मौलिक अधिकार: शोषण, धर्म, संस्कृति और उपचार (अनुच्छेद 23 से 32)
यह पाठ भाग 3, मौलिक अधिकार, को पूरा करता है: अनुच्छेद 23 से 32। आप बाकी अधिकार-समूहों से मिलेंगे: शोषण के विरुद्ध अधिकार, धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार, संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार और सांविधानिक उपचारों का अधिकार, साथ में वे पाँच रिट जो हर अधिकार को लागू करवाने का रास्ता हैं। आप यह भी देखेंगे कि संपत्ति अब इस सूची में क्यों नहीं है।
पहले अनुमान लगाइए
भाग 3 सांविधानिक उपचारों के अधिकार पर समाप्त होता है। NCERT के अनुसार डॉ. अंबेडकर ने इसे संविधान का हृदय और आत्मा कहा। इसके औज़ार रिट हैं: न्यायालय के आदेश, जिनके नाम पुराने लैटिन शब्दों से आए हैं। अनुमान लगाइए कि यह रिट क्या करती है।
पहले अनुमान लगाइए: किस रिट से न्यायालय आदेश देता है कि गिरफ्तार व्यक्ति को उसके सामने पेश किया जाए?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A
NCERT के अनुसार बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट से न्यायालय आदेश देता है कि गिरफ्तार व्यक्ति को उसके सामने पेश किया जाए। गिरफ्तारी विधिपूर्ण न हो तो न्यायालय उसे छोड़ने का आदेश भी दे सकता है।
विकल्प B: परमादेश तब जारी होता है जब कोई पदाधिकारी अपना कानूनी कर्तव्य नहीं निभा रहा हो।
विकल्प C: अधिकार-पृच्छा तब जारी होती है जब कोई व्यक्ति ऐसे पद पर बैठा हो जिसका वह हकदार नहीं है।
विकल्प D: उत्प्रेषण से न्यायालय किसी निचले न्यायालय या प्राधिकारी को लंबित मामला ऊँचे न्यायालय में भेजने का आदेश देता है।
संकेत: वह रिट सोचिए जो गिरफ्तार हुए व्यक्ति की रक्षा करती है।
रोज़ की एक तस्वीर
किसी मैच में रेफरी के इशारों की कल्पना कीजिए।
पाँच रिट रेफरी के इशारों की तरह काम करती हैं:
खिलाड़ी को मेरे पास लाओ बंदी प्रत्यक्षीकरण
न्यायालय आदेश देता है कि गिरफ्तार व्यक्ति उसके सामने पेश हो
अपना काम करो परमादेश
कोई पदाधिकारी अपना कानूनी कर्तव्य नहीं निभा रहा
रुको, यह तुम्हारा मैच नहीं प्रतिषेध
निचला न्यायालय अपनी अधिकारिता से बाहर जा रहा है
यह पद तुम्हें किसने दिया? अधिकार-पृच्छा
कोई व्यक्ति ऐसे पद पर है जिसका वह हकदार नहीं
फ़ाइल ऊपर भेजो उत्प्रेषण
निचला न्यायालय या प्राधिकारी लंबित मामला ऊँचे न्यायालय को भेजे
इस तस्वीर की एक सीमा है: रेफरी का इशारा उसका अपना फ़ैसला है, जबकि रिट न्यायालय का आदेश है: अनुच्छेद 32 के अधीन उच्चतम न्यायालय का, या अनुच्छेद 226 के अधीन किसी उच्च न्यायालय का।
देखिए: भाग 3 के छह समूह
flowchart TD P["भाग 3: अधिकारों के छह समूह"] --> A["समता का अधिकार: अनुच्छेद 14 से 18"] P --> B["स्वतंत्रता का अधिकार: अनुच्छेद 19 से 22"] P --> C["शोषण के विरुद्ध अधिकार: अनुच्छेद 23 और 24"] P --> D["धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार: अनुच्छेद 25 से 28"] P --> E["संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार: अनुच्छेद 29 और 30"] P --> F["सांविधानिक उपचारों का अधिकार: अनुच्छेद 32"]
पिछले पाठ में समता और स्वतंत्रता आ चुके हैं। यह पाठ बाकी समूहों का है:
| समूह | अनुच्छेद | किसकी रक्षा |
|---|---|---|
| शोषण के विरुद्ध अधिकार | 23 और 24 | मानव का दुर्व्यापार, बेगार और अन्य बलातश्रम नहीं; चौदह वर्ष से कम आयु का कोई बालक कारखाने, खान या अन्य परिसंकटमय नियोजन में नहीं |
| धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार | 25 से 28 | सभी व्यक्तियों को अंतःकरण और धर्म की स्वतंत्रता; धार्मिक कार्यों का प्रबंध; किसी एक धर्म के लिए कर नहीं; राज्य-निधि से पूर्णतः पोषित संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा नहीं |
| संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार | 29 और 30 | नागरिकों का कोई भी अनुभाग अपनी भाषा, लिपि या संस्कृति बनाए रख सकता है; अल्पसंख्यक-वर्ग शिक्षा संस्थाएँ चला सकते हैं |
| सांविधानिक उपचारों का अधिकार | 32 | इन अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए उच्चतम न्यायालय में जाने का अधिकार, रिट के साथ |
