मुख्य सामग्री पर जाएँ

अपवर्तन और लेंस

पाठ 2 / 912 मिनटPDF नोट्समुफ़्त

आप क्या सीखेंगे

अपवर्तन समझना, पतले लेंसों से बनने वाले प्रतिबिंबों का किरण-निर्माण करना तथा प्रतिबिंब की स्थिति, आवर्धन और लेंस की क्षमता की गणना करना सीखेंगे। पहले किरण की दिशा और चिह्न परिपाटी तय करें; फिर सूत्र में मान रखें। उदाहरण और अभ्यास प्रश्न मौलिक शिक्षण सामग्री हैं।

1 प्रकाश का माध्यम की सीमा पार करना

किरण मॉडल में प्रकाश किसी समांगी पारदर्शी माध्यम में सीधी रेखा में चलता है। समांगी का अर्थ है कि संबंधित प्रकाशीय गुण पूरे माध्यम में एकसमान हैं। अलग-अलग अपवर्तनांक वाले माध्यमों की सीमा पार करते समय पारगमित प्रकाश की चाल और सामान्यतः दिशा बदलती है। यह अपवर्तन है।

किरण जहाँ सीमा पर पहुँचती है, वहाँ सीमा के लंबवत अभिलंब खींचें। आपतन कोण i और अपवर्तन कोण r को इसी अभिलंब से मापें, सतह से कभी नहीं। लंबवत आपतन में i = 0° और r = 0° होते हैं: चाल बदलने पर भी प्रकाश सीधे आगे जाता है। इसलिए चाल बदलने का अर्थ हमेशा किरण का मुड़ना नहीं है।

निरपेक्ष अपवर्तनांक n = c/s है। यहाँ c निर्वात में प्रकाश की चाल और s माध्यम में उसकी चाल है। अपवर्तनांक की कोई इकाई नहीं होती। अधिक अपवर्तनांक का अर्थ प्रकाश की कम चाल है। “प्रकाशीय रूप से सघन” इसी प्रकाशीय तुलना को बताता है, प्रति इकाई आयतन द्रव्यमान को नहीं। स्थिर सीमा पार करने पर आवृत्ति अपरिवर्तित रहती है; चाल के साथ तरंगदैर्ध्य बदलता है।

2 किरण किस ओर मुड़ेगी

आपतित किरण, अपवर्तित किरण और अभिलंब एक ही तल में होते हैं। निश्चित रंग के माध्यम 1 से माध्यम 2 में जाने वाले प्रकाश के लिए स्नेल का नियम है:

n₁ sin i = n₂ sin r

इसलिए अशून्य कोणों के लिए sin i/sin r = n₂/n₁ होता है। यह केवल n₂ के बराबर तब है जब n₁ = 1 हो; वायु से किसी पदार्थ में प्रवेश के लिए यह लगभग सही है। दोनों माध्यमों की तुलना करें:

  • अधिक अपवर्तनांक वाले माध्यम में प्रवेश: पारगमित किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है; तिरछे आपतन में r < i
  • कम अपवर्तनांक वाले माध्यम में प्रवेश: किरण अभिलंब से दूर मुड़ती है; अपवर्तित किरण बनने पर r > i

अधिक से कम अपवर्तनांक वाले माध्यम में जाते समय पर्याप्त तिरछी किरण का पारगमन होने के बजाय पूर्ण आंतरिक परावर्तन हो सकता है। हर आपतित किरण का बाहर निकलना अनिवार्य न मानें।

3 समांतर फलकों वाली काँच की पट्टिका

समांतर फलकों वाली पट्टिका के दोनों ओर वायु हो तो प्रवेश और निर्गमन बिंदु पर अलग-अलग अभिलंब खींचें। तिरछी किरण काँच में प्रवेश करते समय अभिलंब की ओर और बाहर निकलते समय उससे दूर मुड़ती है। निर्गत किरण मूल आपतित दिशा के समांतर होती है, लेकिन बगल की ओर खिसक जाती है। इसे पार्श्व विस्थापन कहते हैं। समांतर निर्गमन का अर्थ अपवर्तन का न होना नहीं है। लंबवत आपतन में पार्श्व विस्थापन नहीं होता। प्रिज्म के अपवर्तक फलक समांतर नहीं होते, इसलिए पट्टिका का यह निष्कर्ष उस पर सीधे लागू नहीं कर सकते।

