प्रशासन में भावनात्मक बुद्धिमत्ता
भावनात्मक बुद्धिमत्ता और प्रशासनिक निर्णय
इस पाठ में भावनात्मक बुद्धिमत्ता, उसकी सीमाएँ और नागरिक, कर्मचारियों तथा अन्य आवेदकों से जुड़े एक निर्णय को समझेंगे। उद्देश्य सोच-समझकर दी गई प्रतिक्रिया को निष्पक्ष, साक्ष्य-आधारित निर्णय से जोड़ना है।
भावनात्मक बुद्धिमत्ता (EI) में अपनी और दूसरों की भावनाओं को पहचानना, समझना तथा सोच-समझकर प्रतिक्रिया देना शामिल है। अधिकारी की झुँझलाहट ध्यान देने योग्य सूचना है, दंड देने का आदेश नहीं। नागरिक की परेशानी सुनने और जाँच करने का कारण है; इससे उसका हर आरोप सही सिद्ध नहीं होता।
अलग मॉडलों को एक न मानें। सैलोवी और ग्रेवाल के अनुसार मेयर–सैलोवी क्षमता मॉडल में भावनाओं को पहचानना, चिंतन में उनका उपयोग, उन्हें समझना और उनका प्रबंधन शामिल है। लेखकों का क्षमता मॉडल संबंधी विवरण। गोलमैन के परिचित पुराने ढाँचे में पाँच क्षेत्र हैं; बाद के ढाँचे में इन्हें चार क्षेत्रों में व्यवस्थित किया गया। नीचे दी गई पाँच-क्षेत्रीय सूची सीखने के लिए उपयोगी है, लेकिन EI की अकेली, सर्वसम्मत वैज्ञानिक परिभाषा नहीं। अपने ढाँचों पर गोलमैन का विवरण।
पाँच परिचित घटकों का व्यावहारिक अर्थ
डैनियल गोलमैन की 1995 की पुस्तक ने EI को लोकप्रिय बनाने में योगदान दिया। किसी अवधारणा को लोकप्रिय बनाना उससे जुड़े समस्त शोध की शुरुआत करना नहीं है। पुस्तक के बारे में प्रकाशक का विवरण।
- आत्म-जागरूकता: अपनी भावना और निर्णय पर उसका प्रभाव पहचानना। अधिकारी सोचता है, “मेरे कार्यालय की आलोचना से मुझे शर्मिंदगी हो रही है।” यह उसकी प्रतिक्रिया की पहचान है; इससे आलोचना अनुचित सिद्ध नहीं होती।
- आत्म-नियमन: पहले आवेग पर चलने के बजाय प्रतिक्रिया चुनना। अधिकारी उत्तर देने से पहले रुकता है और आवेदन खारिज करने की धमकी देने के बजाय फाइल जाँचता है। इसका अर्थ कभी क्रोध न आना या क्रोध छिपाकर बाद में बदला लेना नहीं है।
- प्रेरणा: तात्कालिक प्रशंसा या पद से आगे के उद्देश्य पर टिके रहना। निष्पक्ष जाँच पूरी करना तब भी महत्त्वपूर्ण है जब कोई सराहना न मिले। केवल आँकड़े बेहतर दिखाने के लिए शिकायत बंद करना उस उद्देश्य की जगह दिखावे को रखना होगा।
- समानुभूति (empathy): दूसरे की भावना और दृष्टिकोण समझने का प्रयास। पूछें कि बार-बार आने से नागरिक को क्या नुकसान हुआ, फिर अपनी समझ की पुष्टि करें। यह मन पढ़ लेना, हर माँग से सहमत होना या बिना सुने केवल तरस खाना नहीं है।
- सामाजिक कौशल: संवाद, समन्वय और असहमति सँभालना। अगला कदम नागरिक की समझ की भाषा में बताएँ, टीम में स्पष्ट जिम्मेदारी दें और समझ की पुष्टि करें। अनुनय से सही विकल्प स्पष्ट होने चाहिए; डर का उपयोग करके चुप्पी हासिल करना इसका उचित प्रयोग नहीं।
