लाभ हानि और छूट
आप क्या सीखेंगे
मूल्य से जुड़े प्रश्न में पहले यह तय करें कि कौन-सी राशि 100% है। इस पाठ में आप तय की गई लागत पर लाभ या हानि, अंकित मूल्य पर छूट और एक से अधिक परिवर्तनों के बाद का परिणाम निकालेंगे। आप अंतिम मूल्य से अज्ञात शुरुआती मूल्य भी पाएँगे और दो बिक्री की वास्तविक राशियाँ जोड़कर कुल परिणाम निकालेंगे।
यह पाठ पिछले पाठ प्रतिशत और क्रमिक परिवर्तन की प्रतिशत तथा गुणक विधियों का उपयोग करता है। यहाँ हर लागत-आधार धनात्मक है। दी गई सभी वस्तुएँ बिकती हैं और कोई अनकहा खर्च नहीं जोड़ा जाता। ये अंकगणित के मॉडल हैं; व्यापारिक लेखांकन या कर-गणना का मार्गदर्शन नहीं।
गणना से पहले पिछला ज्ञान याद करें
प्रतिक्रिया देखने से पहले प्रयास करें।
- 15% वृद्धि के लिए कौन-सा दशमलव गुणक होगा?
- 12% कमी के बाद शुरुआती राशि का कितना प्रतिशत बचता है?
- यदि ₹468 किसी अज्ञात राशि का 90% है, तो वह राशि कैसे निकालेंगे?
- क्या ₹400 का 10% और ₹600 का 10% बराबर राशि हैं?
प्रतिक्रिया:
- 100% + 15% = 115%, इसलिए 1.15 से गुणा करें। 0.15 से गुणा करने पर केवल वृद्धि की राशि मिलेगी।
- 88% बचता है, इसलिए गुणक 0.88 है।
- ₹468 को 0.90 से भाग देने पर ₹520 मिलेंगे। जाँच: ₹520 × 0.90 = ₹468।
- नहीं। राशियाँ ₹40 और ₹60 हैं। आधार अलग हों तो समान दर का अर्थ समान धनराशि नहीं होता।
यदि आपने कमी को उलटने के लिए छोटी अंतिम राशि में उसी प्रतिशत की वृद्धि की, तो पिछले पाठ में मूल आधार वापस पाने की विधि देखें। अब इसी तर्क को अलग-अलग नाम वाले मूल्यों पर लागू करेंगे।
निर्देशित खंड A लागत और बिक्री का परिणाम
1 तीनों मूल्यों को अलग पहचानें
एक प्रश्न में एक ही विक्रेता का दृष्टिकोण बनाए रखें।
- क्रय मूल्य (CP) वह खरीद मूल्य है जो वस्तु के लिए चुकाया गया
- कुल लागत को यहाँ C लिखेंगे; इसमें CP और केवल वे अतिरिक्त खर्च आते हैं जिन्हें प्रश्न लागत में शामिल बताता है
- अंकित मूल्य (MP) बताई गई छूट से पहले सूची में लिखा मूल्य है
- विक्रय मूल्य (SP) प्रश्न में बिक्री से प्राप्त राशि है
यदि कोई अतिरिक्त खर्च शामिल नहीं है, तो C = CP। यदि कुल लागत पहले से दी है, तो उसके घटक फिर से न जोड़ें। ढुलाई या मरम्मत तभी शामिल करें जब प्रश्न ऐसा कहे। बिना दिए किराए, वेतन या दूसरे खर्च का अनुमान लगाकर न जोड़ें।
इस पाठ में सामान्य लाभ या हानि प्रतिशत के लिए तय की गई कुल लागत C को 100% मानेंगे। पहले SP की तुलना C से करें:
- SP > C हो तो लाभ = SP − C; लाभ प्रतिशत = (लाभ ÷ C) × 100%
- SP < C हो तो हानि = C − SP; हानि प्रतिशत = (हानि ÷ C) × 100%
- SP = C हो तो न लाभ, न हानि; प्रतिशत 0% है
अंतर रुपये में एक राशि है। प्रतिशत उस राशि की तुलना C से करता है, इसलिए उसके साथ मुद्रा की इकाई नहीं लगती। C शून्य से बड़ा होना चाहिए; शून्य लागत इस सामान्य प्रतिशत के लिए हर नहीं बन सकती।
हल किया गया उदाहरण 1 लाभ की राशि से दर निकालना
एक वस्तु की कुल लागत ₹640 है और वह ₹736 में बिकती है। लाभ की राशि और सामान्य लागत-आधारित लाभ प्रतिशत निकालें।
