प्रकाशिकी: 20 प्रश्नों का अध्ययन अभ्यास
इस अभ्यास का उपयोग कैसे करें
यह निःशुल्क, मौलिक अध्ययन अभ्यास प्रकाशिकी के तीनों पाठों के बाद करें: परावर्तन और दर्पण; अपवर्तन और लेंस; मानव नेत्र, वर्ण-विक्षेपण और प्रकाशीय प्रभाव। कुल 20 प्रश्न हैं, प्रत्येक एक अंक का है और हर प्रश्न में ठीक एक विकल्प सही है। अभ्यास बिना समय-सीमा, ऋणात्मक अंकन और उत्तीर्ण सीमा के है। सुझाए गए 25 मिनट केवल अध्ययन-सहायता हैं, आधिकारिक परीक्षा अवधि नहीं। यह पूरे RRB सीबीटी का अनुकरण नहीं है और उसकी आधिकारिक अंकन-व्यवस्था को नहीं दोहराता।
जब तक प्रश्न कुछ और न कहे, वस्तु वास्तविक और सीधी मानें। दर्पण तथा लेंस की गणनाओं में मुख्य अक्ष के पास चलने वाली किरणों का सन्निकटन अपनाएँ; लेंस पतले और हवा में हैं। आपतित प्रकाश बाएँ से दाएँ चलता है। कार्तीय चिह्न परंपरा में दर्पण के ध्रुव या लेंस के प्रकाशिक केंद्र से दाईं ओर की दूरियाँ धनात्मक और बाईं ओर की दूरियाँ ऋणात्मक हैं। इसलिए यहाँ प्रयुक्त वास्तविक वस्तुओं के लिए u < 0 है। v का चिह्न दर्पण या लेंस के अनुसार समझें; केवल “वास्तविक” शब्द देखकर अनुमान न लगाएँ। आपतन, परावर्तन और अपवर्तन कोण अभिलंब से मापे जाते हैं।
व्याख्या देखने से पहले अपना विकल्प और एक कारण या गणना लिखें। फिर गलती पहचानें: अभिलंब और सतह का भ्रम, वस्तु की स्थिति, चिह्न परंपरा, दर्पण–लेंस का गलत सूत्र, मात्रक परिवर्तन, प्रतिबिंब की प्रकृति या अपवर्तन, वर्ण-विक्षेपण और प्रकीर्णन में भ्रम। संबंधित पाठ फिर पढ़ें और उत्तर देखे बिना छूटा प्रश्न दोबारा हल करें।
प्रश्न
- एक किरण समतल दर्पण की सतह से 28° का कोण बनाते हुए उस पर पड़ती है। अभिलंब से मापा गया परावर्तन कोण कितना है?
A. 28° B. 56° C. 62° D. 90°
- समांतर किरणें खुरदरी दीवार पर पड़कर अलग-अलग दिशाओं में परावर्तित होती हैं। इसका सही कारण क्या है?
A. अलग-अलग बिंदुओं पर अभिलंब अलग होते हैं, फिर भी हर परावर्तित किरण परावर्तन के नियम मानती है। B. खुरदरी सतह पर परावर्तन कोण का आपतन कोण से कोई संबंध नहीं होता। C. दीवार प्रत्येक किरण को बिना परावर्तन के अपने आर-पार भेज देती है। D. हर परावर्तित किरण को बाकी सभी परावर्तित किरणों के समांतर रहना चाहिए।
- एक व्यक्ति स्थिर समतल दर्पण के सामने शुरू में 1.5 m दूर है। वह सीधा दर्पण की ओर 0.4 m चलता है। व्यक्ति और उसके प्रतिबिंब के बीच की दूरी कितनी घटती है?
A. 0.4 m B. 0.8 m C. 1.1 m D. 2.2 m
- एक वास्तविक वस्तु अवतल दर्पण के मुख्य फोकस F और वक्रता केंद्र C के बीच रखी है। उसके प्रतिबिंब का कौन-सा वर्णन सही है?
