संख्या पद्धति धन ऋण की गणना और BODMAS
आप क्या सीखेंगे
संख्याओं के प्रकार और संक्रियाओं के चिह्न सही पढ़ना, गणना के हर चरण का कारण बताना और यह पहचानना कि भाग कब अपरिभाषित है। पाठ के अंत तक आप:
- प्राकृत संख्याओं, पूर्ण संख्याओं, पूर्णांकों और परिमेय संख्याओं में अंतर कर सकेंगे तथा उनके आपसी संबंध पहचान सकेंगे
- धनात्मक और ऋणात्मक पूर्णांकों की तुलना कर सकेंगे तथा शून्य सहित उनकी गणना कर सकेंगे
- स्पष्ट रूप से लिखे व्यंजकों पर BODMAS लागू कर सकेंगे, जिसमें समान प्राथमिकता वाली संक्रियाएँ भी हों
- समझा सकेंगे कि −6² और (−6)² के मान अलग क्यों हैं और शून्य भाजक क्यों नहीं हो सकता
- छोटी परिस्थिति को कोष्ठक वाले व्यंजक में लिखकर उत्तर की जाँच कर सकेंगे
यह RRB Group D गणित पाठ्यक्रम में संख्याओं और गणना का पहला पाठ है। CEN 09/2025 के खंड 14.1 में संख्या पद्धति और BODMAS का उल्लेख है। यह पाठ परीक्षा में आने वाले प्रश्नों की संख्या का अनुमान नहीं लगाता और पूरे गणित पाठ्यक्रम को नहीं समेटता। भिन्नों की गणना, महत्तम समापवर्तक, लघुत्तम समापवर्त्य और वर्गमूल की विधियाँ आगे के पाठों में आएँगी।
1 शुरू करने से पहले
आप पूर्ण संख्याएँ तथा +, −, ×, ÷, =, < और > पढ़ सकें और एक संक्रिया वाले प्रश्न हल कर सकें। ऋणात्मक संख्याओं के नियम, घात और संक्रियाओं का क्रम नीचे सिखाया जाएगा; इन्हें पहले से जानना आवश्यक नहीं है। चरण साफ रखने के लिए कागज़ पर लिखें। व्याख्या देखने से पहले ये चार प्रश्न हल करें।
- 407 में 4 का स्थानीय मान क्या है?
- 68 + 27 का मान निकालिए।
- 9 × 6 का मान निकालिए।
- 84 ÷ 7 का मान निकालिए।
शुरुआती जाँच की व्याख्या और छोटा सुधार अभ्यास
- 400। अंक 4 सैकड़े के स्थान पर है: 407 = 400 + 0 + 7। अंक और उसका स्थानीय मान अलग होते हैं। दोबारा अभ्यास: 603 में 6 का स्थानीय मान 600 है; 251 में 5 का स्थानीय मान 50 है।
- 95। 27 को 20 + 7 में बाँटें: 68 + 20 + 7 = 88 + 7 = 95। दोबारा अभ्यास: 47 + 36 = 47 + 30 + 6 = 83; 82 − 25 = 82 − 20 − 5 = 57।
- 54। नौ के छह समूहों में 54 होते हैं। 10 × 6 − 6 = 60 − 6 = 54 से जाँचें। दोबारा अभ्यास: 8 × 7 = 10 × 7 − 2 × 7 = 56; 6 × 4 = 24।
- 12। भाग, गुणा की उलटी प्रक्रिया है: 7 × 12 = 84। दोबारा अभ्यास: 72 ÷ 8 = 9, क्योंकि 8 × 9 = 72; 96 ÷ 6 = 16, क्योंकि 6 × 16 = 96।
कोई प्रश्न कठिन लगा हो तो उसके दोबारा अभ्यास वाले उत्तर ढककर फिर हल करें, उसके बाद लंबे व्यंजक पर जाएँ। कोई उत्तीर्ण सीमा या समय-सीमा नहीं है। उद्देश्य यह पहचानना है कि किस आधारभूत कौशल पर ध्यान देना चाहिए।
2 संख्याओं के प्रकार आपस में जुड़े हैं