23 शोषण, 25 धर्म, 29 संस्कृति, 32 उपचार। इनमें से हर समूह उसी अनुच्छेद से शुरू होता है जिसकी संख्या उसके नाम से पहले लिखी है।
संपत्ति के अनिवार्य अर्जन वाला अनुच्छेद 31, 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 से निरसित हुआ। NCERT के अनुसार 44वें संशोधन ने संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से हटाकर एक साधारण कानूनी अधिकार बना दिया। अब यह अनुच्छेद 300क में है: किसी व्यक्ति को विधि के प्राधिकार के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा।
नियम खोजिए
शोषण, धर्म और रिट पर तीन छोटे प्रश्न।
कौन-सा अनुच्छेद कहता है कि चौदह वर्ष से कम आयु के किसी बालक को किसी कारखाने या खान में काम करने के लिए नियोजित नहीं किया जाएगा?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A
अनुच्छेद 24: "चौदह वर्ष से कम आयु के किसी बालक को किसी कारखाने या खान में काम करने के लिए नियोजित नहीं किया जाएगा या किसी अन्य परिसंकटमय नियोजन में नहीं लगाया जाएगा"।
विकल्प B: अनुच्छेद 21क शिक्षा का अधिकार है, छह से चौदह वर्ष के बालकों के लिए।
विकल्प C: अनुच्छेद 23 मानव के दुर्व्यापार और बलातश्रम का प्रतिषेध करता है।
विकल्प D: अनुच्छेद 51क मौलिक कर्तव्यों की सूची है।
संकेत: यह मानव के दुर्व्यापार वाले अनुच्छेद के ठीक बाद, शोषण के विरुद्ध अधिकार में आता है।
अनुच्छेद 25 के अनुसार कृपाण धारण करना और लेकर चलना किस धर्म के मानने का अंग समझा जाएगा?
उत्तर देखें
सही उत्तर: B
अनुच्छेद 25, स्पष्टीकरण 1: "कृपाण धारण करना और लेकर चलना सिक्ख धर्म के मानने का अंग समझा जाएगा"।
विकल्प A: जैन धर्म का नाम अनुच्छेद 25 के स्पष्टीकरण 2 में है, जो हिंदुओं के प्रति निर्देश के बारे में है; कृपाण वाले नियम में नहीं।
विकल्प C: बौद्ध धर्म का नाम भी स्पष्टीकरण 2 में है, कृपाण वाले नियम में नहीं।
विकल्प D: स्पष्टीकरण 2 कहता है कि अनुच्छेद 25(2)(ख) में हिंदुओं के प्रति निर्देश में सिक्ख, जैन या बौद्ध धर्म के मानने वाले भी आते हैं; कृपाण वाला नियम सिक्ख धर्म का नाम लेता है।
संकेत: अनुच्छेद 25 का स्पष्टीकरण 1 केवल एक धर्म का नाम लेता है।
इनमें से कौन-सा अनुच्छेद 32(2) में नाम ली गई रिटों में नहीं है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: C
अनुच्छेद 32(2) में "बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार-पृच्छा और उत्प्रेषण रिट" के नाम हैं। संविधान व्यादेश का ज़िक्र अनुच्छेद 226(3) में करता है, जहाँ उच्च न्यायालय के सामने याचिका में "अंतरिम आदेश" की बात है।
विकल्प A: बंदी प्रत्यक्षीकरण अनुच्छेद 32(2) में नाम ली गई पहली रिट है।
विकल्प B: उत्प्रेषण अनुच्छेद 32(2) में नाम ली गई आखिरी रिट है।
विकल्प D: अधिकार-पृच्छा अनुच्छेद 32(2) में है, उत्प्रेषण से ठीक पहले।
संकेत: अनुच्छेद 32(2) पाँच रिटों के नाम लेता है। उन्हें उँगलियों पर गिनिए।
नाम दीजिए: वह अधिकार जो बाकी अधिकारों की रक्षा करता है
NCERT बताती है कि सांविधानिक उपचारों का अधिकार इतना अहम क्यों है: इससे हर नागरिक को यह अधिकार मिलता है कि मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर वह उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय जाकर उन्हें वापस पा सके।
नियम: अनुच्छेद 32 मौलिक अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए उच्चतम न्यायालय में जाने के अधिकार की गारंटी देता है और उसे पाँच रिट निकालने की शक्ति देता है। अनुच्छेद 226 हर उच्च न्यायालय को यही रिट "भाग 3 द्वारा प्रदत्त अधिकारों में से किसी को प्रवर्तित कराने के लिए और किसी अन्य प्रयोजन के लिए" निकालने की शक्ति देता है।
अनुच्छेद 32(4): "इस संविधान द्वारा अन्यथा उपबंधित के सिवाय, इस अनुच्छेद द्वारा प्रत्याभूत अधिकार निलंबित नहीं किया जाएगा"। इसके अपवाद आप आपात वाले पाठ में देखेंगे।
हल किया हुआ, अधूरा, फिर खुद
प्रश्न
पुलिस अर्जुन को हिरासत में लेती है और उसके परिवार को कारण नहीं बताती। परिवार चाहता है कि न्यायालय उसे देखे। कौन-सी रिट लगेगी, और कौन-से न्यायालय उसे निकाल सकते हैं?
