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प्रकाश परावर्तन और दर्पण

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आप क्या सीखेंगे

किरण आरेख और चिह्न सहित गणना से एक ही प्रश्न का उत्तर निकालें: दर्पण प्रतिबिंब कहाँ बनाता है और वह कैसा होता है? आप परावर्तन और प्रतिबिंब बनने में अंतर करेंगे, उपयोगी किरणें चुनेंगे और दर्पण के उपयोग को वस्तु की स्थिति से जोड़ेंगे। यह सामान्य विज्ञान का माध्यमिक-स्तरीय प्रकाशिकी अभ्यास है, किसी विषय से आने वाले परीक्षा-अंकों की भविष्यवाणी नहीं।

1 प्रकाश और किरण मॉडल

वस्तु से आया प्रकाश आँख में प्रवेश करता है, तभी वस्तु दिखाई देती है। दीपक प्रकाश उत्सर्जित करता है; पुस्तक सामान्यतः अपने द्वारा परावर्तित प्रकाश से दिखती है। प्रकाश निर्वात में भी चलता है; निर्वात में उसकी चाल लगभग 3 × 10⁸ m/s है।

समांगी पारदर्शी माध्यम में, जहाँ प्रकाशीय गुण स्थान के साथ नहीं बदलते, विद्यालयी किरण मॉडल प्रकाश को सीधी रेखाओं में चलता हुआ दर्शाता है। किरण दिशा बताने वाले तीर सहित रेखा है, कोई भौतिक धागा नहीं। जब विवर्तन जैसे तरंग-प्रभाव नगण्य हों, यह मॉडल उपयोगी होता है। इसका अर्थ यह नहीं कि प्रकाश कभी दिशा नहीं बदल सकता: सतह से परावर्तन या माध्यम बदलने पर अपवर्तन हो सकता है।

2 परावर्तन में अभिलंब का उपयोग

किरण सतह पर जहाँ टकराती है, उस बिंदु पर सतह के लंबवत रेखा खींचें। यही अभिलंब है। गोलीय दर्पण पर स्थानीय अभिलंब वक्रता केंद्र से होकर जाता है।

आपतन कोण i, आने वाली किरण और अभिलंब के बीच मापा जाता है। परावर्तन कोण r, बाहर जाने वाली किरण और उसी अभिलंब के बीच मापा जाता है। नियम हैं:

  • i = r
  • आपतित किरण, परावर्तित किरण और आपतन बिंदु का अभिलंब एक ही तल में होते हैं

कोण का हल सहित उदाहरण: किरण समतल दर्पण की सतह से 35° का कोण बनाती है। अभिलंब से उसका कोण 90° − 35° = 55° है। अतः i = r = 55°, न कि 35°। परावर्तित किरण भी सतह से 35° बनाती है। कोण रखने से पहले अभिलंब खींचें।

चिकनी सतह समानांतर किरणों को एक नियमित दिशा में परावर्तित कर सकती है। खुरदरी सतह पर अलग बिंदुओं के स्थानीय अभिलंब अलग दिशाओं में होते हैं, इसलिए परावर्तित किरणें कई दिशाओं में फैलती हैं। यह विसरित परावर्तन भी हर बिंदु पर परावर्तन के नियम मानता है। इसमें i = r का उल्लंघन नहीं होता।

3 वास्तविक और आभासी प्रतिबिंब

वास्तविक प्रतिबिंब वहाँ बनता है जहाँ बाहर जाने वाली किरणें सचमुच मिलती हैं। उचित स्थान पर रखा पर्दा उसे प्राप्त कर सकता है। आभासी प्रतिबिंब वहाँ माना जाता है जहाँ बाहर जाती किरणों के पीछे की ओर बढ़ाए गए विस्तार मिलते हैं; वास्तविक किरणें उस आभासी बिंदु से नहीं गुजरतीं। वहाँ पर्दा रखकर प्रतिबिंब सीधे प्राप्त नहीं किया जा सकता, लेकिन बाहर आती किरणें पाकर आँख या कैमरा उसे देख सकता है।

वास्तविक किरण-पथ के लिए तीर वाली सतत रेखाएँ और पीछे बढ़ाए गए विस्तारों के लिए टूटी रेखाएँ बनाएँ। “आभासी” का अर्थ अदृश्य नहीं है। “वास्तविक” का अर्थ हमेशा बड़ा भी नहीं है।

