सारणिक, पंक्ति संक्रियाएँ और व्युत्क्रमणीयता
उद्देश्य, पूर्वज्ञान और सीमा
सारणिक कुशलता से निकालना, पंक्ति संक्रियाओं का असर दर्ज करना और शून्य सारणिक का सही अर्थ समझना सीखें। पूर्वज्ञान: आव्यूह गुणन तथा वर्ग आव्यूह। यह आधिकारिक Determinants शीर्षक को पढ़ाता है और समीकरणों व आइगेनमानों के लिए साधन देता है। सारणिक लेते समय, अलग से न कहा हो तो आव्यूह वास्तविक और वर्ग हैं।
1. सारणिक एक संख्या है, आव्यूह नहीं
A=[[a,b],[c,d]] के लिए det(A)=ad−bc। सारणिक वर्ग आव्यूह का होता है। [[2,3],[1,4]] का सारणिक 8−3=5 है। आयताकार आव्यूह की रैंक होती है, सामान्य सारणिक नहीं; उसके सारणिक को शून्य न कहें।
3×3 आव्यूह में किसी पंक्ति या स्तम्भ से विस्तार करें। लघुसारणिक Mᵢⱼ, पंक्ति i और स्तम्भ j हटाने के बाद बचा सारणिक है। सहखंड Cᵢⱼ=(−1)ⁱ⁺ʲMᵢⱼ। पहली पंक्ति में चिह्न +,−,+ हैं और आगे बारी-बारी बदलते हैं। पंक्ति i से det(A)=ΣⱼaᵢⱼCᵢⱼ। शून्य वाली पंक्ति या स्तम्भ चुनने से काम कम होता है।
हल किया उदाहरण: A=[[1,2,0],[3,4,0],[5,6,7]]। अंतिम स्तम्भ से det(A)=7 det([[1,2],[3,4]])=7(4−6)=−14। उस स्तम्भ की पहली दो प्रविष्टियाँ शून्य हैं और तीसरी का सहखंड-चिह्न धनात्मक है। किसी और पंक्ति से भी वही संख्या मिलनी चाहिए।
2. अलग पंक्ति संक्रियाओं का अलग प्रभाव
दो पंक्तियों की अदला-बदली सारणिक का चिह्न उलटती है। एक पंक्ति को c से गुणा करना सारणिक को c से गुणा करता है। Rᵢ को Rᵢ+cRⱼ से बदलना, जहाँ i≠j, सारणिक नहीं बदलता। यही नियम स्तम्भों पर भी लागू हैं। सभी विलोपन चरणों को सारणिक-संरक्षक मानना गलत है; अदला-बदली और गुणन अलग असर डालते हैं।
त्रिकोणीय आव्यूह का सारणिक उसके विकर्ण का गुणनफल है। इसलिए त्रिकोणीय रूप तक विलोपन अक्सर सहखंड-विस्तार से तेज होता है। कुल चिह्न और गुणक अलग दर्ज करें।
उदाहरण: A=[[0,2,1],[1,3,1],[2,8,3]]। R₁ और R₂ बदलें, फिर R₃←R₃−2R₁ करने पर [[1,3,1],[0,2,1],[0,2,1]] मिलता है। अंत में R₃←R₃−R₂ से शून्य पंक्ति मिलती है। नया सारणिक शून्य है, अतः det(A) भी शून्य है; चिह्न बदलने से शून्य नहीं बदलता। इससे पंक्तियों की निर्भरता भी दिखती है।
अशून्य उदाहरण: A=[[2,1,0],[4,3,1],[0,2,5]]। R₂←R₂−2R₁ से [[2,1,0],[0,1,1],[0,2,5]], फिर R₃←R₃−2R₂ से ऊपरी त्रिकोणीय रूप मिलता है, जिसके विकर्ण पर 2,1,3 हैं। कोई अदला-बदली या पंक्ति-गुणन नहीं हुआ, इसलिए det(A)=6।
3. संरचनात्मक नियम और उनकी शर्तें
n×n आव्यूहों के लिए det(AB)=det(A)det(B), det(Aᵀ)=det(A) और det(I)=1। इसलिए det(cA)=cⁿdet(A): सभी n पंक्तियाँ गुणित हुई हैं। सामान्यतः यह c det(A) नहीं है। यदि A व्युत्क्रमणीय हो, तो det(A⁻¹)=1/det(A)।
सामान्यतः det(A+B)=det(A)+det(B) गलत है। 2×2 इकाई आव्यूह के लिए det(I+I)=det(2I)=4, जबकि det(I)+det(I)=2। बाकी पंक्तियाँ स्थिर रखते हुए सारणिक एक पंक्ति में रैखिक है, पूरे आव्यूह में नहीं।
समान पंक्तियाँ, आनुपातिक पंक्तियाँ, शून्य पंक्ति या पंक्तियों में कोई भी रैखिक निर्भरता सारणिक शून्य बनाती है। स्तम्भों के लिए भी यही सच है। उलटे, वर्ग आव्यूह का सारणिक शून्य होने का अर्थ पंक्तियों और स्तम्भों का निर्भर होना है। विकर्ण पर शून्य होने पर भी सारणिक अशून्य हो सकता है: [[0,1],[1,0]] का सारणिक −1 है।
4. व्युत्क्रमणीयता और 2×2 व्युत्क्रम
वर्ग आव्यूह व्युत्क्रमणीय तभी और केवल तभी है जब det(A)≠0। एक दिशा det(AA⁻¹)=det(I)=1 से मिलती है। 2×2 A में ad−bc≠0 हो, तो
A⁻¹=(1/(ad−bc))[[d,−b],[−c,a]]।
