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राजकोषीय नीति और केंद्रीय बजट

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राजकोषीय नीति

अर्थव्यवस्था — संवृद्धि, मुद्रास्फीति, रोज़गार और समानता — को प्रभावित करने हेतु सरकारी व्यय और कराधान का उपयोग।

  • विस्तारवादी: अधिक व्यय / कम कर (मंदी में)।
  • संकुचनकारी: कम व्यय / अधिक कर (मुद्रास्फीति नियंत्रण हेतु)।

केंद्रीय बजट: प्राप्तियों और व्यय का वर्गीकरण

अनुच्छेद 112 के अंतर्गत वार्षिक वित्तीय विवरण में केंद्र की अनुमानित प्राप्तियाँ और व्यय दिए जाते हैं। वित्त मंत्री इसे प्रस्तुत करते हैं। राजस्व और पूँजी पक्षों को अलग-अलग पढ़ें।

  • राजस्व प्राप्तियाँ: कर तथा गैर-कर आय, जैसे शुल्क और प्राप्त ब्याज।
  • गैर-ऋण पूँजी प्राप्तियाँ: दिए गए ऋण के मूलधन की वसूली और विनिवेश से प्राप्त राशि।
  • ऋण पूँजी प्राप्तियाँ: उधारी से चुकौती का दायित्व बनता है।
  • राजस्व व्यय: वेतन, दिया गया ब्याज, सब्सिडी और सेवाओं पर खर्च।
  • पूँजीगत व्यय: सीधे परिसंपत्तियाँ खरीदना या बनाना (सड़कें, रेलमार्ग) और ऋण देना। केंद्र के अनुदान राजस्व व्यय ही रहते हैं, भले ही प्राप्तकर्ता उनसे परिसंपत्तियाँ बनाएँ।

पहले लेन-देन पहचानें। “प्राप्त ब्याज” और “दिया गया ब्याज” में धन का प्रवाह उलटी दिशाओं में होता है। “ऋण की वसूली” और “नई उधारी” दोनों से नकदी आ सकती है, लेकिन उनकी प्राप्ति-श्रेणियाँ अलग हैं। जोड़ने से पहले हर मद की श्रेणी लिखें।

तीन घाटे, तीन सवाल

  • राजकोषीय घाटा (FD) = कुल व्यय − (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण पूँजी प्राप्तियाँ)।
  • राजस्व घाटा (RD) = राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्तियाँ।
  • प्राथमिक घाटा (PD) = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान।

FD के लिए कुल व्यय में ऋण के मूलधन की चुकौती शामिल नहीं होती।

दिया गया ब्याज राजस्व व्यय में पहले से शामिल है। FD वित्त जुटाने की कमी दिखाता है, सकल बाज़ार उधारी नहीं; वित्तपोषण में नकद शेष का समायोजन भी हो सकता है।

हल किया हुआ उदाहरण: एक काल्पनिक बजट

सभी राशियाँ काल्पनिक इकाइयों में हैं; ये किसी वास्तविक वर्ष के आँकड़े नहीं हैं। इन पाँच बातों से शुरू करें:

  • राजस्व प्राप्तियाँ = 100
  • गैर-ऋण पूँजी प्राप्तियाँ = 10
  • राजस्व व्यय = 110, जिसमें 10 का ब्याज भुगतान शामिल है
  • पूँजीगत व्यय = 30
  • ऋण के मूलधन की चुकौती इस अभ्यास के बाहर है; नकद शेष में कोई समायोजन नहीं है और पूरी कमी उधारी से पूरी होगी।
  • चरण 1: दोनों योग निकालें। व्यय: 110 + 30 = 140। घटाई जाने वाली प्राप्तियाँ: 100 + 10 = 110।
  • चरण 2: FD निकालें। 140 − 110 = 30। दी गई गैर-ऋण प्राप्तियों के अतिरिक्त 30 की ज़रूरत है। इस अभ्यास की वित्तपोषण-संबंधी मान्यता के अनुसार 30 की उधारी होगी।
  • चरण 3: RD निकालें। 110 − 100 = 10। राजस्व खाते में व्यय, प्राप्तियों से 10 अधिक है।
  • चरण 4: PD निकालें। 30 − 10 = 20। इस गणना में ब्याज का खर्च अलग रखने पर भी 20 की कमी बचती है। इससे वास्तव में देय ब्याज समाप्त नहीं हो जाता।

तीन अलग उत्तर क्यों? 30 पूरी योजना के लिए वित्त की कमी बताता है; 10 केवल राजस्व खाते का अंतर बताता है; 20 पहले अंतर से ब्याज का भाग हटाता है। तीनों एक ही काल्पनिक बजट के अलग सवालों के उत्तर हैं। 30 + 10 + 20 न जोड़ें: ये आपस में जुड़े माप हैं, तीन अलग-अलग देनदारियाँ नहीं।

अभ्यास जाँच 1: लेखांकन की दो गलतियाँ खोजें

एक विद्यार्थी ऊपर के उदाहरण पर लिखता है: “30 की उधारी से प्राप्तियाँ 110 से 140 हो जाती हैं, इसलिए FD शून्य है। 10 का ब्याज भी 140 के व्यय में जोड़ना चाहिए।” आगे पढ़ने से पहले दोनों गलतियाँ समझाएँ।

