गुणनखंड विभाज्यता और अभाज्य गुणनखंडन
आप क्या सीखेंगे
गणना की विधि चुनने से पहले धनात्मक पूर्णांक की संरचना पहचानना सीखें। आप गुणनखंड और गुणज निकालेंगे, अभाज्य तथा भाज्य संख्याओं में अंतर करेंगे, कारण सहित विभाज्यता की जाँच करेंगे और पूरा अभाज्य गुणनखंडन लिखेंगे। आप यह भी समझाएँगे कि दो संख्याओं से विभाज्यता कब उनके गुणनफल से विभाज्यता सुनिश्चित करती है।
यह पाठ संख्या पद्धति की वे बुनियादें बनाता है जिनका उपयोग आगे महत्तम समापवर्तक, लघुत्तम समापवर्त्य, भिन्न और वर्गमूल में होगा। इसमें विषयवार परीक्षा-अंकों का अनुमान नहीं है। अलग से न कहा गया हो तो यहाँ सभी गुणनखंड, गुणज, भाजक और जाँची जाने वाली संख्याएँ धनात्मक पूर्णांक हैं। इससे शून्य या ऋणात्मक गुणनखंडों की अलग परंपराएँ अनजाने में शामिल नहीं होतीं।
1 तीन उपयोगी बातें दोहराएँ
- 42 ÷ 6 = 7, क्योंकि 6 × 7 = 42। इसमें कोई शेषफल नहीं है।
- 3² = 3 × 3 = 9। घातांक बार-बार आए गुणनखंडों की गिनती बताता है।
- 43 = 6 × 7 + 1। यहाँ भागफल 7 और शेषफल 1 है, इसलिए 6 से 43 का निःशेष भाग नहीं होता।
धनात्मक पूर्णांकों के भाग में भाजक धनात्मक होता है और भागफल शून्य या धनात्मक पूर्णांक होता है। लिखें: भाज्य = भाजक × भागफल + शेषफल, जहाँ शेषफल पूर्णांक हो, कम से कम 0 और भाजक से छोटा हो। कोई पूर्णांक दूसरे को निःशेष भाग देता है या नहीं, यह जानने के लिए भिन्न या दशमलव जरूरी नहीं है। यह नया लगे तो 29 ÷ 5 को 29 = 5 × 5 + 4 और 30 ÷ 5 को 30 = 5 × 6 + 0 लिखकर जाँचें।
2 गुणनखंड भाग देता है और गुणज गुणा से बनता है
धनात्मक पूर्णांकों d और k के लिए n = d × k हो, तो d और k, n के गुणनखंड हैं तथा n इन दोनों का गुणज है। एक ही संबंध दोनों ओर से पढ़ सकते हैं, लेकिन शब्द आपस में बदले नहीं जा सकते: 6, 42 का गुणनखंड है; 42, 6 का गुणज है।
प्रत्येक धनात्मक पूर्णांक के गुणनखंड 1 और वह संख्या स्वयं होते हैं; 1 के लिए ये एक ही गुणनखंड हैं। उसके सभी धनात्मक गुणनखंड 1 से उस संख्या तक होते हैं, इसलिए उनकी संख्या सीमित है। उसके धनात्मक गुणज 1, 2, 3, … से गुणा करने पर मिलते हैं, इसलिए सूची का अंत नहीं होता। व्यापक पूर्णांक-परंपरा में शून्य भी गुणज है, लेकिन वह धनात्मक गुणज नहीं है और हमारी सूचियों में नहीं आएगा।
हल सहित उदाहरण 1 गुणनखंडों की पूरी सूची
48 के सभी धनात्मक गुणनखंड और पहले चार धनात्मक गुणज लिखिए।
- गुणनखंड-युग्म बनाएँ: 1 × 48, 2 × 24, 3 × 16, 4 × 12 और 6 × 8।
- जाँच में 5 सफल नहीं है, क्योंकि 48 = 5 × 9 + 3। जब छोटे गुणनखंड की जाँच करते-करते वह अपने जोड़ीदार से बड़ा होने लगे, तो अगले युग्म उलटे क्रम में दोहरेंगे। यहाँ 7 × 7 > 48 है, इसलिए ऐसा युग्म नहीं हो सकता जिसके दोनों गुणनखंड कम से कम 7 हों।
