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रिट और संवैधानिक उपचारों का अधिकार

पाठ 4 / 42 मिनटमुफ़्त

अनुच्छेद 32

  • मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है। डॉ. बी. आर. आंबेडकर ने इसे संविधान का "हृदय और आत्मा" कहा।
  • उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के अंतर्गत रिट जारी करते हैं — दायरा व्यापक है, क्योंकि वे मौलिक अधिकारों और अन्य विधिक अधिकारों को लागू करा सकते हैं।

पाँच रिट

रिटअर्थउद्देश्य
बंदी प्रत्यक्षीकरण"शरीर प्रस्तुत करो"अवैध हिरासत से मुक्ति (सार्वजनिक और निजी दोनों के विरुद्ध)
परमादेश"हम आदेश देते हैं"लोक अधिकारी/निकाय को सार्वजनिक कर्तव्य निभाने का आदेश (राष्ट्रपति, राज्यपाल या निजी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं)
प्रतिषेध"रोकना"उच्च न्यायालय निचली अदालत/अधिकरण को अधिकार-क्षेत्र लाँघने से रोकता है (निवारक)
उत्प्रेषण"प्रमाणित करना"निचली अदालत/अधिकरण के पारित आदेश को रद्द करना (उपचारात्मक)
अधिकार पृच्छा"किस अधिकार से"किसी व्यक्ति के सार्वजनिक पद धारण करने के अधिकार की जाँच

आपातकाल में निलंबन

राष्ट्रीय आपातकाल में राष्ट्रपति मौलिक अधिकारों के लिए न्यायालय जाने का अधिकार निलंबित कर सकते हैं (अनुच्छेद 359), अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर (44वें संशोधन, 1978 के बाद)।

प्रारंभिक परीक्षा बिंदु

  1. संसद अन्य न्यायालयों को भी रिट जारी करने का अधिकार दे सकती है (अनुच्छेद 32(3)); अभी तक ऐसा नहीं किया गया।
  2. प्रतिषेध केवल न्यायिक/अर्ध-न्यायिक निकायों के विरुद्ध; उत्प्रेषण अधिकारों को प्रभावित करने वाले प्रशासनिक प्राधिकारियों तक विस्तारित किया गया है।

उदाहरण से समझें

रिट सर्वोच्च न्यायालय का औज़ार-बक्सा हैं, हर औज़ार अलग ख़राबी के लिए। बंदी प्रत्यक्षीकरण अवैध हिरासत का ताला खोलने वाली चाबी है; परमादेश सोए अधिकारी को जगाने वाला अलार्म; प्रतिषेध अदालत के सीमा लाँघने से पहले का "रुको" संकेत; उत्प्रेषण ग़लत आदेश मिटाने वाला रबड़; और अधिकार पृच्छा घुसपैठिए से पूछती है, "यह कुर्सी तुम्हें किसने दी?"

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