भारत में मानसूनी वर्षा क्यों होती है?
हवा का रास्ता समझें, फिर वर्षा का कारण बताएँ
समुद्रतट का एक नगर बहुत गीला और पहाड़ के दूसरी ओर का स्थान अपेक्षाकृत सूखा क्यों हो सकता है? तीन बातें खोजें: मौसमी पवन व्यवस्था, नमी का स्रोत और हवा को ऊपर उठाने वाली प्रक्रिया।
1. मौसमी परिसंचरण, केवल एक विशाल समुद्री समीर नहीं
दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत की मुख्य ग्रीष्मकालीन वर्षा ऋतु है, जो मोटे तौर पर जून–सितंबर तक रहती है। मौसमी ऊष्मन से वायुदाब की व्यवस्था बदलने में मदद मिलती है, पर केवल थल और समुद्र का अलग-अलग गर्म होना पूरी व्याख्या नहीं है। उत्तरी गोलार्ध की गर्मियों में उष्णकटिबंधीय वर्षा-पट्टी उत्तर की ओर खिसकती है। अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) में व्यापारिक पवनें मिलती हैं और हवा ऊपर उठती है। भारतीय क्षेत्र में मानसूनी द्रोणी वर्षा के लिए महत्वपूर्ण लंबा निम्न-दाब क्षेत्र है। इसकी स्थिति बदलती रहती है।
आसपास के महासागरों से हवा इस मौसमी परिसंचरण में आती है। भूमध्य रेखा पार करने वाला प्रवाह उत्तरी गोलार्ध में पृथ्वी के घूर्णन के प्रभाव से मुड़ता है। दक्षिण-पश्चिमी पवनें उस दिशा के नाम पर हैं, जहाँ से वे आती हैं। ऊपरी वायुमंडलीय परिसंचरण और महासागरीय दशाएँ भी मानसून को प्रभावित करती हैं।
2. नमी आने के दो व्यापक मार्ग
अरब सागर और बंगाल की खाड़ी नम मानसूनी हवा के दो व्यापक मार्ग हैं। इन्हें दो अलग-अलग बंद पाइप न समझें। पवनें, स्थलरूप और चलते मौसम तंत्र एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत की वर्षा में योगदान देती है। मानसूनी निम्न-दाब क्षेत्र और अवदाब पश्चिम या उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़कर भीतरी भागों में भी वर्षा ला सकते हैं।
3. हल सहित उदाहरण: पश्चिमी घाट के आर-पार
दो स्थान सोचें: A पश्चिमी ढाल पर नम पवनों के सामने है; B पर्वत-शिखर के पूर्व में है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की इस सरल स्थिति में A पर अधिक वर्षा की अपेक्षा करें।
- नमी का स्रोत पहचानें: अरब सागर से आने वाली हवा।
- अवरोध खोजें: पश्चिमी घाट इस हवा के कुछ भाग को ऊपर उठने के लिए बाध्य करते हैं।
- ऊपर उठती हवा फैलती और ठंडी होती है; संघनन से बादल और वर्षण बन सकते हैं।
- शिखर पार करके नीचे उतरती हवा गर्म होती है। B अपेक्षाकृत सूखा वृष्टि-छाया क्षेत्र है; वहाँ वर्षा असंभव नहीं है।
इसे पर्वतीय या पर्वतकृत वर्षा कहते हैं। पवनाभिमुख ढाल आती हुई हवा के सामने होती है; पवनविमुख ढाल हवा की दिशा में पीछे, ओट वाली ओर होती है। ये नाम हवा की दिशा पर निर्भर हैं। चित्र एक सामान्य प्रवृत्ति बताता है, हर दिन हर स्थान का मौसम नहीं।
4. एक मानसून, असमान वर्षा
ऋतु के भीतर और अलग-अलग वर्षों में वर्षा बदलती है। चलते निम्न-दाब क्षेत्र, अवदाब और मानसूनी द्रोणी की बदलती स्थिति वर्षा तथा शुष्क दौर बनाते हैं। द्रोणी हिमालय की तलहटी की ओर खिसके तो मध्य भारत में वर्षा का विराम हो सकता है, जबकि तलहटी में वर्षा बढ़ सकती है। विराम का अर्थ पूरे देश में वर्षा बंद होना नहीं है। ENSO जैसे महासागर–वायुमंडल के पैटर्न साल-दर-साल बदलाव को प्रभावित करते हैं, पर हर स्थान का परिणाम अकेले तय नहीं करते।
जून–सितंबर हर क्षेत्र की मुख्य वर्षा ऋतु भी नहीं है। अक्टूबर–दिसंबर का उत्तर-पूर्व मानसून तमिलनाडु के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। उस समय बंगाल की खाड़ी की पवनें और मौसम तंत्र नमी देते हैं।
यह क्रम याद रखें: परिसंचरण → नमी → उत्थापन → वर्षा। किसी स्थान की व्याख्या में स्थलरूप, पवनों के सामने उसकी स्थिति और ऋतु जोड़ें।
पाँच मौलिक अभ्यास प्रश्न
- भारत की ग्रीष्मकालीन मानसूनी वर्षा की सबसे अच्छी व्याख्या कौन-सी है?
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सही उत्तर: B
मौसमी पवनें नमी पहुँचाती हैं। ऊपर उठती और ठंडी होती हवा वर्षा बनने में मदद करती है; केवल ऊष्मन से वर्षा का स्थान और समय नहीं समझाया जा सकता।
- अरब सागर से नम पवनें आने पर किस स्थान पर पर्वतकृत वर्षा की संभावना अधिक है?
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सही उत्तर: B
पवनाभिमुख पश्चिमी ढाल पर पर्वत नम हवा को ऊपर उठाते हैं। हवा ठंडी होकर बादल और वर्षा बना सकती है।
- बंगाल की खाड़ी से नमी आने के व्यापक मार्ग का सही वर्णन कौन-सा है?
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सही उत्तर: A
खाड़ी की नमी पूर्व और पूर्वोत्तर तक पहुँचती है। मानसूनी निम्न-दाब क्षेत्र और अवदाब भीतरी भागों में बढ़कर पश्चिम या उत्तर-पश्चिम में वर्षा फैला सकते हैं।
- भारत की ऋतु-भर की कुल वर्षा दीर्घकालीन औसत के करीब है। इससे कौन-सा निष्कर्ष सुरक्षित है?
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सही उत्तर: C
कुल मात्रा में स्थानीय कमी, अधिकता और शुष्क दौर छिप सकते हैं। स्थान और समय के अनुसार वितरण भी महत्वपूर्ण है।
- मानसूनी द्रोणी हिमालय की तलहटी की ओर खिसकती है। कौन-सी स्थिति संभव है?
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सही उत्तर: B
द्रोणी उत्तर की ओर खिसकने पर मध्य भारत में वर्षा का विराम और तलहटी में अधिक वर्षा हो सकती है। विराम पूरे देश में वर्षा का रुकना नहीं है।
स्रोत
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