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नीति-निदेशक तत्त्व और मूल कर्तव्य: अलग भूमिकाएँ

पाठ 5 / 66 मिनटमुफ़्त

सीखने का लक्ष्य

राज्य की नीति का मार्गदर्शन करने वाले तत्त्वों और नागरिकों को संबोधित कर्तव्यों में अंतर करें। किसी की प्रवर्तनीयता के बारे में बहुत व्यापक दावा न बनाएँ।

देखें कि निर्देश किसे दिया गया है

भाग IV में राज्य की नीति के निदेशक तत्त्व हैं। अनुच्छेद 37 के अनुसार वे न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, फिर भी देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि बनाते समय राज्य को उन्हें लागू करना है। “सीधे प्रवर्तनीय नहीं” का अर्थ “महत्त्वहीन” या “राज्य उन्हें अनदेखा कर सकता है” नहीं है। संविधान, 2024 संस्करण: अनुच्छेद 37

भाग IVA के अनुच्छेद 51A में नागरिकों के मूल कर्तव्य दिए हैं। प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना इनके उदाहरण हैं। मूल कर्तव्य और नीति-निदेशक तत्त्व अलग संवैधानिक स्थानों पर हैं और अलग पक्षों को संबोधित करते हैं। संविधान: अनुच्छेद 51A

चरणों में तुलना: विषय एक, भूमिका अलग

दो अध्ययन कार्ड पर्यावरण की बात करते हैं। केवल साझा शब्द देखकर उनका वर्गीकरण न करें।

  1. कार्ड A राज्य को पर्यावरण की रक्षा और सुधार तथा वन और वन्यजीवों के संरक्षण का संवैधानिक निर्देश पूछता है। भाग IV का अनुच्छेद 48A देखें: यह नीति-निदेशक तत्त्व है।
  2. कार्ड B प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का नागरिक कर्तव्य पूछता है। भाग IVA का अनुच्छेद 51A(g) देखें: यह मूल कर्तव्य है।
  3. अंतर समझाएँ: विषय मिलता है, लेकिन कार्ड A राज्य की नीतिगत भूमिका और कार्ड B नागरिक की जिम्मेदारी पर है। संबंधित पक्ष और संवैधानिक स्थान से वर्गीकरण तय होता है।

किसी खास दंड के प्रश्न में संबंधित कानून पढ़ें। केवल “कर्तव्य” शब्द से दंड न मान लें और यह भी न मानें कि कोई कानून कर्तव्य को लागू करने में सहायक नहीं हो सकता। केवल संवैधानिक श्रेणी हर प्रवर्तन-प्रश्न का उत्तर नहीं देती।

आम गलती

अनुच्छेद 37 और अनुच्छेद 32 को न मिलाएँ। अनुच्छेद 37 नीति-निदेशक तत्त्वों की स्थिति बताता है; अनुच्छेद 32 भाग III के अधिकारों के प्रवर्तन से संबंधित है। अच्छे कामों की हर सूची अपने-आप मौलिक अधिकारों की सूची नहीं होती।

खुद जाँचें

  1. नीति-निदेशक तत्त्व किस भाग में हैं? भाग IV में।
  2. नागरिकों के मूल कर्तव्य किस अनुच्छेद में हैं? भाग IVA के अनुच्छेद 51A में।
  3. अनुच्छेद 37 के अंतर्गत सीधे न्यायालय से प्रवर्तन न होने पर क्या नीति-निदेशक तत्त्व अर्थहीन हैं? नहीं। वही अनुच्छेद उन्हें शासन में मूलभूत और विधि-निर्माण के लिए महत्त्वपूर्ण भी बताता है।

ये मौलिक वर्गीकरण अभ्यास हैं, पिछले वर्ष के प्रश्न नहीं। स्रोत संस्करण: 1 मई 2024 को यथाविद्यमान संविधान।

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