- हर युग्म के दोनों सदस्य लें: 1, 2, 3, 4, 6, 8, 12, 16, 24, 48।
- पहले चार धनात्मक गुणज हैं 48 × 1, 48 × 2, 48 × 3, 48 × 4, अर्थात 48, 96, 144, 192।
गलती की जाँच: युग्म का केवल एक सदस्य लिखने पर सही गुणनखंड छूट जाते हैं। किसी युग्म में एक ही गुणनखंड दो बार हो, जैसे 5 × 5 = 25, तो सूची में उसे एक ही बार लिखें।
3 अभाज्य एक संख्या का गुण है सह-अभाज्य दो संख्याओं का संबंध
अभाज्य संख्या के ठीक दो अलग धनात्मक गुणनखंड होते हैं: 1 और वह संख्या स्वयं। भाज्य संख्या 1 से बड़ा ऐसा पूर्णांक है जिसके दो से अधिक धनात्मक गुणनखंड हों। 1 इनमें से कोई नहीं है, क्योंकि उसका केवल एक धनात्मक गुणनखंड है। 2 ही एकमात्र सम अभाज्य संख्या है; उससे बड़ी प्रत्येक सम संख्या में अतिरिक्त गुणनखंड 2 होता है। हर विषम संख्या अभाज्य नहीं होती।
दो धनात्मक पूर्णांक सह-अभाज्य होते हैं जब उनका एकमात्र साझा धनात्मक गुणनखंड 1 हो। इसके लिए दोनों में से किसी संख्या का अभाज्य होना जरूरी नहीं है। साझा गुणनखंड वे हैं जो दोनों गुणनखंड-सूचियों में आते हैं। अगले पाठ में इनमें सबसे बड़े गुणनखंड से महत्तम समापवर्तक की विधि बनेगी।
हल सहित उदाहरण 2 दिखावट नहीं परिभाषा जाँचें
1, 2, 39 और 47 का वर्गीकरण करें तथा तय करें कि 8 और 15 सह-अभाज्य हैं या नहीं।
- 1 का एक धनात्मक गुणनखंड है, इसलिए यह न अभाज्य है, न भाज्य।
- 2 के गुणनखंड 1 और 2 हैं, इसलिए यह अभाज्य है।
- 39 = 3 × 13, इसलिए विषम होने पर भी यह भाज्य है।
- 47 के लिए देखें कि 7 × 7 > 47 है। 1 और 47 से अलग किसी गुणनखंड-युग्म में एक गुणनखंड 2 से 6 तक होना चाहिए। अभाज्य संख्याएँ 2, 3 और 5 जाँचना पर्याप्त है; 4 और 6 में 2 या 3 गुणनखंड हैं। इनमें से कोई 47 को निःशेष भाग नहीं देता, इसलिए 47 अभाज्य है।
- 8 के गुणनखंड 1, 2, 4, 8 तथा 15 के 1, 3, 5, 15 हैं। केवल 1 साझा है, इसलिए 8 और 15 सह-अभाज्य हैं, जबकि दोनों भाज्य हैं।
गलती की जाँच: “दोनों अभाज्य” और “सह-अभाज्य” को एक न समझें। 2 से विभाज्य न होना केवल एक जाँच है; इससे अभाज्य होना सिद्ध नहीं होता।
4 स्थानीय मान के कारण विभाज्यता की जाँच गणना बचाती है
विभाज्यता की जाँच बताती है कि शेषफल शून्य है या नहीं। वह सामान्यतः भागफल नहीं बताती। नीचे की जाँचें दशमलव अंकों में लिखे धनात्मक पूर्णांकों पर लागू हैं:
- 2: अंतिम अंक 0, 2, 4, 6 या 8 हो
- 5: अंतिम अंक 0 या 5 हो
- 10: अंतिम अंक 0 हो
- 4: अंतिम दो अंकों से बनी संख्या 4 से विभाज्य हो
- 8: अंतिम तीन अंकों से बनी संख्या 8 से विभाज्य हो
- 3: सभी अंकों का योग 3 से विभाज्य हो
- 9: सभी अंकों का योग 9 से विभाज्य हो
- 6: संख्या 2 और 3 दोनों से विभाज्य हो