4 लेंस का मॉडल

यहाँ हम वायु में रखे पतले काँच के लेंस लेते हैं, जिनका पदार्थ वायु से प्रकाशीय रूप से अधिक सघन है। किरणें मुख्य अक्ष के पास रहती हैं और उससे छोटे कोण बनाती हैं; इन्हें उपाक्षीय किरणें कहते हैं। मोटे लेंसों और बड़े कोण वाली किरणों के लिए अधिक विस्तृत अध्ययन चाहिए।

उत्तल लेंस बीच में मोटा होता है और अक्ष के समांतर किरण-पुंज को अभिसारित करता है। अवतल लेंस बीच में पतला होता है और ऐसे पुंज को अपसारित करता है। प्रकाशिक केंद्र O, उससे गुजरता मुख्य अक्ष तथा O से बराबर दूरी पर बाईं ओर F_L और दाईं ओर F_R फोकस चिह्नित करें। प्रकाश बाएँ से दाएँ चलता है। फोकस दूरी का परिमाण |f|, OF दूरी है; 2F इससे दोगुनी दूरी दर्शाता है। उत्तल लेंस की समांतर किरणें F_R पर मिलती हैं; अवतल लेंस से निकलती किरणों के पीछे बढ़ाए गए विस्तार F_L पर मिलते हैं।

5 दो किरणों से प्रतिबिंब बनाएँ

बाईं ओर सीधा वस्तु-तीर बनाएँ, जिसका आधार अक्ष पर हो। उसके शीर्ष से नीचे दी गई किरणों में से दो खींचें:

उत्तल लेंस: अक्ष के समांतर किरण लेंस से निकलकर F_R से गुजरती है। O से गुजरने वाली किरण पतले लेंस के इस मॉडल में बिना विचलन के आगे बढ़ती है। जिस आपतित किरण की रेखा F_L से गुजरती है, वह लेंस के बाद अक्ष के समांतर निकलती है।

अवतल लेंस: अक्ष के समांतर किरण ऐसे अपसारित होती है मानो F_L से आई हो। O से गुजरने वाली किरण बिना विचलन आगे बढ़ती है। F_R की ओर निर्देशित किरण लेंस के बाद अक्ष के समांतर निकलती है।

वास्तविक प्रकाश-पथ के लिए तीरयुक्त सतत रेखाएँ खींचें। निर्गत किरणें मिलें तो उनका प्रतिच्छेद प्रतिबिंब का शीर्ष बताता है: प्रतिबिंब वास्तविक है और वहाँ पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है। किरणें फैल रही हों तो उनकी निर्गत रेखाओं को पीछे की ओर टूटी रेखाओं से बढ़ाएँ। उनका आभासी प्रतिच्छेद आभासी प्रतिबिंब की स्थिति बताता है। उस स्थिति पर उसे सीधे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता। टूटी रेखाएँ केवल निर्माण के लिए हैं; प्रकाश पीछे नहीं चल रहा।

उत्तल लेंस में वस्तु F_L से दूर हो तो समांतर किरण और केंद्र से गुजरने वाली किरण दाईं ओर अक्ष के नीचे मिलती हैं। वस्तु O और F_L के बीच हो तो उनके पीछे बढ़ाए गए विस्तार बाईं ओर अक्ष के ऊपर मिलते हैं। अवतल लेंस के सामने वास्तविक वस्तु हो तो पीछे बढ़ाए गए विस्तार O और F_L के बीच अक्ष के ऊपर मिलते हैं।

6 प्रतिबिंब बनने की सभी सामान्य स्थितियाँ

इन स्थितियों में वास्तविक वस्तु बाईं ओर है: आपतित किरणें वास्तव में उससे फैलकर आती हैं। “समान आकार” और “छोटा” कहने पर प्रतिबिंब की ऊँचाई की तुलना वस्तु की ऊँचाई से की जाती है।