इस पाठ का नियम: प्राकृत संख्याएँ 1 से शुरू होंगी। गणित के कुछ संदर्भों में इस नाम में 0 भी शामिल होता है; यहाँ बताई गई परिभाषा अपनाएँ।
- प्राकृत संख्याएँ: 1, 2, 3, …, जिनसे गिनती करते हैं
- पूर्ण संख्याएँ: 0, 1, 2, 3, …
- पूर्णांक: …, −3, −2, −1, 0, 1, 2, 3, …
- परिमेय संख्याएँ: जिन्हें p/q के रूप में लिख सकते हैं, जहाँ p और q पूर्णांक हों तथा q ≠ 0 हो
प्रत्येक प्राकृत संख्या पूर्ण संख्या है; प्रत्येक पूर्ण संख्या पूर्णांक है; प्रत्येक पूर्णांक परिमेय है, क्योंकि उसे हर 1 के साथ लिख सकते हैं। इन कथनों को उलट देना हमेशा सही नहीं है। भिन्न के रूप में लिखी संख्या का मान पूर्णांक भी हो सकता है, इसलिए केवल लिखावट देखकर संख्या का प्रकार तय न करें।
आगे आप अपरिमेय संख्याएँ भी पढ़ेंगे, जिन्हें ऐसे p/q के रूप में नहीं लिखा जा सकता। परिमेय और अपरिमेय संख्याएँ मिलकर वास्तविक संख्याएँ बनाती हैं। अभी केवल परिमेय संख्या की लिखावट पहचानें; भिन्नों की संक्रियाएँ और अपरिमेय वर्गमूलों के उदाहरण आगे आएँगे।
हल सहित उदाहरण 1 संख्याओं का वर्गीकरण
0, −6, 9 और 5/2 को प्राकृत संख्या, पूर्ण संख्या, पूर्णांक और परिमेय संख्या के रूप में पहचानिए। एक संख्या एक से अधिक समूहों में हो सकती है।
- 0 = 0/1: पूर्ण संख्या, पूर्णांक और परिमेय संख्या
- −6 = −6/1: पूर्णांक और परिमेय संख्या
- 9 = 9/1: प्राकृत संख्या, पूर्ण संख्या, पूर्णांक और परिमेय संख्या
- 5/2: परिमेय संख्या; पूर्णांक नहीं
इस पाठ में प्राकृत संख्याएँ 1, 2, 3, … हैं। पूर्ण संख्याओं में 0 भी होता है। पूर्णांक p और q के लिए, जहाँ q ≠ 0 हो, p/q के रूप में लिखी जा सकने वाली संख्या परिमेय है। इसलिए प्रत्येक पूर्णांक परिमेय भी है। ये समूह एक-दूसरे से अलग नहीं हैं।
गलती की जाँच: 0 प्राकृत संख्या नहीं है; वह पूर्ण संख्या, पूर्णांक और परिमेय संख्या है। परिमेय संख्या का मान पूर्णांक भी हो सकता है।
3 धन ऋण संख्याओं के जोड़ और घटाव के लिए संख्या रेखा
संख्या रेखा पर इकाइयों के चिह्न बराबर दूरी पर होते हैं। दाईं ओर जाने पर संख्याएँ बढ़ती हैं: −9 < −3 < 0 < 4। शून्य न धनात्मक है, न ऋणात्मक। दो ऋणात्मक संख्याओं में शून्य के पास वाली संख्या बड़ी होती है: −3 > −9, जबकि 3 < 9 है।
धनात्मक पूर्णांक जोड़ने पर दाईं ओर और ऋणात्मक पूर्णांक जोड़ने पर बाईं ओर चलते हैं। समान चिह्न वाली दो संख्याएँ जोड़ते समय उनकी शून्य से दूरियाँ जोड़ें और वही चिह्न रखें: −4 + (−5) = −9। विपरीत चिह्न वाली संख्याओं में उनकी शून्य से दूरियों की तुलना करें: −9 + 14 का परिणाम शून्य से पाँच इकाई धनात्मक दिशा में है।