हल
- समस्या पहचानिए
एक व्यक्ति रोका गया है, और परिवार को शक है कि गिरफ्तारी विधिपूर्ण नहीं है।
- रिट मिलाइए
NCERT के अनुसार बंदी प्रत्यक्षीकरण में न्यायालय आदेश देता है कि गिरफ्तार व्यक्ति उसके सामने पेश किया जाए, और गिरफ्तारी विधिपूर्ण न हो तो उसे छोड़ने का आदेश दे सकता है।
- न्यायालय चुनिए
अनुच्छेद 32 के अधीन उच्चतम न्यायालय यह रिट निकाल सकता है; अनुच्छेद 226 के अधीन उच्च न्यायालय भी।
उत्तर: बंदी प्रत्यक्षीकरण, उच्चतम न्यायालय (अनुच्छेद 32) या उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226) से।
ध्यान दें: बंदी प्रत्यक्षीकरण रोके गए व्यक्ति के लिए है; परमादेश उस पदाधिकारी के लिए जो अपना कानूनी कर्तव्य नहीं निभाता।
अब एक अधूरा प्रश्न पूरा कीजिए।
अधूरा हल: नगरपालिका का एक अधिकारी वह लाइसेंस देने से मना करता है जो विधि के अनुसार उसे देना ही है, और एक नागरिक के अधिकार पर चोट पड़ती है। NCERT के शब्दों में, वह पदाधिकारी अपना कानूनी कर्तव्य नहीं निभा रहा। कौन-सी रिट लगेगी?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A
NCERT के अनुसार परमादेश तब जारी होता है जब न्यायालय पाता है कि कोई पदाधिकारी अपना कानूनी कर्तव्य नहीं निभा रहा और इससे किसी व्यक्ति के अधिकार का हनन हो रहा है।
विकल्प B: प्रतिषेध उस निचले न्यायालय को रोकता है जो अपनी अधिकारिता से बाहर जा रहा हो।
विकल्प C: उत्प्रेषण से निचले न्यायालय या प्राधिकारी को लंबित मामला ऊँचे न्यायालय में भेजने का आदेश मिलता है।
विकल्प D: बंदी प्रत्यक्षीकरण से गिरफ्तार व्यक्ति को न्यायालय के सामने पेश करने का आदेश मिलता है।
संकेत: अधिकारी का कर्तव्य बनता है और वह उसे नहीं निभा रहा।
और एक खुद कीजिए।
एक व्यक्ति महीनों से एक सार्वजनिक पद पर काम कर रहा है, जबकि वह उस पद का हकदार नहीं है। कौन-सी रिट उसे उस पद पर काम करने से रोक सकती है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: C
NCERT के अनुसार अगर न्यायालय पाता है कि कोई व्यक्ति ऐसे पद पर है जिसका वह हकदार नहीं, तो वह अधिकार-पृच्छा रिट जारी करके उसे उस पद पर काम करने से रोक देता है।
विकल्प A: उत्प्रेषण लंबित मामले को निचले न्यायालय या प्राधिकारी से ऊँचे न्यायालय में भेजता है।
विकल्प B: परमादेश पदाधिकारी से उसका कानूनी कर्तव्य निभवाता है; यहाँ सवाल पद पर रहने के हक का है।
विकल्प D: प्रतिषेध अपनी अधिकारिता से बाहर जा रहे निचले न्यायालय के लिए है।
संकेत: पूछिए: वह किस अधिकार से इस पद पर है?