उत्तल लेंस

  • वस्तु बहुत दूर: प्रतिबिंब F_R के पास, वास्तविक, उलटा और अत्यधिक छोटा; अनंत पर अक्षीय बिंदु का प्रतिबिंब F_R पर
  • वस्तु 2F_L से दूर: प्रतिबिंब F_R और 2F_R के बीच, वास्तविक, उलटा और छोटा
  • वस्तु 2F_L पर: प्रतिबिंब 2F_R पर, वास्तविक, उलटा और समान आकार का
  • वस्तु F_L और 2F_L के बीच: प्रतिबिंब 2F_R से दूर, वास्तविक, उलटा और बड़ा
  • वस्तु F_L पर: वस्तु के प्रत्येक बिंदु से आई किरणें लेंस से समांतर निकलती हैं; किसी सीमित दूरी पर पर्दे को स्पष्ट प्रतिबिंब नहीं मिलता, इसे प्रचलित रूप में अनंत पर प्रतिबिंब कहते हैं
  • वस्तु F_L और O के बीच: प्रतिबिंब वस्तु वाली ओर, आभासी, सीधा और बड़ा

अवतल लेंस

  • वास्तविक वस्तु किसी भी सीमित दूरी पर: प्रतिबिंब O और F_L के बीच, आभासी, सीधा और छोटा
  • अक्षीय वस्तु-बिंदु अनंत पर: आभासी प्रतिबिंब F_L पर; बहुत दूर की विस्तृत वस्तु का सीधा और अत्यधिक छोटा प्रतिबिंब F_L के पास

इसलिए उत्तल लेंस वास्तविक या आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिंब बना सकता है। आवर्धक काँच में वस्तु फोकस के भीतर रखी जाती है। “अवतल लेंस हमेशा आभासी प्रतिबिंब बनाता है” वाले सामान्य कथन में वास्तविक वस्तु की शर्त आवश्यक है।

7 चिह्न और सूत्र

सभी दूरियाँ O से मापें। आपतित प्रकाश बाएँ से दाएँ हो तो दाईं ओर की दूरी धनात्मक और बाईं ओर की दूरी ऋणात्मक है। इसलिए वास्तविक वस्तु के लिए u < 0; दाईं ओर वास्तविक प्रतिबिंब के लिए v > 0; बाईं ओर आभासी प्रतिबिंब के लिए v < 0 होता है। उत्तल लेंस के लिए f > 0 और अवतल लेंस के लिए f < 0 है। अक्ष के ऊपर की ऊँचाई धनात्मक और नीचे की ऋणात्मक है।

पतले लेंस का सूत्र: 1/f = 1/v − 1/u

आवर्धन: m = hᵢ/hₒ = v/u

यहाँ hᵢ और hₒ क्रमशः प्रतिबिंब तथा वस्तु की ऊँचाइयाँ हैं। धनात्मक m का अर्थ सीधा और ऋणात्मक m का अर्थ उलटा प्रतिबिंब है। आकार जानने के लिए |m| की तुलना 1 से करें। लेंस सूत्र में लंबाई की समान इकाइयाँ लें। लेंस का आवर्धन v/u है; दर्पण के सूत्र में अतिरिक्त ऋण चिह्न होता है।

क्षमता: P = 1/f, जहाँ f मीटर में और P डायोप्टर (D) में है। उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक और अवतल की ऋणात्मक होती है। फोकस दूरी का परिमाण जितना कम होगा, अभिसरण या अपसरण उतना अधिक होगा; इससे हर वस्तु-स्थिति में प्रतिबिंब का बड़ा होना आवश्यक नहीं।

8 तीन हल सहित संख्यात्मक उदाहरण

उदाहरण 1 अपवर्तन। प्रकाश n ≈ 1 वाली वायु से n = 1.60 वाले पदार्थ में i = 30° पर प्रवेश करता है। c = 3.00 × 10⁸ m/s लें।

