वर्ग वर्गमूल और उचित अनुमान
आप क्या सीखेंगे
वर्गमूल के उत्तर में सही मान के साथ सही अर्थ भी जरूरी है। इस पाठ में आप:
- वर्ग करना, मुख्य वर्गमूल निकालना और वर्ग वाली समीकरण के हल ढूँढ़ना अलग-अलग पहचानेंगे
- असंभव पूर्ण वर्गों को पहचानेंगे और अभाज्य गुणनखंडों के जोड़ों से पूर्ण वर्ग की पुष्टि करेंगे
- सबसे छोटा धनात्मक पूर्णांक गुणक या सटीक भाजक निकालेंगे, जिससे पूर्ण वर्ग पूर्णांक मिले
- अंकों के जोड़े बनाकर दीर्घ भाग विधि से पूर्णांकों और दशमलव संख्याओं के वर्गमूल निकालेंगे
- भिन्नों के सटीक वर्गमूल निकालेंगे, अन्य वर्गमूलों की सीमाएँ तय करेंगे और अनुमान को स्पष्ट लिखेंगे
RRB CEN 09/2025 के §14.1 में गणित के पाठ्यक्रम में वर्गमूल दिया गया है। यह आधारभूत पाठ परीक्षा में किसी विषय के प्रश्नों की संख्या का अनुमान नहीं लगाता। इसमें पिछले पाठों का अभाज्य गुणनखंडन और भिन्न तथा दशमलव का ज्ञान काम आएगा। करणी के उन्नत नियम, हर का परिमेयकरण और घनमूल इस पाठ के बाहर हैं।
1 शुरू करने से पहले
प्रतिक्रिया पढ़ने से पहले ये तीन बातें याद करके हल करें।
- 4² और (−4)² के मान निकालिए।
- 180 को अभाज्य गुणनखंडों के गुणनफल के रूप में लिखिए।
- 0.49 को ऐसे भिन्न में लिखिए जिसका अंश और हर पूर्णांक हों।
प्रतिक्रिया और दोबारा अभ्यास
- दोनों मान 16 हैं: 4 × 4 = 16 और (−4) × (−4) = 16। वर्ग का अर्थ संख्या को उसी संख्या से गुणा करना है, 2 से नहीं। दोबारा देखें: 7² = 49 और (−7)² = 49। याद रखें कि बिना कोष्ठक के −7² का मान −49 है।
- 180 = 18 × 10 = 2² × 3² × 5। हर अभाज्य गुणनखंड कितनी बार आया है, यह गिनें। दोबारा अभ्यास: 72 = 2³ × 3²।
- 0.49 = 49/100, क्योंकि अंतिम अंक शतांश के स्थान पर है। दोबारा देखें: 0.09 = 9/100 और 0.009 = 9/1000; शून्य अंकों के स्थान तय करते हैं।
किसी प्रश्न में कठिनाई हुई हो, तो दीर्घ भाग शुरू करने से पहले संबंधित पिछला पाठ दोहराएँ। यहाँ समय-सीमा या उत्तीर्ण होने की न्यूनतम अंक-शर्त नहीं है।
2 वर्ग और वर्गमूल चिह्न का अर्थ
वास्तविक संख्या a का वर्ग a² = a × a है। वास्तविक संख्या का वर्ग कभी ऋणात्मक नहीं होता: अशून्य धनात्मक या ऋणात्मक संख्या का वर्ग धनात्मक होता है, और 0² = 0। इस पाठ में पूर्ण वर्ग पूर्णांक वह अऋणात्मक पूर्णांक है जिसे किसी पूर्णांक n के लिए n² लिखा जा सके। इसलिए 0 और 1 भी पूर्ण वर्ग हैं। अऋणात्मक का अर्थ शून्य या धनात्मक है।
a ≥ 0 के लिए √a उस एक अऋणात्मक संख्या को दर्शाता है जिसका वर्ग a है। इसे मुख्य वर्गमूल कहते हैं। √ चिह्न दोनों चिह्न वाले उत्तर नहीं माँगता। ऋणात्मक संख्या का वास्तविक वर्गमूल नहीं होता, क्योंकि किसी वास्तविक संख्या का वर्ग ऋणात्मक नहीं हो सकता; सम्मिश्र संख्याएँ हमारे पाठ के बाहर हैं।
हल किया उदाहरण 1 एक मुख्य वर्गमूल और दो संभव हल
√169 की तुलना x² = 169 के सभी वास्तविक हलों से करें। √0 भी निकालें।
- 13 × 13 = 169, इसलिए √169 = 13।
- (−13) × (−13) = 169 भी है। इसलिए x² = 169 के हल x = 13 और x = −13 हैं। संक्षेप में x = ±13 लिखने का अर्थ यही दो विकल्प हैं।
- √0 = 0। समीकरण x² = 0 का केवल एक हल x = 0 है; −0 और 0 एक ही संख्या हैं।
गलती की जाँच: √169 = ±13 लिखना गलत है। समीकरण के दो हल हैं, लेकिन मुख्य वर्गमूल चिह्न का एक मान है। इसी तरह √((−6)²) = √36 = 6 है, −6 नहीं।
3 अंतिम अंक से असंभव पूर्ण वर्ग हटाएँ
इकाई के हर संभव अंक 0 से 9 का वर्ग करें। प्राप्त वर्गों के इकाई अंक इसी क्रम में 0, 1, 4, 9, 6, 5, 6, 9, 4, 1 हैं। दहाई या उससे बड़े स्थान गुणनफल के इकाई अंक को नहीं बदलते। इसलिए किसी पूर्णांक का वर्ग केवल 0, 1, 4, 5, 6 या 9 पर समाप्त हो सकता है।
जिस पूर्णांक का अंतिम अंक 2, 3, 7 या 8 है, वह पूर्ण वर्ग नहीं है। स्वीकार्य अंतिम अंक होना जरूरी है, लेकिन इतना पर्याप्त नहीं है: इसका अर्थ केवल यह है कि इस छोटी जाँच ने संख्या को अस्वीकार नहीं किया। पुष्टि के लिए वर्ग करके, गुणनखंडन करके या क्रमागत पूर्णांकों के वर्गों से तुलना करके देखना होगा।
हल किया उदाहरण 2 स्वीकार्य अंतिम अंक प्रमाण नहीं है
क्या 746 और 728 पूर्ण वर्ग हो सकते हैं?