4 समतल दर्पण

समतल दर्पण के सामने रखी वास्तविक वस्तु का प्रतिबिंब आभासी, सीधा और वस्तु के बराबर आकार का होता है। दर्पण के पीछे उसकी लंबवत दूरी उतनी ही होती है जितनी सामने वस्तु की लंबवत दूरी। दर्पण में दिखने वाला परिचित बाएँ-दाएँ उलटाव पार्श्व परिवर्तन कहलाता है; प्रतिबिंब ऊपर-नीचे नहीं उलटता।

दूरी का हल सहित उदाहरण: एक मार्कर स्थिर समतल दर्पण के सामने 1.8 m पर है। उसका प्रतिबिंब पीछे 1.8 m पर होगा, इसलिए वस्तु और प्रतिबिंब का अंतर 3.6 m है। मार्कर को दर्पण की ओर 0.3 m खिसकाएँ: अब दोनों तरफ दूरी 1.5 m और कुल अंतर 3.0 m है। अंतर 0.6 m घटा। “दर्पण से दूरी” और “वस्तु तथा प्रतिबिंब के बीच दूरी” अलग रखें।

समतल दर्पण का प्रतिबिंब बनाने के लिए एक ही वस्तु-बिंदु से दो किरणें दर्पण के अलग बिंदुओं तक भेजें। हर किरण को उसके स्थानीय अभिलंब से बराबर कोण पर परावर्तित करें। परावर्तित किरणों को पीछे की ओर बढ़ाएँ। उनके विस्तार दर्पण के पीछे संबंधित प्रतिबिंब-बिंदु पर मिलते हैं।

5 गोलीय दर्पण और मुख्य बिंदु

अवतल दर्पण का परावर्तक तल भीतर की ओर मुड़ा होता है; उत्तल दर्पण बाहर उभरे तल से परावर्तन करता है। हमारे मॉडल में दोनों किसी गोले के भाग हैं।

  • P, ध्रुव, परावर्तक सतह का मध्य बिंदु है
  • C, वक्रता केंद्र, उस गोले का केंद्र है जिसका दर्पण एक भाग है
  • मुख्य अक्ष P और C से गुजरने वाली सीधी रेखा है
  • R, चिह्न सहित दूरी PC, वक्रता त्रिज्या है
  • F मुख्य फोकस है। अक्ष के समानांतर और पास की किरणें अवतल दर्पण से परावर्तन के बाद वहाँ मिलती हैं; उत्तल दर्पण में वे वहाँ से आती हुई प्रतीत होती हैं
  • f, चिह्न सहित दूरी PF, फोकस दूरी है

गोलीय दर्पणों के उपाक्षीय सन्निकटन में f = R/2 होता है। उपाक्षीय किरणें मुख्य अक्ष के पास रहती हैं और उससे छोटे कोण बनाती हैं। इससे यह दावा न करें कि गोलीय दर्पण पर पड़ने वाली किसी चौड़े किरण-पुंज की सभी किरणें ठीक एक ही बिंदु पर मिलेंगी। आगे के किरण-निर्माण और दर्पण सूत्र भी इसी आदर्शीकृत सन्निकटन पर आधारित हैं।

6 दो किरणों से प्रतिबिंब बनाएँ

दोनों किरणें उसी सीधी वस्तु के शीर्ष से शुरू करें। अवतल दर्पण के लिए एक उपयोगी किरण अक्ष के समानांतर जाती है और परावर्तन के बाद F से गुजरती है। C से होकर जाने वाली दूसरी किरण अपने ही पथ पर लौटती है, क्योंकि वह अभिलंब की दिशा में टकराती है। विकल्प के रूप में F से होकर जाने वाली किरण अक्ष के समानांतर लौटती है, या P पर पड़ने वाली किरण अक्ष से समान कोण पर परावर्तित होती है। किरणों का मिलन-बिंदु प्रतिबिंब का शीर्ष है।

