गीता गांधी और नैतिक चिंतक तुलनात्मक अभ्यास
सभी आठ प्रश्न हल करें। प्रश्न 1–7 प्रत्येक 5 अंक के हैं; प्रति उत्तर 50 शब्द-सीमा है। प्रश्न 8 के 10 अंक और 150 शब्द-सीमा है। सुझाया अभ्यास-समय: 50 मिनट, फिर स्वमूल्यांकन करें। यह मौलिक मॉड्यूल अभ्यास है, आधिकारिक आरपीएससी प्रश्नपत्र या पूरी आचारशास्त्र इकाई की परीक्षा नहीं। उत्तर-निर्देश पढ़ने से पहले प्रश्न हल करें। तर्कपूर्ण वैकल्पिक उत्तर भी अंक पा सकते हैं। नमूने की शब्दावली अनिवार्य नहीं। समान अंक-मानदंड के अनुसार स्रोत-समर्थित समकक्ष व्याख्याएँ और व्यावहारिक विकल्प स्वीकारें। प्रश्न 3 और 4 में दोनों नामित परंपराएँ या चिंतक तथा प्रश्न 6 में दोनों कांटीय परीक्षण जरूरी हैं। व्याख्या के बिना नाम या उद्धरण लिखने पर तर्क के अंक न दें।
प्रश्न
प्रश्न 1 · 5 अंक
उत्तरदायी कर्म में अनासक्ति और लोकसंग्रह की अलग भूमिकाएँ समझाएँ। विफल अधिकृत परीक्षण की समीक्षा का एक कारण दें।
प्रश्न 2 · 5 अंक
वास्तव में उपयोगी अभियान भी जानबूझकर गलत सूचना पर आधारित हो तो नैतिक रूप से दोषपूर्ण क्यों होगा? गांधी का तर्क और एक रचनात्मक विकल्प दें।
प्रश्न 3 · 5 अंक
सत्यापित कदाचार सुधारते समय अपमानजनक वाणी से बचने के अलग बौद्ध और जैन कारण दें। करुणा को उत्तरदायित्व समाप्त करना न मानें।
प्रश्न 4 · 5 अंक
कौटिल्य के राजकीय लोकहित-तर्क और आंबेडकर के समान पहुँच के सामाजिक-लोकतांत्रिक आधार का अंतर करें। एक संस्थागत निहितार्थ दें।
प्रश्न 5 · 5 अंक
अपुष्ट आरोप पर उचित प्रतिक्रिया अंकगणितीय मध्य के बजाय व्यावहारिक प्रज्ञा का विषय क्यों है? चयन को चरित्र से जोड़ें।
प्रश्न 6 · 5 अंक
जानबूझकर झूठे सेवा-वचन को सार्वभौम नियम के परीक्षण से परखें; फिर बताएँ कि उसमें आवेदक को केवल साधन कैसे बनाया जाता है।
प्रश्न 7 · 5 अंक
मिल की कल्याण-दृष्टि में दीर्घकालिक सुरक्षा और आनंद की गुणवत्ता दोनों का महत्त्व समझाएँ। बड़ी भीड़ से निर्णय तय क्यों नहीं हो जाता?
प्रश्न 8 · 10 अंक
काल्पनिक सार्वजनिक सामुदायिक भवन में एक साप्ताहिक समय-खंड शेष है। दो पात्र वयस्क संघ इसे चाहते हैं; बार-बार अनौपचारिक नवीनीकरण से नए आवेदक बाहर रह गए हैं। लिखित नियम समान विचार, प्रकाशित मानदंड और अभिलिखित कारण माँगते हैं। अधिकारी स्वतः नवीनीकरण रोक सकता है, दोनों समूहों को सुन सकता है और अधिकृत बारी-क्रम का परीक्षण कर सकता है; पात्रता नहीं बदल सकता। सहकर्मी सर्वसम्मति की घोषणा सुझाता है, जबकि एक समूह असहमत है। गांधी तथा आंबेडकर या मिल के अलग तर्कों की तुलना करें, व्यावहारिक आवंटन-प्रक्रिया का औचित्य दें और एक सुरक्षा-उपाय तथा निर्णय बदलने वाला तथ्य बताएँ। परिवर्तित तथ्य: सत्यापित अभिलेख बताते हैं कि एक प्रस्तावित समय-सारिणी में भवन अधिकांश सप्ताह खाली रहेगा; समान व्यवहार या उपयोगिता को यांत्रिक बराबर हिस्से माने बिना पुनर्विचार करें।
उत्तर निर्देश और स्वमूल्यांकन
प्रश्न 1