A. आभासी, सीधा और छोटा, दर्पण के पीछे B. वास्तविक, उलटा और छोटा, F तथा C के बीच C. वास्तविक, उलटा और समान आकार का, C पर D. वास्तविक, उलटा और बड़ा, C के पार
- एक अवतल दर्पण की फोकस दूरी f = −16 cm है। वास्तविक वस्तु u = −48 cm पर है। कौन-सा जोड़ा प्रतिबिंब दूरी v और चिह्न सहित आवर्धन m बताता है?
A. v = +24 cm; m = +1/2 B. v = −24 cm; m = −1/2 C. v = −12 cm; m = −1/4 D. v = −24 cm; m = +1/2
- एक गोलीय दर्पण वास्तविक सीधी वस्तु का ऐसा प्रतिबिंब बनाता है जिसका चिह्न सहित आवर्धन m = +2 है। कौन-सा कथन सही है?
A. प्रतिबिंब वास्तविक, उलटा और वस्तु से दोगुनी ऊँचाई का है। B. प्रतिबिंब आभासी, सीधा और वस्तु की आधी ऊँचाई का है। C. प्रतिबिंब आभासी, सीधा और वस्तु से दोगुनी ऊँचाई का है। D. प्रतिबिंब वास्तविक, सीधा और वस्तु के समान ऊँचाई का है।
- एक उत्तल दर्पण के लिए f = +24 cm और वास्तविक वस्तु के लिए u = −48 cm है। प्रतिबिंब कहाँ बनेगा?
A. दर्पण के 16 cm पीछे B. दर्पण के 16 cm सामने C. दर्पण के 48 cm पीछे D. दर्पण के 48 cm सामने
- एक अवतल गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या का परिमाण 36 cm है। मुख्य अक्ष के पास चलने वाली किरणों के सन्निकटन में उसकी चिह्न सहित फोकस दूरी कितनी है?
A. +18 cm B. −36 cm C. −72 cm D. −18 cm
- प्रकाश की एक किरण हवा से साधारण काँच में अभिलंब से 40° का कोण बनाते हुए प्रवेश करती है। काँच का अपवर्तनांक हवा से अधिक है। संचरित किरण के साथ क्या होगा?
A. वह अभिलंब से दूर मुड़ती है और उसकी चाल घटती है। B. वह अभिलंब की ओर मुड़ती है और उसकी चाल बढ़ती है। C. वह अभिलंब की ओर मुड़ती है और उसकी चाल घटती है। D. उसकी दिशा नहीं बदलती और उसकी चाल भी समान रहती है।
- प्रकाश हवा से काँच में ठीक अभिलंब के अनुदिश प्रवेश करता है। संचरित प्रकाश का कौन-सा वर्णन सही है?
A. उसकी दिशा नहीं बदलती, चाल घटती है और आवृत्ति नहीं बदलती। B. वह अभिलंब की ओर मुड़ता है और उसकी चाल नहीं बदलती। C. उसकी दिशा नहीं बदलती, चाल घटती है और आवृत्ति भी घटती है। D. अभिलंबवत आपतन के कारण उसकी दिशा और चाल दोनों नहीं बदलतीं।
- एक पारदर्शी माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक n = 1.25 है। निर्वात में प्रकाश की चाल 3.0 × 10⁸ m/s मानने पर इस माध्यम में प्रकाश की चाल कितनी है?
A. 3.75 × 10⁸ m/s B. 2.4 × 10⁸ m/s C. 1.25 × 10⁸ m/s D. 3.0 × 10⁸ m/s
- एक किरण समांतर फलकों वाली आयताकार काँच की सिल्ली से तिरछी होकर गुजरती है। दोनों तरफ हवा है। निर्गत किरण का कौन-सा वर्णन सही है?
