य: 2 अंक
- प्रश्न से जुड़ा सही गिलूंड-साक्ष्य: 2 अंक
- प्रत्यक्ष तुलना और ऐतिहासिक महत्त्व: 3 अंक
- साक्ष्य की एक प्रासंगिक सीमा: 1 अंक
समान आयामों पर व्यवस्थित, समर्थित तुलना को अंक दें। तुलना समझाए बिना सही खोजें गिनाने से निष्कर्ष के पूरे तीन अंक नहीं मिलते। कालीबंगा का खेत प्रारंभिक हड़प्पा का रखें और प्रस्तावित भंडारण-कार्य को ज्ञात कर-संस्था से अलग करें।
स्रोत और पठन स्थान
- स्रोत 2: NCERT, Themes in Indian History I, Theme 1: Bricks, Beads and Bones, reprint 2026–27 — मुद्रित पृ. 1; पीडीएफ पृ. 1; मुद्रित पृ. 3; पीडीएफ पृ. 3
- स्रोत 3: B. B. Lal and colleagues, Excavations at Kalibangan: The Harappans (1960–69), Part I, Memoirs of ASI 110, 2015 — मुद्रित पृ. 1; पीडीएफ पृ. 23; मुद्रित पृ. 3–4; पीडीएफ पृ. 25–26
- स्रोत 4: Archaeological Survey of India, Indian Archaeology 1961–62 — A Review, §63 Excavation at Ahar — मुद्रित पृ. 45; पीडीएफ पृ. 53; मुद्रित पृ. 50; पीडीएफ पृ. 58
- स्रोत 6: Vasant Shinde, Gregory L. Possehl and Marta E. Ameri, Excavations at Gilund 2001–2003: The Seal Impressions and Other Finds, in South Asian Archaeology 2003, pp. 159–169; DAI digital edition 2022 — मुद्रित पृ. 161; पीडीएफ पृ. 4; मुद्रित पृ. 163; पीडीएफ पृ. 6; मुद्रित पृ. 165; पीडीएफ पृ. 8; मुद्रित पृ. 167; पीडीएफ पृ. 10
- स्रोत 7: Archaeological Survey of India, Indian Archaeology 1987–88 — A Review, §80 Excavation at Ganeshwar — मुद्रित पृ. 101–102; पीडीएफ पृ. 109–110
- स्रोत 8: Archaeological Survey of India, Indian Archaeology 1988–89 — A Review, §73 Galvashram, Ganeshwar — मुद्रित पृ. 76–78; पीडीएफ पृ. 83–85
- स्रोत 9: Rajasthan Foundation, Jaipur district booklet, Bairat Excavated Site — पीडीएफ पृ. 73–74
- स्रोत 10: NCERT, Themes in Indian History I, Theme 2: Kings, Farmers and Towns, reprint 2026–27 — मुद्रित पृ. 32; पीडीएफ पृ. 5; मुद्रित पृ. 33; पीडीएफ पृ. 6
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