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विकर्णीकरण, समरूपता और आव्यूह के घात

पाठ 145 / 1796 मिनटमुफ़्त

उद्देश्य, पूर्वज्ञान और सीमा

आइगेन-आधार का अस्तित्व जाँचना, विकर्णीकरण बनाना और उससे आव्यूह के घात निकालना सीखें। पूर्वज्ञान: आइगेनमान, आइगेनस्थान, रैंक और व्युत्क्रम। विकर्णीकरण आधिकारिक eigenvalues/eigenvectors शीर्षक का सहायक विस्तार है; GATE 2026 CS में अलग नामित शीर्षक नहीं। क्षेत्र F स्पष्ट रखें; R और C में उत्तर बदल सकता है।

1. विकर्णीकरण का अर्थ

F पर A का विकर्णीकरण संभव है यदि A=PDP⁻¹, जहाँ P क्षेत्र F पर व्युत्क्रमणीय और D उसी क्षेत्र पर विकर्ण है। समतुल्य रूप AP=PD या P⁻¹AP=D है। P के स्तम्भ v₁,…,vₙ और D=diag(λ₁,…,λₙ) लें। AP=PD के स्तम्भों की तुलना से Avᵢ=λᵢvᵢ मिलता है। P की व्युत्क्रमणीयता का अर्थ है कि ये n आइगेनवेक्टर रैखिकतः स्वतंत्र हैं। इसलिए आइगेन-आधार आवश्यक और पर्याप्त है।

क्रम महत्त्वपूर्ण है: P का स्तम्भ i, D की प्रविष्टि i से मिलना चाहिए। आइगेनवेक्टर को अशून्य अदिश से गुणा कर सकते हैं; स्थान बदलें तो D में भी वही क्रम परिवर्तन करें। P का लम्ब-एकक होना जरूरी नहीं। जब P के स्तम्भ आइगेनवेक्टर हों, तब PAP⁻¹ सामान्यतः अपेक्षित P⁻¹AP से अलग है।

2. पूरा उदाहरण बनाएँ और जाँचें

A=[[2,1],[0,3]] के लिए λ₁=2 का v₁=(1,0)ᵀ और λ₂=3 का v₂=(1,1)ᵀ लें। तब P=[[1,1],[0,1]], P⁻¹=[[1,−1],[0,1]] और D=diag(2,3)। गणना से AP=[[2,3],[0,3]]=PD। अतः A=PDP⁻¹। अक्सर AP=PD जाँचना तीन गुणकों के गुणन से सरल है, पर det(P)≠0 भी सिद्ध करना चाहिए।

हर पूर्णांक k≥0 पर पास-पास के P⁻¹P कटने से Aᵏ=PDᵏP⁻¹ मिलता है। इस उदाहरण में Aᵏ=[[2ᵏ,3ᵏ−2ᵏ],[0,3ᵏ]]। k=0 पर गैर-विकर्ण प्रविष्टि शून्य और परिणाम I है; k=3 पर [[8,19],[0,27]]। ऋण k तभी मान्य है जब A व्युत्क्रमणीय हो। सामान्य बहुपद f के लिए f(A)=Pf(D)P⁻¹ भी है।

3. अस्तित्व की विश्वसनीय जाँच

F पर अभिलाक्षणिक बहुपद का रैखिक गुणनखण्डों में विभाजन होना चाहिए और आइगेनस्थानों की विमाओं का योग n होना चाहिए। समतुल्य रूप में अभिलाक्षणिक बहुपद F पर रैखिक गुणनखण्डों में विभाजित हो और हर आइगेनमान की ज्यामितीय तथा बीजीय बहुलता बराबर हों। A−λI की नलिटी से विमा निकालें। अलग आइगेनस्थानों के आधार-सदिश स्वतंत्र योगदान देते हैं।

F में n अलग आइगेनमान होना पर्याप्त है। आवश्यक नहीं: Iₙ का विकर्णीकरण संभव है जबकि उसका अकेला आइगेनमान n बार आता है। दोहराव आइगेनस्थान की विमा निकालने का संकेत है, स्वतः असफलता नहीं। diag(1,1,2) में 1 का आइगेनस्थान द्विविमीय और 2 का एकविमीय है; पूरा आधार मिलता है।

