भारत की नदियाँ, जलवायु और मिट्टियाँ
हिमालयी नदियाँ
गंगा गंगोत्री से (भागीरथी के रूप में) निकलती है और देवप्रयाग में अलकनंदा से मिलती है। ब्रह्मपुत्र मानसरोवर के पास (त्सांगपो के रूप में) निकलती है। सिंधु की सहायक नदियाँ: झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलुज। हिमालयी नदियाँ बारहमासी हैं (हिम + वर्षा)।
प्रायद्वीपीय नदियाँ
पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में: गोदावरी (सबसे लंबी प्रायद्वीपीय, "दक्षिण गंगा"), कृष्णा, कावेरी, महानदी — ये डेल्टा बनाती हैं। पश्चिम की ओर अरब सागर में: नर्मदा और तापी — भ्रंश घाटियों से बहती हैं और ज्वारनदमुख बनाती हैं।
जलवायु
भारत की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसूनी है। दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून–सितंबर) अधिकांश वर्षा लाता है; मौसिनराम (मेघालय) सबसे अधिक वर्षा वाले स्थानों में है। तमिलनाडु को उत्तर-पूर्वी (लौटते) मानसून से सर्दियों में वर्षा मिलती है।
मिट्टियाँ
जलोढ़ – सबसे बड़ा क्षेत्र, सिंधु-गंगा मैदान। काली (रेगुर) – कपास, दक्कन पठार। लाल – आयरन ऑक्साइड। लैटेराइट – निक्षालित, अधिक वर्षा वाले क्षेत्र।
परीक्षा टिप्स
- नर्मदा और तापी: पश्चिम की ओर बहने वाली, ज्वारनदमुख।
- काली मिट्टी कपास के लिए आदर्श है।
उदाहरण से समझें
भारत की नदियाँ भाई-बहनों के दो परिवारों जैसी हैं। हिमालयी परिवार का एक अमीर चाचा है — हिमनद — जो साल भर पैसा (पानी) भेजता है, इसलिए वे कभी सूखती नहीं। प्रायद्वीपीय परिवार केवल मानसून की तनख्वाह पर निर्भर है, इसलिए गर्मियों में उनकी जेब लगभग खाली हो सकती है।
इस पाठ के टेस्ट
- Indian Rivers, Climate and Soils practice
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