A. वह हमेशा बाहर निकलने वाले फलक पर लंबवत होती है। B. दोनों फलक प्रिज्म की तरह काम करते हैं, इसलिए वह आपतित किरण के समांतर नहीं होती। C. वह आपतित किरण का रास्ता ठीक उलटकर स्रोत की ओर लौटती है। D. वह आपतित किरण के समांतर होती है, लेकिन पार्श्व रूप से विस्थापित होती है।
- हवा में एक पतले उत्तल लेंस के लिए f = +24 cm और वास्तविक वस्तु के लिए u = −72 cm है। कौन-सा जोड़ा प्रतिबिंब दूरी v और चिह्न सहित आवर्धन m बताता है?
A. v = +36 cm; m = −1/2 B. v = −36 cm; m = +1/2 C. v = +18 cm; m = −1/4 D. v = +36 cm; m = +1/2
- हवा में एक पतले अवतल लेंस के लिए f = −30 cm और वास्तविक वस्तु के लिए u = −60 cm है। प्रतिबिंब का कौन-सा वर्णन सही है?
A. v = +20 cm; वास्तविक और उलटा B. v = −60 cm; आभासी और समान आकार का C. v = −20 cm; आभासी, सीधा और एक-तिहाई ऊँचाई का D. v = −20 cm; आभासी, उलटा और एक-तिहाई ऊँचाई का
- हवा में एक पतले अवतल लेंस की चिह्न सहित फोकस दूरी −125 cm है। उसकी क्षमता कितनी है?
A. −0.008 D B. +0.80 D C. −125 D D. −0.80 D
- एक सामान्य नेत्र अपनी स्पष्ट दृष्टि-सीमा के भीतर की पास की वस्तु से ध्यान हटाकर दूर की वस्तु पर केंद्रित करता है। कौन-सा परिवर्तन दूर की वस्तु को रेटिना पर केंद्रित करने में मदद करता है?
A. पक्ष्माभी पेशियाँ सिकुड़ती हैं, लेंस मोटा होता है और उसकी फोकस दूरी घटती है। B. पक्ष्माभी पेशियाँ शिथिल होती हैं, लेंस पतला होता है और उसकी फोकस दूरी बढ़ती है। C. लेंस समान रहता है और रेटिना प्रतिबिंब तक पहुँचने के लिए पीछे खिसकती है। D. पुतली नेत्र लेंस की जगह लेकर स्वयं प्रतिबिंब बनाती है।
- विद्यालय-स्तर के मूल मॉडल में क्रमशः निकट-दृष्टि दोष (मायोपिया) और दूर-दृष्टि दोष (हाइपरमेट्रोपिया) के सुधार के लिए कौन-सा लेंस-जोड़ा सही है?
A. उत्तल; अवतल B. उत्तल; उत्तल C. अवतल; अवतल D. अवतल; उत्तल
- पहला काँच का प्रिज्म श्वेत प्रकाश को वर्णक्रम में अलग करता है। दूसरे समान प्रिज्म को उलटे अभिविन्यास में इस प्रकार रखा जाता है कि सभी रंग उससे गुजरकर फिर एक साथ मिल जाएँ। दूसरे प्रिज्म से क्या निकल सकता है?
A. श्वेत प्रकाश, क्योंकि उसके घटक रंग फिर मिल गए हैं B. केवल बैंगनी प्रकाश, क्योंकि पहले प्रिज्म ने उसे सबसे अधिक विचलित किया था C. कोई प्रकाश नहीं, क्योंकि एक प्रिज्म रंगों को स्थायी रूप से नष्ट कर देता है D. केवल लाल प्रकाश, क्योंकि दूसरे प्रिज्म को बाकी हर रंग अवशोषित करना ही होगा
- पृथ्वी के वायुमंडल से देखने पर दूर का तारा टिमटिमाता क्यों दिखाई देता है?