किसी अशून्य संख्या की विपरीत संख्या शून्य से उतनी ही दूर, लेकिन दूसरे चिह्न की होती है। 4 की विपरीत संख्या −4 और −4 की विपरीत संख्या 4 है। शून्य की विपरीत संख्या शून्य ही है: −0 = 0। किसी संख्या को घटाने का अर्थ उसकी विपरीत संख्या जोड़ना है। इससे a − b = a + (−b) का अर्थ समझ आता है; केवल देखकर ऋण चिह्न मिटाने की जरूरत नहीं पड़ती।
हल सहित उदाहरण 2 धन ऋण संख्याओं का जोड़ और घटाव
−9 + 14 और −7 − (−4) का मान निकालिए। दिशा या चिह्न में बदलाव का कारण बताइए।
- −9 + 14 = 5
- −7 − (−4) = −7 + 4 = −3
पहले व्यंजक में −9 से 14 इकाई दाईं ओर चलने पर 5 मिलता है। दूसरे में −4 घटाने का अर्थ उसके विपरीत चिह्न वाली संख्या +4 जोड़ना है। यह नियम किसी संख्या को घटाने पर लागू होता है; पास-पास दिखने वाले हर दो ऋण चिह्नों को मिटाने का नियम नहीं है।
गलती की जाँच: −7 − (−4) का मान −11 नहीं है। घटाने के चिह्न और संख्या −4 के चिह्न को अलग-अलग पहचानें।
4 गुणा और भाग में चिह्नों का कारण समझें
गुणा में समान चिह्न होने पर गुणनफल धनात्मक और अलग चिह्न होने पर ऋणात्मक होता है। शून्य से गुणा करने पर शून्य मिलता है। कम परिचित स्थिति को एक छोटे क्रम से समझें:
- (−3) × 2 = −6
- (−3) × 1 = −3
- (−3) × 0 = 0
- (−3) × (−1) = 3
- (−3) × (−2) = 6
दूसरा गुणनखंड हर बार 1 घटता है और गुणनफल 3 बढ़ता है। इस क्रम को जारी रखने से वितरण नियम बना रहता है और समझ आता है कि ऋणात्मक संख्या का ऋणात्मक संख्या से गुणा धनात्मक क्यों है। इसे दो ऋणात्मक संख्याओं को जोड़ने का नियम न समझें।
भाग को गुणा से जाँचते हैं: यदि a ÷ b = c है, तो b × c = a होना चाहिए, जहाँ b ≠ 0 है। इसलिए −24 ÷ (−4) = 6, क्योंकि (−4) × 6 = −24। अशून्य संख्याओं के भाग में समान या अलग चिह्नों का नियम गुणा जैसा ही है।
जब गुणा और भाग बिना अतिरिक्त कोष्ठक के साथ आएँ, तो बाएँ से दाएँ करें; किसी एक चिह्न की प्राथमिकता अधिक नहीं है। यह नीचे दिए पूरे संक्रिया-क्रम का एक हिस्सा है।
हल सहित उदाहरण 3 गुणा और भाग के चिह्न
(−8) × 3 ÷ (−4) का मान निकालिए।
- (−8) × 3 ÷ (−4) = −24 ÷ (−4) = 6
- जाँच: 6 × (−4) = −24
अलग-अलग चिह्नों वाली संख्याओं का गुणनफल ऋणात्मक होता है। दो ऋणात्मक संख्याओं का भागफल धनात्मक होता है। गुणा और भाग का संक्रिया-क्रम में स्थान समान है, इसलिए यहाँ बाईं ओर की संक्रिया पहले करें।
गलती की जाँच: पहली संख्या ऋणात्मक होने के कारण ही अंतिम उत्तर को ऋणात्मक न मानें।
5 घात का मान निकालने से पहले आधार पढ़ें
धनात्मक पूर्णांक घातांक बताता है कि समान आधार को कितने गुणनखंडों के रूप में गुणा करना है। जैसे, 4³ = 4 × 4 × 4 = 64। आधार 4 और घातांक 3 है। इसका अर्थ 4 × 3 नहीं है। वर्ग में दो समान गुणनखंड होते हैं: 6² = 6 × 6।
