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अरावली और राजस्थान की नदियाँ

पाठ 2 / 218 मिनटमुफ़्त

सवाल सीधे शब्दों में: राजस्थान के पश्चिम में रेगिस्तान और पूर्व में हरे खेत क्यों हैं? और यहाँ की नदियाँ किस तरफ़ बहती हैं?

इस पाठ के बाद आप: अरावली की दिशा और सबसे ऊँची चोटी बता सकेंगे, समझा सकेंगे कि अरावली राजस्थान को दो भागों में कैसे बाँटती है, और लूणी, बनास, चंबल व माही को सही दिशा में पहचान सकेंगे।

1. कहानी: दो भाई, दो खेत

किशन टोंक ज़िले के एक गाँव में रहता है। उसके खेत के पास से बनास नदी बहती है। उसके घर में गेहूँ और सरसों होती है।

उसका ममेरा भाई गोपाल बाड़मेर के पास रहता है। वहाँ बारिश कम होती है। खेतों में ज़्यादातर बाजरा उगता है। पास की लूणी नदी में ज़्यादातर पानी बरसात के दिनों में ही आता है।

दिवाली पर गोपाल बस से जयपुर होते हुए किशन के गाँव गया। रास्ते में उसने खिड़की से देखा: एक तरफ़ रेत के टीले, फिर पहाड़ियों की लंबी कतार, और उसके बाद हरे खेत।

गोपाल ने कंडक्टर से पूछा, "ये पहाड़ियाँ कौन-सी हैं?"

कंडक्टर बोला, "ये अरावली हैं, भाई। यही तय करती हैं कि कहाँ रेत होगी और कहाँ खेत।"

आज हम यही समझेंगे।

2. पहला कदम: अरावली क्या है?

  • अरावली (Aravalli) पहाड़ियों की एक लंबी कतार है।
  • यह राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व (South-west to North-east) की ओर फैली है।
  • दक्षिण-पश्चिम में माउंट आबू (सिरोही) के पास गुरु शिखर है। यह अरावली की सबसे ऊँची चोटी है: 1,722 मीटर।
  • उत्तर-पूर्व में अरावली खेतड़ी (झुंझुनूं) की ओर जाती है और आगे दिल्ली तक पहुँचती है।
  • अरावली दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत-श्रेणियों (fold mountains) में गिनी जाती है।
राजस्थान का उच्चावच मानचित्र: दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व जाती अरावली, गुरु शिखर 1,722 मीटर, खेतड़ी; उत्तर-पश्चिम में थार लगभग 60%, दक्षिण-पूर्व लगभग 40%

3. दूसरा कदम: अरावली राजस्थान को दो भागों में बाँटती है

  • अरावली के उत्तर-पश्चिम में राजस्थान का लगभग 60% भाग है। यहाँ थार का मरुस्थल (Thar Desert) है: रेत के टीले, कम बारिश, कम नदियाँ।
  • अरावली के दक्षिण-पूर्व में लगभग 40% भाग है। यहाँ बारिश ज़्यादा है, नदियाँ हैं, और खेती ज़्यादा होती है।

पश्चिम में बारिश कम क्यों?

  • अरब सागर से आने वाली मानसूनी हवाएँ (Arabian Sea branch of the monsoon) अरावली के समानांतर (parallel) चलती हैं।
  • अरावली इन हवाओं को रोकती नहीं, इसलिए हवाएँ ऊपर उठकर बादल नहीं बनातीं।
  • इसलिए पश्चिमी राजस्थान में बहुत कम बारिश होती है।

4. तीसरा कदम: अरावली = पानी को बाँटने वाली छत

गाँव के कच्चे घर की ढलान वाली छत याद कीजिए। बारिश का पानी छत के बीच की ऊँची रेखा से दो तरफ़ बह जाता है।

