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मुद्रा, बैंकिंग और भारतीय रिज़र्व बैंक

पाठ 2 / 22 मिनटमुफ़्त

मुद्रा के कार्य

विनिमय का माध्यम, मूल्य का मापक, मूल्य का संचय और स्थगित भुगतान का मानक।

मुद्रा आपूर्ति के माप (RBI)

  • M1 (संकुचित मुद्रा) = जनता के पास करेंसी + बैंकों में माँग जमा + RBI के पास अन्य जमा।
  • M3 (व्यापक मुद्रा) = M1 + बैंकों में सावधि जमा। M3 सबसे अधिक प्रयुक्त माप है।

भारतीय रिज़र्व बैंक

  • RBI अधिनियम, 1934 के अंतर्गत 1 अप्रैल 1935 को स्थापित; 1949 में राष्ट्रीयकरण।
  • कार्य: मुद्रा जारीकर्ता (₹1 के नोट व सिक्के सरकार जारी करती है), सरकार का बैंकर, बैंकों का बैंक, विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षक, बैंकों का नियामक।

मौद्रिक नीति के उपकरण

  • रेपो दर: वह दर जिस पर RBI बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है।
  • रिवर्स रेपो / SDF: वह दर जिस पर RBI अतिरिक्त तरलता सोखता है।
  • CRR: जमा का वह हिस्सा जिसे बैंकों को नकद रूप में RBI के पास रखना होता है।
  • SLR: जमा का वह हिस्सा जिसे बैंकों को तरल परिसंपत्तियों (नकद, सोना, स्वीकृत प्रतिभूतियाँ) में रखना होता है।
  • खुले बाज़ार की क्रियाएँ (OMO): सरकारी प्रतिभूतियों की ख़रीद/बिक्री।

CRR या रेपो दर बढ़ाने से तरलता घटती है (सख़्त नीति); घटाने से बढ़ती है।

मौद्रिक नीति समिति (MPC)

छह सदस्य (गवर्नर सहित 3 RBI से, 3 बाहरी)। लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्य: CPI मुद्रास्फीति 4% ± 2%।

प्रारंभिक परीक्षा बिंदु

  1. बैंक राष्ट्रीयकरण: 1969 में 14 बैंक, 1980 में 6 और।
  2. मात्रात्मक उपकरण (CRR, SLR, रेपो, OMO) और गुणात्मक उपकरण (मार्जिन आवश्यकता, नैतिक दबाव) में अंतर समझें।

उदाहरण से समझें

RBI शहर की जल आपूर्ति के मुख्य वाल्व की तरह काम करता है। बैंक घरों तक जाने वाले पाइप हैं। रेपो दर या CRR बढ़ाना वाल्व कसना है — उधारकर्ताओं तक कम पैसा पहुँचता है और क़ीमतें ठंडी पड़ती हैं। इन्हें घटाना वाल्व खोलना है, जिससे विकास के लिए पाइपों में अधिक पैसा बहता है।

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