ऋणात्मक संख्या की घात लिखते समय कोष्ठक पूरे आधार को स्पष्ट करते हैं। कोष्ठक के बिना किसी धनात्मक संख्या के वर्ग से पहले लगा ऋण चिह्न उस वर्ग की विपरीत संख्या लेने को कहता है।
हल सहित उदाहरण 4 घात का आधार और पहले लगा ऋण चिह्न
−6², (−6)² और −(6²) की तुलना कीजिए।
- −6² = −(6 × 6) = −36
- (−6)² = (−6) × (−6) = 36
- −(6²) = −36
−6² में केवल 6 का वर्ग लेकर उसका विपरीत चिह्न वाला मान लिया जाता है। (−6)² में कोष्ठक के कारण आधार −6 है, इसलिए दोनों गुणनखंड −6 हैं। संख्या के पहले लगा ऋण चिह्न ऋणात्मक घातांक नहीं है।
गलती की जाँच: “वर्ग वाला हर व्यंजक धनात्मक होता है” गलत है। पहले पहचानें कि किस संख्या या पूरे व्यंजक का वर्ग लिया जा रहा है।
6 BODMAS में चार स्तर हैं छह अलग प्राथमिकताएँ नहीं
BODMAS कोष्ठक, घात, भाग, गुणा, जोड़ और घटाव याद रखने का एक तरीका है। यहाँ “orders” का अर्थ घात है; मूलों का परिचय आगे होगा। यह विधि अपनाएँ:
- समूह: सबसे अंदर के कोष्ठक से शुरू करें और उसके भीतर भी यही संक्रिया-क्रम अपनाएँ। सभी आकार के कोष्ठक समूह बनाते हैं; उनका एक-दूसरे के अंदर होना महत्वपूर्ण है, आकार नहीं।
- घात: आधार सही पहचानकर घात का मान निकालें।
- गुणा और भाग: दोनों की प्राथमिकता समान है। इस स्तर पर बची संक्रियाएँ बाएँ से दाएँ करें।
- जोड़ और घटाव: दोनों की प्राथमिकता भी समान है। इस स्तर पर भी बाएँ से दाएँ करें।
जैसे, 5 + 2 × 6 = 5 + 12 = 17। जोड़ पहले करने पर आप (5 + 2) × 6 = 42 निकालेंगे, जो एक अलग व्यंजक है। अधिक प्राथमिकता वाली संक्रियाओं से पहले हर चिह्न पर बस बाएँ से दाएँ गणना न करें।
एक ही प्राथमिकता स्तर पर “बाएँ से दाएँ” गणना की सुरक्षित विधि है। आगे आप सही नियमों से व्यंजक दोबारा लिख सकेंगे, जैसे चिह्न सहित पदों को सुविधाजनक क्रम में जोड़ना। लेकिन हर पद और उसका चिह्न सुरक्षित रखना होगा। इस नियम से घटाव या भाग की संख्याओं का क्रम मनमाने ढंग से बदलने की अनुमति नहीं मिलती।
हल सहित उदाहरण 5 समान प्राथमिकता की गलतियाँ सुधारें
एक विद्यार्थी कहता है कि 42 ÷ 7 × 3 = 2 और 23 − 8 + 4 = 11। दोनों गणनाएँ सही कीजिए।
- 42 ÷ 7 × 3 = 6 × 3 = 18
- 23 − 8 + 4 = 15 + 4 = 19
पहले गलत उत्तर में बिना कोष्ठक के ही 7 × 3 को एक साथ भाजक मान लिया गया है। दूसरे में 8 और 4 को पहले जोड़कर घटाया गया है। भाग और गुणा की प्राथमिकता समान है; जोड़ और घटाव की प्राथमिकता भी समान है। हर स्तर की संक्रियाएँ बाएँ से दाएँ करें।
गलती की जाँच: BODMAS का अर्थ यह नहीं है कि हर गुणा से पहले सारे भाग करें या हर घटाव से पहले सारे जोड़ करें।
हल सहित उदाहरण 6 एक के अंदर एक कोष्ठक और घात
54 − [18 ÷ 3 + (5 − 2)²] का मान निकालिए।
- 54 − [18 ÷ 3 + (5 − 2)²]
