Introduction to Environment and Ecology
पर्यावरण की मूल बातें
पर्यावरण हमारे चारों ओर की हर चीज़ है — वायु, जल, मिट्टी, पौधे, जीव-जंतु और मनुष्य — और उनके बीच का संबंध। इन संबंधों का अध्ययन पारिस्थितिकी (Ecology) कहलाता है।
पारिस्थितिकी तंत्र
- जैविक घटक: उत्पादक, उपभोक्ता, अपघटक
- अजैविक घटक: सूर्य का प्रकाश, वायु, जल, मिट्टी, तापमान
- उत्पादक (हरे पौधे) प्रकाश संश्लेषण से भोजन बनाते हैं।
- उपभोक्ता: शाकाहारी (प्राथमिक), मांसाहारी (द्वितीयक/तृतीयक), सर्वाहारी
- अपघटक (जीवाणु, कवक) मृत पदार्थ को तोड़कर पोषक तत्व मिट्टी में लौटाते हैं।
खाद्य श्रृंखला और ऊर्जा प्रवाह
घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → बाज़। ऊर्जा का प्रवाह एक दिशा में होता है; अगले स्तर तक केवल लगभग 10% ऊर्जा पहुँचती है (10% नियम)।
वायुमंडल और ओज़ोन
- परतें: क्षोभमंडल → समतापमंडल → मध्यमंडल → तापमंडल → बाह्यमंडल
- ओज़ोन परत (समतापमंडल में) हानिकारक UV किरणों को सोखती है; CFC इसे नुकसान पहुँचाते हैं।
- ग्रीनहाउस गैसें: CO₂, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, जलवाष्प — ये वैश्विक तापन का कारण हैं।
प्रदूषण और मुख्य शब्द
- वायु, जल, मृदा और ध्वनि प्रदूषण
- जैव-निम्नीकरणीय कचरा अपने आप सड़ जाता है; अजैव-निम्नीकरणीय (प्लास्टिक, काँच) नहीं।
- जैव विविधता = जीवन की विविधता; भारत के हॉटस्पॉट: पश्चिमी घाट, हिमालय।
महत्वपूर्ण दिवस
- विश्व पर्यावरण दिवस – 5 जून; पृथ्वी दिवस – 22 अप्रैल; ओज़ोन दिवस – 16 सितंबर
उदाहरण से समझें
पारिस्थितिकी तंत्र को एक रेलवे नेटवर्क की तरह समझिए। सूर्य पावर स्टेशन है — सारी ऊर्जा वहीं से आती है। हरे पौधे इंजन हैं जो उस ऊर्जा को भोजन में बदलते हैं (उत्पादक)। हर स्टेशन पर चढ़ने वाले यात्री उपभोक्ता हैं: पहले शाकाहारी, फिर मांसाहारी जो उन पर "निर्भर" हैं।
हर स्टेशन पर कुछ ऊर्जा ख़र्च हो जाती है — जैसे स्टेशनों के बीच जलने वाला ईंधन — इसलिए अगले स्तर तक केवल लगभग 10% पहुँचती है। अपघटक सफ़ाई और मरम्मत दल हैं: बचा हुआ सब रीसायकल करते हैं ताकि नेटवर्क चलता रहे। और ओज़ोन परत स्टेशन की छत है, जो सबको तेज़ UV "बारिश" से बचाती है।
इस पाठ के टेस्ट
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