इसके विपरीत J=[[2,1],[0,2]] का बहुपद (t−2)² और E₂=span{(1,0)ᵀ} है। एकमात्र आइगेनस्थान की विमा एक है, इसलिए det(J)=4≠0 होने पर भी विकर्णीकरण असंभव। वहीं diag(0,1) अव्युत्क्रमणीय होते हुए भी विकर्ण है। व्युत्क्रमणीयता और विकर्णीकरण अलग प्रश्न हैं।

4. समरूपता आधार का परिवर्तन है

B=P⁻¹AP उसी रैखिक रूपान्तरण को दूसरे आधार में दर्शाता है। समरूप आव्यूहों के अभिलाक्षणिक बहुपद, बहुलता सहित आइगेनमान, ट्रेस, सारणिक और रैंक समान हैं। केवल समान ट्रेस और सारणिक से समरूपता सिद्ध नहीं। उदाहरणतः 2I₂ तथा ऊपर का J समान आइगेनमान, ट्रेस और सारणिक रखते हैं, लेकिन एक का विकर्णीकरण संभव है और दूसरे का नहीं; वे समरूप नहीं हैं।

पंक्ति-न्यूनीकरण सामान्यतः समरूपता रूपान्तरण नहीं है। विस्तारित निकाय पर सही तरह लगी प्रारम्भिक पंक्ति संक्रियाएँ हल-समुच्चय बचाती हैं, लेकिन आइगेनमान बदल सकती हैं। जैसे I₂ की पहली पंक्ति को 2 से गुणा करने पर diag(2,1) मिलता है। आइगेनमान निकालने के लिए A को पंक्ति-घटित न करें; λ मिलने के बाद आइगेनस्थान हेतु A−λI को घटाएँ।

5. सममित आव्यूह और क्षेत्र की सावधानी

वास्तविक स्पेक्ट्रल प्रमेय के अनुसार वास्तविक सममित A के वास्तविक आइगेनवेक्टरों का लम्ब-एकक आधार होता है। अतः A=QDQᵀ, जहाँ QᵀQ=I और D वास्तविक विकर्ण है। अलग आइगेनमानों के आइगेनवेक्टर लम्ब हैं: Au=λu और Av=μv होने पर सममिति से λuᵀv=(Au)ᵀv=uᵀAv=μuᵀv। इसलिए λ≠μ से uᵀv=0। दोहराए आइगेनमान के आइगेनस्थान में लम्ब-एकक आधार चुनें।

S=[[2,1],[1,2]] में (1,1)ᵀ और (1,−1)ᵀ के आइगेनमान 3 तथा 1 हैं। हर सदिश को √2 से भाग देकर लम्ब-एकक Q के स्तम्भ मिलते हैं; D=diag(3,1)। सममिति से धन आइगेनमान या व्युत्क्रमणीयता आवश्यक नहीं: −I तथा शून्य आव्यूह प्रतिउदाहरण हैं।

वास्तविक घूर्णन [[0,−1],[1,0]] का R पर विकर्णीकरण नहीं क्योंकि वास्तविक आइगेनमान नहीं। C पर अलग आइगेनमान i और −i के कारण विकर्णीकरण संभव है। अस्तित्व के दावे में क्षेत्र बनाए रखें।

जाँच-सूची

बहुलता सहित सभी आइगेनमान निकालें, हर आइगेनस्थान का आधार निकालें, n स्वतंत्र सदिश गिनें और संगत P व D बनाएँ। AP=PD तथा P की व्युत्क्रमणीयता जाँचें। इसके बाद ही घात का सूत्र लगाएँ। अलग आइगेनमान पर्याप्त हैं; दोहराए आइगेनमान जाँच माँगते हैं; वास्तविक सममिति वास्तविक लम्ब-एकक विकर्णीकरण की गारंटी देती है।

मौलिक अभ्यास: छह एक-सही-विकल्प प्रश्न

ये मौलिक प्रश्न हैं, पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं। ठीक एक विकल्प चुनें।

LG01. क्षेत्र F पर n×n आव्यूह A का F पर विकर्णीकरण कब संभव है?