मॉडल: C = ₹640 आधार राशि यानी 100% है; SP = ₹736। ₹736 > ₹640, इसलिए लाभ = ₹736 − ₹640 = ₹96। लाभ प्रतिशत = (96 ÷ 640) × 100% = 15%।
इस मॉडल में हर ₹100 लागत पर ₹15 लाभ मिलता है। अलग तरीके से जाँचें: ₹640 का 10% = ₹64 और 5% = ₹32। इनका योग ₹96 है तथा ₹640 + ₹96 = ₹736।
गलती की जाँच: ₹96 का अर्थ 96% नहीं है। ₹736 से भाग देना अलग, स्पष्ट रूप से बिक्री-आधारित तुलना का उत्तर होगा।
हल किया गया उदाहरण 2 बताया गया खर्च एक बार शामिल करना
एक विक्रेता वस्तु को ₹720 में खरीदता है और ₹80 ढुलाई देता है, जिसे प्रश्न लागत में शामिल बताता है। वस्तु ₹920 में बिकती है। अन्य खर्च नहीं हैं। कुल लागत और लाभ प्रतिशत निकालें।
दर निकालने से पहले लागत का लेखा बनाएँ:
- खरीद: ₹720
- शामिल ढुलाई: ₹80
- कुल लागत C: ₹720 + ₹80 = ₹800
- विक्रय मूल्य SP: ₹920
लाभ = ₹920 − ₹800 = ₹120। लाभ प्रतिशत = (120 ÷ 800) × 100% = 15%।
जाँच: ₹800 × 1.15 = ₹920। बिक्री से तय की गई ₹800 लागत वापस मिलती है और ₹120 बचते हैं। ढुलाई उस ₹800 में पहले से शामिल है। उसे दोबारा न जोड़ें और बिक्री की प्राप्ति में भी न जोड़ें। उसे छोड़ने से लाभ वास्तविक गणना से अधिक दिखेगा।
2 आगे और उलटी गणना के लिए गुणक
मान लें लागत-आधारित लाभ की दर p% है। बिक्री से पूरी लागत और उसी लागत का p% वापस मिलता है। इसलिए SP = C × (1 + p/100)। यदि l% हानि हो, तो SP = C × (1 − l/100)।
C वापस पाने के लिए उसी गुणक से भाग देकर गुणा को उलटें:
- लाभ होने पर: C = SP ÷ (1 + p/100)
- हानि होने पर: C = SP ÷ (1 − l/100)
यहाँ p और l दरों के संख्यात्मक मान हैं, जैसे 15 या 8। हानि की उलटी गणना में 0 ≤ l < 100 होना चाहिए। 100% हानि पर किसी भी धनात्मक C के लिए SP = 0 होगा, इसलिए उस विक्रय मूल्य से एक निश्चित मूल लागत नहीं मिल सकती। इन गैर-ऋणात्मक मूल्य वाले मॉडलों में हानि लागत के 100% से अधिक नहीं हो सकती। लाभ पर ऐसी 100% की ऊपरी सीमा नहीं है।
हल किया गया उदाहरण 3 हानि की आगे और उलटी गणना
भाग A: कुल लागत ₹600 और लागत पर हानि 15% है। SP निकालें।
₹600 का बचा हुआ भाग 100% − 15% = 85% है। SP = ₹600 × 0.85 = ₹510। राशि से जाँचें: हानि = ₹600 × 0.15 = ₹90; ₹600 − ₹90 = ₹510। हानि की स्थिति के अनुसार विक्रय मूल्य लागत से कम है।
भाग B: एक अलग बिक्री में 8% हानि पर SP ₹552 है। उसकी कुल लागत निकालें।
अब ₹552 अज्ञात लागत का 92% है, 100% नहीं। 0.92 × C = ₹552, इसलिए C = ₹552 ÷ 0.92 = ₹600। जाँच: ₹600 का 8% = ₹48 हानि और ₹600 − ₹48 = ₹552।
गलती की जाँच: ₹552 में उसका 8% जोड़ने पर ₹596.16 मिलते हैं, जो मूल लागत नहीं है। खोया हुआ 8% C पर निकाला गया था, ₹552 पर नहीं।
जाँच बिंदु A गणना से पहले आधार चुनें
प्रतिक्रिया ढककर दोनों प्रश्न हल करें।
- एक वस्तु अपनी कुल लागत पर 15% लाभ के साथ ₹690 में बिकती है। रिक्त स्थान भरें: ₹690 लागत का ___% है। लागत निकालें।
- खरीद मूल्य ₹360 और लागत में शामिल मरम्मत ₹40 है। SP ₹380 है और अन्य खर्च नहीं हैं। लाभ होगा या हानि, और कितने प्रतिशत?