भावना, अवलोकन और अनुमान का अंतर
तीन प्रकार की जानकारी अलग रखें। अवलोकन: “नागरिक ने ऊँची आवाज़ में बात की और तीन बार आने की पर्चियाँ दिखाईं।” बताई गई भावना: “नागरिक कहता है कि उसे कल की समय-सीमा की चिंता है।” अनुमान: “वह हमें डराना चाहता है।” आखिरी बात सत्यापित नहीं है। इसी तरह कर्मचारी का संक्षिप्त उत्तर आलस्य का प्रमाण नहीं और शांत आवेदक की समस्या आवश्यक रूप से कम गंभीर नहीं होती।
खुला प्रश्न पूछें, जैसे “पिछली बार आने पर क्या हुआ था?” उत्तर का सार बताएँ और सुधार का अवसर दें। रसीदें, आवेदन और कर्मचारियों का पक्ष जाँचें। किसी का निदान न करें, रूप-रंग से उद्देश्य न तय करें और शांत स्वर को ईमानदारी का प्रमाण न मानें। भावनाएँ किसी समस्या की ओर ध्यान दिला सकती हैं; वास्तव में क्या हुआ, यह साक्ष्य से तय होगा।
हल किया गया उदाहरण विलंबित प्रमाणपत्र और काम का दबाव
काल्पनिक अभ्यास: नीचे कोई वास्तविक व्यक्ति, कार्यालय या घटना नहीं है। सभी प्रक्रियाएँ और समय इस अभ्यास की दी हुई शर्तें हैं; ये भारतीय कानून या वास्तविक शिकायत-निवारण की समय-सीमा का विवरण नहीं हैं।
दी हुई नीति: सेवा केंद्र आवश्यक जाँच के बाद ही प्रमाणपत्र जारी करता है। पूर्ण आवेदनों पर प्राप्ति-क्रम में काम होता है; केवल दबाव डालने से प्राथमिकता नहीं मिलती। पर्यवेक्षक अतिरिक्त जाँचकर्ता लगा सकता है, शिकायत दर्ज कर सकता है और लिखित स्थिति बता सकता है। स्थिति संबंधी विवाद न सुलझने पर आवेदक पर्यवेक्षक से समीक्षा माँग सकता है। पात्रता-जाँच छोड़ने या किसी बाहरी समय-सीमा तक परिणाम की गारंटी देने की शक्ति नहीं है।
स्थिति: सुबह 11 बजे एक नागरिक तीसरी बार आता है। वह कहता है कि अगली सुबह प्रमाणपत्र चाहिए और ऊँची आवाज़ में बोलता है, पर धमकी नहीं देता। दो कर्मचारी अनुपस्थित हैं। एक कर्मचारी कहता है, “अभी मंजूर कर दीजिए ताकि मामला खत्म हो।” एक अन्य आवेदक चुपचाप प्रतीक्षा कर रहा है। पर्यवेक्षक को झुँझलाहट और शर्मिंदगी महसूस होती है।
जाँच से मिले तथ्य: नागरिक के आवश्यक दस्तावेज़ कागजी फाइल में हैं, लेकिन एक दस्तावेज़ सूची में दर्ज नहीं हुआ। पात्रता-जाँच अधूरी है। दो पुराने पूर्ण आवेदन उससे पहले हैं। अतिरिक्त जाँचकर्ता तीनों फाइलों पर काम कर सकता है; दोपहर 3 बजे तक काम पूरा होना संभव है, निश्चित नहीं। ये उदाहरण में दिए तथ्य हैं, किसी के स्वर से निकले निष्कर्ष नहीं।
1 परस्पर जुड़ी चिंताओं को पहचानें
नागरिक को उत्तर चाहिए और उसे बार-बार आने का खर्च हुआ हो सकता है; बताई गई समय-सीमा और खर्च के बारे में अभी स्पष्टता चाहिए। कर्मचारियों पर काम का वास्तविक दबाव है, लेकिन इससे जाँच छोड़ना उचित नहीं हो जाता। पुराने आवेदकों को भी समान विचार मिलना चाहिए। पर्यवेक्षक को अपनी शर्मिंदगी के कारण दंड देने या विशेष कृपा करने से बचना है।