अनासक्ति निजी फल पर निर्भरता की जाँच करती है, कर्म छोड़ने को नहीं कहती। लोकसंग्रह व्यक्ति से आगे व्यापक हित की ओर ध्यान दिलाता है। विफल अधिकृत परीक्षण की समीक्षा जरूरी है, क्योंकि निष्प्रभावी उपाय लोगों पर बोझ डाल सकता है। विफलता स्वीकारना सेवा का संकल्प छोड़ना नहीं है।
- अनासक्ति — 1.5 अंक
- लोकसंग्रह — 1.5 अंक
- समीक्षा का कारण — 1 अंक
- स्पष्टता — 1 अंक
प्रेरणा और कर्म के व्यापक कारण को अलग करें। परिणाम-समीक्षा इस प्रकरण में उचित प्रयोग है, गीता में बताई आधुनिक प्रक्रिया का उद्धरण नहीं।
प्रश्न 2
गांधी के लिए साधन साध्य का स्वरूप गढ़ते हैं। जानबूझकर गलत सूचना सहयोग को छल पर टिकाती है और सत्यपूर्ण संबंध बिगाड़ती है। वास्तविक उद्देश्य समझाएँ, स्वैच्छिक भागीदारी आमंत्रित करें और निवासियों के साथ उपयोगी सहायता जुटाएँ। व्यावहारिक लाभ चुने तरीके का नैतिक दोष नहीं मिटाता।
- साधन–साध्य तर्क — 2 अंक
- प्रकरण-साक्ष्य — 1 अंक
- रचनात्मक विकल्प — 1 अंक
- स्पष्टता — 1 अंक
विकल्प बेईमान तरीका बदले, केवल उसे विनम्र शब्दों में न दोहराए। सत्यपूर्ण सहयोग से तत्काल सफलता की गारंटी न दें।
प्रश्न 3
बौद्ध दृष्टि मंशा जाँचती है और द्वेष के बजाय मैत्री तथा करुणा विकसित करती है। जैन दृष्टि वाणी और आचरण में अनुशासित अहिंसा पर जोर देती है। सत्यापित कदाचार का आनुपातिक, सत्यपूर्ण सुधार अपमान के बिना करें। दोनों उत्तरदायित्व का समर्थन कर सकती हैं, लेकिन उनके आधार अलग रहें।
- बौद्ध कारण — 1.5 अंक
- जैन कारण — 1.5 अंक
- न्यायसंगत कदम — 1 अंक
- स्पष्टता — 1 अंक
प्रत्येक परंपरा का उचित कारण दें। केवल “दोनों दया सिखाती हैं” अपर्याप्त है; उचित सुधार रद्द करना प्रश्न की माँग नहीं।
प्रश्न 4
कौटिल्य राजकीय परिश्रम और सुलभ सुनवाई को प्रजा के हित तथा प्रभावी शासन से जोड़ते हैं। आंबेडकर सामाजिक लोकतंत्र को स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर टिकाते हैं: पहुँच समान हैसियत का प्रश्न है, शासक की कृपा नहीं। अनुचित प्रवेश-बाधाएँ हटाकर पात्र आवेदकों के पंजीकरण और समीक्षा की भरोसेमंद प्रक्रिया बनाएँ।
- कौटिल्य का आधार — 1.5 अंक
- आंबेडकर का आधार — 1.5 अंक
- संस्थागत उपाय — 1 अंक
- स्पष्टता — 1 अंक
साझा सुधार से राजनीतिक आधार समान नहीं हो जाते। दो प्रसिद्ध नाम गिनाने के बजाय दोनों दृष्टियों में संस्था का महत्त्व समझाएँ।
प्रश्न 5
व्यावहारिक प्रज्ञा अच्छे उद्देश्य के लिए परिस्थिति की माँग परखती है। अपुष्ट आरोप में निष्पक्ष जाँच चाहिए, उपेक्षा और दंड का संख्यात्मक समझौता नहीं। उचित कारणों से आनुपातिक प्रतिक्रिया चुनना चरित्र व्यक्त और विकसित करता है। तत्काल खतरा सत्यापित होने पर प्रतिक्रिया बदलनी चाहिए।
- व्यावहारिक प्रज्ञा — 2 अंक
- चयन और चरित्र — 2 अंक
- स्पष्टता — 1 अंक
मध्य परिस्थिति के अनुरूप प्रतिक्रिया है, औसत दंड नहीं। उत्तर में विवेक, जानबूझकर किया चयन और चरित्र का संबंध स्पष्ट हो।
प्रश्न 6