प्रतिक्रिया:
- ₹690 लागत का 115% है। C = ₹690 ÷ 1.15 = ₹600। जाँच: ₹600 का 15% = ₹90, इसलिए ₹600 + ₹90 = ₹690। ₹690 का 15% घटाने पर गलत आधार इस्तेमाल होगा।
- C = ₹360 + ₹40 = ₹400। विक्रय मूल्य लागत से ₹20 कम है, इसलिए हानि = (20 ÷ 400) × 100% = 5%। केवल ₹360 से तुलना करने पर गलत रूप से लाभ दिखेगा।
यदि लाभ-हानि की दिशा गलत हुई, तो लागत का लेखा फिर बनाएँ। यदि दिशा सही लेकिन प्रतिशत गलत है, तो हर पर गोला लगाएँ और जाँचें कि वह तय की गई लागत है या नहीं।
निर्देशित खंड B अंकित मूल्य और बदलते आधार
3 छूट का आधार अंकित मूल्य है
छूट (बट्टा) MP में की गई कमी है। इससे पता चलता है कि ग्राहक सूची के मूल्य से कितना कम चुकाता है; इससे अकेले विक्रेता का लाभ या हानि नहीं पता चलता। उसके लिए C भी चाहिए।
d% छूट पर घटाई गई राशि MP × d/100 है और विक्रय मूल्य में MP का (100 − d)% बचता है:
- छूट की राशि = MP − SP
- छूट प्रतिशत = ((MP − SP) ÷ MP) × 100%
- SP = MP × (1 − d/100)
- 0 ≤ d < 100 होने पर MP = SP ÷ (1 − d/100)
MP > 0 लें। 100% छूट से विक्रय मूल्य शून्य हो जाता है; उस शून्य से एक निश्चित MP वापस नहीं निकाला जा सकता। शून्य गुणक से भाग न दें।
हल किया गया उदाहरण 4 छूट की राशि और बचा हुआ मूल्य
एक वस्तु का अंकित मूल्य ₹1,250 है और छूट 12% है। छूट की राशि तथा SP निकालें।
मॉडल: ₹1,250 को 100% मानें; 12% घटता है और 88% बचता है। छूट की राशि = ₹1,250 × 0.12 = ₹150। SP = ₹1,250 − ₹150 = ₹1,100। गुणक विधि से भी ₹1,250 × 0.88 = ₹1,100 मिलता है।
जाँच: ₹150 + ₹1,100 = ₹1,250 और ₹150 ÷ ₹1,250 = 0.12। ₹150 की कटौती से ₹150 हानि सिद्ध नहीं होती। लागत दी ही नहीं गई है।
हल किया गया उदाहरण 5 अंकित मूल्य वापस पाना
15% छूट के बाद एक वस्तु ₹1,020 में बिकती है। MP निकालें।
₹1,020, MP का बचा हुआ 85% है। उलटने से पहले संबंध लिखें: SP = 0.85 × MP, इसलिए MP = ₹1,020 ÷ 0.85 = ₹1,200।
जाँच: ₹1,200 का 15% = ₹180; ₹1,200 − ₹180 = ₹1,020। साथ ही धनात्मक छूट के अनुसार MP, SP से बड़ा है।
गलती की जाँच: ₹1,020 में उसका 15% जोड़ने पर ₹1,173 मिलते हैं। इसमें 15% छूट देने पर ₹1,020 नहीं बचेंगे। मूल छूट का आधार ₹1,200 था।
4 मूल्य के हर चरण का अनुसरण करें
लागत पर मूल्य-वृद्धि का अर्थ है लागत को दिए हुए प्रतिशत से बढ़ाकर MP तय करना। यह मूल्य तय करने का चरण है; अंतिम लाभ वास्तव में प्राप्त राशि पर निर्भर करता है।
लागत पर m% मूल्य-वृद्धि और MP पर d% छूट हो, तो: C → (1 + m/100) से गुणा → MP → (1 − d/100) से गुणा → SP।
दोनों दरें सामान्यतः अलग-अलग रुपये की राशियों पर लागू होती हैं। दोनों गुणक रखें। अंतिम संयुक्त गुणक 1 से बड़ा हो तो लाभ, 1 से छोटा हो तो हानि और 1 के बराबर हो तो न लाभ, न हानि है। यह तुलना मूल C से होती है।
हल किया गया उदाहरण 6 मूल्य-वृद्धि के बाद छूट
कुल लागत ₹800 है। विक्रेता लागत से 25% अधिक अंकित मूल्य रखता है और फिर MP पर 12% छूट देता है। MP, SP और अंतिम लागत-आधारित लाभ निकालें।
पहला चरण, आधार C = ₹800: MP = ₹800 × 1.25 = ₹1,000। मूल्य-वृद्धि की राशि ₹200 है। दूसरा चरण, आधार MP = ₹1,000: छूट = ₹1,000 × 0.12 = ₹120। SP = ₹1,000 × 0.88 = ₹880।
अंतिम बिक्री की तुलना मूल लागत से करें: लाभ = ₹880 − ₹800 = ₹80; लाभ प्रतिशत = (80 ÷ 800) × 100% = 10%।