A. तारा बहुत छोटे अंतराल पर अपना प्रकाश बनाना बार-बार चालू और बंद करता है। B. वायुमंडल में एक स्थिर समतल दर्पण बारी-बारी से किरणों को दूसरी ओर परावर्तित करता है। C. बदलती वायुमंडलीय स्थितियाँ अपवर्तन और आँख तक पहुँचने वाले तारे के प्रकाश की मात्रा बदलती हैं। D. नेत्र लेंस काँच के प्रिज्म वाली प्रक्रिया से श्वेत ताराप्रकाश को रंगों में बाँटता है।
- साफ दिन में सूर्य से दूर वाला आकाश सामान्यतः नीला क्यों दिखाई देता है?
A. हवा के अणु नीले से अधिक लाल प्रकाश का प्रकीर्णन करते हैं। B. हवा के अणु लंबे तरंगदैर्घ्य वाले लाल प्रकाश की तुलना में छोटे तरंगदैर्घ्य वाले नीले प्रकाश का अधिक प्रकीर्णन करते हैं। C. वायुमंडल का एक अकेला प्रिज्म सूर्य के प्रकाश को पूरे आकाश में एक स्थिर नीली पट्टी में बाँटता है। D. महासागरों का नीला रंग हर जगह आकाश के रंग का मुख्य कारण है।
व्याख्या सहित उत्तर
- C — अभिलंब दर्पण पर लंबवत होता है, इसलिए आपतन कोण 90° − 28° = 62° है। परावर्तन के नियम से r = i = 62°। A में अभिलंब के बजाय सतह से कोण लिया गया है। B में i निकाले बिना दिए कोण को दोगुना किया गया है। D सतह और अभिलंब के बीच का कोण है, परावर्तन कोण नहीं।
- A — खुरदरापन होने से अलग-अलग बिंदुओं पर अभिलंब की दिशा बदलती है। प्रत्येक बिंदु पर उसी स्थानीय अभिलंब के सापेक्ष i = r होता है। अलग अभिलंबों के कारण विसरित परावर्तन होता है। B में परावर्तन का नियम गलत ढंग से छोड़ दिया गया है। C संचरण का वर्णन है, दी गई घटना का नहीं। D चिकनी समतल सतह से समांतर किरणों के आदर्श परावर्तन के अनुकूल है, इस खुरदरी दीवार के नहीं।
- B — समतल दर्पण में प्रतिबिंब उतना ही पीछे होता है जितनी दूर वस्तु सामने होती है। शुरू की दूरी 2 × 1.5 = 3.0 m है। व्यक्ति की नई दर्पण-दूरी 1.5 − 0.4 = 1.1 m है, इसलिए व्यक्ति–प्रतिबिंब की नई दूरी 2.2 m है। कमी 3.0 − 2.2 = 0.8 m है। A केवल व्यक्ति का 0.4 m विस्थापन गिनता है; C व्यक्ति और दर्पण की नई दूरी है; D व्यक्ति और प्रतिबिंब की अंतिम दूरी है, उसकी कमी नहीं।
- D — अवतल दर्पण में F और C के बीच रखी वस्तु का प्रतिबिंब C के पार वास्तविक, उलटा और बड़ा बनता है। A वास्तविक वस्तु के लिए उत्तल दर्पण का सामान्य परिणाम है। B अवतल दर्पण में C के पार रखी वस्तु का परिणाम है। C में वस्तु स्वयं C पर होनी चाहिए। इसलिए वस्तु की स्थिति महत्त्वपूर्ण है; केवल दर्पण का प्रकार जानना पर्याप्त नहीं।
- B — दर्पण के लिए 1/v = 1/f − 1/u = −1/16 + 1/48 = −1/24 cm⁻¹, अतः v = −24 cm। फिर m = −v/u = −(−24)/(−48) = −1/2: प्रतिबिंब वास्तविक, उलटा और वस्तु की आधी ऊँचाई का है। A में दोनों चिह्न उलट गए हैं। C में गलती से 1/f में 1/u जोड़ दिया गया है। D में v सही है, लेकिन दर्पण के −v/u के बजाय लेंस का आवर्धन सूत्र v/u लगा दिया गया है।