- 728 का अंतिम अंक 8 है, इसलिए वह पूर्ण वर्ग नहीं है।
- 746 का अंतिम अंक 6 है, जो स्वीकार्य है। इससे अकेले अंतिम निर्णय नहीं मिलता।
- 27² = 729 और 28² = 784। चूँकि 729 < 746 < 784, किसी पूर्णांक का वर्ग 746 नहीं हो सकता। यह भी पूर्ण वर्ग नहीं है।
अऋणात्मक पूर्णांक बढ़ने पर उनके वर्ग भी बढ़ते हैं। दो क्रमागत पूर्णांकों के बीच कोई अन्य पूर्णांक नहीं होता जिसका वर्ग इस अंतराल में आ सके।
गलती की जाँच: स्वीकार्य अंतिम अंक का अर्थ “निश्चित रूप से पूर्ण वर्ग” नहीं है। पूर्णांकों की इस जाँच को दशमलव संख्या के अंतिम लिखे अंक पर सीधे न लगाएँ।
4 अभाज्य गुणनखंडों के जोड़ों से पूर्णांक वर्गमूल
किसी धनात्मक पूर्णांक का वर्ग करते समय उसका पूरा अभाज्य गुणनखंडन दोहरता है। इसलिए हर अभाज्य गुणनखंड सम संख्या में आता है। उलटे, यदि हर अभाज्य गुणनखंड का जोड़ा बन जाए, तो प्रत्येक जोड़े से एक गुणनखंड लेने पर ऐसी पूर्णांक संख्या मिलती है जिसका वर्ग मूल संख्या है। यह जाँच भी है और वर्गमूल निकालने की विधि भी। पूर्णांक 1 का वर्गमूल 1 है। 0 का अभाज्य गुणनखंडन करने की कोशिश न करें; उसका वर्गमूल अलग से 0 है।
हल किया उदाहरण 3 हर जोड़े से एक गुणनखंड
अभाज्य गुणनखंडन से √1764 निकालिए।
- 1764 = 4 × 441 = (2 × 2) × (3 × 3) × (7 × 7)।
- हर अभाज्य गुणनखंड का साथी है: 1764 = 2² × 3² × 7²।
- प्रत्येक जोड़े से एक लें: √1764 = 2 × 3 × 7 = 42।
- गुणा करके जाँचें: 42 × 42 = 1764।
गलती की जाँच: हर जोड़े से एक गुणनखंड लेना है, पूरी सूची से केवल एक नहीं। कोई अभाज्य गुणनखंड बिना जोड़े के बचे, तो धनात्मक पूर्णांक पूर्ण वर्ग नहीं है। उसका वास्तविक वर्गमूल फिर भी है, लेकिन वह पूर्णांक नहीं है।
5 विषम गिनती को सबसे छोटे गुणक या भाजक से बदलें
यहाँ गुणक और भाजक धनात्मक पूर्णांक होने चाहिए। भाजक से मूल संख्या पूरी तरह विभाजित होनी चाहिए और भागफल पूर्ण वर्ग पूर्णांक होना चाहिए।
धनात्मक पूर्णांक N के गुणनखंडन में उन अभाज्य गुणनखंडों को पहचानें जिनकी गिनती विषम है। ऐसे हर अभाज्य गुणनखंड की एक-एक प्रति लेकर उनका गुणनफल बनाएँ।
- N को इस गुणनफल से गुणा करने पर हर विषम गिनती में 1 जुड़ता है और सभी गिनतियाँ सम हो जाती हैं।
- N को इस गुणनफल से भाग देने पर हर विषम गिनती से 1 घटता है और सभी गिनतियाँ सम हो जाती हैं।
यही सबसे छोटा धनात्मक विकल्प क्यों है? हर विषम गिनती को सम करने के लिए उस अभाज्य गुणनखंड की विषम संख्या में प्रतियाँ जोड़नी या हटानी होंगी; कम से कम एक प्रति जरूरी है। इसलिए शर्त पूरी करने वाले हर गुणक या भाजक में ऊपर बना गुणनफल अवश्य शामिल होगा। अतिरिक्त प्रतियाँ या दूसरे अभाज्य गुणनखंड लेने से उससे छोटा धनात्मक पूर्णांक नहीं मिल सकता। यदि N पहले से पूर्ण वर्ग है, तो सबसे छोटा गुणक और भाजक दोनों 1 हैं।
हल किया उदाहरण 4 सबसे छोटा गुणक और सबसे छोटा भाजक
540 के लिए दोनों निकालिए।
- 540 = 54 × 10 = 2² × 3³ × 5।
- 2 की गिनती सम है। 3 और 5 की गिनती विषम है, इसलिए आवश्यक गुणनफल 3 × 5 = 15 है।
- गुणा: 540 × 15 = 2² × 3⁴ × 5² = 8100 = 90²।
