परिवार, समाज और शिक्षा मानव मूल्य कैसे विकसित करते हैं
इस पाठ में आप क्या सीखेंगे
मूल्य सीखने की प्रक्रियाएँ समझें, आत्मसात् करने और बिना विचार किए अनुरूपता में अंतर करें, तथा परिचितों के प्रति निष्ठा और निष्पक्ष लोक कर्तव्य के टकराव को सुलझाएँ। मूल्य, नैतिक निर्णय और नियम का अंतर अस्पष्ट हो तो नैतिकता और मूल्यों का परिचय वाला पाठ फिर पढ़ें।
मूल्य केवल परिचित दिनचर्या नहीं है
मूल्य अपेक्षाकृत स्थिर मानदंड है, जिसके आधार पर हम तय करते हैं कि क्या महत्त्वपूर्ण है और कैसा आचरण उचित है। आदत व्यवहार का दोहराया जाने वाला ढंग है। सामाजिक स्वीकृति दूसरे लोगों की अनुकूल प्रतिक्रिया है। ये एक-दूसरे को सहारा दे सकते हैं, लेकिन एक ही बात नहीं हैं।
एक लिपिक समय से पहले कार्यालय पहुँचता है। इसका कारण आदत, आलोचना का भय या नागरिकों के लिए काउंटर को भरोसेमंद बनाने की प्रतिबद्धता हो सकता है। केवल दिखाई देने वाले काम से कारण स्पष्ट नहीं होता। नागरिकों की जरूरत समझने वाले लिपिक के पास अधिकारी की अनुपस्थिति में भी समय पर आने का कारण है। यह मूल्य को आत्मसात् करने का संकेत है: अपने आचरण के लिए उस मानदंड को कारण मानना। इससे स्थायी सद्गुणी चरित्र सिद्ध नहीं होता।
मूल्यों को भी परखना जरूरी है। कोई व्यक्ति अपने समूह के अनुचित पक्षपात को पूरी ईमानदारी से आत्मसात् कर सकता है। उसकी निष्ठा विश्वास की मजबूती समझाती है; विश्वास का औचित्य सिद्ध नहीं करती।
मूल्य कैसे सीखे जाते हैं
एनसीईआरटी का शैक्षिक ढाँचा देखे गए आचरण, संबंधों, अभ्यास और चिंतन से सीखने की चर्चा करता है। उसमें घर, विद्यालय और व्यापक समुदाय परस्पर प्रभाव डालते हैं। यह उपयोगी शिक्षण-ढाँचा है; यह दावा नहीं कि किसी प्रभाव से कोई निश्चित चरित्र अनिवार्य रूप से बनता है। एनसीईआरटी ढाँचा: मूल्य-अर्जन और आदर्श आचरण वाले खंड
आचरण से उदाहरण प्रस्तुत करना। परिवार का कोई सदस्य बिल की गलती स्वयं स्वीकार करता है, जबकि किसी ने ध्यान नहीं दिया। सीखने वाला ईमानदारी को व्यवहार में देखता है। वयस्क प्रशिक्षण केंद्र की प्रशिक्षक अपने दिए गलत अंक को सबके सामने सुधारती है। इससे सीख मिलती है कि अधिकार रखने वाला व्यक्ति गरिमा खोए बिना गलती स्वीकार कर सकता है। यदि संस्था गलत रिपोर्ट को चुपचाप पुरस्कृत करे, तो ईमानदारी का भाषण कमजोर पड़ जाएगा।
प्रोत्साहन और बार-बार अभ्यास। आवासीय संघ उन स्वयंसेवकों का धन्यवाद करता है जो खर्च साफ बताते हैं। यह प्रतिक्रिया पारदर्शिता को प्रोत्साहित कर सकती है। रसीदें नियमित दर्ज करने से सावधान लेखांकन सहज बन सकता है। पुरस्कार केवल दिखावे को भी बढ़ा सकते हैं: यदि कम शिकायतों पर ही प्रशंसा मिले, तो कर्मचारी समस्याएँ सुलझाने के बजाय शिकायत करने से रोक सकते हैं। पूछें कि पुरस्कार वास्तव में किस व्यवहार को बढ़ावा देता है।
कारण, संवाद और चिंतन। महाविद्यालय विद्यार्थियों को चयन-निर्णय पर प्रश्न करने देता है और मानदंड समझाता है। वे कारण देना, आपत्ति सुनना और मत बदलना सीखते हैं। यह भी शिक्षा है। समय-सारिणी, सुलभ सुविधाएँ, मूल्यांकन की प्रक्रिया और असहमति के प्रति व्यवहार औपचारिक पाठ्यक्रम के साथ मूल्य सिखाते हैं।