उत्तल दर्पण में अक्ष के समानांतर आपतित किरण परावर्तन के बाद दर्पण के पीछे F से आती हुई लगती है। C की ओर भेजी गई किरण अपनी आने वाली रेखा पर वापस लौटती है। वास्तविक परावर्तित किरणें फैलती हैं; उनके पीछे बढ़ाए गए टूटे विस्तार दर्पण के पीछे मिलते हैं। आभासी प्रतिबिंब तक दर्पण के आर-पार जाती सतत परावर्तित किरणें न बनाएँ।

अवतल दर्पण के सामने मुख्य अक्ष की ओर रखी वास्तविक वस्तुओं के प्रमुख मामले:

  • वस्तु C से परे (P से दूरी PC से अधिक): प्रतिबिंब C और F के बीच, वास्तविक, उल्टा और छोटा
  • वस्तु C पर: प्रतिबिंब C पर, वास्तविक, उल्टा और समान आकार का
  • वस्तु C और F के बीच: प्रतिबिंब C से परे (P से दूरी PC से अधिक), वास्तविक, उल्टा और बड़ा
  • वस्तु F पर: एक बिंदु से आने वाली किरणें परावर्तन के बाद समानांतर होती हैं; इस आदर्श मॉडल में सीमित दूरी पर प्रतिबिंब नहीं बनता
  • वस्तु F और P के बीच: प्रतिबिंब दर्पण के पीछे, आभासी, सीधा और बड़ा
  • बहुत दूर की वस्तु: प्रतिबिंब फोकस तल के निकट आता है; अक्ष पर बहुत दूर स्थित बिंदु का प्रतिबिंब F के निकट बनता है

उत्तल दर्पण के सामने सीमित दूरी पर रखी वास्तविक वस्तु का प्रतिबिंब दर्पण के पीछे P और F के बीच बनता है। वह आभासी, सीधा और छोटा होता है। वास्तविक वस्तु की शर्त महत्त्वपूर्ण है; कथन हर संभावित अभिसारी आपतित किरण-पुंज के लिए नहीं है। वास्तविक वस्तु बहुत दूर जाने पर उसका प्रतिबिंब F के निकट आता है।

7 गणना से पहले कार्तीय चिह्न

आपतित प्रकाश को बाएँ से दाएँ जाता दिखाएँ और वस्तु बाईं ओर रखें। P को मूल बिंदु मानें। सभी दूरियाँ P से मापें, F या C से नहीं।

  • P के दाएँ धनात्मक; बाएँ ऋणात्मक
  • अक्ष के ऊपर ऊँचाई धनात्मक; नीचे ऋणात्मक
  • यहाँ की वास्तविक वस्तुओं के लिए u ऋणात्मक है
  • अवतल दर्पण में f और R ऋणात्मक; उत्तल दर्पण में f और R धनात्मक
  • सामने बनने वाले वास्तविक प्रतिबिंब का v ऋणात्मक; पीछे बनने वाले आभासी प्रतिबिंब का v धनात्मक

दर्पण सूत्र लगाने से पहले मानों को चिह्न सहित लिखें: 1/f = 1/v + 1/u, इसलिए 1/v = 1/f − 1/u।

यहाँ u वस्तु दूरी, v प्रतिबिंब दूरी और f फोकस दूरी है। लंबाई की एक ही इकाई रखें। चिह्न सहित रैखिक आवर्धन m = h′/h = −v/u है, जहाँ h वस्तु और h′ प्रतिबिंब की ऊँचाई है। सीधी वस्तु के सापेक्ष धनात्मक चिह्न सीधा और ऋणात्मक चिह्न उल्टा प्रतिबिंब बताता है। परिमाण |m| आकार बताता है: 1 से अधिक तो बड़ा, 1 से कम तो छोटा और 1 तो समान आकार।

8 चिह्न सहित तीन गणनाएँ

उदाहरण 1 अवतल दर्पण और पर्दा: 4 cm ऊँची सीधी वस्तु अवतल दर्पण के सामने 36 cm पर है। फोकस दूरी का परिमाण 12 cm है।

u = −36 cm; f = −12 cm; h = +4 cm। 1/v = −1/12 − (−1/36) = −3/36 + 1/36 = −1/18। अतः v = −18 cm। प्रतिबिंब दर्पण के सामने 18 cm पर बनेगा, जहाँ पर्दे पर उसे प्राप्त किया जा सकता है। m = −(−18)/(−36) = −1/2, इसलिए h′ = (−1/2) × 4 = −2 cm। प्रतिबिंब वास्तविक, उल्टा और आधे आकार का है। स्थिति जाँचें: C सामने 24 cm पर है; C से परे रखी वस्तु का प्रतिबिंब C और F के बीच होना चाहिए, और 18 cm यही शर्त पूरी करता है।