- C — m का धनात्मक चिह्न बताता है कि प्रतिबिंब सीधा है; |m| = 2 का अर्थ वस्तु से दोगुनी ऊँचाई है। वास्तविक वस्तु के लिए u < 0 और दर्पण में m = −v/u है। इसलिए m > 0 होने पर v > 0 मिलता है; प्रतिबिंब दर्पण के पीछे आभासी बनता है। A चिह्न को अनदेखा करता है। B में 2 की जगह उसका व्युत्क्रम लिया गया है। D में प्रतिबिंब की प्रकृति और आकार दोनों गलत हैं। फोकस दूरी के भीतर रखी वस्तु के लिए अवतल दर्पण ऐसा प्रतिबिंब बना सकता है।
- A — 1/v = 1/f − 1/u = 1/24 + 1/48 = 1/16 cm⁻¹, इसलिए v = +16 cm, यानी दर्पण के पीछे। साथ ही m = −16/(−48) = +1/3 है; यह ध्रुव और फोकस के बीच बने सीधे, छोटे, आभासी प्रतिबिंब से मेल खाता है। B में धनात्मक v के लिए गलत तरफ चुनी गई है। C में चिह्न सहित u लगाने के बजाय परिमाणों को 1/24 − 1/48 के रूप में घटाया गया है। D में परिमाण की यही गलती और गलत तरफ, दोनों हैं।
- D — मुख्य अक्ष के पास की किरणों के लिए f = R/2 होता है। इस अवतल दर्पण का वक्रता केंद्र आपतित प्रकाश वाली ओर है, इसलिए R = −36 cm और f = −18 cm। A में अवतल दर्पण का चिह्न छूट गया है। B में फोकस दूरी को त्रिज्या के बराबर माना गया है। C में त्रिज्या को आधा करने के बजाय दोगुना कर दिया गया है। वक्रता त्रिज्या ध्रुव से वक्रता केंद्र तक मापी जाती है।
- C — अधिक अपवर्तनांक का अर्थ प्रकाश की कम चाल है। अधिक अपवर्तनांक वाले माध्यम में इस तिरछे प्रवेश पर अपवर्तन कोण आपतन कोण से छोटा होता है, इसलिए किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है। A में मुड़ने की दिशा गलत है। B में चाल का परिवर्तन गलत है। D में तिरछे आपतन को अभिलंबवत आपतन मान लिया गया है और चाल का परिवर्तन भी छोड़ दिया गया है।
- A — अभिलंबवत आपतन पर i = r = 0° होता है, इसलिए दिशा नहीं बदलती। फिर भी काँच में प्रकाश की चाल कम होती है और सीमा पर आवृत्ति समान रहती है। चाल = आवृत्ति × तरंगदैर्घ्य होने से तरंगदैर्घ्य घटता है। B में बिना कारण मुड़ना बताया गया है और चाल का परिवर्तन छोड़ा गया है। C में आवृत्ति को गलत ढंग से बदला गया है। D में दिशा न बदलने को चाल न बदलना मान लिया गया है।
- B — n = c/चाल, इसलिए चाल = c/n = (3.0 × 10⁸)/1.25 = 2.4 × 10⁸ m/s। A में n से भाग देने के बजाय गुणा किया गया है। C में अपवर्तनांक के संख्यात्मक मान को चाल का गुणांक मान लिया गया है। D अपवर्तनांक को अनदेखा करके निर्वात वाली चाल ही रखता है। उत्तर का c से कम होना एक उपयोगी जाँच है।