- भाग: 540 ÷ 15 = 2² × 3² = 36 = 6²।
- दोनों उत्तर 15 हैं, लेकिन प्राप्त पूर्ण वर्ग अलग हैं। गुणा और भाग की जाँच से दोनों परिणाम पुष्ट होते हैं।
गलती की जाँच: 540 से भाग देने पर 1 मिलता है, जो पूर्ण वर्ग है, लेकिन 540 सबसे छोटा उपयुक्त भाजक नहीं है। केवल 3 या केवल 5 लेने पर दूसरे अभाज्य गुणनखंड की विषम गिनती बची रहेगी।
रुककर जाँचें
98 के लिए सबसे छोटा धनात्मक गुणक क्या है? 98 का सबसे छोटा धनात्मक भाजक क्या है जिससे भाग देने पर पूर्ण वर्ग पूर्णांक मिले?
प्रतिक्रिया: 98 = 2 × 7²। दोनों उत्तर 2 हैं: 98 × 2 = 196 = 14² और 98 ÷ 2 = 49 = 7²। “सबसे छोटा” गुणक या भाजक होना है, प्राप्त पूर्ण वर्ग नहीं।
6 दीर्घ भाग से एक-एक अंक करके वर्गमूल
दीर्घ भाग विधि में पहले सारे अभाज्य गुणनखंड निकालने की जरूरत नहीं होती। दी गई संख्या के अंकों का हर जोड़ा वर्गमूल का एक अंक देता है। नीचे सभी चरण लिखे हैं; समझने के लिए चित्र जरूरी नहीं है।
गणना से पहले अंकों के जोड़े बनाएँ
दशमलव बिंदु से शुरू करें। दशमलव बिंदु न लिखा हो, तो इकाई के अंक से शुरू करें।
- पूर्णांक भाग में बाईं ओर चलते हुए जोड़े बनाएँ। केवल सबसे बाएँ समूह में एक अंक हो सकता है: 4624 के समूह 46 | 24 और 10404 के समूह 1 | 04 | 04 हैं।
- दशमलव के बाद दाईं ओर चलते हुए जोड़े बनाएँ: 5.76 के समूह 5 . 76 हैं। बिंदु अब भी दशमलव बिंदु है; खड़ी रेखाएँ केवल जोड़े अलग करती हैं, भाग की संक्रिया नहीं दिखातीं।
- दशमलव के बाद अंत में एक अंक बच जाए, तो उसके दाईं ओर शून्य लगाएँ: 354.7 = 354.70, जिसके समूह 3 | 54 . 70 हैं। यह शून्य पूर्णांक भाग में कभी न जोड़ें।
- दिए दशमलव अंकों से आगे गणना करने के लिए दशमलव के बाद शून्यों के जोड़े लगाएँ। जैसे 70 = 70.00 00 … । प्रत्येक अतिरिक्त जोड़ा वर्गमूल का एक और दशमलव स्थान देता है।
हर बार अपनाने वाले चरण
- सबसे बाएँ पूर्णांक समूह के लिए वह सबसे बड़ा अंक चुनें जिसका वर्ग उस समूह से अधिक न हो। वर्गमूल का यह पहला अंक लिखें और उसका वर्ग घटाएँ। 1 से छोटी संख्या के लिए पूर्णांक समूह 0 है और वर्गमूल का पहला अंक 0 होगा।
- अगला जोड़ा नीचे लाएँ। पुराना शेष r और अगला जोड़ा p हो, तो नई गणना संख्या 100 × r + p है। 04 नीचे लाने का अर्थ शेष को 100 से गुणा करके 4 जोड़ना है; शुरू का शून्य दोनों स्थान सुरक्षित रखता है।
- अब तक मिले वर्गमूल के अंकों को दशमलव बिंदु हटाकर एक पूर्णांक q की तरह पढ़ें। अगला अंक d, 0 से 9 में से चुनें। सबसे बड़ा ऐसा d लें जिसके लिए (20 × q + d) × d नई गणना संख्या से अधिक न हो।
- इस गुणनफल को घटाएँ। वर्गमूल के अंकों के अंत में d लिखें, इसलिए अब तक के अंकों से बनी नई संख्या 10 × q + d होगी। अगले चरण में यही पूरी नई संख्या इस्तेमाल करें। सभी आवश्यक जोड़ों तक प्रक्रिया दोहराएँ।
- पूर्णांक समूहों से मिले अंकों के तुरंत बाद वर्गमूल में दशमलव बिंदु रखें, अर्थात पहले दशमलव जोड़े की गणना से पहले। कोई अंक 0 आए, तो भी लिखें; उसका स्थान न छोड़ें।