चाल s = c/n = 1.875 × 10⁸ m/s। स्नेल के नियम से sin r = (1 × sin 30°)/1.60 = 0.3125, इसलिए r ≈ 18.2°। छोटा कोण पुष्टि करता है कि किरण अभिलंब की ओर मुड़ी। यहाँ चाल का संकेत s, प्रतिबिंब दूरी v से अलग है।

उदाहरण 2 उत्तल लेंस। 4 cm ऊँची सीधी वस्तु, 12 cm फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस से 36 cm बाईं ओर है।

u = −36 cm; f = +12 cm। 1/v = 1/f + 1/u = 1/12 − 1/36 = 1/18। अतः v = +18 cm और m = 18/(−36) = −0.50। hᵢ = m hₒ = −0.50 × 4 = −2 cm।

प्रतिबिंब लेंस से 18 cm दाईं ओर, वास्तविक, उलटा और आधे आकार का है। यह 2F से दूर रखी वस्तु के किरण-निर्माण से मेल खाता है। क्षमता के लिए f = +0.12 m, इसलिए P ≈ +8.33 D।

उदाहरण 3 अवतल लेंस। 8 cm ऊँची सीधी वस्तु एक अवतल लेंस से 48 cm बाईं ओर है। फोकस दूरी का परिमाण 16 cm है।

u = −48 cm; f = −16 cm। 1/v = −1/16 − 1/48 = −1/12। अतः v = −12 cm और m = (−12)/(−48) = +1/4। hᵢ = (1/4) × 8 = +2 cm।

प्रतिबिंब लेंस से 12 cm बाईं ओर, आभासी, सीधा और छोटा है। यह O और F_L के बीच है। f = −0.16 m रखने पर P = −6.25 D मिलता है।

9 सामान्य गलतियाँ और पुनरावृत्ति

कोण अभिलंब से मापें। पदार्थ के भार के बजाय प्रकाशीय अपवर्तनांक की तुलना करें। उत्तल लेंस का प्रतिबिंब बताने से पहले वस्तु की स्थिति जाँचें। गणना से पहले चिह्न लगाएँ और क्षमता निकालने से पहले सेंटीमीटर को मीटर में बदलें। एक ही लेंस के लिए भी वस्तु की स्थिति बदलने पर आवर्धन बदलता है। अंत में जाँचें कि गणना से मिली प्रतिबिंब की ओर, दिशा और आकार किरण-निर्माण से मेल खाते हैं या नहीं।

अपनी समझ जाँचिए

उत्तरमाला पढ़ने से पहले सभी छह प्रश्न हल करें।

  1. किरण वायु से काँच में अभिलंब के अनुदिश प्रवेश करती है। क्या बदलता है?

A. केवल दिशा B. चाल, लेकिन दिशा और आवृत्ति नहीं C. केवल आवृत्ति D. न चाल, न दिशा

  1. अशून्य कोणों पर प्रकाश n₁ = 1.20 से n₂ = 1.80 वाले माध्यम में जाता है। sin i/sin r कितना है?

A. 2/3 B. 1.20 C. 1.80 D. 1.50

  1. वास्तविक वस्तु उत्तल लेंस और उसके निकट वाले फोकस के बीच है। उसका प्रतिबिंब कैसा है?

A. आभासी, सीधा और बड़ा B. वास्तविक, उलटा और छोटा C. आभासी, सीधा और छोटा D. वास्तविक, सीधा और बड़ा

  1. एक अवतल लेंस की फोकस दूरी −80 cm है। उसकी क्षमता कितनी है?

A. +1.25 D B. −0.0125 D C. −1.25 D D. −80 D

  1. पतले लेंस के लिए u = −24 cm और v = +12 cm है। आवर्धन कितना है?

A. +0.50 B. −0.50 C. −2 D. +2

  1. एक तिरछी किरण समांतर फलकों वाली काँच की पट्टिका पार करती है, जिसके दोनों ओर वायु है। निर्गत किरण कैसी है?