अरावली भी ऐसी ही है। इसे जल-विभाजक (Water Divide) कहते हैं।

  • पश्चिम की ओर: लूणी नदी दक्षिण-पश्चिम में बहकर कच्छ के रण (Rann of Kutch) तक जाती है। पश्चिम की कई छोटी नदियाँ रेत में ही खो जाती हैं।
  • पूर्व की ओर: बनास नदी चंबल में मिलती है। चंबल यमुना में, और यमुना गंगा में मिलकर बंगाल की खाड़ी तक पहुँचती है।
  • दक्षिण में: माही नदी खंभात की खाड़ी (Gulf of Khambhat), यानी अरब सागर में जाती है।
राजस्थान की नदियाँ: अरावली के पश्चिम में लूणी कच्छ के रण की ओर; पूर्व में बनास चंबल में, चंबल यमुना में; दक्षिण में माही खंभात की खाड़ी की ओर; तीर बहाव की दिशा दिखाते हैं

5. चौथा कदम: चार नदियाँ, एक-एक करके

चार नदियाँ एक नज़र में

लूणी
अजमेर के पास अरावली की पश्चिमी ढलान से दक्षिण-पश्चिम, लगभग 495 किमी, कच्छ का रण; बालोतरा तक पानी मीठा, आगे खारा
बनास
कुंभलगढ़ के पास खमनोर की पहाड़ियों से लगभग 512 किमी, पूरी तरह राजस्थान में; सवाई माधोपुर में रामेश्वर के पास चंबल में
चंबल
मध्य प्रदेश में महू के पास, विंध्य से चौरासीगढ़ से राजस्थान में, कोटा होकर उत्तर-पूर्व; सालभर बहती; उत्तर प्रदेश में यमुना में
माही
मध्य प्रदेश में विंध्याचल की पहाड़ियों से बांसवाड़ा से राजस्थान में; कर्क रेखा को दो बार काटती; खंभात की खाड़ी में

नदी कहाँ से निकलती है और कहाँ जाती है, यह दोनों साथ याद करें।

  • लूणी का पानी बालोतरा तक मीठा रहता है; उसके आगे खारा होता जाता है।
  • बनास पूरी तरह राजस्थान के अंदर बहती है।
  • चंबल राजस्थान से नहीं निकलती; यह मध्य प्रदेश से आती है।
  • माही का रास्ता उल्टे "U" जैसा है: पहले उत्तर, फिर मुड़कर दक्षिण-पश्चिम। इसलिए यह कर्क रेखा को दो बार काटती है।

6. याद रखने के आसान तरीके (समझने के बाद)

आसान तरीके

अरावली की दिशा: "आबू से खेतड़ी" — नीचे बाएँ से ऊपर दाएँ। दो भाग: "60 रेत, 40 खेत"। लूणी: "लूणी लौटे रण में, पानी हो खारा" — पश्चिम, रण, खारा। बनास: "बनास बसे अपने घर" — पूरी तरह राजस्थान में। चंबल: "चंबल चली कोटा" — मध्य प्रदेश से आकर कोटा होकर। माही: "माही ने कर्क रेखा दो बार काटी"।

7. झटपट जाँच

अरावली की सबसे ऊँची चोटी कौन-सी है?

A खेतड़ी
B गुरु शिखर
C कुंभलगढ़
D चौरासीगढ़
उत्तर देखें

सही उत्तर: B

गुरु शिखर माउंट आबू (सिरोही) के पास है और 1,722 मीटर ऊँचा है।

विकल्प A: खेतड़ी अरावली के उत्तर-पूर्वी भाग में एक जगह है, सबसे ऊँची चोटी नहीं।

विकल्प C: कुंभलगढ़ के पास से बनास निकलती है; यह सबसे ऊँची चोटी नहीं।

विकल्प D: चौरासीगढ़ वह जगह है जहाँ चंबल राजस्थान में आती है।

संकेत: आबू पर "गुरु"।

कौन-सी नदी दक्षिण-पश्चिम में बहकर कच्छ के रण तक जाती है?