- 11: एकांतर स्थानों के अंकों के योगों का अंतर 0 या 11 का धनात्मक अथवा ऋणात्मक गुणज हो
संख्या में दो या तीन से कम अंक हों, तो क्रमशः 4 या 8 के लिए पूरी संख्या जाँचें। अंतिम अंक-समूह 00 या 000 का मान 0 है और वह संबंधित विभाज्यता-जाँच में सफल है।
अंतिम अंक क्यों काम करते हैं
10 का हर पूरा समूह 2 और 5 से विभाज्य है, इसलिए अंतिम अंक की जाँच बचती है। 10 से विभाज्यता के लिए अंतिम अंक 0 होना चाहिए। इसी तरह 100, 4 से और 1000, 8 से विभाज्य है। बड़े स्थानों वाला भाग पहले से विभाज्य है, इसलिए केवल अंतिम दो या तीन अंकों वाला भाग शेषफल छोड़ सकता है।
हल सहित उदाहरण 3 अंतिम अंकों से 5312 की जाँच
2, 4, 5, 8 और 10 से विभाज्यता जाँचिए।
- अंतिम अंक 2 है: संख्या 2 से विभाज्य है, लेकिन 5 या 10 से नहीं।
- अंतिम दो अंकों से 12 = 4 × 3 बनता है। 5312 = 5300 + 12 और 5300, 4 से विभाज्य है, इसलिए पूरी संख्या 4 से विभाज्य है।
- अंतिम तीन अंकों से 312 = 8 × 39 बनता है। 5312 = 5000 + 312 और 5000, 8 से विभाज्य है, इसलिए संख्या 8 से विभाज्य है।
गलती की जाँच: केवल सम अंतिम अंक होने से 4 या 8 से विभाज्यता सिद्ध नहीं होती। जितने अंतिम अंकों की जाँच चाहिए, उतने लें।
अंक-योग क्यों काम करता है
7389 को 7 × 1000 + 3 × 100 + 8 × 10 + 9 लिखें। 1000, 100 और 10 में से प्रत्येक, 9 के किसी गुणज से 1 अधिक है। इनकी जगह 1 रखने पर केवल 9 के गुणज हटते हैं और 7 + 3 + 8 + 9 बचता है। इसलिए मूल संख्या और अंक-योग को 9 से भाग देने पर शेषफल समान रहता है। हटाई गई राशियाँ 3 के गुणज भी हैं, इसलिए 3 के लिए भी यही तर्क काम करता है।
हल सहित उदाहरण 4 अंक-योग और सम होने की जाँच साथ लगाएँ
7389 की 3, 9 और 6 से विभाज्यता जाँचिए।
- अंक-योग 7 + 3 + 8 + 9 = 27 है।
- 27, 3 और 9 दोनों से विभाज्य है, इसलिए 7389 भी 3 और 9 दोनों से विभाज्य है।
- 7389 विषम है, इसलिए 2 से विभाज्य नहीं है। अतः वह 6 से विभाज्य नहीं है।
6 के लिए दोनों जाँचें क्यों चाहिए? 6 = 2 × 3 में 2 और 3 अलग अभाज्य संख्याएँ हैं, इसलिए संख्या में दोनों गुणनखंड चाहिए। केवल 3 से विभाज्य संख्या 9 या 6 से विभाज्य हो, यह जरूरी नहीं। जैसे, 15, 3 से विभाज्य है लेकिन 9 या 6 से नहीं।
11 के लिए एकांतर अंक-योग क्यों काम करते हैं
10 की क्रमागत घातें बारी-बारी से 11 के किसी गुणज से 1 कम या 1 अधिक होती हैं: 10 = 11 − 1, 100 = 99 + 1, 1000 = 1001 − 1। इससे स्थानीय मान वाला योग एकांतर चिह्नों वाले अंक-योग में बदलता है। किसी भी सिरे से शुरू कर सकते हैं; अंतर का चिह्न उलटने से उसका 11 का गुणज होना नहीं बदलता।
हल सहित उदाहरण 5 छूटा अंक निकालें
कौन-सा अंक d, चार अंकों की संख्या 47d3 को 11 से विभाज्य बनाता है?