चरण 3 में गुणा नए एकल अंक d से करना है, पूरे नए वर्गमूल से नहीं। q = 6 और d = 8 होने पर घटाने वाला गुणनफल 128 × 8 है, 128 × 68 नहीं।
जाँच वाला गुणनफल क्यों काम करता है
मान लें कि अब तक के अंकों से बनने वाली अगली पूर्णांक संख्या 10 × q + d है। इसे स्वयं से गुणा करने पर:
(10 × q + d)² = 100 × q² + 20 × q × d + d² = 100 × q² + (20 × q + d) × d।
अगले दो अंक नीचे लाने पर पहले तक संसाधित संख्या को 100 से गुणा करके अगला जोड़ा जोड़ा जाता है। पुराने वर्ग का योगदान अब 100 × q² है। नए अंक के लिए अतिरिक्त आवश्यक भाग ठीक (20 × q + d) × d है। इससे अंकों के जोड़े बनाने और जाँच वाले गुणनफल का कारण समझ आता है; “दुगुना करके अंक जोड़ें” केवल रटी हुई तरकीब नहीं रह जाती।
हल किया उदाहरण 5 पूर्णांक और दशमलव की दीर्घ भाग विधि
A √4624 निकालिए
समूह: 46 | 24।
- पहला समूह 46: 6² = 36 ≤ 46, जबकि 7² = 49 > 46। वर्गमूल का पहला अंक = 6; शेष = 46 − 36 = 10।
- 24 नीचे लाएँ: नई गणना संख्या = 100 × 10 + 24 = 1024।
- अब तक के वर्गमूल अंकों से बनी संख्या q = 6 है, इसलिए (120 + d) × d जाँचें। अंक 8 से 128 × 8 = 1024 मिलता है; अंक 9 से 129 × 9 = 1161 मिलता है, जो बड़ा है। 8 चुनें।
- नए अंक मिलकर 68 बने; शेष = 1024 − 1024 = 0। सभी जोड़े इस्तेमाल हो गए, इसलिए सटीक मान √4624 = 68 है। जाँच: 68² = 4624।
B √5.76 निकालिए
समूह: 5 . 76।
- पहला समूह 5: 2² = 4 ≤ 5 < 3²। पहला वर्गमूल अंक = 2; शेष = 1।
- सभी पूर्णांक समूह इस्तेमाल हो गए, इसलिए 2 के बाद दशमलव बिंदु रखें।
- 76 नीचे लाएँ: नई गणना संख्या = 100 × 1 + 76 = 176। अब तक के वर्गमूल अंकों से बनी संख्या q = 2 है।
- d = 4 चुनें, क्योंकि (40 + 4) × 4 = 176, जबकि (40 + 5) × 5 = 225 बड़ा है। शेष 0 है।
- दशमलव का यह जोड़ा वर्गमूल के दशांश स्थान का अंक 4 देता है, इसलिए √5.76 = 2.4। जाँच: 2.4 × 2.4 = 5.76।
C शून्य अंक भी लिखें और अब तक के सभी अंक इस्तेमाल करें
√10404 के लिए समूह 1 | 04 | 04 लें।
- पहले समूह 1 से वर्गमूल का पहला अंक 1 और शेष 0 मिलता है।
- 04 नीचे लाने पर 4 मिलता है। अंक 1 के लिए (20 + 1) × 1 = 21 > 4 चाहिए, इसलिए अंक 0 चुनें। अब तक के वर्गमूल अंक 10 लिखें और शेष 4 रखें।
- अगला 04 नीचे लाएँ: नई गणना संख्या = 100 × 4 + 4 = 404। अब q = 10 है, न कि 1 या केवल अंतिम अंक 0।
- अंक 2 चुनें: (200 + 2) × 2 = 404। अंक 3 से 609 मिलता, जो बड़ा है। वर्गमूल = 102 और शेष = 0; जाँचें कि 102² = 10404।
यदि अशून्य जोड़े बाकी हैं, तो शेष 0 होते ही रुकना सही नहीं है। भाग C में पहला शेष शून्य था, लेकिन दोनों 04 समूह बाकी थे और जरूरी थे। यदि शेष शून्य है और बाकी सभी जोड़े 00 हैं, तो उन्हें भी आगे लें या वर्गमूल के संबंधित स्थानों पर शून्य भरें। सटीक परिणाम तभी लें जब सभी आवश्यक स्थानों का हिसाब हो गया हो और शेष शून्य हो।
दशमलव का स्थान जाँचें
उत्तर पढ़ने से पहले 0.0009 के अंकों के जोड़े बनाएँ।
