मौलिक अधिकार: समता और स्वतंत्रता (अनुच्छेद 12 से 22)
संविधान के भाग 3 में मौलिक अधिकार हैं (संविधान के हिंदी पाठ में इनका नाम मूल अधिकार है)। यह पाठ भाग 3 के अनुच्छेद 12 से 22 तक है: इन अधिकारों का सम्मान किसे करना है, इन्हें तोड़ने वाली विधि का क्या होता है, समता का अधिकार और स्वतंत्रता का अधिकार। आप जानेंगे कि हर अनुच्छेद क्या करता है, अनुच्छेद 22 को एक गिरफ्तारी पर लगाएँगे, और पास-पास के अनुच्छेदों के बीच बिछे जालों का अभ्यास करेंगे।
पहले अनुमान लगाइए
समता का अधिकार अनुच्छेद 14 से 18 तक है, और हर अनुच्छेद का छोटा-सा शीर्षक बताता है कि वह क्या करता है। आगे पढ़ने से पहले अनुमान लगाइए।
पहले अनुमान लगाइए: कौन-सा अनुच्छेद अस्पृश्यता का अंत करता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A
अनुच्छेद 17 का शीर्षक है "अस्पृश्यता का अंत"। यह अस्पृश्यता का अंत करता है और किसी भी रूप में उसके आचरण को निषिद्ध करता है।
विकल्प B: अनुच्छेद 18 उपाधियों का अंत है।
विकल्प C: अनुच्छेद 15 धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध करता है।
विकल्प D: अनुच्छेद 23 मानव के दुर्व्यापार और बलातश्रम का प्रतिषेध करता है; इसी से शोषण के विरुद्ध अधिकार शुरू होता है।
संकेत: सही अनुच्छेद का शीर्षक उसी प्रथा का नाम लेता है जिसका वह अंत करता है।
रोज़ की एक तस्वीर
एक हाउसिंग सोसाइटी के नियम-पट्ट की कल्पना कीजिए, जिसे उसकी प्रबंध समिति को भी मानना पड़ता है।
भाग 3 ऐसे नियम-पट्ट की तरह है जिसे प्रबंध समिति को भी मानना पड़ता है:
किसे मानना है अनुच्छेद 12
"राज्य": भारत की सरकार और संसद्, हर राज्य की सरकार और विधान-मंडल, और सभी स्थानीय और अन्य प्राधिकारी
पट्ट से टकराने वाला नियम नहीं टिकता अनुच्छेद 13
इन अधिकारों को छीनने या न्यून करने वाली विधि उस मात्रा तक शून्य है
हर सदस्य के लिए एक जैसे नियम अनुच्छेद 14 से 18
समता का अधिकार
हर सदस्य को अपने ढंग से जीने की जगह अनुच्छेद 19 से 22
स्वतंत्रता का अधिकार
इस तस्वीर की एक सीमा है: नियम-पट्ट पर किसी नियम का अर्थ प्रायः समिति ही तय करती है। मौलिक अधिकारों को लागू कराने के लिए अनुच्छेद 32 उच्चतम न्यायालय में जाने के अधिकार की गारंटी देता है। यह आप अगले पाठ में पढ़ेंगे।
देखिए: समता और स्वतंत्रता एक नक्शे पर
flowchart TD P["भाग 3: मौलिक अधिकार"] --> G["साधारण: अनुच्छेद 12 और 13"] P --> E["समता का अधिकार: अनुच्छेद 14 से 18"] P --> F["स्वतंत्रता का अधिकार: अनुच्छेद 19 से 22"] G --> G1["12: राज्य कौन है; 13: इन अधिकारों के विरुद्ध विधियाँ शून्य"] E --> E1["14: विधि के समक्ष समता; 15: विभेद का प्रतिषेध; 16: लोक नियोजन; 17: अस्पृश्यता का अंत; 18: उपाधियों का अंत"] F --> F1["19: नागरिकों की स्वतंत्रताएँ; 20: अपराधों के लिए दोषसिद्धि; 21: प्राण और दैहिक स्वतंत्रता; 21क: शिक्षा; 22: गिरफ्तारी और निरोध"]
इस हिस्से में स्वतंत्रताओं की सबसे लंबी सूची अनुच्छेद 19(1) में है। इसके खंड (क) से (छ) तक जाते हैं, पर खंड (च) अब नहीं है:
| खंड | अनुच्छेद 19(1): सभी नागरिकों को अधिकार होगा |
|---|---|
| (क) | वाक्-स्वातंत्र्य और अभिव्यक्ति-स्वातंत्र्य का |
| (ख) | शांतिपूर्वक और निरायुध सम्मेलन का |
| (ग) | संगम या संघ या सहकारी सोसाइटी बनाने का |
| (घ) | भारत के राज्यक्षेत्र में सर्वत्र अबाध संचरण का |
| (ङ) | भारत के राज्यक्षेत्र के किसी भाग में निवास करने और बस जाने का |
| (च) | 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा लोप किया गया |
| (छ) | कोई वृत्ति, उपजीविका, व्यापार या कारबार करने का |
