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कर्तव्य, निर्देशक तत्व और संपत्ति

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सीखने का परिणाम

आप नीति निर्देशक तत्व, मौलिक कर्तव्य और संपत्ति की रक्षा को मौलिक अधिकारों से अलग रख सकते हैं।

अवधारणाएँ और उनके कारण

नीति निर्देशक तत्व भाग 4 में हैं। अनुच्छेद 37 कहता है कि इस भाग के उपबंध किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं होंगे। वही अनुच्छेद कहता है कि ये तत्व देश के शासन में मूल हैं, और कानून बनाते समय राज्य का कर्तव्य है कि उन्हें लागू करे। प्रवर्तनीय न होना यह नहीं कहता कि वे महत्वहीन हैं। इसका अर्थ है कि व्यक्ति उन्हें अधिकार की तरह न्यायालय से नहीं लगवा सकता। मौलिक कर्तव्य भाग 4क, अनुच्छेद 51क में हैं। यह भाग 42वें संशोधन से जुड़ा गया और 3 जनवरी 1977 को लागू हुआ। अनुच्छेद 51क का कर्तव्य मौलिक अधिकार नहीं है। वह भाग 3 में नहीं है, और अनुच्छेद 32 उसे प्रवर्तित नहीं करता। 44वें संशोधन, 1978, ने संपत्ति को मौलिक अधिकारों से बाहर किया। अनुच्छेद 300क कहता है कि किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से विधि के प्राधिकार के बिना वंचित नहीं किया जाएगा। यह संवैधानिक रक्षा है, मौलिक अधिकार नहीं।

हल किए गए उदाहरण

  1. क्या न्यायालय नीति निर्देशक तत्व को अधिकार की तरह लगा सकता है? नहीं। अनुच्छेद 37 भाग 4 को न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं मानता।
  2. मौलिक कर्तव्य कहाँ हैं? अनुच्छेद 51क, भाग 4क, 42वाँ संशोधन।
  3. क्या संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकार है? नहीं। वह अनुच्छेद 300क में है।

आम गलतियाँ

नीति निर्देशक तत्वों को बेकार कहना अनुच्छेद 37 से आगे बढ़ जाना है। वे कानून बनाने का निर्देश हैं। न्यायालय उन्हें अधिकार की तरह नहीं लगाता। मौलिक कर्तव्य न तो भाग 3 हैं और न भाग 4। संपत्ति मौलिक अधिकारों से हटी। संविधान से नहीं हटी। अनुच्छेद 300क अब भी है।

अभ्यास प्रश्न

  1. कौन सा अनुच्छेद कहता है कि नीति निर्देशक तत्व किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं?
  2. मौलिक कर्तव्य किस संशोधन से जुड़े गए?
  3. 44वें संशोधन के बाद संपत्ति की रक्षा किस अनुच्छेद में है?

उत्तर और व्याख्या

  1. अनुच्छेद 37।
  2. 42वाँ संशोधन। अनुच्छेद 51क 3 जनवरी 1977 को लागू हुआ।
  3. अनुच्छेद 300क। यह मौलिक अधिकार नहीं है।

उदाहरण से समझें

भाग 3 वह अधिकार है जिसे आप न्यायालय ले जा सकते हैं। भाग 4 वह दिशा है जो राज्य को कानून लिखते समय मिलती है। भाग 4क वह कर्तव्य है जो नागरिक पर रखा गया है। तीन अलग ताखे।

सूत्र और नियम

  • भाग 4, अनुच्छेद 37: नीति निर्देशक तत्व किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं।
  • भाग 4क, अनुच्छेद 51क: मौलिक कर्तव्य, 42वाँ संशोधन, प्रवर्तन 3 जनवरी 1977।
  • अनुच्छेद 300क: संपत्ति, मौलिक अधिकार नहीं, 44वाँ संशोधन 1978 के बाद।
  • अनुच्छेद 32 केवल भाग 3 को प्रवर्तित करता है।

इस पाठ के नोट्स

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