एक संयुक्त गुणक से जाँचें: 1.25 × 0.88 = 1.10 और ₹800 × 1.10 = ₹880। गलती की जाँच: 25% − 12% = 13% अंतिम लाभ नहीं है। मूल्य-वृद्धि से ₹200 जुड़ते हैं, लेकिन छूट से ₹120 घटते हैं, क्योंकि आधार अलग हैं। एक ही बिक्री में छूट और लाभ दोनों हो सकते हैं।
हल किया गया उदाहरण 7 दो क्रमिक छूट
₹2,000 अंकित मूल्य वाली वस्तु पर पहले 20% छूट और फिर उस समय बचे मूल्य पर 5% छूट मिलती है। SP और मूल MP पर समतुल्य एकल छूट निकालें।
पहली छूट के बाद: ₹2,000 × 0.80 = ₹1,600। दूसरी छूट ₹1,600 का 5% = ₹80 है, इसलिए SP = ₹1,600 × 0.95 = ₹1,520। संयुक्त गुणक 0.80 × 0.95 = 0.76 है। यानी मूल MP का 76% बचता है और समतुल्य एकल छूट 100% − 76% = 24% है।
राशियों से जाँचें: दोनों छूट ₹400 और ₹80 हैं, जिनका योग ₹480 है। तब (480 ÷ 2,000) × 100% = 24% और ₹2,000 − ₹480 = ₹1,520।
गलती की जाँच: 20% + 5% जोड़कर 25% कहना दूसरी कटौती को गलत रूप से ₹2,000 का 5% मानता है। हर तत्कालीन मूल्य पर d₁% और फिर d₂% छूट के लिए बचा हुआ गुणक (1 − d₁/100)(1 − d₂/100) है। इसे 1 से घटाने पर हटाया गया भिन्नात्मक भाग मिलता है।
5 संयुक्त दर से पहले राशियाँ जोड़ें
वस्तुओं के समूह में सभी तय की गई लागतें और सभी बिक्री-प्राप्तियाँ अलग-अलग जोड़ें। कुल SP − कुल C धनात्मक हो तो वह कुल लाभ है; अन्यथा हानि की राशि के लिए घटाव का क्रम उलटें। सामान्य प्रतिशत के लिए उस राशि को कुल C से भाग दें।
अलग-अलग लागत-आधार हों तो व्यक्तिगत लाभ-हानि दरों का साधारण औसत न लें। बड़ी लागत की दर का कुल परिणाम पर अधिक प्रभाव होता है। दो वस्तुओं की लागत समान हो तो चिह्न सहित दरों को बराबर भार देना सही है; यह हर स्थिति का संक्षिप्त नियम नहीं है।
हल किया गया उदाहरण 8 दो बिक्री और आधार की छोटी तुलना
एक वस्तु की लागत ₹400 है और वह 25% लाभ पर बिकती है। दूसरी की लागत ₹600 है और वह 10% हानि पर बिकती है। दोनों बिक गई हैं और अन्य खर्च नहीं हैं। कुल लागत-आधारित परिणाम निकालें। फिर एक अलग तुलना में बिक्री-आधारित मार्जिन निकालें; यहाँ इसकी परिभाषा है कुल लाभ को कुल SP से भाग देकर प्रतिशत में लिखना।
| वस्तु | तय की गई लागत | विक्रय की गणना | बिक्री की प्राप्ति |
|---|---|---|---|
| पहली | ₹400 | ₹400 × 1.25 | ₹500 |
| दूसरी | ₹600 | ₹600 × 0.90 | ₹540 |
| कुल | ₹1,000 | प्राप्तियाँ जोड़ें | ₹1,040 |
कुल लाभ = ₹1,040 − ₹1,000 = ₹40। लागत-आधारित लाभ प्रतिशत = (40 ÷ 1,000) × 100% = 4%। परिवर्तनों को जोड़कर जाँचें: पहली वस्तु पर ₹100 लाभ और दूसरी पर ₹60 हानि है; ₹100 − ₹60 = ₹40। 25% और −10% का औसत 7.5% होगा, लेकिन असमान लागतों के कारण बराबर भार देना उचित नहीं है।
अलग बिक्री-आधारित मार्जिन में यही ₹40 लाभ अलग हर के साथ आता है: बिक्री-आधारित मार्जिन = (40 ÷ 1,040) × 100% = (50/13)% ≈ 3.846%। भिन्न सटीक है; दशमलव को तीन दशमलव स्थानों तक सन्निकट किया गया है। यह 4% से कम है क्योंकि वही अंश बिक्री की बड़ी राशि से विभाजित हो रहा है। बिक्री वाला हर केवल तभी लें जब वह तुलना स्पष्ट रूप से माँगी गई हो। लागत पर मूल्य-वृद्धि, लागत-आधारित लाभ प्रतिशत और बिक्री-आधारित मार्जिन के नाम एक-दूसरे की जगह न लगाएँ।
जाँच बिंदु B चरण जोड़ें और दावे को जाँचें
प्रतिक्रिया से पहले प्रयास करें।
- MP ₹800 और छूट 25% है। कुल लागत ₹500 हो तो SP और लागत-आधारित लाभ प्रतिशत निकालें।
- एक विद्यार्थी कहता है, “दो बिक्री में 20% लाभ और 20% हानि हमेशा एक-दूसरे को काट देते हैं।” कौन-सी जानकारी नहीं दी गई है?