2 उपलब्ध विकल्पों की तुलना करें
- नागरिक को शांत करने के लिए तुरंत मंजूरी: बहस समाप्त हो सकती है, लेकिन जाँच छूटेगी, पुराने आवेदकों को नुकसान होगा और दबाव डालने को लाभ मिलेगा। यह विकल्प अस्वीकार करें।
- शिकायत टालकर किसी और दिन आने को कहना: कठिन बातचीत टल जाएगी, लेकिन दस्तावेज़ दर्ज न होने की गलती और अनिश्चितता बनी रहेगी। काम का दबाव कठिनाई समझाता है; इससे यह उत्तर पर्याप्त नहीं हो जाता।
- सुनना, अभिलेख सुधारना और उपलब्ध क्षमता का निष्पक्ष उपयोग: इसमें समन्वय चाहिए और इच्छित परिणाम का वादा नहीं किया जा सकता। फिर भी इससे समान व्यवहार बनाए रखते हुए वास्तविक गलती सुधरती है। यही विकल्प चुनें।
3 निर्णय लें और उसका कारण बताएँ
पर्यवेक्षक बार-बार आने की परेशानी स्वीकार करता है और सत्यापित अभिलेखीय गलती के लिए क्षमा माँगता है। कर्मचारी दस्तावेज़-सूची सुधारता है; अतिरिक्त जाँचकर्ता तीनों फाइलें उनके मौजूदा प्राप्ति-क्रम में जाँचता है। मंजूरी संतोषजनक जाँच पर निर्भर है। नागरिक से शिकायत वापस लेने की शर्त रखे बिना शिकायत दर्ज होती है और पर्यवेक्षक लिखित स्थिति देता है।
संभावित उत्तर: “आपका दस्तावेज़ कागजी फाइल में है; हम उसे सूची में दर्ज नहीं कर पाए। इस गलती के लिए क्षमा चाहता हूँ। हम प्रविष्टि सुधारेंगे और अतिरिक्त जाँचकर्ता से प्राप्ति-क्रम में फाइलें जँचवाएँगे। जाँच अधूरी होने पर भी मैं दोपहर 3 बजे तक आपको स्थिति बताऊँगा। पात्रता जाँचे बिना मंजूरी का वादा नहीं कर सकता। स्थिति संबंधी विवाद न सुलझे तो आप मुझसे समीक्षा माँग सकते हैं।”
3 बजे का वादा स्थिति बताने का है, प्रमाणपत्र मिलने की गारंटी का नहीं। पर्यवेक्षक दोनों पक्षों से बारी-बारी बोलने को कहता है, लेकिन शिकायत दर्ज करने के लिए नागरिक का स्वर शांत होने की शर्त नहीं रखता। यदि वास्तव में धमकी हो तो उस काल्पनिक कार्यालय की दी हुई सुरक्षा-प्रक्रिया के अनुसार कदम उठेंगे; अभी दिए तथ्यों में ऐसी धमकी नहीं है।
4 कार्रवाई पूरी करें और सीखें
3 बजे परिणाम बताएँ या स्पष्ट करें कि कौन-सी जाँच बाकी है, कौन जिम्मेदार है और अगली स्थिति कब बताई जाएगी। केवल नागरिक के चले जाने या शांत हो जाने से शिकायत को निस्तारित न मानें। जाँचें कि पुराने आवेदक पीछे तो नहीं किए गए। कर्मचारियों के साथ दस्तावेज़ दर्ज करने की चूक और अनुपस्थिति में कार्य-व्यवस्था की समीक्षा करें; उनका पक्ष सुनना साक्ष्य के आधार पर जिम्मेदारी की जाँच के अनुकूल है।