- = 54 − [18 ÷ 3 + 3²]
- = 54 − [6 + 9]
- = 54 − 15
- = 39
सबसे अंदर के कोष्ठक से शुरू करें। वर्ग कोष्ठक के भीतर जोड़ से पहले घात और भाग का मान निकालें। कोष्ठक का आकार कोई स्थायी प्राथमिकता तय नहीं करता; यह देखें कि कौन-सा समूह किसके अंदर है।
गलती की जाँच: 3² का अर्थ 3 × 3 है, 3 × 2 नहीं। वर्ग कोष्ठक के पहले का घटाने का चिह्न न छोड़ें।
लिखावट स्पष्ट रखें
इस पाठ में गुणा के लिए × लिखें। बिना कोष्ठक की तिरछी भाग-रेखाओं की शृंखला के बजाय (18 + 6) ÷ (5 − 2) लिखें। इसका मान 24 ÷ 3 = 8 है। भिन्न की क्षैतिज रेखा भी उसके ऊपर के पूरे अंश और नीचे के पूरे हर को समूह बनाती है; भाग से पहले दोनों समूहों का मान निकलता है। एक पंक्ति में भिन्न लिखते समय एक से अधिक पद वाले अंश या हर के कोष्ठक बनाए रखें।
यहाँ 6 ÷ 2(1 + 2) जैसी पहेलियाँ नहीं हैं, जिनमें भाग और बिना × चिह्न के गुणा को अलग-अलग तरह से पढ़ा जा सकता है। उद्देश्य स्पष्ट व्यंजक का मान निकालना है, लेखक का आशय अनुमान से पकड़ना नहीं। आगे भिन्नों के पाठ में “योग का आधा” जैसे वाक्यांश को गुणन में बदलते समय पूरे योग को कोष्ठक में रखेंगे। “of” शब्द के लिए कोई अतिरिक्त सार्वभौमिक प्राथमिकता न बनाएँ।
7 जाँचें कि भाग परिभाषित है
भाजक अशून्य हो तो भाज्य शून्य हो सकता है: 0 ÷ 9 = 0, क्योंकि 9 × 0 = 0। लेकिन भाजक शून्य नहीं हो सकता। कोष्ठक वाले भाजक का मान हमेशा भाग से पहले निकालें; लिखी हुई कोई संख्या शून्य न होने पर भी पूरे समूह का मान शून्य हो सकता है।
हल सहित उदाहरण 7 शून्य और अपरिभाषित भाग
इनमें कौन-से व्यंजक परिभाषित हैं: 0 ÷ 9, 9 ÷ 0, 0 ÷ 0 और 10 ÷ (7 − 7)?
- 0 ÷ 9 = 0
- 9 ÷ 0: अपरिभाषित
- 0 ÷ 0: अपरिभाषित
- 10 ÷ (7 − 7) = 10 ÷ 0: अपरिभाषित
भाग में ऐसा एक निश्चित भागफल चाहिए जिसे भाजक से गुणा करने पर भाज्य मिले। किसी संख्या को 0 से गुणा करने पर 9 नहीं मिलता। प्रत्येक संख्या को 0 से गुणा करने पर 0 मिलता है, इसलिए 0 ÷ 0 से एक निश्चित उत्तर नहीं चुना जा सकता। कोष्ठक में लिखे भाजक का मान भाग करने से पहले निकालें।
गलती की जाँच: शून्य से भाग करने का उत्तर न शून्य है, न ही वास्तविक संख्याओं में “अनंत” नाम का कोई भागफल।
8 परिस्थिति के अनुसार समूह बनाएँ
गणना से पहले लिखें कि हर गुणा या जोड़ किसकी गिनती कर रहा है। पैसों के मान एक ही इकाई में रखें। फिर देखें कि उत्तर उचित है या नहीं: धनात्मक खरीद-कीमत घटाने पर वापस मिलने वाले रुपये दिए गए रुपये से अधिक नहीं होने चाहिए।
हल सहित उदाहरण 8 परिस्थिति से व्यंजक और उत्तर की जाँच
चार नोटबुकों में से प्रत्येक की कीमत ₹27 है। एक पेन की कीमत ₹13 है। ₹150 देने पर कितने रुपये वापस मिलेंगे?