बोलो, जुटो, जुड़ो, घूमो, बसो, कमाओ। अनुच्छेद 19(1) की छह स्वतंत्रताओं के लिए छह क्रियाएँ, खंडों के क्रम में: (क), (ख), (ग), (घ), (ङ) और (छ)।
नियम खोजिए
समता और स्वतंत्रता के अनुच्छेदों पर तीन छोटे प्रश्न।
लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता कौन-सा अनुच्छेद देता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A
अनुच्छेद 16 का शीर्षक है "लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता"। यह राज्य के अधीन नौकरियों और पदों के बारे में है।
विकल्प B: अनुच्छेद 14 विधि के समक्ष समता है, किसी भी व्यक्ति के लिए।
विकल्प C: अनुच्छेद 15 धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध करता है।
विकल्प D: अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का अंत है।
संकेत: वह अनुच्छेद ढूँढिए जिसके शीर्षक में "नियोजन" शब्द है।
आज अनुच्छेद 19(1) में कितनी स्वतंत्रताएँ हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A
अनुच्छेद 19(1) में खंड (क) से (छ) तक के अक्षर हैं, पर खंड (च) का 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा लोप किया गया। छह स्वतंत्रताएँ बचती हैं: (क), (ख), (ग), (घ), (ङ) और (छ)।
विकल्प B: 7 में (क) से (छ) तक हर खंड गिना गया है, लोप किया गया खंड (च) भी।
विकल्प C: 5 उद्देशिका की स्वतंत्रताओं की गिनती है: विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना।
विकल्प D: 19 तो अनुच्छेद की संख्या है, उसकी स्वतंत्रताओं की गिनती नहीं।
संकेत: खंडों के अक्षर गिनिए, फिर लोप किए गए खंड को घटाइए।
"किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा, अन्यथा नहीं"। यह कौन-सा अनुच्छेद कहता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A
ये शब्द पूरा अनुच्छेद 21 हैं, "प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण"। इसमें "किसी व्यक्ति" लिखा है, इसलिए यह हर व्यक्ति की रक्षा करता है, केवल नागरिकों की नहीं।
विकल्प B: अनुच्छेद 19 नागरिकों की स्वतंत्रताओं की सूची है, जैसे वाक्-स्वातंत्र्य।
विकल्प C: अनुच्छेद 22 कुछ दशाओं में गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण देता है।
विकल्प D: अनुच्छेद 20 अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण देता है।
संकेत: यहाँ जिनकी रक्षा है, वे हैं प्राण और दैहिक स्वतंत्रता। किस अनुच्छेद के शीर्षक में ये हैं?
नाम दीजिए: अधिकारों का सम्मान किसे करना है, और अधिकार कौन-से हैं
NCERT के अनुसार समता और स्वतंत्रता वे दो अधिकार हैं जो लोकतंत्र के लिए सबसे ज़रूरी हैं। भाग 3 भी अपने अधिकार-समूहों में इन्हें सबसे पहले रखता है: पहले समता का अधिकार, फिर स्वतंत्रता का अधिकार।
नियम: अनुच्छेद 12 बताता है कि अधिकारों का सम्मान किसे करना है: "राज्य" को। अनुच्छेद 13 इन्हें छीनने या न्यून करने वाली विधि को उस मात्रा तक शून्य करता है। अनुच्छेद 14 से 18 समता का अधिकार देते हैं; अनुच्छेद 19 से 22 स्वतंत्रता का अधिकार।
NCERT साफ़ कहती है कि ये अधिकार असीमित नहीं हैं। अनुच्छेद 19(2) राज्य को ऐसी विधि बनाने देता है जो वाक्-स्वातंत्र्य पर "युक्तियुक्त निर्बंधन" लगाए, जैसे राज्य की सुरक्षा, लोक व्यवस्था, शिष्टाचार या सदाचार के हितों में, या मानहानि के संबंध में।
हल किया हुआ, अधूरा, फिर खुद
प्रश्न
पुलिस किरण को ऐसे कस्बे में गिरफ्तार करती है जो निकटतम मजिस्ट्रेट के न्यायालय से दूर है। किरण को निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष कब तक पेश करना होगा?