नागरिक से पूछें कि स्थिति का विवरण समझ आया या नहीं, और कर्मचारियों से पूछें कि सही प्रविष्टि में बाधा क्या थी। जाँचें कि वादे के अनुसार स्थिति बताई गई और दोबारा आने की जरूरत घटी या नहीं। इससे सेवा में सुधार परखा जाएगा; केवल सुखद बातचीत समस्या सुलझने का प्रमाण नहीं है।
EI की उपयोगिता और सीमाएँ
EI शिकायत सुनने, संकट में अनिश्चितता समझाने और टीम की असहमति सँभालने में सहायक हो सकती है। वह अनुपस्थित कर्मचारियों की जगह नहीं भर सकती, पात्रता सिद्ध नहीं कर सकती, तकनीकी ज्ञान की जगह नहीं ले सकती और स्वयं तय नहीं करती कि कौन-सा नियम न्यायसंगत है। ऊपर के उदाहरण में अतिरिक्त क्षमता जुटाना और अभिलेख सुधारना सम्मानपूर्ण शब्द चुनने जितना ही महत्त्वपूर्ण है।
EI सत्यनिष्ठा की गारंटी नहीं है। एमरलिंग और गोलमैन भावनात्मक कौशल से लोगों को अनुचित ढंग से प्रभावित करने की संभावना पर चर्चा करते हैं। नैतिकता और EI पर उनका विवेचन। विनम्रता से दबाव डालकर उचित शिकायत वापस करवाना फिर भी गलत है। निष्पक्ष नियम, साक्ष्य, कारण, जवाबदेही और नैतिक प्रतिबद्धता इन कौशलों के उपयोग का मार्गदर्शन करें। क्रोध को समझना वैध असहमति दबाने की तकनीक नहीं बनना चाहिए।
कौशल का अभ्यास और परिणाम की जाँच
प्रशिक्षण से भावनात्मक दक्षताएँ बेहतर हो सकती हैं, लेकिन सुधार अपने-आप नहीं होता। नेलिस और सहयोगियों के नियंत्रित वयस्क प्रशिक्षण अध्ययनों में सुधार मिला; इससे हर कार्यक्रम या शिक्षार्थी में समान सुधार सिद्ध नहीं होता। नेलिस और सहयोगी, 2011।
अभ्यास के लिए किसी साथी के साथ काल्पनिक उदाहरण का संवाद करें। पहले अवलोकन, अपनी भावना, अपना अनुमान और चुना गया कदम लिखें। फिर पूछें कि आपने कहाँ बात काटी, उद्देश्य मान लिया या जरूरत से अधिक वादा किया। एक सुधार के साथ संवाद दोहराएँ। अंत में व्यवहार और निर्णय दोनों जाँचें: क्या प्राप्ति-क्रम तोड़े बिना गलती सुधरी? यह सीखने का अभ्यास है, EI का नैदानिक परीक्षण नहीं।
स्व-जाँच और उत्तर
- क्या नागरिक का क्रोध उसकी माँग सही होने का प्रमाण है? नहीं। भावना स्वीकारें और फाइल तथा नीति जाँचें। समानुभूति और सत्यापन साथ काम करते हैं।
- क्या ऊँची आवाज़ वाले नागरिक को दो पुराने आवेदनों से पहले रखा जाए? दी हुई नीति में नहीं। कार्यालय की गलती सुधारें और प्राप्ति-क्रम बनाए रखते हुए अतिरिक्त क्षमता लगाएँ। यदि किसी अन्य उदाहरण में स्पष्ट आपातकालीन प्राथमिकता-नियम हो तो उसे समान रूप से लागू करना होगा।
- पर्यवेक्षक क्रोध महसूस करता है, लेकिन बदला नहीं लेता। क्या EI असफल रही? नहीं। क्रोध पहचानकर निष्पक्ष प्रतिक्रिया चुनना जागरूकता और नियमन दर्शाता है; कभी क्रोध न आना इसकी कसौटी नहीं है।