सहयोग पाने के लिए जानबूझकर झूठा सेवा-वचन देने का कर्म-सूत्र सार्वभौम होने पर वचन की विश्वसनीयता मिटाता है; वह संगत सार्वभौम नियम नहीं बनता। छल आवेदक के निर्णय को अधिकारी के उद्देश्य के लिए नियंत्रित करता है। इससे व्यक्ति की विवेकपूर्ण स्वायत्तता के बजाय उसे केवल साधन बनाया जाता है।
- सार्वभौम नियम — 2 अंक
- व्यक्ति साध्य — 2 अंक
- स्पष्टता — 1 अंक
वचन देने की प्रथा में विरोध समझाएँ, केवल व्यापक बेईमानी के बुरे परिणाम नहीं। “केवल” महत्त्वपूर्ण है: ईमानदार सहयोग निषिद्ध नहीं।
प्रश्न 7
मिल के लिए सुरक्षा और भरोसेमंद अधिकार टिकाऊ कल्याण बढ़ाते हैं। आनंद की गुणवत्ता दोनों प्रकारों से परिचित सक्षम निर्णायक परखते हैं। निष्पक्ष निर्णय सभी प्रभावित हित देखता है। भीड़ की संख्या अकेले आनंद की गुणवत्ता, हानि की गंभीरता या भविष्य के लाभों की विश्वसनीयता नहीं बताती।
- सुरक्षा — 1.5 अंक
- गुणवत्ता — 1.5 अंक
- संख्या से आगे तर्क — 1 अंक
- स्पष्टता — 1 अंक
यह निष्कर्ष न निकालें कि अधिकारी शिक्षा या पद से नागरिकों का मूल्य तय कर सकता है। सक्षम निर्णायक की तुलना अनुभूत आनंद की है, असमान नागरिक हैसियत की नहीं।
प्रश्न 8
गांधी का साधन–साध्य विचार झूठी सर्वसम्मति अस्वीकार करता है: छल वांछित सहयोगपूर्ण संबंध बिगाड़ता है। आंबेडकर का सामाजिक लोकतंत्र नवीनीकरण जाँचने का अलग कारण देता है: समान हैसियत प्रभावशाली पुराने समूहों की पहुँच पर निर्भर न रहे। मैं अनुमति के अनुसार स्वतः नवीनीकरण रोकूँगा, दोनों संघों को सुनूँगा, प्रासंगिक मानदंड प्रकाशित करूँगा और कारण दर्ज करूँगा। अधिकृत बारी-क्रम का परीक्षण तभी उचित है जब वास्तविक उपयोग और समान विचार संभव हों; समानता यांत्रिक बराबर हिस्से नहीं माँगती। सुलभ समीक्षा-मार्ग रखें और आपत्तियाँ सही दर्ज करें; पालन को सहमति न बताएँ। सत्यापित अभिलेख दिखाएँ कि प्रस्तावित समय-सारिणी में भवन अधिकतर सप्ताह खाली रहेगा तो दोनों समूहों की प्रमाणित उपलब्धता के अनुसार परीक्षण का बारी-क्रम बदलें। समझाएँ कि संशोधित तारीखें निष्पक्ष विचार कैसे बनाए रखती हैं। दोनों तर्क ईमानदार, समीक्षा योग्य प्रक्रिया का समर्थन कर सकते हैं, लेकिन गांधीवादी नैतिकता और आंबेडकर की लोकतांत्रिक दृष्टि समान नहीं हो जातीं।
- दो सही विचार — 3 अंक
- अलग तर्क और तुलना — 2 अंक
- तथ्य और व्यावहारिक निर्णय — 3 अंक
- सुरक्षा या पुनर्विचार — 1 अंक
- स्पष्टता — 1 अंक
नमूने में गांधी और आंबेडकर चुने गए हैं। गांधी–मिल उत्तर भी पूर्ण अंक पा सकता है, यदि साधन–साध्य तर्क की तुलना निष्पक्ष कल्याण, भरोसेमंद अपेक्षाओं और बहिष्कार के परिणामों से सही करे। दिए अधिकारों और तथ्यों से समर्थित दूसरी व्यावहारिक प्रक्रिया स्वीकारें; यही समय-सारिणी अनिवार्य न मानें। केवल नाम लिखने पर विचारकों के अंक न दें। निर्णय तथा सुरक्षा/पुनर्विचार की श्रेणियों में सुरक्षा-उपाय और बदले तथ्य पर प्रतिक्रिया, दोनों जाँचें; एक ही बिंदु के दो बार अंक न दें।
इस पाठ के नोट्स
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