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1950 में अपनाया गया राज्य चिह्न

पाठ 2 / 23 मिनटमुफ़्त

सीखने का परिणाम

आप मूल सिंह शीर्ष और भारत के राजचिह्न में अंतर कर सकेंगे, राजचिह्न को अपनाने की तिथि बता सकेंगे और उसकी आकृति तथा ध्येय वाक्य के अलग-अलग स्रोत पहचान सकेंगे।

अवधारणाएँ और उनके कारण

भारत का राजचिह्न सारनाथ के अशोक सिंह शीर्ष का रूपांतर है। मूल सिंह शीर्ष में चार सिंह पीठ से पीठ मिलाकर खड़े हैं। वे एक गोल आधार-पट्टिका पर हैं, जिसे अबेकस कहते हैं। यह पट्टिका घंटी के आकार के कमल पर टिकी है।

भारत सरकार ने राजचिह्न को 26 जनवरी 1950 को अपनाया। इसकी छवि में तीन सिंह दिखाई देते हैं; चौथा पीछे होने के कारण दिखाई नहीं देता। मूल सिंह शीर्ष के घंटी के आकार वाले कमल को राजचिह्न में शामिल नहीं किया गया।

राजचिह्न की आधार-पट्टिका के बीच धर्मचक्र है। देखने वाले की दाईं ओर बैल और बाईं ओर घोड़ा है।

पट्टिका के नीचे ध्येय वाक्य सत्यमेव जयते देवनागरी लिपि में लिखा है। इसका अर्थ है सत्य की ही जय होती है। स्रोत: मुण्डक उपनिषद। सारनाथ का सिंह शीर्ष आकृति का आधार है। देवनागरी लिपि का नाम है।

हल किए गए उदाहरण

  1. “मूल सिंह शीर्ष में चार सिंह हैं, लेकिन राजचिह्न में तीन दिखाई देते हैं।” दोनों बातें सही हैं। प्रश्न मूल मूर्ति के बारे में हो तो कुल सिंह गिनें; अपनाई गई छवि में दिखाई देने वाले सिंह पूछे जाएँ तो तीन चुनें।
  2. “कमल मूल मूर्ति का भाग है, इसलिए राजचिह्न में भी सिंहों के नीचे होना चाहिए।” यह निष्कर्ष गलत है। राजचिह्न मूल मूर्ति का रूपांतर है और कमल वाला आधार इसमें शामिल नहीं किया गया।
  3. “भारत का राजचिह्न कब अपनाया गया?” उत्तर है 26 जनवरी 1950। प्रश्न राजचिह्न को अपनाने की तिथि पूछता है, प्राचीन मूर्ति के निर्माण की तिथि नहीं।

आम गलतियाँ

“मूल में चार” और “छवि में तीन दिखाई देते हैं” को न मिलाएँ। राजचिह्न को मूल मूर्ति के हर भाग वाली तस्वीर न मानें। तिथि, आकृति का स्रोत, ध्येय वाक्य और उसका अर्थ अलग-अलग तथ्य हैं।

अभ्यास प्रश्न

  1. भारत का राजचिह्न किस तिथि को अपनाया गया?
  2. सत्यमेव जयते का अर्थ क्या है?
  3. दोनों संख्याएँ बताएँ: मूल सिंह शीर्ष में कुल सिंह; राजचिह्न में दिखाई देने वाले सिंह।
  4. ध्येय वाक्य का स्रोत कौन-सा है: सारनाथ का सिंह शीर्ष या मुण्डक उपनिषद?

उत्तर और व्याख्या

  1. 26 जनवरी 1950।
  2. सत्य की ही जय होती है।
  3. मूल में चार; राजचिह्न में तीन दिखाई देते हैं। दिखाई देने वाले सिंहों की संख्या और मूल मूर्ति के कुल सिंहों की संख्या अलग हैं।
  4. मुण्डक उपनिषद। सिंह शीर्ष आकृति का आधार है।

संदर्भ

भारतीय दूतावास, जुबा: इंडिया न्यूज़, अप्रैल 2017, राजचिह्न वाला भाग

उदाहरण से समझें

एक मॉडल और उसे देखकर बनाए गए चित्र की कल्पना करें। चित्र में कुछ भाग दिखाई नहीं देते; चित्रकार किसी भाग को जानबूझकर छोड़ भी सकता है। इसी तरह मूल सिंह शीर्ष में चार सिंह हैं, पर राजचिह्न में तीन दिखाई देते हैं; घंटी के आकार वाला कमल इसमें शामिल नहीं किया गया। ध्यान रखें: पीछे छिपा होना और रूपांकन से हटा देना अलग बातें हैं।

सूत्र और नियम

  • सारनाथ का अशोक सिंह शीर्ष।
  • 26 जनवरी 1950 को अपनाया गया। छवि में तीन सिंह दिखते हैं।
  • ध्येय वाक्य: सत्यमेव जयते, अर्थ सत्य की ही जय होती है।
  • मूल सिंह शीर्ष के घंटी के आकार वाले कमल को राजचिह्न में शामिल नहीं किया गया।

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