पारिवारिक संबंध देखभाल सिखा सकते हैं; साथी और नागरिक समूह सहयोग बढ़ा सकते हैं; शिक्षण संस्थाएँ तर्कपूर्ण चर्चा और निष्पक्ष प्रक्रिया दे सकती हैं। कोई पारिवारिक ढाँचा या सामाजिक समूह नैतिक श्रेष्ठता अथवा कमजोरी की गारंटी नहीं है। प्रत्येक परिवेश पूर्वाग्रह भी पहुँचा सकता है। महत्त्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति क्या सीखता है और क्या वह सीख निष्पक्ष परीक्षण में टिकती है।
जब प्रभाव एक-दूसरे से टकराएँ
परिवार परिचितों की सहायता को महत्त्व दे सकता है, सहकर्मी गति को पुरस्कृत कर सकते हैं और पेशेवर प्रशिक्षण निष्पक्ष चयन की माँग कर सकता है। समाजीकरण व्यक्ति की स्वतंत्र निर्णय-क्षमता समाप्त नहीं करता। तीन प्रश्न पूछें:
- हर अपेक्षा के पीछे कौन-सी उचित चिंता है? निष्ठा में देखभाल हो सकती है; गति से देरी घट सकती है।
- यहाँ इसे मानने की कीमत कौन चुकाएगा? सीमित सार्वजनिक लाभ परिचित को देने से उतना ही पात्र अपरिचित वंचित हो सकता है।
- क्या प्रभावित लोगों के सामने निर्णय का सुसंगत और प्रासंगिक कारण दिया जा सकता है?
आलोचनात्मक चिंतन किसी चिंता को बनाए रखते हुए उसकी अभिव्यक्ति बदल सकता है। रिश्तेदार की परवाह उसके आवेदन का प्रारूप समझाने का कारण हो सकती है। केवल यह संबंध उसे बेहतर स्थान देने का औचित्य नहीं है।
हल किया हुआ उदाहरण: प्रशिक्षण की एक सीट
यह वयस्कों के कार्यस्थल का काल्पनिक प्रकरण है। नगरपालिका कार्यालय में वित्तपोषित प्रशिक्षण की एक सीट है। घोषित नीति पहले कार्य-संबंधी जरूरत और फिर पहले ऐसा प्रशिक्षण न मिल पाने को प्राथमिकता देती है। पूर्ण बराबरी पर दर्ज प्रक्रिया से लॉटरी होती है। चयनकर्ता स्पष्टीकरण माँग सकता है, लेकिन आवेदन बंद होने के बाद मानदंड नहीं बदल सकता।
मीरा की मौसी चाहती हैं कि वह वयस्क पड़ोसी नितिन को चुने, जिसने कभी परिवार की मदद की थी। नितिन समान प्रशिक्षण पहले ले चुका है। फराह की कार्य-संबंधी जरूरत बराबर है और उसे पहले ऐसा अवसर नहीं मिला। सहकर्मी कहते हैं कि परिचित व्यक्ति को चुनना आसान रहेगा।
तर्कपूर्ण उत्तर। घोषित दूसरे मानदंड के अनुसार मीरा को फराह को पहले स्थान पर रखना चाहिए, कारण दर्ज करने चाहिए और परिणाम सम्मानपूर्वक समझाना चाहिए। नितिन को आगामी प्रशिक्षण की ऐसी जानकारी दे सकती है जो सभी को समान रूप से उपलब्ध हो। पारिवारिक कृतज्ञता दबाव को समझाती है; पेशेवर प्रशिक्षण और घोषित प्रक्रिया निष्पक्ष मानदंड देते हैं। कारण दर्ज करने से निर्णय की जाँच संभव होती है; केवल दर्ज कर देने से अनुचित मानदंड उचित नहीं बन जाता।
यदि नया साक्ष्य कार्य-संबंधी जरूरत की तुलना बदलता है, तो दोनों आवेदकों के लिए समान अनुमत प्रक्रिया से उसकी जाँच करनी चाहिए। निष्पक्षता में प्रासंगिक अंतर मायने रख सकते हैं। इसका अर्थ सबको एक जैसा परिणाम देना नहीं है।
अपनी समझ परखें
जाँच 1। कर्मचारी केवल इसलिए गलती बताता है क्योंकि डेस्क की कैमरा रिकॉर्डिंग हो रही है। क्या इससे ईमानदारी आत्मसात् होना सिद्ध है?
