आइगेनमान, आइगेनवेक्टर और बहुलता
उद्देश्य और पूर्वज्ञान
आइगेनमान और आइगेनस्थान निकालना, बीजीय तथा ज्यामितीय बहुलता अलग करना, और ट्रेस, सारणिक व बहुपद से उत्तर जाँचना सीखें। पूर्वज्ञान: सारणिक, समघात रैखिक निकाय और रैंक। A वर्ग आव्यूह है। क्षेत्र स्पष्ट रखें: वास्तविक आव्यूह के आइगेनमान और सदिश सम्मिश्र हो सकते हैं। अलग कथन न हो तो यहाँ के उदाहरण वास्तविक अदिश लेते हैं।
1. परिभाषा का समीकरण
आइगेनयुग्म Av=λv तथा v≠0 को संतुष्ट करता है। λ आइगेनमान और v आइगेनवेक्टर है। छवि उसी रेखा पर रहती है; ऋण λ दिशा उलटता है और λ=0 सदिश को शून्य भेजता है। शून्य आइगेनमान मान्य है, पर शून्य सदिश कभी आइगेनवेक्टर नहीं। v का हर अशून्य अदिश गुणज भी उसी λ का आइगेनवेक्टर है।
इसे (A−λI)v=0 लिखें। अशून्य हल तभी है जब A−λI अव्युत्क्रमणीय हो। हम एकक अग्रगुणांक वाला अभिलाक्षणिक बहुपद p(t)=det(tI−A) लेते हैं। det(A−tI) में केवल (−1)ⁿ का अंतर है, इसलिए मूल वही हैं। मूल मिलने पर समघात निकाय हल करें; केवल सारणिक से आइगेनवेक्टर नहीं मिलते।
2. पूरा हल किया उदाहरण
A=[[2,1],[0,3]] लें। p(t)=(t−2)(t−3), इसलिए आइगेनमान 2 और 3 हैं। λ=2 पर (A−2I)v=0 से y=0; आइगेनस्थान span{(1,0)ᵀ} है। आइगेनवेक्टर (c,0)ᵀ हैं जहाँ c≠0। λ=3 पर −x+y=0, इसलिए आइगेनस्थान span{(1,1)ᵀ} है। प्रत्यक्ष जाँच: A(1,1)ᵀ=(3,3)ᵀ।
आइगेनस्थान Eλ=ker(A−λI) में शून्य शामिल है और यह सदिश समष्टि है। केवल आइगेनवेक्टरों के समुच्चय में शून्य नहीं, इसलिए वह सदिश समष्टि नहीं है। दोनों को न मिलाएँ। त्रिकोणीय आव्यूह के tI−A का सारणिक विकर्ण प्रविष्टियों का गुणनफल है। अतः उसके आइगेनमान विकर्ण प्रविष्टियाँ हैं, पुनरावृत्ति सहित; उसके आइगेनवेक्टर आवश्यक रूप से निर्देशांक-सदिश नहीं हैं।
3. दो प्रकार की बहुलता
बीजीय बहुलता p(t) में λ मूल के दोहराव की संख्या है। ज्यामितीय बहुलता dim Eλ=n−rank(A−λI) है। हर आइगेनमान के लिए 1≤ज्यामितीय बहुलता≤बीजीय बहुलता। दोहराव से स्वतंत्र आइगेनवेक्टरों की संख्या निश्चित नहीं होती।
J=[[4,1],[0,4]] में p(t)=(t−4)², लेकिन (J−4I)(x,y)ᵀ=(y,0)ᵀ। इसलिए y=0 और E₄ की विमा एक है, जबकि बीजीय बहुलता दो। इसके विपरीत 4I₂ का वही अभिलाक्षणिक बहुपद है, पर E₄ पूरी द्विविमीय समष्टि है। उसका हर अशून्य सदिश आइगेनवेक्टर है। यही अंतर अगले पाठ में विकर्णीकरण का आधार बनेगा।
भिन्न आइगेनमानों के आइगेनवेक्टर रैखिकतः स्वतंत्र होते हैं। दो सदिशों के लिए, v₂=cv₁ और c≠0 मानकर A लगाने पर λ₂=λ₁ अनिवार्य होता है। सामान्य प्रमाण में प्रस्तावित निर्भरता पर A−λI लगाकर पदों की संख्या घटाते हैं। एक ही आइगेनमान के कई आइगेनवेक्टर निर्भर हो सकते हैं।
4. त्वरित जाँच और रूपान्तरण
C पर सभी n आइगेनमान बीजीय बहुलता सहित गिनें। उनका योग tr(A), अर्थात विकर्ण प्रविष्टियों का योग, और गुणनफल det(A) है। इसलिए A व्युत्क्रमणीय तभी है जब शून्य उसका आइगेनमान न हो। ये जाँच गणना की गलती पकड़ सकती हैं, पर सामान्यतः तीन या अधिक आकार के आव्यूह के सभी आइगेनमान केवल ट्रेस और सारणिक से नहीं निकलते।