- 3 बजे प्रमाणपत्र तैयार न हो तो कौन-सा वादा निभाना है? स्थिति बताएँ, शेष जाँच और जिम्मेदार व्यक्ति स्पष्ट करें तथा अगली सूचना का समय दें। अधूरे निर्णय को पूरा बताकर प्रस्तुत न करें।
- शांत अधिकारी कार्यालय की छवि बचाने के लिए प्रविष्टि की गलती छिपाता है। क्या यह सत्यनिष्ठा है? नहीं। बाहरी संयम तथ्य छिपाने को उचित नहीं बनाता। अभिलेख, स्पष्टीकरण और सुधार सच्चे होने चाहिए।
मुख्य परीक्षा अभ्यास और आदर्श उत्तर
मौलिक अभ्यास प्रश्न: भावनात्मक बुद्धिमत्ता निष्पक्षता का स्थान लिए बिना प्रशासनिक निर्णय को कैसे बेहतर बना सकती है? काल्पनिक सेवा-केंद्र के उदाहरण से समझाइए। 150 शब्दों में उत्तर दीजिए। यह UPSC के पिछले वर्ष का प्रश्न नहीं है।
आदर्श उत्तर · 150 शब्द
भावनात्मक बुद्धिमत्ता अधिकारी को भावनाएँ पहचानकर सोच-समझकर प्रतिक्रिया चुनने में सहायता देती है। इससे साक्ष्य जुटाने और निर्णय समझाने का तरीका सुधर सकता है, जबकि पात्रता निष्पक्ष नियमों से तय होती है।
काल्पनिक केंद्र में पर्यवेक्षक झुँझलाहट पहचानता है, नागरिक का पक्ष सुनता है और फाइल जाँचता है। छूटी प्रविष्टि सुधारी जाती है, पर ऊँची आवाज़ के कारण मंजूरी नहीं मिलती। अतिरिक्त जाँचकर्ता तीनों आवेदन प्राप्ति-क्रम में जाँचता है। पर्यवेक्षक सत्यापित गलती के लिए क्षमा माँगता है, शिकायत दर्ज करता है और परिणाम के बजाय स्थिति बताने का वादा करता है।
इसमें आत्म-जागरूकता, नियमन, समानुभूति और समन्वय के साथ निष्पक्षता जुड़ती है। कर्मचारियों पर दबाव स्वीकारना जाँच छोड़ने का बहाना नहीं बनता। समीक्षा बताती है कि वादा निभा और गलती सुधरी या नहीं।
परंतु संयम सत्यनिष्ठा या संसाधनों की गारंटी नहीं है। भावनात्मक कौशल साक्ष्य, सच्चे कारणों और समान व्यवहार के अधीन रहें; शिकायत दबाना उनका नैतिक उद्देश्य विफल करेगा।
उदाहरण से समझें
भावनात्मक बुद्धिमत्ता वाहन के शॉक एब्ज़ॉर्बर जैसी है: दबाव या टकराव से कठिन यात्रा में झटका लगे तो यह अधिकारी को संतुलित प्रतिक्रिया देने में सहायता कर सकती है। उद्देश्य आवेग में वाहन मोड़ने से बचना है, झटका महसूस करने की क्षमता खो देना नहीं।
इस उपमा की सीमाएँ हैं। नागरिक और उनकी शिकायतें ऐसे गड्ढे नहीं जिन्हें पार करके आगे बढ़ जाना है। झटका किसी वास्तविक कमी का संकेत हो सकता है जिसकी जाँच और सुधार जरूरी है। शॉक एब्ज़ॉर्बर न्यायसंगत रास्ता नहीं चुनते, सड़क नहीं सुधारते और ईंधन नहीं देते; उसी तरह EI नैतिक निर्णय, साक्ष्य, निष्पक्ष प्रक्रिया या संसाधनों का विकल्प नहीं है। संतुलित प्रतिक्रिया से लोगों की बात सुनी जाए और मूल समस्या सुधरे; केवल बाहर से शांति दिखना पर्याप्त नहीं।
इस पाठ के नोट्स
इस पाठ के टेस्ट
- प्रशासन में भावनात्मक बुद्धिमत्ता का अभ्यास
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