[[2,3],[1,4]] का व्युत्क्रम (1/5)[[4,−3],[−1,2]] है। गुणा करके I जाँचें। ad−bc=0 हो तो शून्य से भाग न दें और व्युत्क्रम न मानें। बड़े आव्यूहों में संभव होने पर [A|I] को [I|A⁻¹] तक घटा सकते हैं। केवल एक समीकरण-तंत्र हल करने के लिए पूरा व्युत्क्रम निकालना प्रायः आवश्यक नहीं।
पैरामीटर उदाहरण: A(t)=[[1,2],[3,t]] का सारणिक t−6 है। हर t≠6 पर व्युत्क्रमणीय और t=6 पर अव्युत्क्रमणीय है। शून्य सारणिक अकेले नहीं बताता कि Ax=b का कोई हल नहीं है या अनंत हल हैं; b भी जाँचना होगा। अगला पाठ विस्तारित आव्यूह की रैंक से अंतर बताएगा।
5. हल की जाँच-सूची और गलतियाँ
पहले वर्ग आकार जाँचें। त्रिकोणीय रूप, शून्य या पंक्ति-निर्भरता खोजें। विस्तार या विलोपन चुनें; अदला-बदली और गुणन का हिसाब रखें। नियम गुणनफल के लिए है या योग के लिए, जाँचें। यदि किसी पिवट या हर में पैरामीटर है, तो भाग देने से पहले उसके शून्य होने का मामला अलग करें। det(A), rank(A) और trace(A) को न मिलाएँ: सारणिक एक संख्या है, रैंक स्वतंत्र दिशाएँ गिनती है और ट्रेस विकर्ण का योग है। आइगेनमानों से इनके संबंध अलग पाठ में आएँगे।
मौलिक अभ्यास: छह एक-सही-विकल्प प्रश्न
ये मौलिक प्रश्न हैं, पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं। ठीक एक विकल्प चुनें।
LD01. det([[2,3],[1,4]]) क्या है?
A. 11 B. 5 C. 8 D. −5
उत्तर: B
A: तिरछा गुणन जोड़ना नहीं, घटाना है।
B: 2×4−3×1=5।
C: यह केवल मुख्य विकर्ण का गुणन है।
D: इसमें घटाव का क्रम उलट गया है।
LD02. A का आकार 3×3 और det(A)=2 है। det(2A) क्या है?
A. 4 B. 8 C. 16 D. 6
उत्तर: C
A: पूरे आव्यूह को गुणा करने से तीनों पंक्तियाँ बदलती हैं।
B: गुणक 2³ है, लेकिन इसे det(A) से भी गुणा करना है।
C: det(2A)=2³det(A)=16।
D: गुणक में घात आती है, आकार का साधारण गुणन नहीं।
LD03. A की दूसरी पंक्ति को दूसरी पंक्ति+5 पहली पंक्ति से बदलकर B बना। det(A)=−3 हो तो det(B) क्या है?
A. −15 B. 3 C. 2 D. −3
उत्तर: D
A: दूसरी पंक्ति का गुणज जोड़ने से सारणिक गुणित नहीं होता।
B: दो पंक्तियों की अदला-बदली चिह्न उलटेगी; दिया हुआ पंक्ति-प्रतिस्थापन नहीं।
C: गुणांक 5 को सारणिक में नहीं जोड़ते।
D: इस प्रकार के पंक्ति-प्रतिस्थापन से सारणिक अपरिवर्तित रहता है।
LD04. किस वास्तविक k पर [[1,2],[3,k]] अव्युत्क्रमणीय है?
A. 0 B. 3 C. 6 D. 2
उत्तर: C
A: सारणिक k−6 है, k नहीं।
B: k=3 पर सारणिक −3 है, जो अशून्य है।
C: अव्युत्क्रमणीयता के लिए k−6=0 चाहिए।
D: k=2 पर सारणिक −4 है।
LD05. A और B के आकार 2×2 हैं, det(A)=−2 तथा det(B)=3। det(A⁻¹B) क्या है?
A. −6 B. −3/2 C. −2/3 D. 3/2
उत्तर: B
A: पहला गुणक A का व्युत्क्रम है, जिसका सारणिक −1/2 है।
B: det(A⁻¹B)=det(B)/det(A)=−3/2।
C: यह अनुपात उलटता है।
D: A का सारणिक ऋणात्मक है, इसलिए परिणाम ऋणात्मक है।
LD06. A=[[1,2,0],[0,3,4],[0,0,−2]]। det(A) क्या है?
A. 2 B. −6 C. 24 D. 0
उत्तर: B
A: यह विकर्ण का योग है, सारणिक नहीं।
B: त्रिकोणीय आव्यूह में विकर्ण गुणा करें: 1×3×(−2)=−6।
C: त्रिकोणीय सारणिक के गुणन में विकर्ण से बाहर की प्रविष्टियाँ नहीं आतीं।
D: विकर्ण के नीचे शून्य होने से सारणिक शून्य होना आवश्यक नहीं।
स्रोत और सीमा
आधिकारिक 2026 पाठ्यक्रम के सारणिक और आव्यूह-व्युत्क्रमणीयता से संरेखित। समीकरण-संगति और आइगेनमान अनुप्रयोग अलग हैं। मौलिक अभ्यास; संपूर्ण तैयारी का दावा नहीं।
Official GATE 2026 CS syllabus (verified 2026-10-14).
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