हल
- नियम ढूँढिए
अनुच्छेद 22(2): हर गिरफ्तार और अभिरक्षा में निरुद्ध व्यक्ति को "ऐसी गिरफ्तारी से चौबीस घंटे की अवधि में निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा"।
- देखिए क्या छोड़ा जाता है
ये चौबीस घंटे "गिरफ्तारी के स्थान से मजिस्ट्रेट के न्यायालय तक यात्रा के लिए आवश्यक समय को छोड़कर" गिने जाते हैं।
- लगाइए
गिरफ्तारी से चौबीस घंटे गिनिए और मजिस्ट्रेट के न्यायालय तक यात्रा का समय छोड़ दीजिए।
उत्तर: गिरफ्तारी से चौबीस घंटे के भीतर, मजिस्ट्रेट के न्यायालय तक यात्रा का समय छोड़कर।
ध्यान दें: उस अवधि के बाद किरण को "मजिस्ट्रेट के प्राधिकार के बिना" अभिरक्षा में नहीं रखा जा सकता।
अब एक अधूरा प्रश्न पूरा कीजिए।
अधूरा हल: अनुच्छेद 21क, शिक्षा का अधिकार, के साथ एक फ़ुटनोट है: "संविधान (छियासीवां संशोधन) अधिनियम, 2002 ... (1-4-2010 से) अन्तःस्थापित"। अन्तःस्थापित का अर्थ है जोड़ा गया, यानी अनुच्छेद 21क को 86वें संशोधन ने जोड़ा। वह संशोधन अधिनियम किस वर्ष पारित हुआ?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A
फ़ुटनोट में संविधान (छियासीवां संशोधन) अधिनियम, 2002 का नाम है। उसी फ़ुटनोट में "(1-4-2010 से)" लिखा है: 1 अप्रैल 2010 वह तारीख है जिससे अनुच्छेद 21क लागू हुआ।
विकल्प B: 1976 42वें संशोधन अधिनियम का वर्ष है, जिसने उद्देशिका में समाजवादी और पंथनिरपेक्ष जोड़े।
विकल्प C: 1978 44वें संशोधन अधिनियम का वर्ष है, जिसने अनुच्छेद 19 की स्वतंत्रताओं का खंड (च) हटाया।
विकल्प D: 1950 वह वर्ष है जब संविधान लागू हुआ।
संकेत: संशोधन अधिनियम का वर्ष उसके नाम के ठीक बाद लिखा होता है।
और एक खुद कीजिए।
अनुच्छेद 15 पाँच आधारों पर विभेद का प्रतिषेध करता है। इनमें से कौन-सा उन आधारों में नहीं है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A
अनुच्छेद 15 के शीर्षक में आधार हैं: धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान। भाषा इनमें नहीं है। भाषा अनुच्छेद 29(2) के आधारों में है (धर्म, मूलवंश, जाति, भाषा), जो शिक्षा संस्थाओं में प्रवेश के बारे में है।
विकल्प B: धर्म अनुच्छेद 15 के शीर्षक का पहला आधार है।
विकल्प C: जाति भी अनुच्छेद 15 के शीर्षक के आधारों में है।
विकल्प D: जन्मस्थान अनुच्छेद 15 के शीर्षक का आखिरी आधार है।
संकेत: अनुच्छेद 15 के पाँच आधार ज़ोर से बोलिए: धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान।
जाल जिनमें अंक कटते हैं
- 17 या 18: अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का अंत करता है; अनुच्छेद 18 उपाधियों का अंत करता है, पर सेना या विद्या संबंधी सम्मान की छूट है।
- सात या छह: अनुच्छेद 19(1) के खंड (क) से (छ) तक हैं, पर (च) का लोप हो चुका है, इसलिए छह स्वतंत्रताएँ बचती हैं।
- नागरिक या व्यक्ति: अनुच्छेद 19 की स्वतंत्रताएँ सभी नागरिकों के लिए हैं; अनुच्छेद 21 "किसी व्यक्ति" से शुरू होता है, इसलिए वह हर व्यक्ति की रक्षा करता है।
- अधिनियम का वर्ष या लागू होने की तारीख: 86वां संशोधन अधिनियम 2002 का है; अनुच्छेद 21क 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ।