- अंक 0 से 9 तक का पूर्णांक होता है। एकांतर योगों का अंतर (4 + d) − (7 + 3) = d − 6 है।
- d के 0 से 9 तक होने पर यह अंतर −6 से 3 तक होता है। इस सीमा में 11 का एकमात्र गुणज 0 है।
- इसलिए d − 6 = 0, जिससे d = 6। जाँच: 4763 = 11 × 433।
गलती की जाँच: अंतर का 11 होना जरूरी नहीं। दिए अंकों से संभव होने पर 0, 11, −11, 22 और −22 सभी जाँच में सफल हैं।
5 अभाज्य गुणनखंडन से मूल गुणनखंड मिलते हैं
गुणनखंडन किसी संख्या को गुणनखंडों के गुणनफल में लिखता है। अभाज्य गुणनखंडन में हर गुणनखंड अभाज्य होना चाहिए। भाज्य गुणनखंडों को तब तक तोड़ें जब तक कोई भाज्य गुणनखंड न बचे, या बार-बार अभाज्य भाजकों से भाग दें। बार-बार आने वाले अभाज्य गुणनखंड को घात के रूप में लिख सकते हैं। 1 से बड़े हर पूर्णांक के अभाज्य गुणनखंड और उनकी बारंबारता, क्रम छोड़कर, निश्चित होते हैं।
हल सहित उदाहरण 6 गुणनखंडन पूरा करें और जाँचें
840 को अभाज्य संख्याओं की घातों के गुणनफल में लिखिए।
- सुविधाजनक गुणनखंडों में बाँटें: 840 = 84 × 10।
- आगे तोड़ें: 84 = 2 × 2 × 3 × 7 तथा 10 = 2 × 5।
- साथ लिखें: 840 = 2 × 2 × 2 × 3 × 5 × 7 = 2³ × 3 × 5 × 7।
- वापस गुणा करके जाँचें: 8 × 3 × 5 × 7 = 24 × 35 = 840।
840 = 8 × 105 से शुरू करने पर भी वही अंतिम अभाज्य गुणनखंड मिलते हैं। पहला विभाजन अलग हो सकता है; अंत में किसी अभाज्य गुणनखंड की गिनती अलग हो तो कोई गणना छूटी है। 4 × 210 पर न रुकें, क्योंकि 4 और 210 भाज्य हैं। अभाज्य गुणनखंडों की सूची में 1 न जोड़ें।
6 दो विभाज्यता शर्तों से गुणनफल की शर्त कब बनती है
सह-अभाज्य धनात्मक पूर्णांकों a और b के लिए, दोनों से विभाज्य संख्या a × b से भी विभाज्य होती है। अभाज्य गुणनखंडों की भाषा में, दोनों की जरूरतों में कोई अभाज्य गुणनखंड साझा नहीं है, इसलिए दोनों के पूरे गुणनखंड-समूह चाहिए। यदि a और b सह-अभाज्य नहीं हों, तो कुछ अभाज्य गुणनखंडों की जरूरतें साझा होती हैं। उनका गुणनफल ऐसे अतिरिक्त गुणनखंड माँग सकता है जो पहली दो शर्तों से निश्चित नहीं थे।
हल सहित उदाहरण 7 निश्चित निष्कर्ष सावधानी से लिखें
कोई संख्या 4 और 9 दोनों से विभाज्य है। क्या वह 36 से भी विभाज्य होगी? इसकी तुलना “4 और 6 दोनों से विभाज्य” की शर्त से करें।
- 4 = 2² और 9 = 3² में कोई साझा अभाज्य गुणनखंड नहीं है। दोनों से विभाज्य संख्या में 2 के दो और 3 के दो गुणनखंड होने चाहिए। इसलिए वह 2² × 3² = 36 से विभाज्य है।