- D — काँच में प्रवेश करते समय किरण अभिलंब की ओर और बाहर आते समय अभिलंब से दूर मुड़ती है। फलक समांतर हैं और बाहर का माध्यम दोनों ओर समान है, इसलिए निर्गत दिशा आपतित दिशा के समांतर होती है; तिरछे गुजरने पर पार्श्व विस्थापन होता है। A में बिना आधार लंबवत निर्गमन मान लिया गया है। B समांतर फलकों को अनदेखा करता है; प्रिज्म के फलक एक-दूसरे से झुके होते हैं। C स्रोत की ओर लौटने का वर्णन है, सिल्ली के आर-पार संचरण का नहीं।
- A — लेंस के लिए 1/v = 1/f + 1/u = 1/24 − 1/72 = 1/36 cm⁻¹। इसलिए v = +36 cm और m = v/u = 36/(−72) = −1/2। प्रतिबिंब लेंस के दूसरी ओर वास्तविक, उलटा और वस्तु की आधी ऊँचाई का है। B में चिह्न उलट दिए गए हैं। C में लेंस के बजाय दर्पण का समीकरण लगा दिया गया है। D में लेंस के v/u के बजाय दर्पण का आवर्धन सूत्र −v/u लगा दिया गया है।
- C — 1/v = 1/f + 1/u = −1/30 − 1/60 = −1/20 cm⁻¹, इसलिए v = −20 cm। प्रतिबिंब वस्तु वाली तरफ है और आभासी है। लेंस का आवर्धन m = v/u = (−20)/(−60) = +1/3 है, इसलिए प्रतिबिंब सीधा और छोटा है। A में चिह्न और प्रतिबिंब की प्रकृति गलत हैं। B दर्पण का समीकरण लगाने से मिलता है। D में स्थिति सही है, लेकिन धनात्मक आवर्धन को उलटे प्रतिबिंब का संकेत मान लिया गया है।
- D — पहले f = −125 cm = −1.25 m करें। क्षमता P = 1/f = 1/(−1.25) = −0.80 D। ऋणात्मक क्षमता हवा में अपसारी अवतल लेंस से मेल खाती है। A में मीटर में बदले बिना सेंटीमीटर वाले मान का व्युत्क्रम लिया गया है। B ऋण चिह्न छोड़ देता है। C में मीटर वाली फोकस दूरी का व्युत्क्रम लेने के बजाय फोकस दूरी का अंक ही दोहरा दिया गया है।
- B — दूर की वस्तु के लिए पक्ष्माभी पेशियाँ शिथिल होती हैं और नेत्र लेंस कम वक्र तथा पतला होता है। उसकी फोकस दूरी बढ़ती और अभिसारी क्षमता घटती है, जिससे प्रतिबिंब रेटिना पर बना रहता है। A पास की वस्तु पर केंद्रित करने का वर्णन है। C में समंजन को रेटिना के खिसकने से जोड़ दिया गया है। D में प्रकाश को प्रवेश देने वाली पुतली और प्रकाश केंद्रित करने वाले लेंस-तंत्र के कार्य मिलाए गए हैं।
- D — निकट-दृष्टि दोष में दूर की वस्तु की किरणें रेटिना के सामने केंद्रित होतीं; उपयुक्त अवतल लेंस नेत्र में प्रवेश से पहले अभिसरण घटाता है। दूर-दृष्टि दोष में पास की वस्तु की किरणें रेटिना के पीछे केंद्रित होतीं; उपयुक्त उत्तल लेंस अतिरिक्त अभिसरण देता है। A दोनों सुधारों को उलट देता है। B में निकट-दृष्टि दोष के लिए गलत ढंग से अभिसरण बढ़ाया गया है। C में दूर-दृष्टि दोष के लिए गलत ढंग से अभिसरण घटाया गया है। यह मॉडल पर आधारित प्रश्न है, किसी व्यक्ति के लिए चश्मे का परामर्श नहीं।
