भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम: इसरो, प्रक्षेपण यान और कक्षाएँ
संस्थाएँ
- INCOSPAR की स्थापना 1962 में डॉ. विक्रम साराभाई के नेतृत्व में हुई; 1969 में यह इसरो बना।
- अंतरिक्ष विभाग और अंतरिक्ष आयोग का गठन 1972 में हुआ। इसरो मुख्यालय: बेंगलुरु।
- IN-SPACe (2020) निजी अंतरिक्ष गतिविधियों को अधिकृत करता है; NSIL इसरो की वाणिज्यिक शाखा है।
प्रक्षेपण यान
- PSLV: सूर्य-तुल्यकाली / ध्रुवीय कक्षा के लिए भरोसेमंद यान; चंद्रयान-1 (2008) और मंगलयान (2013) प्रक्षेपित किए।
- GSLV (Mk II): स्वदेशी क्रायोजेनिक ऊपरी चरण; उपग्रहों को GTO में स्थापित करता है।
- LVM3 (GSLV Mk III): भारी प्रक्षेपण यान; चंद्रयान-2 (2019) और चंद्रयान-3 (2023) प्रक्षेपित किए।
- SSLV: छोटे उपग्रहों के त्वरित, कम लागत प्रक्षेपण के लिए।
कक्षाओं के प्रकार
| कक्षा | ऊँचाई | उपयोग |
|---|---|---|
| निम्न भू कक्षा (LEO) | ~160–2,000 किमी | पृथ्वी अवलोकन, ISS |
| सूर्य-तुल्यकाली (SSO) | ~600–800 किमी, ध्रुवीय | सुदूर संवेदन (किसी स्थान पर एक ही स्थानीय समय) |
| भूस्थैतिक (GEO) | भूमध्य रेखा से ~35,786 किमी | संचार, मौसम (INSAT/GSAT) |
प्रमुख मिशन
- आर्यभट (1975): भारत का पहला उपग्रह (सोवियत संघ द्वारा प्रक्षेपित)।
- मंगलयान / मार्स ऑर्बिटर मिशन (2013): भारत पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में पहुँचा (2014)।
- चंद्रयान-3 (2023): चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास पहली सॉफ्ट लैंडिंग; लैंडिंग स्थल का नाम शिव शक्ति।
- आदित्य-L1 (2023): पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी दूर सूर्य–पृथ्वी लैग्रेंज बिंदु L1 पर सौर वेधशाला।
- NavIC: भारत की क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली।
- गगनयान: मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम।
प्रीलिम्स टिप्स
- भूस्थैतिक उपग्रहों की परिक्रमा अवधि 24 घंटे होती है और वे भूमध्य रेखा के ऊपर स्थिर दिखते हैं।
- क्रायोजेनिक इंजन द्रव हाइड्रोजन और द्रव ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं।
उदाहरण से समझें
कक्षाएँ एक गोलाकार दौड़ ट्रैक की लेनों जैसी हैं। भीतरी लेन (LEO) छोटी है, इसलिए धावक (उपग्रह) लगभग 90 मिनट में एक चक्कर पूरा कर लेते हैं और हर बार मैदान का अलग हिस्सा देखते हैं। सबसे बाहरी लेन (GEO) इतनी लंबी है कि धावक को ठीक 24 घंटे लगते हैं — उतना ही समय जितना मैदान स्वयं घूमने में लेता है — इसलिए ज़मीन पर खड़े दर्शक को वह धावक स्थिर दिखता है।
इस पाठ के टेस्ट
- India's Space Programme: ISRO, Launch Vehicles and Orbits practice
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