- धनात्मक MP पर 100% छूट के बाद SP = ₹0 हो, तो क्या मूल MP पता चल सकता है?
प्रतिक्रिया:
- SP = ₹800 × 0.75 = ₹600। लाभ = ₹600 − ₹500 = ₹100, जो ₹500 का 20% है। 25% छूट और 20% लाभ के आधार अलग हैं।
- दोनों बिक्री की लागतें चाहिए। असमान लागतों पर समान दरें अलग धनराशियाँ बताती हैं। हर प्राप्ति निकालकर राशियाँ जोड़ें; इन बराबर लेकिन विपरीत दरों से लाभ-हानि तभी कटेंगे जब लागतें बराबर हों।
- नहीं। हर धनात्मक MP को 0 से गुणा करने पर ₹0 मिलता है। 0 से भाग देना उलटी गणना नहीं है।
स्वतंत्र अभ्यास से पहले
हर प्रश्न में क्रिया चुनने से पहले प्रतिशत के पास उसकी आधार राशि लिखें।
- C, MP और SP पहचानें; केवल स्पष्ट रूप से शामिल खर्चों को एक बार जोड़ें
- तय करें कि राशि, प्रतिशत या शुरुआती मूल्य में से क्या पूछा गया है
- सामान्य लाभ-हानि के लिए C, छूट के लिए MP और केवल स्पष्ट बिक्री-आधारित मार्जिन के लिए SP लें
- ज्ञात गुणक को भाग देकर उलटें; अंतिम राशि पर वही दर न लगाएँ
- क्रमिक परिवर्तनों में हर चरण की तत्कालीन आधार राशि देखें
- कई बिक्री हों तो भाग देने से पहले राशियाँ जोड़ें; उत्तर में लाभ या हानि लिखें
- उत्तर को मूल संबंध में रखकर जाँचें, उसका आकार देखें और आवर्ती दशमलव की जगह सटीक भिन्न रखें
अगले 12 प्रश्न सीखने के लिए बनाए गए मौलिक अभ्यास हैं और इनकी कोई समय-सीमा नहीं है। सही उत्तर पर +1 अंक तथा गलत या छोड़े गए प्रश्न पर 0 अंक मिलेंगे। कोई ऋणात्मक अंकन और उत्तीर्ण होने की न्यूनतम अंक-सीमा नहीं है। यह पूरी कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) का अनुकरण नहीं है।
स्वतंत्र अभ्यास
1
एक वस्तु की कुल लागत ₹450 है और वह ₹540 में बिकती है। उसका सामान्य लागत-आधारित लाभ प्रतिशत कितना है? A. (50/3)% B. 20% C. 90% D. 120%
2
एक वस्तु की कुल लागत ₹750 है और विक्रय मूल्य ₹660 है। लागत-आधारित हानि प्रतिशत कितना है? A. 90% B. 88% C. (150/11)% D. 12%
3
अंकित मूल्य ₹900 है और उस पर 15% छूट है। छूट की राशि कितनी है? A. ₹135 B. ₹765 C. ₹15 D. ₹90
4
₹1,600 अंकित मूल्य वाली वस्तु पर 7.5% छूट है। उसका विक्रय मूल्य कितना है? A. ₹120 B. ₹400 C. ₹1,480 D. ₹1,720
5
एक वस्तु कुल लागत पर 15% लाभ के साथ ₹1,035 में बिकती है। उसकी कुल लागत कितनी है? A. ₹879.75 B. ₹900 C. ₹1,190.25 D. ₹155.25
6
एक वस्तु कुल लागत पर 8% हानि के साथ ₹828 में बिकती है। उसकी कुल लागत कितनी है? A. ₹900 B. ₹894.24 C. ₹761.76 D. ₹10,350
7
खरीद मूल्य ₹950 है और लागत में स्पष्ट रूप से शामिल मरम्मत ₹50 है। वस्तु ₹1,120 में बिकती है; अन्य खर्च नहीं हैं। लागत-आधारित लाभ प्रतिशत कितना है? A. (340/19)% B. (20/3)% C. 17% D. 12%
8
अंकित मूल्य पर 18% छूट के बाद एक वस्तु ₹1,722 में बिकती है। उसका अंकित मूल्य कितना था? A. ₹1,412.04 B. ₹2,031.96 C. ₹2,100 D. ₹378
9
कुल लागत ₹500 है। लागत से 30% अधिक अंकित मूल्य रखा गया और फिर उस अंकित मूल्य पर 20% छूट दी गई। अंतिम लागत-आधारित लाभ प्रतिशत कितना है? A. 4% B. 10% C. 26% D. 104%
10
