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गांधी युग और स्वतंत्रता की राह (1915–1947)

पाठ 2 / 22 मिनटमुफ़्त

गांधी के प्रारंभिक प्रयोग

गांधी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से लौटे। भारत में उनके पहले सत्याग्रह:

  • चंपारण (1917): नील किसान (तिनकठिया प्रणाली), बिहार।
  • अहमदाबाद मिल हड़ताल (1918): पहला आमरण अनशन।
  • खेड़ा (1918): किसानों के लगान माफ़ी के लिए, गुजरात (सरदार पटेल के साथ)।

जन आंदोलन

आंदोलनवर्षमुख्य बिंदु
रौलट सत्याग्रह1919रौलट एक्ट के विरुद्ध; जलियाँवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919)
असहयोग और खिलाफ़त1920–22स्कूल, अदालत, विदेशी कपड़े का बहिष्कार; चौरी चौरा (फ़रवरी 1922) के बाद वापस
सविनय अवज्ञा1930–34नमक कानून तोड़ने के लिए दांडी मार्च (12 मार्च – 6 अप्रैल 1930) से आरंभ
भारत छोड़ो1942"करो या मरो"; ग्वालिया टैंक, बंबई से आरंभ (8 अगस्त 1942)

अन्य पड़ाव

  • साइमन कमीशन (1927): सभी सदस्य अंग्रेज़; "साइमन वापस जाओ" के साथ बहिष्कार।
  • लाहौर अधिवेशन (1929), अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू: पूर्ण स्वराज प्रस्ताव; 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।
  • गांधी–इरविन समझौता (1931) और द्वितीय गोलमेज़ सम्मेलन (गांधी शामिल हुए)।
  • पूना समझौता (1932): गांधी और बी.आर. आंबेडकर के बीच दलित वर्गों के प्रतिनिधित्व पर।
  • भारत सरकार अधिनियम, 1935: प्रांतीय स्वायत्तता।
  • क्रिप्स मिशन (1942), सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आज़ाद हिंद फ़ौज, कैबिनेट मिशन (1946)।
  • माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) → भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 → 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता।

प्रीलिम्स टिप्स

  1. हर आंदोलन को उसके कारण और समापन से जोड़ें।
  2. 1929 लाहौर = पूर्ण स्वराज; बाद में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के लिए चुना गया।

उदाहरण से समझें

गांधी के आंदोलन समुद्र तट पर आती लहरों की तरह थे। हर लहर (असहयोग, सविनय अवज्ञा, भारत छोड़ो) आगे बढ़ी, फिर पीछे हटी — एक विराम जिसका उपयोग गांधी ने फिर से संगठित होने के लिए किया — पर हर नई लहर किनारे पर और आगे तक पहुँची, जब तक 1947 में ब्रिटिश सत्ता बह नहीं गई।

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