- A — पहला प्रिज्म श्वेत प्रकाश में पहले से मौजूद रंगों को अलग-अलग कोणों से अपवर्तित करके अलग करता है। सही तरह से रखा गया उलटा प्रिज्म इस वर्णक्रम को फिर मिलाकर श्वेत प्रकाश दे सकता है। B अधिक विचलन को केवल एक रंग बचने का कारण मान लेता है। C अलग होने को नष्ट होना मानता है। D बिना आधार चुनिंदा अवशोषण मान लेता है; साधारण प्रिज्म के लिए लाल को छोड़कर सभी रंग हटाना आवश्यक नहीं। प्रिज्म को सही तरह रखना महत्त्वपूर्ण है; पास में कोई भी दूसरा प्रिज्म रख देने से रंगों का फिर मिलना निश्चित नहीं होता।
- C — दूर का तारा लगभग बिंदु-स्रोत जैसा होता है। वायुमंडल में अपवर्तनांक की बदलती स्थितियाँ किरणों के पथ और दिखने वाली चमक में उतार-चढ़ाव पैदा करती हैं; यही टिमटिमाना है। A सामान्य वायुमंडलीय प्रभाव को स्वयं तारे के तेज बदलावों से जोड़ता है। B बिना आधार परावर्तक सतह मान लेता है। D टिमटिमाने को प्रिज्म के वर्ण-विक्षेपण से मिला देता है। कारण वायुमंडलीय अपवर्तन है, परावर्तन के नियम का टूटना नहीं।
- B — हवा के अणु और बहुत सूक्ष्म कण लंबे दृश्य तरंगदैर्घ्यों की तुलना में छोटे तरंगदैर्घ्यों का अधिक प्रकीर्णन करते हैं। नीले सिरे का प्रकीर्णित प्रकाश सूर्य से अलग दिशाओं से आँखों तक पहुँचता है, जिससे साफ आकाश नीला दिखाई देता है। A तरंगदैर्घ्य की निर्भरता को उलट देता है। C अनेक दिशाओं में प्रकीर्णन को प्रिज्म द्वारा वर्णक्रम बनाने से मिला देता है। D कारण नहीं है: महासागरों से दूर भी नीला आकाश दिखाई देता है।
स्रोत टिप्पणी
वैज्ञानिक जाँच: NIOS माध्यमिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी, Light Energy (OPT-S01); NCERT कक्षा X, Light – Reflection and Refraction (OPT-S04); NCERT कक्षा X, The Human Eye and the Colourful World (OPT-S03)। NCERT कक्षा XII का Ray Optics (OPT-S02) केवल मुख्य अक्ष के पास वाली किरणों के दर्पण-मॉडल और चिह्नों की जाँच के लिए है, अभ्यास का स्तर बढ़ाने के लिए नहीं। प्रश्नों की भाषा, संख्यात्मक विकल्प और व्याख्याएँ मौलिक हैं; ये पूर्व-वर्षीय प्रश्न नहीं हैं और विषय की आवृत्ति की कोई भविष्यवाणी नहीं की गई है।
सूत्र और नियम
अभ्यास की जाँच-सूची
- किरणों के कोण अभिलंब से मापें, सतह से नहीं
- दर्पण: 1/f = 1/v + 1/u; चिह्न सहित आवर्धन m = −v/u
- हवा में पतले लेंस: 1/f = 1/v − 1/u; चिह्न सहित आवर्धन m = v/u
- निरपेक्ष अपवर्तनांक n = c/(माध्यम में चाल); c निर्वात में प्रकाश की चाल है
- लेंस क्षमता P = 1/f में f मीटर में और P डायोप्टर में हो
- उत्तर चुनने के साथ प्रतिबिंब या प्रकाशीय प्रभाव का कारण भी बताएँ
इस पाठ के नोट्स
इस पाठ के टेस्ट
- प्रकाशिकी: 20 प्रश्नों का अध्ययन अभ्यास
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