प्रतिक्रिया: 0 . 00 | 09। पूर्णांक समूह से वर्गमूल 0 मिलता है। पहला दशमलव जोड़ा 00 दशांश अंक 0 देता है। अगले जोड़े 09 के लिए q = 0 और d = 3 से (0 + 3) × 3 = 9 मिलता है, इसलिए शतांश अंक 3 है। अतः √0.0009 = 0.03; (0.03)² = 0.0009। दशांश स्थान का शून्य छोड़ने पर गलत उत्तर 0.3 मिल जाएगा।
यदि शेष अशून्य बना रहे, तो और जोड़े लेने से आगे के अंक मिलेंगे; बीच में रोका गया दशमलव अपने-आप सटीक वर्गमूल नहीं है। किसी दशमलव स्थान तक सन्निकट मान लिखने के लिए कम से कम उसके अगले अंक तक निकालें और पिछले पाठ का पूर्णांकन नियम लगाएँ।
7 सटीक भिन्न और उचित सीमाएँ
a ≥ 0 और b > 0 के लिए √(a/b) = √a/√b। सरल सटीक प्रश्नों में पहले भिन्न को सरल करके देखें कि अंश और हर पूर्ण वर्ग हैं या नहीं। यह नियम इसलिए सही है क्योंकि दाईं ओर के अऋणात्मक भागफल का वर्ग a/b है। विशेष रूप से, √(49/100) = 7/10 = 0.7, इसलिए √0.49 = 0.7 है, 0.07 नहीं।
हल किया उदाहरण 6 सटीक मान या सीमाओं वाला अनुमान
A √(81/196) निकालिए
81 = 9² और 196 = 14²। इसलिए √(81/196) = 9/14। जाँच: (9/14) × (9/14) = 81/196। वर्गमूल में अंश और हर दोनों का योगदान है।
B √70 की सीमाएँ तय करके अनुमान सुधारें
- 8² = 64 < 70 < 81 = 9², इसलिए 8 < √70 < 9। ये क्रमागत पूर्णांकों की सीमाएँ हैं।
- इस अंतराल का अर्थ यह नहीं कि वर्गमूल इसका मध्य मान 8.5 है। वास्तव में 8.5² = 72.25 है, 70 नहीं।
- अधिक संकीर्ण अंतराल के लिए 8.3² = 68.89 < 70 और 8.4² = 70.56 > 70, इसलिए 8.3 < √70 < 8.4।
- निकटतम दशांश तक पूर्णांकन करने के लिए मध्य मान 8.35 जाँचें: 8.35² = 69.7225 < 70, इसलिए √70, 8.35 से बड़ा है। अतः निकटतम दशांश तक √70 ≈ 8.4। सन्निकट मान के लिए ≈ लिखें, = नहीं।
परिमेय और अपरिमेय का संक्षिप्त अंतर
परिमेय संख्या को पूर्णांकों p और q, जहाँ q ≠ 0 है, के लिए p/q लिखा जा सकता है। उसका दशमलव प्रसार सांत होता है या आगे जाकर अंकों का निश्चित खंड बार-बार दोहराता है। अपरिमेय संख्या इस रूप में नहीं लिखी जा सकती; उसका दशमलव न समाप्त होता है, न आगे जाकर कोई निश्चित खंड लगातार दोहराता है।
अऋणात्मक पूर्णांक N के लिए √N तभी परिमेय है जब N पूर्ण वर्ग है। इसलिए √81 = 9 परिमेय है, जबकि √70 अपरिमेय है। छोटा-सा कारण परिचित अभाज्य गुणनखंडों से समझें: यदि न्यूनतम रूप में √N = p/q और q > 0 है, तो p² = N × q²। q को भाग देने वाला कोई भी अभाज्य गुणनखंड p² को, और इसलिए p को भी, भाग देगा। यह p/q के न्यूनतम रूप में होने के विरुद्ध है। इसलिए q = 1 होना चाहिए; वर्गमूल पूर्णांक होगा और N उसी का वर्ग होगा। N = 0 के लिए वर्गमूल सीधे 0 है।
कैलकुलेटर पर √70 के सीमित अंक दिखना केवल सन्निकट मान है, सटीक दशमलव के समाप्त होने का प्रमाण नहीं। हर वर्गमूल अपरिमेय नहीं है: √0.49 = 0.7 और √(81/196) = 9/14 परिमेय हैं।
8 गुणनफल और योग के नियम अलग हैं
अऋणात्मक वास्तविक a और b के लिए √(a × b) = √a × √b। भाग के लिए b > 0 भी जरूरी है। प्रस्तावित अऋणात्मक परिणाम का वर्ग करके इन नियमों की जाँच होती है। इनसे योग के लिए ऐसा ही नियम नहीं मिलता।
हल किया उदाहरण 7 योग का वर्गमूल बाँटने की गलती
क्या √(16 + 9) = √16 + √9 है?