- पूरी कीमत = 4 × 27 + 13 = 108 + 13 = ₹121
- वापस मिलने वाले रुपये = 150 − (4 × 27 + 13) = 150 − 121 = ₹29
- जाँच: 121 + 29 = 150
पहले पूरी कीमत को एक समूह में लिखें, फिर उसे दिए गए रुपये से घटाएँ। चार की संख्या केवल नोटबुकों के लिए है; एक पेन की कीमत को चार से गुणा नहीं करना है।
गलती की जाँच: 150 − 4 × 27 + 13 में पेन की कीमत घटने के बजाय वापस जुड़ जाती है।
9 स्वतंत्र अभ्यास
उत्तरमाला देखने से पहले सभी बारह प्रश्न हल करें। प्रत्येक में ठीक एक विकल्प चुनें और कम से कम एक कारण या गणना लिखें। ये मौलिक अध्ययन प्रश्न हैं; कोई समय-सीमा, ऋणात्मक अंकन या उत्तीर्ण सीमा नहीं है। यह पूरे RRB सीबीटी का अनुकरण नहीं है।
- इनमें कौन-सी संख्या परिमेय है, लेकिन पूर्णांक नहीं है?
A. −8 B. 0 C. 13/4 D. 11
- कौन-सी संख्या सबसे बड़ी है?
A. −11 B. −4 C. −9 D. −7
- −13 + 8 का मान निकालिए।
A. −5 B. 5 C. −21 D. 21
- 6 − (−9) का मान निकालिए।
A. −15 B. −3 C. 3 D. 15
- (−7) × (−4) का मान निकालिए।
A. −28 B. 28 C. −11 D. 11
- (−42) ÷ 7 का मान निकालिए।
A. −6 B. 6 C. −35 D. 35
- 63 ÷ 9 × 2 का मान निकालिए।
A. 3 B. 7 C. 14 D. 18
- 31 − 12 + 5 का मान निकालिए।
A. 14 B. 18 C. 22 D. 24
- क्रमशः −5² और (−5)² के मान क्या हैं?
A. −25, 25 B. 25, 25 C. −25, −25 D. 25, −25
- 47 − [24 ÷ 6 + (7 − 4)²] का मान निकालिए।
A. 30 B. 34 C. 38 D. 42
- 8 ÷ (3 − 3) का मान निकालिए।
A. 0 B. 1 C. 8 D. अपरिभाषित
- तीन नोटबुकों में से प्रत्येक की कीमत ₹32 है और एक पेन की कीमत ₹17 है। ₹150 में से कितने रुपये वापस मिलेंगे?