उत्तर। नहीं। काम ईमानदारी के अनुकूल है, लेकिन बताया गया कारण बाहरी निगरानी है। अधिक मजबूत निष्कर्ष के लिए समझ और अलग परिस्थितियों में स्थिर आचरण देखना होगा।
जाँच 2। महाविद्यालय समानता पढ़ाता है, लेकिन प्रभावशाली आवेदकों को कतार से आगे जाने देता है। शैक्षिक समस्या और एक सुधार बताइए।
उत्तर। संस्थागत व्यवहार पाठ का विरोध करता है। निष्पक्ष कतार-प्रक्रिया घोषित करके लागू करें, प्रासंगिक जरूरतों के लिए सुलभ अपवाद-प्रक्रिया दें और अपवाद समझाएँ। केवल एक और भाषण विरोधी उदाहरण को नहीं सुधारता।
जाँच 3। परिवार, समाज और शिक्षण संस्था में मूल्य सीखने का एक-एक प्रभाव बताएँ। उसे अपनाने से पहले क्या परखना चाहिए?
उत्तर। परिवार में गलती स्वीकारना ईमानदारी का उदाहरण है; नागरिक समूह का साफ हिसाब पर प्रोत्साहन पारदर्शिता बढ़ाता है; महाविद्यालय का अपील-निर्णय समझाना कारण देना सिखाता है। हर स्थिति में कारण और प्रभावित लोगों के प्रति उसकी निष्पक्षता परखें। स्वीकृति या संस्थागत दर्जा शुद्धता तय नहीं करता। अन्य प्रासंगिक उदाहरण भी स्वीकार्य हैं।
मुख्य परीक्षा अभ्यास: 5 अंक, 50 शब्द। प्रशासनिक उदाहरण से मूल्य-संस्कार और बिना विचार किए अनुरूपता में अंतर बताइए।
संकेतात्मक उत्तर। मूल्य-संस्कार उदाहरण, अभ्यास और तर्कपूर्ण चिंतन से मानदंड विकसित करता है। बिना विचार किए अनुरूपता अपेक्षाओं की निष्पक्षता जाँचे बिना उनका पालन है। घोषित प्रशिक्षण-मानदंड समझकर लागू करना निष्पक्षता सीखना है; सहकर्मियों के दबाव में पड़ोसी चुनना मात्र अनुरूपता है। कारणों की समझ दबाव में नैतिक आचरण बनाए रखती है।
अंक-विभाजन। अंतर 2; प्रासंगिक प्रशासनिक उदाहरण 2; स्पष्टता 1। अच्छे उत्तर में चिंतन समझाया जाए, केवल “अच्छे मूल्य” न लिखा हो। यह मौलिक अभ्यास है, आधिकारिक आरपीएससी प्रश्न नहीं।
उदाहरण से समझें
एक दिशा-सूचक की कल्पना करें, जिसे चलाना आपने दूसरों से सीखा। उनका मार्गदर्शन दिशा खोजने में मदद करता है, लेकिन पास का चुंबक उसे भटका सकता है। इसी तरह स्वीकृति ईमानदारी को सहारा दे सकती है या पक्षपात की ओर खींच सकती है। चिंतन पूछता है कि दिशा प्रभावित लोगों के लिए न्यायसंगत है या नहीं। सीमा: नैतिक असहमति किसी एक भौतिक उत्तर-दिशा को खोज लेने से नहीं सुलझती। लोगों को कारण देने और परखने पड़ते हैं; दिशा-सूचक प्रभाव की जाँच याद दिलाता है, सही-गलत तय करने वाली मशीन नहीं है।
सूत्र और नियम
- मूल्य: निर्णय का मानदंड; आदत: दोहराया व्यवहार; स्वीकृति: दूसरों की प्रतिक्रिया।
- देखे गए आचरण, प्रोत्साहन और संस्थागत दिनचर्या से सीख मिलती है; संवाद उसे परखता है।
- आत्मसात् करने का संबंध अपने कारणों से है, केवल बाहरी पालन से नहीं।
- परंपरागत अपेक्षाओं की आलोचना संभव है; व्यक्ति की निर्णय-क्षमता बनी रहती है।
- सार्वजनिक आवंटन में प्रासंगिक मानदंड अपनाएँ, कारण समझाएँ और साक्ष्य निष्पक्षता से जाँचें।
- आगे: सत्यापित जीवन-प्रसंगों से सीखने वाले पाठ में सत्यापित जीवन-प्रसंग से मिलने वाली सीख परखें।
इस पाठ के नोट्स
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