- बाईं ओर: √(16 + 9) = √25 = 5।
- दाईं ओर: √16 + √9 = 4 + 3 = 7।
- चूँकि 5 ≠ 7, दावा गलत है। वर्गमूल चिह्न के अंदर पूरा योग पहले निकालना चाहिए।
गलती की जाँच: एक प्रतिउदाहरण किसी सामान्य नियम को गलत सिद्ध कर देता है। इसका अर्थ यह नहीं कि “दोनों पक्ष कभी बराबर नहीं हो सकते”: एक पद शून्य हो, तो वे बराबर होते हैं। बात यह है कि हर अऋणात्मक जोड़ी के लिए योग का वर्गमूल इस तरह अलग करने का नियम नहीं है।
9 स्वतंत्र अभ्यास
उत्तरमाला से पहले सभी बारह प्रश्न करें। हर प्रश्न में एक विकल्प चुनें और एक कारण या गणना लिखें। यह मौलिक सीखने का अभ्यास है, जिसमें समय-सीमा, ऋणात्मक अंक या उत्तीर्ण होने की न्यूनतम अंक-शर्त नहीं है; यह पूरा RRB CBT अभ्यास-पत्र नहीं है।
- 23² का मान क्या है?
A. 46 B. 69 C. 529 D. 523
- मुख्य वर्गमूल √225 का मान क्या है?
A. −15 B. 15 C. ±15 D. 25
- √0 का मान क्या है?
A. −1 B. 1 C. अपरिभाषित D. 0
- कौन-सा इकाई अंक तुरंत बता देता है कि पूर्णांक पूर्ण वर्ग नहीं है?
A. 2 B. 4 C. 6 D. 9
- अभाज्य गुणनखंडन से √2025 निकालिए।
A. 40 B. 45 C. 55 D. 90
- 588 को किस सबसे छोटे धनात्मक पूर्णांक से गुणा करने पर पूर्ण वर्ग पूर्णांक मिलेगा?
A. 2 B. 6 C. 12 D. 3
- 720 का कौन-सा सबसे छोटा धनात्मक पूर्णांक भाजक पूर्ण वर्ग पूर्णांक भागफल देता है?
A. 5 B. 10 C. 15 D. 20
- अंकों के जोड़ों की दीर्घ भाग विधि से √10.24 निकालिए।
A. 0.32 B. 32 C. 3.2 D. 5.12
- √(121/144) निकालिए।
A. 11/144 B. 121/12 C. 12/11 D. 11/12
- √150 किन क्रमागत पूर्णांकों के बीच है?
A. 10 < √150 < 11 B. 12 < √150 < 13 C. 14 < √150 < 15 D. 150 < √150 < 151
- कौन-सा विकल्प √64 और x² = 64 के सभी वास्तविक हल सही देता है?
A. √64 = ±8; x = 8 या −8 B. √64 = −8; केवल x = 8 C. √64 = 8; x = 8 या −8 D. √64 = 8; केवल x = 8
- दावे √(25 + 144) = √25 + √144 की सही गणना और सही निष्कर्ष कौन-से हैं?
A. गलत: बायाँ पक्ष 13, दायाँ पक्ष 17 B. सही: दोनों पक्ष 17 C. सही: दोनों पक्ष 13 D. गलत: बायाँ पक्ष 169, दायाँ पक्ष 17
10 कारण सहित उत्तरमाला
- C. 23² का अर्थ 23 × 23 है। 23 × 20 = 460 और 23 × 3 = 69 निकालकर जोड़ें: 460 + 69 = 529। 2 से गुणा करने पर 46 मिलता है; यह वर्ग करना नहीं है।
- B. 15² = 225 और 15 अऋणात्मक है, इसलिए √225 = 15। दोनों चिह्न वाले मान x² = 225 के हल हैं, लेकिन वर्गमूल चिह्न केवल मुख्य वर्गमूल दर्शाता है।
- D. 0² = 0, इसलिए √0 = 0। शून्य का वर्गमूल परिभाषित है। इसे शून्य से भाग देने से न मिलाएँ; शून्य से भाग अपरिभाषित है।
- A. 0 से 9 तक के अंकों का वर्ग करने पर केवल 0, 1, 4, 5, 6 और 9 इकाई अंक मिलते हैं। अंतिम अंक 2 असंभव है। स्वीकार्य अंतिम अंक 4, 6 और 9 अकेले पूर्ण वर्ग होने का प्रमाण नहीं हैं।
- B. 2025 = 81 × 25 = 3⁴ × 5²। हर जोड़े से एक गुणनखंड लेने पर 3² × 5 = 45 मिलता है। जाँच: 45² = 2025।
- D. 588 = 2² × 3 × 7²। केवल अभाज्य गुणनखंड 3 की गिनती विषम है, इसलिए सबसे छोटा गुणक 3 है। तब 588 × 3 = 1764 = 42²। गुणक 12 से भी पूर्ण वर्ग मिलता है, लेकिन वह सबसे छोटा नहीं है।
- A. 720 = 2⁴ × 3² × 5। सभी अभाज्य गुणनखंडों की गिनती सम करने के लिए एक 5 हटाएँ: 720 ÷ 5 = 144 = 12²। हर उपयुक्त भाजक में 5 शामिल होना जरूरी है, इसलिए 5 सबसे छोटा है।