A. ₹27 B. ₹33 C. ₹37 D. ₹47
10 व्याख्या सहित उत्तरमाला
- C। 13/4 का अंश पूर्णांक और हर अशून्य पूर्णांक है, लेकिन इसका मान पूर्णांक नहीं है। बाकी तीनों पूर्णांक हैं और इसलिए परिमेय भी हैं; प्रश्न की दोनों शर्तें पूरी होनी चाहिए।
- B। संख्या रेखा पर −4 इन संख्याओं में सबसे दाईं ओर है। ऋणात्मक संख्याओं में शून्य के अधिक पास वाली संख्या बड़ी होती है। चिह्नों को छोड़कर केवल 11 और 4 की तुलना करने पर निष्कर्ष उलट जाएगा।
- A। −13 से 8 इकाई दाईं ओर चलने पर −5 मिलता है।
- D। 6 − (−9) = 6 + 9 = 15। ऋणात्मक संख्या घटाने पर उसकी विपरीत संख्या जुड़ती है।
- B। दो ऋणात्मक गुणनखंडों का गुणनफल धनात्मक होता है: 7 × 4 = 28।
- A। चिह्न अलग हैं, इसलिए भागफल ऋणात्मक है; 42 ÷ 7 = 6।
- C। भाग और गुणा की समान प्राथमिकता है। बाएँ से दाएँ: 63 ÷ 9 × 2 = 7 × 2 = 14। भाजक 9 को पहले 2 से गुणा करने पर एक अलग व्यंजक बन जाएगा, जिसमें दोनों भाजक के समूह में हैं।
- D। जोड़ और घटाव को बाएँ से दाएँ करने पर 31 − 12 + 5 = 19 + 5 = 24। 12 और 5 को पहले जोड़ने पर व्यंजक 31 − (12 + 5) बन जाएगा, जिसका मान 14 है।
- A। −5² = −(5 × 5) = −25; (−5)² = (−5) × (−5) = 25। दूसरे व्यंजक में पूरा −5 आधार है।
- B। पहले 7 − 4 = 3। फिर 47 − [24 ÷ 6 + 3²] = 47 − [4 + 9] = 34। घातांक सबसे अंदर के पूरे समूह 7 − 4 के मान पर लागू होता है।
- D। भाजक 3 − 3 = 0 है। शून्य से भाग अपरिभाषित है।
- C। 150 − (3 × 32 + 17) = 150 − (96 + 17) = ₹37। जाँच: 113 + 37 = 150। पेन एक ही है, इसलिए ₹17 को तीन से गुणा नहीं करना है।
11 गलतियों से तय करें कि क्या दोहराना है
- संख्या के प्रकार या तुलना में गलती: खंड 2–3 दोहराएँ
- संक्रिया में चिह्न की गलती: खंड 3–4 दोहराएँ
- गलत आधार या घातांक: खंड 5 दोहराएँ
- गलत अगली संक्रिया या छूटे कोष्ठक: खंड 6 दोहराएँ
- शून्य भाजक की गलती: खंड 7 दोहराएँ
- परिस्थिति के लिए गलत व्यंजक: खंड 8 दोहराएँ
उत्तर ढककर छूटा प्रश्न फिर हल करें और बताएँ कि गलत चरण से गणना क्यों बदल जाती है। आगे जाने से पहले अपने शब्दों में समझाएँ कि 42 ÷ 7 × 3 का मान 18 क्यों है, −6² और (−6)² अलग क्यों हैं और 0 ÷ 0 का मान क्यों नहीं दिया जाता। कोई अंक-आधारित प्रवेश शर्त नहीं है।
स्रोत और अगला पाठ
पाठ की व्याख्या और अभ्यास मौलिक हैं। अवधारणाओं और गणितीय लिखावट के संदर्भ:
- RRB CEN 09/2025, खंड 14.1, मुद्रित पृष्ठ 28: गणित के विषयों का दायरा; यहाँ विषयवार प्रश्न-संख्या का दावा नहीं है
- NIOS गणित 211 अध्याय 1, खंड 1.2–1.3, पृष्ठ 4–9 तथा खंड 1.7, पृष्ठ 15–21: संख्याओं के समूह और गणना; शब्दावली के लिए हिंदी अध्याय 1
- NIOS गणित 211 अध्याय 2, खंड 2.1, पृष्ठ 40–43: आधार और धनात्मक पूर्णांक घातांक
- NCERT गणित प्रकाश कक्षा 7 अध्याय 2, पुनर्मुद्रण 2026–27, खंड 2.2, पृष्ठ 26–35: समूह, चिह्न सहित पद और व्यंजक का अर्थ