दो क्रमिक छूट पहले 10% और फिर 15% हैं; हर छूट उस समय के मूल्य पर लगती है। मूल अंकित मूल्य पर समतुल्य एकल छूट कितनी है? A. 25% B. 5% C. 76.5% D. 23.5%
11
दो वस्तुओं की लागत क्रमशः ₹300 और ₹700 है। पहली अपनी लागत पर 20% लाभ और दूसरी अपनी लागत पर 10% हानि में बिकती है। दोनों बिक गई हैं और अन्य खर्च नहीं हैं। कुल लागत-आधारित परिणाम क्या है? A. 5% लाभ B. 1% हानि C. 10% लाभ D. 1% लाभ
12
एक वस्तु की कुल लागत ₹800 और विक्रय मूल्य ₹1,000 है। सही नाम वाला युग्म चुनें: लागत-आधारित लाभ प्रतिशत; बिक्री-आधारित मार्जिन, जहाँ मार्जिन का अर्थ (लाभ/SP) × 100% है। A. 20%; 25% B. 25%; 25% C. 25%; 20% D. 20%; 20%
उत्तर और व्याख्यात्मक प्रतिक्रिया
1 · B
लाभ = ₹540 − ₹450 = ₹90। लागत-आधार ₹450 है, इसलिए (90/450) × 100% = 20% (B)। जाँच: ₹450 × 1.20 = ₹540। A में बिक्री वाला हर लिया गया: (90/540) × 100% = (50/3)%। C में ₹90 राशि को प्रतिशत मान लिया गया है। D लागत के प्रतिशत के रूप में SP यानी 120% है; इसमें मूल 100% लागत भी शामिल है।
2 · D
हानि = ₹750 − ₹660 = ₹90। लागत से भाग दें: (90/750) × 100% = 12% (D)। जाँच: ₹750 का 88% = ₹660। A में ₹90 हानि की राशि को दर मान लिया गया है। B बिक्री से वापस मिली लागत का प्रतिशत है, खोई हुई लागत का नहीं। C में हानि को SP से भाग दिया गया: (90/660) × 100% = (150/11)%, जो गलत आधार है।
3 · A
छूट = ₹900 × 15/100 = ₹135 (A)। जाँच: 10% = ₹90 और 5% = ₹45; कुल ₹135। B बचा हुआ विक्रय मूल्य ₹900 − ₹135 = ₹765 है। C में दर के संख्यात्मक मान 15 को रुपये मान लिया गया है। D केवल 10% निकालता है और अतिरिक्त 5% छोड़ देता है।
4 · C
7.5% छूट पर MP का 92.5% बचता है। SP = ₹1,600 × 0.925 = ₹1,480 (C)। जाँच: छूट ₹120 है और ₹1,480 + ₹120 = ₹1,600। A छूट की राशि है। B में 7.5% को 75% मानकर केवल 25% बचाया गया है। D में MP से ₹120 घटाने के बजाय जोड़ दिए गए हैं।
5 · B
SP लागत का 115% है, इसलिए C = ₹1,035/1.15 = ₹900 (B)। जाँच: ₹900 का 15% = ₹135 और ₹900 + ₹135 = ₹1,035। A में SP का 15% घटाकर ₹1,035 × 0.85 = ₹879.75 निकाला गया है; इसका आधार गलत है। C में गुणक उलटने के बजाय SP को 1.15 से गुणा किया गया है। D, SP का 15% यानी ₹155.25 है, जो न लागत है और न वास्तविक लाभ।
6 · A
बिक्री में लागत का 92% बचता है। C = ₹828/0.92 = ₹900 (A)। जाँच: ₹900 का 8% = ₹72 और ₹900 − ₹72 = ₹828। B छोटी SP में उसका 8% जोड़कर ₹828 × 1.08 = ₹894.24 देता है। C में SP पर फिर 8% कमी की गई है। D में 0.08 से भाग देकर ₹828 को बची हुई बिक्री-राशि के बजाय हानि की राशि मान लिया गया है।
7 · D
कुल लागत = ₹950 + ₹50 = ₹1,000। लाभ = ₹1,120 − ₹1,000 = ₹120; (120/1,000) × 100% = 12% (D)। जाँच: ₹1,000 × 1.12 = ₹1,120। A में मरम्मत पूरी तरह छोड़ दी गई: (170/950) × 100% = (340/19)%। B में मरम्मत दो बार गिनी गई: ₹1,050 लागत और ₹70 लाभ से (20/3)% मिलता है। C में ₹170 को लाभ मानकर ₹1,000 से भाग दिया गया है; मरम्मत केवल हर में शामिल करने से गणना असंगत हो गई।
8 · C