जाल जिनमें अंक कटते हैं
- अनुच्छेद 32 या 226: अनुच्छेद 32 में उच्चतम न्यायालय की रिट की शक्ति मौलिक अधिकारों के लिए है; अनुच्छेद 226 में उच्च न्यायालय की शक्ति भाग 3 के अधिकारों के लिए "और किसी अन्य प्रयोजन के लिए" भी है।
- संपत्ति: अब मौलिक अधिकार नहीं। अनुच्छेद 31, 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 से निरसित हुआ; अब संपत्ति की रक्षा अनुच्छेद 300क करता है।
- अनुच्छेद 24 की आयु: चौदह वर्ष से कम, कारखाने, खान या अन्य परिसंकटमय नियोजन में।
- व्यक्ति या नागरिक: अनुच्छेद 25 "सभी व्यक्तियों" के लिए है; अनुच्छेद 29(1) "नागरिकों के किसी अनुभाग" के लिए।
- व्यादेश: यह उन पाँच रिटों में नहीं है जिनके नाम अनुच्छेद 32(2) उच्चतम न्यायालय के लिए लेता है।
रवि ने लिखा: "संपत्ति अनुच्छेद 31 के अधीन मौलिक अधिकार है।" आज संविधान संपत्ति की रक्षा किस अनुच्छेद में करता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A
अनुच्छेद 300क के अनुसार किसी व्यक्ति को विधि के प्राधिकार के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा। अनुच्छेद 31, 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 से निरसित हुआ।
विकल्प B: अनुच्छेद 31 निरसित हो चुका है; NCERT के अनुसार 44वें संशोधन ने संपत्ति को एक साधारण कानूनी अधिकार बना दिया।
विकल्प C: अनुच्छेद 32 उच्चतम न्यायालय में जाने का अधिकार है।
विकल्प D: अनुच्छेद 21 प्राण और दैहिक स्वतंत्रता की रक्षा करता है।
संकेत: आज वाले अनुच्छेद की संख्या के अंत में "क" अक्षर है।
मिला-जुला अभ्यास
इनमें से कौन-सा मौलिक अधिकार केवल नागरिकों को मिला है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: C
अनुच्छेद 29(1) "नागरिकों के किसी अनुभाग" के लिए है, जिसकी "अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति" है। अनुच्छेद 25 "सभी व्यक्तियों" के लिए है, अनुच्छेद 21 "किसी व्यक्ति को" से शुरू होता है और अनुच्छेद 14 "किसी व्यक्ति" की रक्षा करता है।
विकल्प A: अनुच्छेद 25 के अनुसार "सभी व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता का" समान हक है।
विकल्प B: अनुच्छेद 21 "किसी व्यक्ति को" से शुरू होता है।
विकल्प D: अनुच्छेद 14 "किसी व्यक्ति" की रक्षा करता है।
संकेत: अनुच्छेद के अपने पाठ में "नागरिक" शब्द ढूँढिए।
सूत्र और नियम
मौलिक अधिकार: अनुच्छेद 23 से 32
- अनुच्छेद 23
- मानव का दुर्व्यापार, बेगार, बलातश्रम प्रतिषिद्ध; अपराध
- अनुच्छेद 24
- बालक चौदह वर्ष से कम आयु का कोई बालक कारखाने, खान या परिसंकटमय नियोजन में नहीं
- अनुच्छेद 25
- अंतःकरण और धर्म सभी व्यक्तियों के लिए; कृपाण सिक्ख धर्म का अंग (स्पष्टीकरण 1)
- अनुच्छेद 26
- धार्मिक कार्य धार्मिक संप्रदाय अपने धर्म विषयक कार्यों का प्रबंध खुद करता है
- अनुच्छेद 27
- कर किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि के लिए कर देने को कोई बाध्य नहीं
- अनुच्छेद 28(1)
- धार्मिक शिक्षा राज्य-निधि से पूर्णतः पोषित संस्थाओं में नहीं
- अनुच्छेद 29(1)
- संस्कृति नागरिकों का कोई भी अनुभाग अपनी भाषा, लिपि या संस्कृति बनाए रख सकता है
- अनुच्छेद 30
- अल्पसंख्यक-वर्ग शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन
- अनुच्छेद 31
- संपत्ति 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 से निरसित; अब अनुच्छेद 300क
- अनुच्छेद 32
- उपचार उच्चतम न्यायालय में जाने का अधिकार; पाँच रिट
- अनुच्छेद 226
- उच्च न्यायालय वही रिट, भाग 3 के लिए और किसी अन्य प्रयोजन के लिए
- पाँच रिट
- बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार-पृच्छा, उत्प्रेषण व्यक्ति पेश करो; कर्तव्य निभाओ; सीमा में रहो; किस अधिकार से; मामला ऊपर भेजो
यह क्यों काम करता है: अधिकार तभी काम आता है जब उसे लागू करवाया जा सके, और अनुच्छेद 32 उच्चतम न्यायालय तक का रास्ता पक्का करता है।
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