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सिलेबस · सामान्य जागरूकता और समसामयिकी

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भारतीय संविधान: प्रस्तावना, अधिकार और कर्तव्य

पाठ 1 / 23 मिनटमुफ़्त

इस पाठ का उद्देश्य

इस आधारभूत पाठ में तीन अलग बातें समझें: संविधान के आदर्श, मूल अधिकार और नागरिकों के मूल कर्तव्य। यह सामान्य जागरूकता की स्थिर जानकारी है; इसे समसामयिक घटनाओं का अद्यतन या पूरा राजव्यवस्था पाठ्यक्रम न समझें।

प्रस्तावना को हिस्सों में पढ़ें

प्रस्तावना की शुरुआत संविधान को अपनाने वाले भारत के लोगों से होती है। इसके बाद भारत का स्वरूप संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में बताया गया है। फिर न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के आदर्श आते हैं। न्याय के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पक्ष हैं। बंधुता का संबंध व्यक्ति की गरिमा तथा राष्ट्र की एकता और अखंडता से है। इन विचारों को आपस में जुड़ा समझें, लेकिन एक ही अर्थ वाला न मानें।[1]

प्रस्तावना में संविधान अपनाने की तारीख 26 नवंबर 1949 है। अधिकांश प्रावधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुए। अनुच्छेद 394 उन प्रावधानों का भी उल्लेख करता है जो पहले लागू हुए थे। इसलिए अपनाने और लागू होने की तारीखों को अलग रखें। अभ्यास में चार खाने बनाएँ: अधिकार का स्रोत, राज्य का स्वरूप, उद्देश्य और अपनाने की तारीख। हर शब्द को सही खाने में रखें।[1]

अधिकार, नीति और कर्तव्य में अंतर

मूल अधिकार भाग III में हैं। अनुच्छेद 32 इस भाग के अधिकारों को लागू कराने के लिए उपयुक्त कार्यवाही द्वारा उच्चतम न्यायालय जाने का अधिकार सुनिश्चित करता है। इसका अर्थ यह नहीं कि हर प्रकार की कानूनी शिकायत का उपाय अनुच्छेद 32 ही है। किसी अधिकार को समझते समय उसके अपने प्रावधान की शर्तें भी पढ़नी होती हैं।[1]

राज्य की नीति के निदेशक तत्त्व भाग IV में हैं। अनुच्छेद 37 के अनुसार इन्हें न्यायालय द्वारा प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता; फिर भी ये देश के शासन में मूलभूत हैं। कानून बनाते समय इन्हें लागू करना राज्य का कर्तव्य है। इसलिए न्यायालय से सीधे प्रवर्तन न होने को महत्त्वहीनता न समझें।[1]

मूल कर्तव्य भाग IVA के अनुच्छेद 51A में हैं और नागरिकों को संबोधित करते हैं। इनमें संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान, पर्यावरण की रक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा शामिल हैं। खंड (क) से (ट) तक ग्यारह कर्तव्य हैं। बयालीसवें संशोधन ने यह भाग जोड़ा। छियासीवें संशोधन ने छह से चौदह वर्ष के बच्चे को शिक्षा के अवसर देने का माता-पिता या संरक्षक का कर्तव्य जोड़ा।[1]

प्रश्न हल करने की विधि

सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा वाला उदाहरण नागरिक के कर्तव्य से जोड़ें। केवल काम अच्छा होने के कारण उसे मूल अधिकार न मानें। कानून बनाते समय कल्याणकारी सिद्धांत अपनाने का प्रश्न भाग IV की ओर संकेत करता है। भाग III के अधिकारों के प्रवर्तन का प्रश्न अनुच्छेद 32 से जुड़ेगा।

विकल्प चुनने से पहले कर्ता, कार्य और संवैधानिक स्थान पहचानें। अंत में बिना देखे लिखें: भाग III—मूल अधिकार; भाग IV—निदेशक तत्त्व; भाग IVA—मूल कर्तव्य।

[1] भारत का संविधान, ऊपर उल्लिखित प्रावधान: https://www.legislative.gov.in/static/uploads/2025/07/359f70a69695affb9d72f8393102bd2e.pdf

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