- भाषा: भाषा अनुच्छेद 29(2) के आधारों में है, जो शिक्षा संस्थाओं में प्रवेश के बारे में है; अनुच्छेद 15 के आधारों में नहीं।
नेहा ने लिखा: "अनुच्छेद 17 उपाधियों का अंत करता है।" वास्तव में उपाधियों का अंत कौन-सा अनुच्छेद करता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A
अनुच्छेद 18 का शीर्षक है "उपाधियों का अंत"। अनुच्छेद 18(1): "राज्य, सेना या विद्या संबंधी सम्मान के सिवाय और कोई उपाधि प्रदान नहीं करेगा"।
विकल्प B: अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का अंत करता है, उपाधियों का नहीं।
विकल्प C: अनुच्छेद 14 विधि के समक्ष समता है।
विकल्प D: अनुच्छेद 16 लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता है।
संकेत: पहले अस्पृश्यता आती है, अनुच्छेद 17 पर; उपाधियाँ उसके ठीक बाद।
मिला-जुला अभ्यास
उद्देशिका "विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता" का वचन देती है। कौन-सा अनुच्छेद वाक्-स्वातंत्र्य और अभिव्यक्ति-स्वातंत्र्य को नागरिकों का मौलिक अधिकार बनाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A
अनुच्छेद 19(1)(क) सभी नागरिकों को "वाक्-स्वातंत्र्य और अभिव्यक्ति-स्वातंत्र्य" का अधिकार देता है। उद्देशिका लक्ष्य बताती है; अनुच्छेद 19 उसे मौलिक अधिकार बनाता है।
विकल्प B: अनुच्छेद 21 प्राण और दैहिक स्वतंत्रता की रक्षा करता है।
विकल्प C: अनुच्छेद 25 अंतःकरण की और धर्म की स्वतंत्रता है।
विकल्प D: अनुच्छेद 14 विधि के समक्ष समता है।
संकेत: नागरिकों की स्वतंत्रताओं की सूची वाक्-स्वातंत्र्य से शुरू होती है।
सूत्र और नियम
मौलिक अधिकार: अनुच्छेद 12 से 22
- अनुच्छेद 12
- "राज्य" भारत की सरकार और संसद्, राज्यों की सरकारें और विधान-मंडल, सभी स्थानीय और अन्य प्राधिकारी
- अनुच्छेद 13
- इन अधिकारों के विरुद्ध विधियाँ जिस मात्रा तक अधिकार छीनें या न्यून करें, उस मात्रा तक शून्य
- अनुच्छेद 14
- विधि के समक्ष समता किसी भी व्यक्ति के लिए
- अनुच्छेद 15
- विभेद का प्रतिषेध धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान
- अनुच्छेद 16
- अवसर की समता लोक नियोजन
- अनुच्छेद 17
- अस्पृश्यता का अंत उससे उपजी निर्योग्यता लागू करना अपराध
- अनुच्छेद 18
- उपाधियों का अंत सेना या विद्या संबंधी सम्मान की छूट
- अनुच्छेद 19(1)
- नागरिकों की छह स्वतंत्रताएँ वाक्, सम्मेलन, संगम, संचरण, निवास, वृत्ति; (च) का लोप 44वें संशोधन से
- अनुच्छेद 20
- अपराधों के लिए दोषसिद्धि एक ही अपराध के लिए एक बार से अधिक अभियोजन और दंड नहीं; अपने विरुद्ध साक्षी होने के लिए बाध्य नहीं
- अनुच्छेद 21
- प्राण और दैहिक स्वतंत्रता केवल विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार
- अनुच्छेद 21क
- शिक्षा छह से चौदह वर्ष के बालक; 86वां संशोधन अधिनियम, 2002
- अनुच्छेद 22(2)
- गिरफ्तारी चौबीस घंटे में निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष
यह क्यों काम करता है: समता हर किसी को एक जैसे नियम देती है; स्वतंत्रता हर व्यक्ति को युक्तियुक्त निर्बंधनों के भीतर अपने ढंग से जीने की जगह देती है।
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