कारण सहित उत्तर: 30 को वित्तपोषण वाले खाने में रखना है, गैर-ऋण प्राप्तियों वाले खाने में नहीं। वहाँ जोड़ने से वही कमी छिप जाती है जिसे मापना है। FD 30 ही रखें। दी गई 110 की राशि में 10 का ब्याज पहले से शामिल है; 10 को फिर जोड़ने पर एक ही भुगतान दो बार गिना जाएगा और व्यय गलत ढंग से 150 हो जाएगा। व्यय 140 और PD 20 ही रखें।

अभ्यास जाँच 2: गणना करें, फिर अर्थ बताएँ

दूसरे काल्पनिक बजट में राजस्व प्राप्तियाँ 120, गैर-ऋण पूँजी प्राप्तियाँ 10, राजस्व व्यय 125, जिसमें 15 का ब्याज शामिल है, और पूँजीगत व्यय 35 हैं। लेखांकन की वही सीमाएँ रखें। कुल व्यय, FD, RD और PD निकालें। क्या छोटा RD बेहतर विकास-परिणाम साबित करता है?

कारण सहित उत्तर: कुल व्यय = 125 + 35 = 160; घटाई जाने वाली प्राप्तियाँ = 120 + 10 = 130। इसलिए FD = 160 − 130 = 30; RD = 125 − 120 = 5; PD = 30 − 15 = 15। पहले से शामिल 15 को दोबारा न जोड़ें। पहले उदाहरण की तुलना में कुल कमी समान है, जबकि राजस्व खाते का अंतर और ब्याज हटाने के बाद बची कमी छोटे हैं। इन गणनाओं से यह पता नहीं चलता कि सेवाएँ किसे मिलीं या कोई परियोजना सफल हुई या नहीं।

FRBM: लक्ष्य बताते समय उसकी तारीख भी बताएँ

FRBM अधिनियम, 2003, और उसके नियम राजकोषीय अनुशासन, प्रकटीकरण तथा घाटे और ऋण के मानकों का ढाँचा देते हैं; निर्धारित परिस्थितियों में छूट के प्रावधान हैं। “3%” को हर वर्ष लागू होने वाला कालातीत लक्ष्य न लिखें: फरवरी 2026 का राजकोषीय नीति वक्तव्य वैधानिक मानक की 31 मार्च 2021 की समय-सीमा को वार्षिक बजट अनुमानों से अलग रखता है।

मुख्य परीक्षा के उत्तर में गणना का उपयोग

पहले से दिए गए विषय उपयोगी हैं: व्यय की गुणवत्ता, क्राउडिंग आउट, सब्सिडी का युक्तिकरण, GST और राजकोषीय संघवाद, परिणाम बजट तथा जेंडर बजटिंग। किसी विषय का नाम भर लिखने के बजाय बताएँ कि असर कैसे होगा, किन शर्तों पर होगा और उसे परखने के लिए कौन-सा प्रमाण चाहिए।

उत्तर बनाने का मौलिक नमूना: “पहले बजट में 30 की कमी है। उसके व्यय के विकल्प परखने के लिए मैं मिलने वाली सेवा या परिसंपत्ति, लाभ पाने वाले लोगों, लागत और रखरखाव की ज़रूरतों की तुलना करूँगा। बिना कर्मचारियों की नई इमारत और आवश्यक सामग्री के बिना चल रहा पुराना क्लिनिक, दोनों की जाँच ज़रूरी है। केवल व्यय की श्रेणी से उसकी उपयोगिता तय नहीं हो सकती।” यह विश्लेषण का उदाहरण है, आधिकारिक आदर्श उत्तर नहीं।

अंतिम स्व-जाँच

उत्तर देने से पहले: दोनों प्राप्ति-समूह अलग रखें; “ब्याज सहित” दी गई राशि को एक बार गिनें; FD के व्यय से ऋण के मूलधन की चुकौती बाहर रखें; तीनों घाटों को आपस में न जोड़ें; हर राजस्व खर्च को अपव्यय या हर पूँजीगत परियोजना को लाभकारी न मानें।

लेखांकन के नियमों के स्रोत

वित्त मंत्रालय, बजट दस्तावेज़ों की कुंजी 2026–27: प्राप्तियों और व्यय का वर्गीकरण; बजट एक नज़र में 2026–27: घाटों की परिभाषाएँ और वित्तपोषण; CAG की FRBM अनुपालन रिपोर्ट (2022), खंड 1.1: ऋण-मूलधन चुकौती का बहिष्करण; NCERT, समष्टि अर्थशास्त्र: एक परिचय, अध्याय 5: पूँजी प्राप्तियों का अंतर। FRBM वक्तव्य का लिंक ऊपर है। यहाँ दिए उदाहरण और अभ्यास-आँकड़े मौलिक शिक्षण अभ्यास हैं, UPSC के पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं।

उदाहरण से समझें

केंद्रीय बजट एक परिवार की वार्षिक योजना जैसा है। वेतन और मिला हुआ किराया राजस्व प्राप्तियों जैसे हैं; किराना और बिल राजस्व व्यय जैसे; घर खरीदना पूँजीगत व्यय जैसा; होम लोन उधारी है। इसे शुरुआती वर्गीकरण का सहारा ही मानें। सरकार कर लगा सकती है और उसकी ज़िम्मेदारियाँ पूरी अर्थव्यवस्था तक फैली होती हैं, जो परिवार से अलग हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएँ और रखरखाव बहुत उपयोगी हो सकते हैं; कोई परिसंपत्ति गलत चुनी गई या कम उपयोग में भी हो सकती है। यह पूछें कि क्या मिला और किसे मिला, बजाय यह मानने के कि हर घर या सार्वजनिक परियोजना अपना खर्च वसूल कर लेगी।

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