वे अधिकार जिन्हें न्यायालय लागू कर सकता है
सीखने का परिणाम
आप मूल अधिकार को नीति निदेशक तत्व से अलग कर सकते हैं, और बता सकते हैं कि अनुच्छेद 32 व्यक्ति को उच्चतम न्यायालय से क्या माँगने देता है।
अवधारणाएँ और उनके कारण
मूल अधिकार भाग 3 में हैं। अनुच्छेद 32(1) भाग 3 के अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए उच्चतम न्यायालय जाने का अधिकार देता है। उस प्रवर्तन के लिए रिट हैं: बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार पृच्छा और उत्प्रेषण। अनुच्छेद 32 नीति निदेशक तत्वों को प्रवर्तित नहीं करता। राज्य के नीति निदेशक तत्व भाग 4 में हैं। अनुच्छेद 37 कहता है कि वे किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, पर देश के शासन में मूल हैं, और राज्य का यह कर्तव्य है कि विधि बनाते समय उन्हें लागू करे। मूल कर्तव्य अलग भाग में हैं, भाग 4क, अनुच्छेद 51क। वे 42वें संशोधन से जोड़े गए और 3 जनवरी 1977 को लागू हुए। यह पाठ उन कर्तव्यों की गिनती नहीं बताता।
हल किए गए उदाहरण
कोई पूछे कि मूल अधिकार किस भाग में हैं। उत्तर भाग 3 है। कोई पूछे कि क्या न्यायालय को नीति निदेशक तत्व प्रवर्तित करना होता है। अनुच्छेद 37 कहता है कि वे किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं।
आम गलतियाँ
नीति निदेशक तत्व के लिए अनुच्छेद 32 का उपयोग करना। अनुच्छेद 32 भाग 3 के लिए है। नीति निदेशक तत्वों को न्यायालय में प्रवर्तनीय कहना। अनुच्छेद 37 कहता है कि वे प्रवर्तनीय नहीं हैं। मूल कर्तव्य को मूल अधिकार मानना। कर्तव्य अनुच्छेद 51क में हैं, भाग 4क में।
अभ्यास प्रश्न
- मूल अधिकार किस भाग में हैं?
- अनुच्छेद 32(1) व्यक्ति को क्या करने देता है?
- क्या नीति निदेशक तत्व न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय हैं?
उत्तर और व्याख्या
- भाग 3।
- भाग 3 के अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए उच्चतम न्यायालय जाना।
- नहीं। अनुच्छेद 37 कहता है कि वे किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, और यह भी कहता है कि राज्य विधि बनाते समय उन्हें लागू करे।
उदाहरण से समझें
दरवाजे का ताला न्यायालय तक ले जाया जा सकता है। दीवार पर लगा वह संकेत, जो बनाने वाले को घर सुधारने का तरीका बताता है, अपने आप उस ताले की तरह प्रवर्तित नहीं होता। भाग 3 ताला है। भाग 4 विधि बनाने का संकेत है।
सूत्र और नियम
भाग 3: मूल अधिकार। अनुच्छेद 32(1): भाग 3 के प्रवर्तन के लिए उच्चतम न्यायालय। रिट: बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार पृच्छा, उत्प्रेषण। भाग 4 और अनुच्छेद 37: नीति निदेशक तत्व किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं, पर राज्य उन्हें विधि बनाते समय लागू करे।
इस पाठ के नोट्स
इस पाठ के टेस्ट
- न्यायालय से प्रवर्तनीय अधिकारों का अभ्यास
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