- C. समूह 10 . 24 बनाएँ। पहले अंक 3 से 3² = 9 और शेष 1 मिलता है। वर्गमूल में 3 के बाद दशमलव बिंदु रखें। 24 नीचे लाने पर 124 मिलता है; 2 चुनें, क्योंकि (60 + 2) × 2 = 124। अतः √10.24 = 3.2; जाँचें कि 3.2² = 10.24।
- D. अंश 11² और हर 12² है, इसलिए अऋणात्मक वर्गमूल 11/12 है। अंश और हर दोनों का वर्ग करके जाँच होती है। 121/144, 1 से छोटा है, इसलिए उसका वर्गमूल भी 1 से छोटा है।
- B. 12² = 144 < 150 < 169 = 13², इसलिए 12 < √150 < 13। इन सीमाओं का अर्थ यह नहीं कि वर्गमूल 12.5 है; 12.5 का वर्ग 156.25 होता है।
- C. वर्गमूल चिह्न अऋणात्मक मूल 8 चुनता है। 8² और (−8)² दोनों 64 हैं, इसलिए समीकरण के दोनों हल हैं। केवल 8 लिखने पर एक वास्तविक हल छूट जाता है।
- A. बायाँ पक्ष √169 = 13 है, जबकि दायाँ पक्ष 5 + 12 = 17 है। 13 ≠ 17 होने से दावा गलत है। बाईं ओर वर्गमूल के अंदर जोड़ना अंतिम चरण नहीं है; योग का वर्गमूल भी निकालना है।
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बोलकर समझाएँ कि स्वीकार्य अंतिम अंक पर्याप्त क्यों नहीं है, जाँच वाले भाजक को पूरे नए वर्गमूल के बजाय नए अंक से गुणा क्यों करते हैं, और दशमलव बिंदु या शून्य अंक क्यों नहीं छोड़ सकते। अभ्यास की कोई गलती बाकी हो, तो संबंधित हल किया उदाहरण दोहराएँ और वर्ग करके अपना उत्तर जाँचें।
11 स्रोत और सीमा
- RRB CEN 09/2025 §14.1, गणित पाठ्यक्रम: https://www.rrbthiruvananthapuram.gov.in/assets/pdf/FinalDetailed_CEN_092025_Level1updated_on_30012026.pdf#page=28। इसका उपयोग विषय की सीमा के लिए हुआ है; आधिकारिक खोज-सूची में पाठ देखा गया, लेकिन इस स्रोत-जाँच में PDF फ़ाइल प्रमाणित नहीं हुई।
- IIT Kanpur SATHEE पर NCERT कक्षा VIII गणित अध्याय 5: §§5.1–5.2, 5.5.1, 5.5.3–5.5.4 और 5.6, वर्ग, वर्गमूल के अर्थ, गुणनखंडन और अंकों के जोड़ों की विधि के लिए: https://sathee.iitk.ac.in/sathee-railway-exams/student-corner/ncert-books/class-08/mathematics/chapter-5-squares-and-square-roots/। संबंधित आधिकारिक खोज-सूची का पाठ देखा गया; आधिकारिक होस्ट पर मुद्रित संस्करण और पृष्ठ-विन्यास प्रमाणित नहीं हुए।
- NIOS माध्यमिक गणित 211 अध्याय 1, परिमेय और अपरिमेय संख्याएँ, विशेष रूप से §1.10, मुद्रित पृष्ठ 28: https://digital.nios.ac.in/content/211en/Chapter-1.pdf।
- केवल दृश्य जाँच के लिए: तीसरे पक्ष के होस्ट पर NCERT नाम वाला पुनर्मुद्रण 2024–25 अध्याय, https://ncert24.com/assets/ots/pdf/ncert-books-class-8-maths-chapter-5.pdf, §§5.5.4–5.6, मुद्रित पृष्ठ 65–68। इसके बाइट आधिकारिक होस्ट की NCERT PDF से समान हैं या नहीं, यह प्रमाणित नहीं है। यहाँ स्रोत का कोई पृष्ठ, चित्र या हल का विन्यास पुनः प्रस्तुत नहीं किया गया है।
इस पाठ की व्याख्याएँ, हल और पाठ-आधारित विन्यास स्वतंत्र रूप से लिखे गए हैं। सामान्य गणितीय संख्याएँ पाठ्यपुस्तक की तालिकाओं या अभ्यासों में भी मिल सकती हैं। अगले अंक के नियम और संख्यात्मक चरणों की स्वतंत्र जाँच हुई है; विधि की परिभाषा के लिए स्रोत के शब्दों की नकल नहीं की गई है।
उदाहरण से समझें
वर्गाकार व्यवस्था से एक भुजा की गिनती तक
49 एक जैसी टाइलों को वर्गाकार जाली में सजाने की कल्पना करें। हर पंक्ति में जितनी टाइलें हों, हर स्तंभ में भी उतनी ही होनी चाहिए। सात पंक्तियों में सात-सात टाइलें लगाने पर 7 × 7 = 49 टाइलें लगती हैं, इसलिए एक भुजा पर टाइलों की संख्या √49 = 7 है।