उदाहरण 2 पास से उपयोग किया गया अवतल दर्पण: फोकस दूरी के परिमाण 15 cm वाले अवतल दर्पण के सामने वस्तु 10 cm पर रखें।

u = −10 cm; f = −15 cm। 1/v = −1/15 − (−1/10) = (−2 + 3)/30 = 1/30। अतः v = +30 cm और m = −30/(−10) = +3। प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 30 cm पर, आभासी, सीधा और तीन गुनी ऊँचाई का है। वस्तु फोकस दूरी के भीतर है। उत्तर में “30” देखकर पर्दा सामने 30 cm पर न रखें; चिह्न प्रतिबिंब की तरफ बताता है।

उदाहरण 3 उत्तल दर्पण: f = +20 cm वाले उत्तल दर्पण के सामने वस्तु 30 cm पर रखें।

u = −30 cm। 1/v = 1/20 − (−1/30) = 3/60 + 2/60 = 1/12। अतः v = +12 cm और m = −12/(−30) = +0.4। प्रतिबिंब आभासी, सीधा और वस्तु की ऊँचाई का 0.4 गुना है। वह दर्पण के पीछे P और F के बीच है, जो किरण-निर्माण से मेल खाता है।

9 कार्य के आधार पर दर्पण चुनें

उत्तल यातायात या वाहन-दर्पण अधिक दृष्टि-क्षेत्र और वास्तविक वस्तुओं के छोटे सीधे प्रतिबिंब देता है। अवतल दाढ़ी बनाने या दंत चिकित्सक के दर्पण में वस्तु P और F के बीच हो तो बड़ा सीधा प्रतिबिंब मिलता है। अवतल परावर्तक के फोकस के पास छोटा प्रकाश स्रोत रखें तो प्रकाश लगभग समानांतर निकलता है; टॉर्च के परावर्तक का विद्यालयी मॉडल यही है। लगभग समानांतर सूर्य-किरणों को फोकस के पास एकत्र करना इसका उल्टा पथ है। वास्तविक उपकरणों में गोलीय दर्पण से अलग आकार भी हो सकते हैं; मॉडल सिद्धांत समझाता है, हर उपकरण की पूरी बनावट नहीं। सूर्य को सीधे या केंद्रित सूर्य-प्रकाश में कभी न देखें।

10 उत्तरमाला से पहले अभ्यास

  1. किरण समतल दर्पण की सतह से 25° बनाती है। अभिलंब से मापा परावर्तन कोण कितना है?

A. 25° B. 50° C. 65° D. 75°

  1. वास्तविक वस्तु समतल दर्पण के सामने 0.8 m पर है। वस्तु और प्रतिबिंब में कितना अंतर है?

A. 0.4 m B. 0.8 m C. 1.6 m D. 2.4 m

  1. विसरित परावर्तन के बारे में कौन-सा कथन सही है?

A. खुरदरी सतह पर परावर्तन का नियम नहीं चलता B. स्थानीय अभिलंब अलग होते हैं, पर हर किरण i = r मानती है C. हर परावर्तित किरण बाकी के समानांतर जाती है D. खुरदरी सतह सारा आपतित प्रकाश सोख लेती है

  1. सीधी वास्तविक वस्तु अवतल दर्पण के F और P के बीच है। उपाक्षीय मॉडल में कैसा प्रतिबिंब मिलेगा?

A. वास्तविक, उल्टा और छोटा B. वास्तविक, सीधा और बड़ा C. आभासी, उल्टा और छोटा D. आभासी, सीधा और बड़ा

  1. अवतल दर्पण में u = −40 cm और f = −10 cm हैं। दर्पण सूत्र से v ज्ञात करें।

A. −40/3 cm B. +40/3 cm C. −8 cm D. +8 cm

  1. उत्तल दर्पण में आभासी प्रतिबिंब के लिए u = −24 cm और v = +8 cm हैं। चिह्न सहित आवर्धन कितना है?