SP, MP का 82% है। MP = ₹1,722/0.82 = ₹2,100 (C)। जाँच: ₹2,100 का 18% = ₹378; ₹2,100 − ₹378 = ₹1,722। A में SP पर फिर 18% छूट दी गई है। B में छोटी SP को आधार बनाकर उसका 18% जोड़ा गया है। D वास्तविक छूट की राशि ₹378 है, मूल अंकित मूल्य नहीं।
9 · A
MP = ₹500 × 1.30 = ₹650; SP = ₹650 × 0.80 = ₹520। लाभ ₹20 है, इसलिए (20/500) × 100% = 4% (A)। जाँच: 1.30 × 0.80 = 1.04। B अलग आधार वाली दरों को 30 − 20 से घटाता है। C, ₹130 छूट को लागत के 26% के रूप में लिखता है; यह अंतिम लाभ की दर नहीं है। D में SP लागत का 104% है और मूल 100% हटाया नहीं गया है।
10 · D
बचा हुआ गुणक 0.90 × 0.85 = 0.765 है। इसलिए 76.5% बचता है और 23.5% घटता है (D)। मूल ₹100 से जाँचें: ₹100 से ₹90 और फिर ₹76.50 होते हैं; कुल कमी ₹23.50 है। A दरें जोड़कर दोनों को मूल राशि पर लागू मानता है। B दोनों कमी होने के बावजूद दरें घटाता है। C छूट के बजाय बचा हुआ प्रतिशत बताता है।
11 · B
प्राप्तियाँ ₹300 × 1.20 = ₹360 और ₹700 × 0.90 = ₹630 हैं। कुल लागत ₹1,000 के सामने कुल SP ₹990 है, इसलिए ₹10 हानि यानी कुल लागत की 1% हानि है (B)। परिवर्तनों से जाँचें: ₹60 लाभ − ₹70 हानि = −₹10। A असमान लागतों के बावजूद 20% और −10% का औसत लेता है। C दरें सीधे घटाकर 10 प्रतिशत-अंक के अंतर को कुल लाभ की दर कहता है। D का परिमाण सही लेकिन दिशा गलत है: प्राप्तियाँ लागत से कम हैं।
12 · C
लाभ = ₹1,000 − ₹800 = ₹200। लागत-आधारित लाभ = (200/800) × 100% = 25%; बिक्री-आधारित मार्जिन = (200/1,000) × 100% = 20%, इसलिए C सही है। जाँच: ₹800 का 25% और ₹1,000 का 20% दोनों वही ₹200 लाभ देते हैं। A में आधारों का क्रम उलट दिया गया है। B दोनों प्रतिशतों में लागत लेता है। D दोनों में बिक्री लेता है। हर बदलने से तुलना बदलती है, लाभ की राशि नहीं।
स्रोत और पाठ की सीमा
इस पाठ की व्याख्याएँ, हल किए गए उदाहरण और अभ्यास-प्रश्न मौलिक हैं। नीचे दिए प्राथमिक पाठ्यपुस्तक खंड गणितीय विधियों और शब्दावली के आधार हैं।
- NIOS Secondary Mathematics 211, Percentage and Its Applications: §8.5.1, Profit and Loss, मुद्रित पृष्ठ 212–216 (PDF पृष्ठ 10–14); §8.5.2, Discount, मुद्रित पृष्ठ 216–219 (PDF पृष्ठ 14–17), §8.5.3 शुरू होने से पहले तक
- NCERT Ganita Prakash, Grade 8 Part II, Fractions in Disguise: §1.3 में पृष्ठ 16–18 पर मूल्यों की तुलना और पृष्ठ 19 की शुरुआत में बिक्री-आधारित तुलना; पृष्ठ 26 पर क्रमिक छूट और पृष्ठ 27 पर मूल्य-वृद्धि के बाद छूट। मुद्रित और PDF पृष्ठ संख्या समान हैं। स्रोत की लेखांकन और कर संबंधी चर्चा इस पाठ के बाहर है
- NCERT Mathematics Class VIII, Comparing Quantities, पुराना 2024–25 पुनर्मुद्रण: §7.2 और §7.2.1, मुद्रित पृष्ठ 82–83 (PDF पृष्ठ 4–5), अंकित मूल्य पर छूट तथा सटीक गणना और अनुमान के अंतर के लिए
- NIOS गणित 211, प्रतिशतता और इसके अनुप्रयोग: हिंदी शब्दावली के लिए §8.5.1, मुद्रित पृष्ठ 221–225 (PDF पृष्ठ 13–17), और §8.5.2, मुद्रित पृष्ठ 225–229 (PDF पृष्ठ 17–21), §8.5.3 शुरू होने से पहले तक