A. हमेशा पट्टिका के लंबवत B. अपरिवर्तित, क्योंकि अपवर्तन नहीं होता C. हमेशा एक साझा फोकस की ओर D. आपतित दिशा के समांतर और पार्श्व विस्थापित

व्याख्या सहित उत्तरमाला

  1. B — लंबवत आपतन में दोनों कोण शून्य हैं। चाल कम और तरंगदैर्ध्य परिवर्तित होता है; आवृत्ति समान रहती है। किरण का मुड़ना आवश्यक नहीं।
  1. D — अनुपात n₂/n₁ = 1.80/1.20 = 1.50 है। केवल 1.80 लेने पर पहले माध्यम का अपवर्तनांक गलत रूप से 1 मान लिया जाता है।
  1. A — निर्गत किरणें फैलती हैं; पीछे बढ़ाए गए विस्तार वस्तु वाली ओर मिलते हैं। फोकस के भीतर की वस्तु का बड़ा आभासी प्रतिबिंब बनता है, पर्दे पर मिलने वाला प्रतिबिंब नहीं।
  1. C — पहले बदलें: f = −0.80 m। P = 1/(−0.80) = −1.25 D। ऋण चिह्न अपसरण बताता है; −0.0125 सेंटीमीटर का गलत उपयोग करने से मिलता है।
  1. B — m = v/u = 12/(−24) = −0.50: प्रतिबिंब उलटा और आधे आकार का है। दर्पण सूत्र का अतिरिक्त ऋण चिह्न लगाने से दिशा गलत मिलेगी।
  1. D — दोनों फलकों पर अपवर्तन होता है। समांतर फलक और बाहर समान माध्यम होने से मूल दिशा लौटती है, जबकि पट्टिका में तिरछे चलने से किरण बगल की ओर खिसकती है।

स्रोत

मुख्य स्रोत: NCERT विज्ञान, खंड 9.3.1–9.3.8, मुद्रित पृ. 146–158। सहायक स्रोत: NIOS प्रकाश ऊर्जा, खंड 15.9–15.14, पृ. 339–347। केवल तकनीकी जाँच: NCERT किरण प्रकाशिकी, खंड 9.3 और 9.5.2–9.5.3।

उदाहरण से समझें

पानी की सतह के आर-पार तिरछी दिशा से देखने पर सीधी स्ट्रॉ मुड़ी हुई लग सकती है। उसके डूबे भाग से आने वाली किरणें पानी से बाहर निकलते समय अपवर्तित होती हैं। आँख निर्गत किरणों को पीछे की ओर सीधा मानकर उस भाग को आभासी स्थिति पर देखती है। स्ट्रॉ स्वयं नहीं मुड़ी; सीमा पर प्रकाश का पथ बदला है।

सूत्र और नियम

अपवर्तन और लेंस संक्षिप्त संदर्भ

  • i और r अभिलंब से मापें; लंबवत आपतन में किरण नहीं मुड़ती
  • n = c/s; अधिक प्रकाशीय अपवर्तनांक का अर्थ प्रकाश की कम चाल
  • n₁ sin i = n₂ sin r; स्थिर सीमा पर आवृत्ति अपरिवर्तित
  • समांतर पट्टिका और बाहर समान माध्यम: निर्गत दिशा समांतर; तिरछे आपतन में पार्श्व विस्थापन
  • वायु में पतले काँच के लेंस: उत्तल अभिसारी, अवतल अपसारी
  • उत्तल लेंस और फोकस के भीतर वास्तविक वस्तु: आभासी, सीधा, बड़ा प्रतिबिंब
  • अवतल लेंस और वास्तविक वस्तु: आभासी, सीधा, छोटा प्रतिबिंब
  • बाएँ से दाएँ प्रकाश: वास्तविक वस्तु के लिए u < 0; उत्तल f > 0; अवतल f < 0
  • लेंस: 1/f = 1/v − 1/u; m = v/u = hᵢ/hₒ
  • m < 0 का अर्थ उलटा; m > 0 का अर्थ सीधा; |m| आकार का अनुपात
  • P = 1/f में f मीटर में लें; इकाई डायोप्टर (D)
  • सतत रेखाएँ प्रकाश-पथ बताती हैं; पीछे की टूटी रेखाएँ आभासी प्रतिबिंब खोजती हैं

इस पाठ के नोट्स

प्रगति सहेजने के लिए साइन इन करें। साइन इन