A. −3 B. +3 C. −1/3 D. +1/3

11 व्याख्या सहित उत्तरमाला

  1. C। आपतन कोण 90° − 25° = 65° है, इसलिए परावर्तन कोण भी 65° है। दिया सतह का कोण i नहीं है।
  1. C। प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 0.8 m पर है। कुल अंतर 0.8 + 0.8 = 1.6 m है।
  1. B। सतह की स्थानीय दिशाएँ अलग होने से परावर्तित किरणें फैलती हैं। स्थानीय नियम नहीं बदलता। इससे न सभी किरणों का समानांतर होना निकलता है, न पूरा अवशोषण।
  1. D। अवतल दर्पण की फोकस दूरी के भीतर परावर्तित किरणें फैलती हैं और उनके पीछे बढ़ाए विस्तार दर्पण के पीछे मिलते हैं; प्रतिबिंब आभासी, सीधा और बड़ा होता है।
  1. A। 1/v = −1/10 − (−1/40) = −3/40, अतः v = −40/3 cm। ऋणात्मक चिह्न सामने का वास्तविक प्रतिबिंब बताता है; लेंस सूत्र लगाने से अलग परिणाम मिलेगा।
  1. D। m = −v/u = −8/(−24) = +1/3। प्रतिबिंब सीधा और एक-तिहाई ऊँचा है। अनुपात उलटने पर 3 और दर्पण के सूत्र का ऋण चिह्न हटाने पर −1/3 मिलता है।

स्रोत और अगला कदम

एनसीईआरटी विज्ञान अध्याय 9 प्रकाश परावर्तन तथा अपवर्तन, पुनर्मुद्रण 2026–27, खंड 9.1–9.2.4, मुद्रित पृष्ठ 134–145, माध्यमिक स्तर पर परावर्तन, प्रतिबिंब और सूत्रों का आधार देता है। एनसीईआरटी भौतिकी भाग 2 अध्याय 9, खंड 9.2.1–9.2.3, पृष्ठ 222–226, उपाक्षीय शर्त स्पष्ट करता है। यहाँ की व्याख्या, संख्याएँ और अभ्यास मौलिक हैं। आगे अपवर्तन और लेंस पढ़कर तुलना करें कि प्रकाश किसी प्रकाशीय साधन से परावर्तित होने के बजाय उसके आर-पार जाने पर क्या बदलता है।

उदाहरण से समझें

उछलती गेंद की उपमा के बजाय किरण-निर्माण करें। समतल दर्पण के बाएँ एक बिंदु-वस्तु रखें। दो आपतित किरणें खींचकर हर बिंदु पर i = r लगाएँ। केवल परावर्तित किरणों को पीछे की ओर टूटी रेखाओं से बढ़ाएँ। विस्तार दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर मिलेंगे। इससे समझ आता है कि प्रकाश उस बिंदु से दर्पण के आर-पार वास्तव में आए बिना भी प्रतिबिंब कैसे दिखता है।

सूत्र और नियम

त्वरित संदर्भ

  • i और r अभिलंब से मापें; विसरित परावर्तन में भी i = r
  • वास्तविक वस्तु के लिए समतल दर्पण: आभासी, सीधा, समान आकार; वस्तु और प्रतिबिंब की लंबवत दूरियाँ बराबर
  • उपाक्षीय गोलीय-दर्पण मॉडल में f = R/2; 1/f = 1/v + 1/u
  • प्रकाश बाएँ से दाएँ हो: वास्तविक वस्तु का u < 0; अवतल f < 0; उत्तल f > 0
  • दर्पण का आवर्धन m = −v/u; चिह्न सीधा या उल्टा होना और |m| आकार बताता है
  • अवतल: F के भीतर की वास्तविक वस्तु का बड़ा आभासी सीधा प्रतिबिंब; F के बाहर वास्तविक उल्टा प्रतिबिंब
  • उत्तल: सीमित दूरी की वास्तविक वस्तु का प्रतिबिंब पीछे P और F के बीच, आभासी, सीधा और छोटा
  • चिह्न, स्थान और आकार को किरण-निर्माण से जाँचें

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