- 4 = 2² तथा 6 = 2 × 3 में एक गुणनखंड 2 की जरूरत साझा है। 12, 4 और 6 दोनों से विभाज्य है, लेकिन 24 से नहीं। इसलिए गुणनफल से विभाज्यता निश्चित नहीं है।
- यह असंभव भी नहीं है: 48, 4, 6 और उनके गुणनफल 24 तीनों से विभाज्य है।
गलती की जाँच: “निश्चित नहीं” और “कभी संभव नहीं” अलग बातें हैं। शर्त साफ लिखें और किसी वास्तविक संख्या से कथन जाँचें। अगले पाठ में लघुत्तम समापवर्त्य बताएगा कि साझा जरूरतों को व्यवस्थित रूप से कैसे संभालते हैं।
7 स्वतंत्र अभ्यास
व्याख्या पढ़ने से पहले प्रत्येक प्रश्न में एक विकल्प चुनें। उत्तर का समर्थन करने वाला गुणनखंड-युग्म, अंकों की जाँच या प्रतिउदाहरण लिखें। यह निःशुल्क, बिना समय-सीमा का अध्ययन अभ्यास है। इसमें ऋणात्मक अंकन या उत्तीर्ण सीमा नहीं है और यह पूरे RRB सीबीटी का अनुकरण नहीं है।
- क्या 7, 91 का गुणनखंड है?
A. हाँ, क्योंकि 91 = 7 × 13 B. नहीं, क्योंकि 91 विषम है C. हाँ, क्योंकि 9 + 1 = 10 D. नहीं, क्योंकि 7 अभाज्य है
- दो सूचियों 6, 12, 18, 24, … तथा 10, 20, 30, 40, … में आने वाला सबसे छोटा धनात्मक साझा मान कौन-सा है?
A. 12 B. 20 C. 24 D. 30
- 1 अभाज्य संख्या क्यों नहीं है?
A. यह विषम है B. इसका केवल एक धनात्मक गुणनखंड है C. यह प्रत्येक धनात्मक पूर्णांक से विभाज्य है D. इसका कोई गुणनखंड नहीं है
- कौन-सा युग्म सह-अभाज्य है?
A. 9 और 15 B. 16 और 24 C. 9 और 16 D. 21 और 28
- 2356 के लिए कौन-सा कथन सही है?
A. 4 से विभाज्य, लेकिन 8 से नहीं B. 8 से विभाज्य, लेकिन 4 से नहीं C. 4 और 8 दोनों से विभाज्य D. न 4 से, न 8 से विभाज्य
- 6243 के लिए कौन-सा कथन सही है?
A. 9 से विभाज्य, लेकिन 3 से नहीं B. 3 और 9 दोनों से विभाज्य C. न 3 से, न 9 से विभाज्य D. 3 से विभाज्य, लेकिन 9 से नहीं
- कौन-सी संख्या 6 से विभाज्य है?
A. 4515 B. 4518 C. 4520 D. 4523
- 9185 पर 11 की जाँच लगाने से क्या निष्कर्ष मिलता है?
A. विभाज्य नहीं, क्योंकि अंक-योग 23 है B. विभाज्य नहीं, क्योंकि एकांतर योगों का अंतर 0 नहीं है C. विभाज्य है, क्योंकि (9 + 8) − (1 + 5) = 11 D. विभाज्य है, क्योंकि अंतिम अंक 5 है
- 1260 का अभाज्य गुणनखंडन कौन-सा है?
A. 2² × 3² × 5 × 7 B. 2 × 3² × 5 × 7 C. 2² × 3 × 5 × 7 D. 4 × 9 × 5 × 7
- चार अंकों की संख्या 52d4 को 9 से विभाज्य बनाने वाला सबसे छोटा अंक d क्या है?
A. 2 B. 5 C. 6 D. 7
- 40 के सभी धनात्मक गुणनखंड बताने वाली सूची है: 1, 2, 4, 5, 10, 20, 40। कौन-सा गुणनखंड छूटा है?
