भारत के शास्त्रीय नृत्य और संगीत परंपराएँ
आधार ग्रंथ
भरत मुनि का नाट्यशास्त्र नाटक, नृत्य और संगीत पर प्राचीनतम ग्रंथ है। इसमें रस (सौंदर्य भाव) और भाव (अभिव्यक्ति) का वर्णन है। नृत्य के दो पक्ष हैं: तांडव (ओजपूर्ण) और लास्य (कोमल)।
आठ शास्त्रीय नृत्य (संगीत नाटक अकादमी)
| नृत्य | राज्य |
|---|---|
| भरतनाट्यम | तमिलनाडु |
| कथकली | केरल |
| मोहिनीअट्टम | केरल |
| कुचिपुड़ी | आंध्र प्रदेश |
| ओडिसी | ओडिशा |
| कथक | उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश) |
| मणिपुरी | मणिपुर |
| सत्रिया | असम |
- सत्रिया वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव ने आरंभ किया और 2000 में इसे शास्त्रीय दर्जा मिला।
- कथकली में विस्तृत श्रृंगार होता है; हरा (पच्चा) रंग सज्जन पात्रों का प्रतीक है।
- मोहिनीअट्टम लास्य शैली में स्त्रियों द्वारा एकल प्रस्तुत किया जाता है।
संगीत परंपराएँ
- हिंदुस्तानी (उत्तर): फ़ारसी परंपराओं से प्रभावित; रूप — ध्रुपद (प्राचीनतम), ख़याल, ठुमरी, टप्पा।
- कर्नाटक (दक्षिण): कृति-आधारित; कर्नाटक संगीत की "त्रिमूर्ति" — त्यागराज, मुत्तुस्वामी दीक्षितार और श्यामा शास्त्री।
- पुरंदर दास को "कर्नाटक संगीत का पितामह" कहा जाता है।
- राग = मधुर ढाँचा; ताल = लयबद्ध चक्र।
यूनेस्को अमूर्त विरासत (चयनित)
वैदिक मंत्रोच्चार, रामलीला, कुटियाट्टम, छऊ नृत्य, कालबेलिया, कुंभ मेला, योग, कोलकाता की दुर्गा पूजा, गुजरात का गरबा।
प्रीलिम्स टिप्स
- नृत्य ↔ राज्य और नृत्य ↔ विशिष्ट विशेषता का मिलान करें।
- लोक नृत्यों (जैसे गरबा, बिहू) को आठ शास्त्रीय नृत्यों से न मिलाएँ।
उदाहरण से समझें
राग एक व्यंजन की विधि (रेसिपी) जैसा है, और हर प्रस्तुति उससे बना एक पकवान। विधि सामग्री (स्वर) और उन्हें मिलाने का तरीका तय करती है, पर हर संगीतकार उसे थोड़ा अलग पकाता है। ताल रसोई की घड़ी है — बीट्स का एक निश्चित चक्र जो सबको समय पर रखता है।
इस पाठ के टेस्ट
- Classical Dances and Music Traditions of India practice
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