A बनास
B चंबल
C लूणी
D माही
उत्तर देखें

सही उत्तर: C

लूणी अजमेर के पास अरावली की पश्चिमी ढलान से निकलकर लगभग 495 किमी बहती है और कच्छ के रण तक जाती है।

विकल्प A: बनास पूर्व की ओर बहकर चंबल में मिलती है।

विकल्प B: चंबल उत्तर-पूर्व में बहकर यमुना में मिलती है।

विकल्प D: माही खंभात की खाड़ी में जाती है।

संकेत: "लूणी लौटे रण में"।

बनास नदी किस नदी में मिलती है?

A चंबल
B लूणी
C माही
D गंगा
उत्तर देखें

सही उत्तर: A

बनास सवाई माधोपुर ज़िले में रामेश्वर के पास चंबल में मिलती है।

विकल्प B: लूणी अरावली के पश्चिम में है; बनास पूर्व में।

विकल्प C: माही दक्षिण में अलग रास्ते से अरब सागर जाती है।

विकल्प D: बनास का पानी आख़िर में गंगा तक पहुँचता है, पर सीधे चंबल में मिलती है।

संकेत: बनास → चंबल → यमुना।

कौन-सी नदी कर्क रेखा को दो बार काटती है?

A लूणी
B बनास
C चंबल
D माही
उत्तर देखें

सही उत्तर: D

माही का रास्ता उल्टे "U" जैसा है। वह मध्य प्रदेश से बांसवाड़ा होकर गुजरात जाती है और कर्क रेखा को दो बार पार करती है।

विकल्प A: लूणी कर्क रेखा से काफ़ी उत्तर में बहती है।

विकल्प B: बनास भी कर्क रेखा के उत्तर में ही बहती है।

विकल्प C: चंबल राजस्थान में कर्क रेखा के उत्तर में बहती है।

संकेत: दक्षिणी छोर की नदी।

कक्षा 5 के बच्चों को "जल-विभाजक" समझाने का सबसे अच्छा तरीका कौन-सा है?

A परिभाषा बोर्ड पर लिखकर याद करवाना
B गीली मिट्टी या रेत से एक ऊँची मेड़ बनाकर उस पर पानी डालना और देखना कि पानी दो तरफ़ कैसे बहता है
C केवल नदियों के नाम की सूची देना
D बच्चों से पूरा अध्याय पढ़कर आने को कहना
उत्तर देखें

सही उत्तर: B

करके सीखने (learning by doing) से बच्चे खुद देखते हैं कि ऊँची रेखा पानी को दो तरफ़ बाँटती है। फिर अरावली से जोड़ना आसान होता है।

विकल्प A: केवल परिभाषा रटने से अवधारणा नहीं बनती।

विकल्प C: नामों की सूची से "क्यों" समझ नहीं आता।

विकल्प D: बिना गतिविधि के कठिन शब्द समझना मुश्किल है।

संकेत: करके सीखना।

आम गलती

"अरावली उत्तर से दक्षिण फैली है।" नहीं। अरावली दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व फैली है। "चंबल राजस्थान से निकलती है।" नहीं। चंबल मध्य प्रदेश से निकलती है। "लूणी सीधे अरब सागर में गिरती है।" नहीं। लूणी कच्छ के रण तक जाती है। "अरावली मानसून को रोककर पश्चिम में बारिश करवाती है।" उल्टा है। हवाएँ अरावली के समानांतर चलती हैं, इसलिए पश्चिम में बारिश कम होती है।

कक्षा में इसे कैसे पढ़ाएँ

रेत का मॉडल: स्कूल के आँगन में रेत से तिरछी मेड़ बनाएँ (अरावली)। लोटे से पानी डालें और बहाव देखें। छत का उदाहरण: स्कूल या घर की ढलान वाली छत दिखाकर "जल-विभाजक" शब्द सिखाएँ। स्थानीय नदी: बच्चों से पूछें कि उनके गाँव के पास कौन-सी नदी या नाला है और पानी किस तरफ़ बहता है। सबको शामिल करें: उभरी मेड़ और नदी की रेखा को छूकर दृष्टिबाधित बच्चे भी दिशा समझ सकते हैं। समझ जाँचें: खाली मानचित्र पर बच्चे अरावली की रेखा खींचें और चारों नदियों के तीर सही दिशा में बनाएँ।

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