A. 6 B. 8 C. 12 D. 16
- एक धनात्मक पूर्णांक 6 और 9 दोनों से विभाज्य है। कौन-सा कथन हमेशा सही है?
A. वह 54 से अवश्य विभाज्य है B. वह 54 से विभाज्य नहीं हो सकता C. 54 से विभाज्यता निश्चित नहीं है; 18 एक प्रतिउदाहरण है D. वह अवश्य अभाज्य है
8 व्याख्या सहित उत्तरमाला
- A. 91 = 7 × 13, इसलिए 7 से भाग देने पर शेषफल शून्य है। विषम या अभाज्य होने से विभाज्यता नहीं रुकती। दिया अंक-योग 7 की विभाज्यता की जाँच नहीं है।
- D. सूचियाँ आगे बढ़ाएँ: 30 = 6 × 5 = 10 × 3। 10 के इससे छोटे धनात्मक गुणज 10 और 20 हैं; दोनों 6 के गुणज नहीं हैं।
- B. अभाज्य संख्या के ठीक दो अलग धनात्मक गुणनखंड होते हैं। 1 का एकमात्र धनात्मक गुणनखंड 1 है। यह न अभाज्य है, न भाज्य।
- C. 9 के धनात्मक गुणनखंड 1, 3, 9 और 16 के 1, 2, 4, 8, 16 हैं। केवल 1 साझा है। बाकी युग्मों में क्रमशः 3, 8 और 7 साझा गुणनखंड हैं।
- A. अंतिम दो अंकों से 56 = 4 × 14 बनता है। अंतिम तीन अंकों से 356 = 8 × 44 + 4 बनता है, इसलिए 8 की जाँच असफल है।
- D. अंक-योग 6 + 2 + 4 + 3 = 15 है। यह 3 से विभाज्य है, लेकिन 9 से नहीं।
- B. 4518 सम है और इसका अंक-योग 18 है, इसलिए 2 और 3 की दोनों जाँचें सही हैं। 4515 विषम है; 4520 का अंक-योग 11 है; 4523 विषम है और इसका अंक-योग 14 है।
- C. एकांतर योगों का अंतर 11 है, जो 11 का गुणज है। अंतर 0 हो सकता है, लेकिन 0 होना जरूरी नहीं। जाँच: 9185 = 11 × 835।
- A. 2² × 3² × 5 × 7 = 4 × 9 × 5 × 7 = 1260 और सभी आधार 2, 3, 5, 7 अभाज्य हैं। D का गुणनफल सही है, लेकिन उसमें भाज्य गुणनखंड 4 और 9 बचे हैं। B और C से क्रमशः 630 और 420 मिलते हैं।
- D. अंक-योग 11 + d है। d के 0 से 9 तक होने पर यह 11 से 20 के बीच है, जिसमें 9 का एकमात्र गुणज 18 है। इसलिए d = 7। जाँच: 5274 = 9 × 586।
- B. गुणनखंड-युग्म 5 × 8 = 40 से छूटा हुआ 8 मिलता है। पूरी सूची 1, 2, 4, 5, 8, 10, 20, 40 है।
- C. 18, 6 और 9 दोनों से विभाज्य है, लेकिन 54 से नहीं, इसलिए A गलत है। स्वयं 54 तीनों से विभाज्य है, इसलिए B भी गलत है। साझा गुणनखंड 3 होने से गुणनफल वाला निष्कर्ष निश्चित नहीं है।
स्रोत और अगला पाठ
IIT Kanpur SATHEE पर NCERT कक्षा 6 गणित का संख्याओं से संबंधित अध्याय, खंड 3.2–3.6, गुणनखंड, अभाज्य, सह-अभाज्य, विभाज्यता और अभाज्य गुणनखंडन के संदर्भ देते हैं; सारांश में सह-अभाज्य गुणनफल का नियम है। वेब संस्करण के लिए अप्रमाणित मुद्रित पृष्ठ के बजाय खंड का संदर्भ दिया गया है। NIOS गणित 211 अध्याय 2, खंड 2.2, मुद्रित पृष्ठ 44–45, अभाज्य घातों की लिखावट का संदर्भ है। यहाँ की व्याख्याएँ, चुनी हुई उदाहरण-संख्याएँ और अभ्यास मौलिक हैं तथा उनकी गणना अलग से जाँची गई है।