यह अनुपात प्रतिशत और व्यावसायिक तुलना मॉड्यूल का एक पाठ है। इसमें दी गई व्यावसायिक प्रतिशत-विधियाँ शामिल हैं; पूरा मॉड्यूल या RRB गणित का पूरा पाठ्यक्रम नहीं। यहाँ विधियाँ तय की गई लागत और स्पष्ट नाम वाले प्रतिशत-आधारों पर लागू हैं; कर, ब्याज और लेखांकन का विस्तार इस पाठ के बाहर है।
उदाहरण से समझें
कल्पना करें कि एक डिब्बे पर स्पष्ट नाम वाले तीन कार्ड लगे हैं। लागत वाला कार्ड बताता है कि प्रश्न के नियमों के अनुसार विक्रेता ने कितना खर्च किया। अंकित मूल्य वाला कार्ड ग्राहकों को दिखाया गया मूल्य बताता है। बिक्री वाला कार्ड वास्तव में प्राप्त राशि बताता है।
लाभ जाँचने के लिए बिक्री वाले कार्ड को लागत वाले कार्ड के पास रखें: लागत वाला कार्ड 100% का संदर्भ देता है। छूट जाँचने के लिए बिक्री वाले कार्ड को अंकित मूल्य वाले कार्ड के पास रखें: अंकित मूल्य वाला कार्ड 100% का संदर्भ देता है। एक ही बिक्री का मूल्य अंकित मूल्य से कम, फिर भी लागत से अधिक हो सकता है; इसलिए छूट के बाद भी लाभ हो सकता है।
कार्ड अलग भूमिकाएँ याद रखने में मदद करते हैं; वे सूत्र नहीं बनाते और यह भी नहीं बताते कि अंकित मूल्य हमेशा लागत से अधिक होगा। अगली छूट उस चरण पर पहुँचे मूल्य पर लगेगी और वस्तुओं के समूह में हर संबंधित लागत तथा बिक्री कार्ड की राशियाँ जोड़नी होंगी। इस उपमा में केवल बताए गए खर्च आते हैं, कोई छिपा हुआ खर्च नहीं।
सूत्र और नियम
आधार पहचानें
- CP: क्रय मूल्य; C: CP और स्पष्ट रूप से शामिल खर्च, हर खर्च एक बार
- MP: अंकित मूल्य; SP: दिए मॉडल में बिक्री की प्राप्ति
- सामान्य लाभ-हानि का आधार: C > 0
- छूट का आधार: MP > 0
- बिक्री-आधारित मार्जिन का आधार: SP > 0, केवल स्पष्ट रूप से माँगे जाने पर
गणना और उलटी गणना
- SP > C हो तो लाभ = SP − C; लाभ प्रतिशत = ((SP − C)/C) × 100%
- SP < C हो तो हानि = C − SP; हानि प्रतिशत = ((C − SP)/C) × 100%
- SP = C हो तो लाभ-हानि 0%
- p% लाभ पर: SP = C(1 + p/100); C = SP/(1 + p/100)
- l% हानि पर: SP = C(1 − l/100); C = SP/(1 − l/100), उलटी गणना में l < 100
- छूट की राशि = MP − SP; छूट प्रतिशत = ((MP − SP)/MP) × 100%
- d% छूट पर: SP = MP(1 − d/100); MP = SP/(1 − d/100), उलटी गणना में d < 100
- 0 ≤ l,d ≤ 100 होने पर आगे की हानि-छूट के गुणक गैर-ऋणात्मक हैं; 100% कमी से एक निश्चित मूल मान वापस नहीं पाया जा सकता
सही हर के साथ संयुक्त परिणाम
- C पर m% मूल्य-वृद्धि और फिर MP पर d% छूट: SP = C(1 + m/100)(1 − d/100)
- क्रमिक छूट d₁%, d₂%: बचा गुणक = (1 − d₁/100)(1 − d₂/100); समतुल्य छूट = (1 − बचा गुणक) × 100%
- समूह: पहले लागतें और प्राप्तियाँ जोड़ें, फिर कुल SP की तुलना कुल C से करें; प्रतिशत का हर कुल C है
- स्पष्ट बिक्री-आधारित मार्जिन = (लाभ/SP) × 100%; समूह में कुल लाभ और कुल SP लें
अंतिम जाँच
रुपये की राशि प्रतिशत नहीं है। केवल छूट से हानि सिद्ध नहीं होती। असमान लागत-आधारों पर दरों का साधारण औसत सही नहीं है। भाग देकर उलटें और उत्तर वापस रखकर जाँचें। आवर्ती परिणामों को सटीक भिन्न में रखें; सन्निकट दशमलव के साथ ≈ लगाएँ।
इस पाठ के नोट्स
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