- OpenStax Prealgebra 2e खंड 2.1, संक्रियाओं के क्रम वाला भाग: समान प्राथमिकता; खंड 10.2, उदाहरण 10.13: पहले लगा ऋण चिह्न और कोष्ठक में ऋणात्मक आधार। ये गणितीय लिखावट के पूरक संदर्भ हैं, RRB के पाठ्यक्रम दस्तावेज़ नहीं
अगला पाठ गुणनखंड विभाज्यता और अभाज्य गुणनखंडन बताएगा कि किसी धनात्मक पूर्ण संख्या को निःशेष कैसे बाँटते हैं और अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में कैसे लिखते हैं। भर्ती की तिथियाँ या पात्रता संबंधी सलाह इस पाठ का हिस्सा नहीं है।
उदाहरण से समझें
कोष्ठक पूरे समूह की सीमा बताते हैं
दो ट्रे की कल्पना करें। हर ट्रे में तीन कप हैं और एक अतिरिक्त कप ट्रे के बाहर रखा है। कुल कप 2 × 3 + 1 = 7 हैं। अब निर्देश बदलकर कहे कि “दोनों में से हर ट्रे में तीन कप और एक अतिरिक्त कप है”, तो कुल कप 2 × (3 + 1) = 8 होंगे।
कोष्ठक बताते हैं कि हर ट्रे के लिए कौन-सा पूरा समूह दोहराया जा रहा है। वे व्यंजक की सजावट नहीं हैं; वे बदलते हैं कि किस मात्रा को गुणा करना है। शब्द पढ़ें, समूह पहचानें और फिर गणना करें। नोटबुक वाले उदाहरण में कोष्ठक पूरी कीमत को समूह बनाते हैं, जिसे दिए गए रुपये से घटाना है।
यह तुलना समूह समझाती है, गणना के सभी नियम नहीं। संक्रियाओं के क्रम और ऋण चिह्नों के लिए पाठ के नियम तथा हल किए उदाहरण अपनाएँ।
सूत्र और नियम
संख्याओं के प्रकार
इस पाठ में प्राकृत संख्याएँ 1 से शुरू हैं। पूर्ण संख्याओं में 0 भी है। पूर्णांक हैं …, −3, −2, −1, 0, 1, 2, 3, …। पूर्णांक p,q और q ≠ 0 के लिए p/q परिमेय संख्या है। प्रत्येक पूर्णांक परिमेय है; हर परिमेय संख्या पूर्णांक नहीं है। शून्य न धनात्मक है, न ऋणात्मक।
धन ऋण की गणना
- जोड़: समान चिह्न → शून्य से दूरियाँ जोड़कर वही चिह्न रखें; विपरीत चिह्न → दूरियाँ घटाकर अधिक दूरी वाली संख्या का चिह्न रखें; समान दूरी वाली विपरीत संख्याओं का योग 0 है
- घटाव: विपरीत संख्या जोड़ें, a − b = a + (−b); 0 की विपरीत संख्या 0 है
- अशून्य संख्याओं का गुणा या भाग: समान चिह्न → धनात्मक; अलग चिह्न → ऋणात्मक
- 0 से गुणा करने पर 0; 0 से भाग अपरिभाषित है, जिसमें 0 ÷ 0 भी शामिल है
- भाग की जाँच: भाजक × भागफल = भाज्य
संक्रिया-क्रम के चार स्तर
- सबसे अंदर का समूह, जिसके भीतर भी यही नियम लगते हैं
- आधार पहचानकर घात
- × और ÷ एक साथ, बाएँ से दाएँ
- + और − एक साथ, बाएँ से दाएँ
−6² = −36, लेकिन (−6)² = 36। A² का अर्थ A × A है, A × 2 नहीं। कोष्ठक का आकार प्राथमिकता तय नहीं करता; देखें कि कौन-सा किसके अंदर है। × स्पष्ट लिखें और एक से अधिक पद वाले हर को कोष्ठक में रखें। भिन्न की क्षैतिज रेखा पूरे अंश और पूरे हर को समूह बनाती है।
उत्तर स्वीकार करने से पहले
चिह्न, समान प्राथमिकता के चरण, हर कोष्ठक में शामिल पूरा व्यंजक और भाजक के 0 होने की संभावना जाँचें। शब्द-प्रश्न में इकाई जाँचें और उत्तर को परिस्थिति में वापस रखकर देखें। अध्ययन अभ्यास के अंकों से कोई उत्तीर्ण शर्त लागू नहीं होती।
इस पाठ के नोट्स
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