A. जब det(A)≠0 हो B. जब Fⁿ में A के n रैखिकतः स्वतंत्र आइगेनवेक्टर हों C. जब F में कम-से-कम एक आइगेनमान हो D. जब हर विकर्ण प्रविष्टि अशून्य हो

उत्तर: B

A: व्युत्क्रमणीयता न आवश्यक है न पर्याप्त।

B: ये सदिश व्युत्क्रमणीय आधार-परिवर्तन P बनाते हैं और P⁻¹AP विकर्ण है।

C: एक आइगेनमान से पूरा आइगेन-आधार नहीं मिलता।

D: विकर्ण प्रविष्टियाँ आइगेन-आधार सिद्ध नहीं करतीं।

LG02. किस आव्यूह का R पर विकर्णीकरण संभव नहीं?

A. [[2,0],[0,2]] B. [[0,0],[0,1]] C. [[2,1],[0,2]] D. [[1,1],[1,1]]

उत्तर: C

A: यह पहले से विकर्ण है।

B: शून्य आइगेनमान विकर्णीकरण नहीं रोकता।

C: एकमात्र आइगेनस्थान span{(1,0)ᵀ} है; एक स्वतंत्र सदिश पर्याप्त नहीं।

D: यह वास्तविक सममित है और आइगेनमान 2 तथा 0 हैं।

LG03. A=[[2,1],[0,3]], P=[[1,1],[0,1]]। P⁻¹AP क्या है?

A. diag(3,2) B. diag(2,3) C. [[2,1],[0,3]] D. I

उत्तर: B

A: विकर्ण क्रम P के आइगेनवेक्टर स्तम्भों से मिलना चाहिए।

B: पहले स्तम्भ का आइगेनमान 2 और दूसरे का 3 है।

C: P आधार को आइगेनवेक्टरों में बदलता है और गैर-विकर्ण पद हटता है।

D: समरूपता आइगेनमान 2 तथा 3 बचाती है, दोनों 1 नहीं बनाती।

LG04. A=[[2,1],[0,3]] के लिए A³ क्या है?

A. [[8,1],[0,27]] B. [[8,19],[0,27]] C. [[6,3],[0,9]] D. [[8,27],[0,27]]

उत्तर: B

A: गैर-विकर्ण प्रविष्टि का सीधे घात लेना सही नहीं।

B: PD³P⁻¹ से गैर-विकर्ण प्रविष्टि 3³−2³=19 है।

C: यह 3A है, A³ नहीं।

D: गैर-विकर्ण प्रविष्टि 27−8 है, 27 नहीं।

LG05. हर वास्तविक सममित आव्यूह के लिए कौन-सा दावा सही है?

A. सभी आइगेनमान धन हैं B. यह व्युत्क्रमणीय है C. वास्तविक आइगेनवेक्टरों का लम्ब-एकक आधार मौजूद है D. सभी आइगेनमान अलग हैं

उत्तर: C

A: उदाहरणार्थ −I के आइगेनमान ऋण हैं।

B: शून्य आव्यूह सममित और अव्युत्क्रमणीय है।

C: वास्तविक स्पेक्ट्रल प्रमेय से QᵀQ=I और QᵀAQ विकर्ण मिलता है।

D: I सममित है और उसके आइगेनमान दोहराते हैं।

LG06. वास्तविक 3×3 आव्यूह के आइगेनमान 1,1,2 हैं। 1 के आइगेनस्थान की विमा 2 है। क्या R पर विकर्णीकरण संभव है?

A. हाँ, क्योंकि आइगेनस्थान 2+1 स्वतंत्र सदिश देते हैं B. नहीं, क्योंकि आइगेनमान दोहरता है C. नहीं, क्योंकि सारणिक 2 है D. केवल जब A पहले से विकर्ण हो

उत्तर: A

A: सरल आइगेनमान 2 का आइगेनस्थान एकविमीय है और 1 के आइगेनस्थान से स्वतंत्र है।

B: पर्याप्त आइगेनवेक्टर हों तो पुनरावृत्ति मान्य है।

C: यह सारणिक विकर्णीकरण नहीं रोकता।

D: विकर्ण आव्यूह के समरूप होने के लिए पहले से विकर्ण होना आवश्यक नहीं।

स्रोत और सीमा

आइगेनमान और आइगेनवेक्टर शीर्षक के अंतर्गत सहायक पाठ। आधिकारिक 2026 CS पाठ्यक्रम में विकर्णीकरण और समरूपता अलग नामित नहीं; इन्हें आइगेनवेक्टर समझने और लगाने हेतु शामिल किया गया है।

Official GATE 2026 CS syllabus (verified 2026-10-14).

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