एक भुजा पर टाइलों की गिनती −7 नहीं हो सकती। इससे समझ आता है कि मुख्य वर्गमूल अऋणात्मक क्यों चुना जाता है। लेकिन अलग संख्या-समीकरण x² = 49 में 7 और −7 दोनों हल हैं, क्योंकि दोनों का वर्ग 49 है। टाइलों का भौतिक मॉडल ऋणात्मक हल नहीं दिखाता।
50 टाइलें हों, तो सभी टाइलों से ऐसी पूरी भरी वर्गाकार जाली नहीं बन सकती जिसकी हर भुजा पर टाइलों की गिनती पूर्णांक हो। इसका अर्थ यह नहीं कि √50 का वास्तविक मान नहीं है; वह 7 और 8 के बीच है। टाइलों की तुलना पूर्ण वर्ग पूर्णांकों और मुख्य वर्गमूल के चुनाव को समझाती है, पूरी दीर्घ भाग विधि को नहीं।
सूत्र और नियम
अर्थ और चिह्न
- a² = a × a; वास्तविक संख्या का वर्ग अऋणात्मक होता है
- a ≥ 0 के लिए √a अऋणात्मक मुख्य वर्गमूल है; √0 = 0
- a > 0 के लिए x² = a के हल x = √a और x = −√a हैं; x² = 0 का केवल एक हल x = 0 है
- ऋणात्मक संख्या का वास्तविक वर्गमूल नहीं होता; √((−6)²) = 6
पूर्ण वर्ग पूर्णांक की जाँच
- स्वीकार्य अंतिम अंक: 0, 1, 4, 5, 6, 9; स्वीकार्य अंक पूर्ण वर्ग होने का प्रमाण नहीं है
- अंतिम अंक 2, 3, 7 या 8 हो, तो पूर्णांक पूर्ण वर्ग नहीं है
- धनात्मक पूर्णांक तभी पूर्ण वर्ग है जब हर अभाज्य गुणनखंड की गिनती सम हो; वर्गमूल के लिए हर जोड़े से एक लें
- 0 और 1 पूर्ण वर्ग हैं; 0 का अभाज्य गुणनखंडन न करें
- पूर्ण वर्ग पूर्णांक बनाने वाला सबसे छोटा धनात्मक पूर्णांक गुणक या सटीक भाजक: विषम गिनती वाले हर अभाज्य गुणनखंड की एक प्रति का गुणनफल लें; कोई ऐसा गुणनखंड न हो, तो 1 लें
अंकों के जोड़ों की दीर्घ भाग विधि
- दशमलव बिंदु से पूर्णांक अंकों के जोड़े बाईं ओर और दशमलव अंकों के जोड़े दाईं ओर बनाएँ। अंत में अकेला दशमलव अंक बचे, तो उसके दाईं ओर शून्य लगाएँ
- पहला समूह: वह सबसे बड़ा अंक चुनें जिसका वर्ग समूह से अधिक न हो, फिर उसका वर्ग घटाएँ
- अगला जोड़ा p नीचे लाएँ: नई गणना संख्या = 100 × पुराना शेष + p
- अब तक के वर्गमूल अंकों को पूर्णांक q की तरह पढ़ें। 0 से 9 में सबसे बड़ा अंक d चुनें जिसके लिए (20 × q + d) × d नई गणना संख्या से अधिक न हो
- यह गुणनफल घटाएँ; अंत में d जोड़कर नई संख्या 10 × q + d बनाएँ। अगली जाँच में दशमलव बिंदु हटाकर यही पूरी नई संख्या इस्तेमाल करें
- पूर्णांक समूह पूरे होते ही वर्गमूल में दशमलव बिंदु रखें। वर्गमूल के शून्य अंक भी लिखें। दशमलव के बाद अतिरिक्त 00 जोड़े वर्गमूल के अगले स्थान देते हैं
गुणा नए एकल अंक से करना है, पूरे नए वर्गमूल से नहीं। शेष शून्य होने पर सटीक उत्तर तभी मिलता है जब सभी आवश्यक स्थानों का हिसाब हो गया हो। अन्यथा आगे गणना करें या बताई गई शुद्धता के सन्निकट मान के साथ ≈ लिखें।
भिन्न अनुमान और गलतियों की जाँच
- a ≥ 0 और b > 0 के लिए √(a/b) = √a/√b; वर्ग करके जाँचें
- a,b ≥ 0 के लिए √(a × b) = √a × √b; √(a + b) = √a + √b कोई सामान्य नियम नहीं है
- k ≥ 0 और k² < N < (k + 1)² हों, तो k < √N < k + 1; सीमाएँ मिलने से वर्गमूल उनका मध्य मान नहीं हो जाता
- अऋणात्मक पूर्णांक N के लिए √N तभी परिमेय है जब N पूर्ण वर्ग हो; कैलकुलेटर के सीमित अंक सटीक मान होने का प्रमाण नहीं हैं
- पूर्णांकन माँगे जाने तक सटीक मान बनाए रखें; उत्तर में माँगी गई शुद्धता बताएँ
इस पाठ के नोट्स
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