आगे जाने से पहले अंतिम अंकों वाली एक जाँच, अंक-योग वाली एक जाँच और अभाज्य तथा सह-अभाज्य में अंतर समझाएँ। गलती बची हो तो संबंधित खंड दोहराकर उसका प्रश्न फिर करें; कोई उत्तीर्ण शर्त नहीं है। अगला पाठ महत्तम समापवर्तक लघुत्तम समापवर्त्य और सही विधि का चयन इसी संरचना से समान समूह तथा दोहराव के प्रश्न हल करेगा।
उदाहरण से समझें
पैकेट और उन पर लिखी संख्या
कल्पना करें कि 35 गिनती की वस्तुएँ बराबर पैकेटों में रखनी हैं और कुछ बचना नहीं चाहिए। 5 के पैकेट बन सकते हैं, क्योंकि 5 × 7 = 35। 6 के पाँच पैकेट भरने पर 5 वस्तुएँ बचती हैं। स्वीकार्य पैकेट-आकार 35 के गुणनखंड हैं। इसके बजाय यदि 5 के पूरे पैकेट जोड़ते जाएँ, तो कुल 5, 10, 15, … मिलते हैं, जो 5 के गुणज हैं।
इससे निश्चित कुल को निःशेष बाँटने वाले आकार और निश्चित आकार दोहराकर बनाए गए कुल में अंतर समझ आता है। विभाज्यता की जाँच बताती है कि कोई पैकेट-आकार ठीक बैठता है या नहीं; वह अपने-आप पैकेटों की गिनती नहीं बताती। अभाज्य गुणनखंडन संख्या का विघटन है; इसका अर्थ यह नहीं कि असली पैकेटों का आकार अभाज्य ही होना चाहिए।
सूत्र और नियम
परिभाषाएँ और दायरा
इस पाठ में धनात्मक पूर्णांक तथा धनात्मक गुणनखंड और गुणज हैं। गुणनखंड निःशेष भाग देता है; गुणज गुणा से बनता है। अभाज्य के ठीक दो अलग धनात्मक गुणनखंड होते हैं। भाज्य संख्या 1 से बड़ी है और उसके दो से अधिक धनात्मक गुणनखंड होते हैं। 1 न अभाज्य है, न भाज्य; 2 एकमात्र सम अभाज्य है। सह-अभाज्य संख्याओं में केवल 1 साझा धनात्मक गुणनखंड है और दोनों भाज्य भी हो सकती हैं।
विभाज्यता की जाँच
- 2: अंतिम अंक सम
- 5: अंतिम अंक 0 या 5
- 10: अंतिम अंक 0
- 4: अंतिम दो अंकों से बनी संख्या 4 से विभाज्य
- 8: अंतिम तीन अंकों से बनी संख्या 8 से विभाज्य
- 3 या 9: अंक-योग क्रमशः 3 या 9 से विभाज्य
- 6: 2 और 3 की दोनों जाँचें सफल
- 11: एकांतर अंक-योगों का अंतर 0 या 11 का गुणज; ऋणात्मक अंतर भी स्वीकार्य
छोटी संख्या के लिए उसके सभी अंक लें। अंतिम अंक-समूह 00 या 000 का मान 0 है।
सत्यापन
हर युग्म के दोनों गुणनखंड लें और दोहराव हटाएँ। पूरे अभाज्य गुणनखंडन में केवल अभाज्य संख्याएँ हों; वापस गुणा करके मूल संख्या जाँचें और घात लिखने से पहले बार-बार आए गुणनखंड गिनें। दो सह-अभाज्य धनात्मक पूर्णांकों से विभाज्य संख्या उनके गुणनफल से भी विभाज्य होती है। सह-अभाज्यता न होने पर यह निष्कर्ष निश्चित नहीं है; असंभव नहीं है।
इस पाठ के नोट्स
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