यदि Av=λv हो तो धन पूर्णांक k के लिए Aᵏv=λᵏv, (A+cI)v=(λ+c)v और हर बहुपद f के लिए f(A)v=f(λ)v। A व्युत्क्रमणीय हो तो A⁻¹v=λ⁻¹v। हर कथन में वही v काम करता है। ऊपर 2 और 3 वाले उदाहरण में A²−3A+I के संगत आइगेनमान −1 और 1 हैं। असंबंधित आव्यूहों के आइगेनमान जोड़कर उनके योग के आइगेनमान न बताएँ; उस कदम के लिए साझा आइगेनवेक्टर चाहिए।
A और Aᵀ के अभिलाक्षणिक बहुपद समान हैं क्योंकि ट्रांसपोज़ से सारणिक नहीं बदलता। उनके आइगेनवेक्टर अलग हो सकते हैं। समरूप आव्यूह P⁻¹AP का भी वही बहुपद है, क्योंकि det(tI−P⁻¹AP)=det(P⁻¹(tI−A)P)=det(tI−A)।
5. क्षेत्र का महत्व
R=[[0,−1],[1,0]] के लिए p(t)=t²+1। R पर कोई आइगेनमान या अशून्य आइगेनवेक्टर नहीं; C पर आइगेनमान i और −i हैं। वास्तविक आव्यूह के आइगेनमान वास्तविक होना आवश्यक नहीं। वास्तविक सममित आव्यूहों के आइगेनमान अवश्य वास्तविक होते हैं; अगले पाठ में यह विशेष परिणाम आएगा।
परीक्षा की विधि और गलतियाँ
p(t) लिखें, बहुलता सहित गुणनखण्ड करें, हर (A−λI)v=0 हल करें और हर आइगेनस्थान का आधार दें। ट्रेस व सारणिक जाँचें और एक प्रतिनिधि आइगेनवेक्टर रखकर सत्यापित करें। शून्य को आइगेनवेक्टर न लें, बिना हल किए बहुलता को विमा न मानें, और पैरामीटर से भाग देने से पहले शून्य वाला मामला जाँचें। इन विधियों में विकर्णीकरण की धारणा आवश्यक नहीं है।
मौलिक अभ्यास: छह एक-सही-विकल्प प्रश्न
ये मौलिक प्रश्न हैं, पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं। ठीक एक विकल्प चुनें।
LE01. v के A का आइगेनवेक्टर होने के लिए कौन-सी शर्त आवश्यक है?
A. v=0 B. v≠0 और किसी अदिश λ के लिए Av=λv C. केवल Av=0 D. v के सभी निर्देशांक अशून्य हैं
उत्तर: B
A: परिभाषा में शून्य सदिश निषिद्ध है।
B: आइगेनवेक्टर अशून्य सदिश है जिसकी छवि उसी का अदिश गुणज है।
C: Av=0 में v=0 भी हल है, जो आइगेनवेक्टर नहीं है। केवल अशून्य हल शून्य आइगेनमान के आइगेनवेक्टर हैं; आइगेनवेक्टरों के अन्य आइगेनमान भी हो सकते हैं।
D: कुछ निर्देशांक शून्य हो सकते हैं; पूरा सदिश अशून्य होना चाहिए।
LE02. A=[[2,1],[0,3]] में λ=3 का आइगेनवेक्टर कौन है?
A. (1,0)ᵀ B. (0,1)ᵀ C. (1,1)ᵀ D. (1,−1)ᵀ
उत्तर: C
A: इसकी छवि इसका दुगुना है, इसलिए आइगेनमान 2 है।
B: छवि (1,3)ᵀ है, (0,3)ᵀ नहीं।
C: A(1,1)ᵀ=(3,3)ᵀ=3(1,1)ᵀ।
D: छवि (1,−3)ᵀ है, (3,−3)ᵀ नहीं।
LE03. 3×3 आव्यूह के बीजीय बहुलता सहित आइगेनमान 2,2,−1 हैं। det(A) क्या है?
A. 3 B. −4 C. 4 D. −1
उत्तर: B
A: 3 ट्रेस है, अर्थात आइगेनमानों का योग।
B: सारणिक गुणनफल है: 2×2×(−1)=−4।
C: इसमें ऋण चिह्न छूट गया।
D: इसमें 2 के दोनों गुणक छूट गए।
LE04. J=[[4,1],[0,4]] के लिए dim ker(J−4I) क्या है?
A. 0 B. 1 C. 2 D. 4
उत्तर: B
A: समीकरण के अशून्य हल हैं।
B: (J−4I)(x,y)ᵀ=(y,0)ᵀ=0 से y=0 तथा x स्वतंत्र है।
C: बीजीय बहुलता दो से दो स्वतंत्र आइगेनवेक्टर आवश्यक नहीं।
D: दो निर्देशांकों के आइगेनस्थान की विमा चार नहीं हो सकती।
LE05. यदि Av=2v और v≠0 है, तो (A²−3A+I)v क्या है?
A. −v B. 0 C. v D. 3v
उत्तर: A
A: बहुपद में आइगेनमान रखें: 4−6+1=−1।
B: बहुपद 2 पर शून्य नहीं है।
C: 4−6+1 का चिह्न ऋण है।
D: यह 2 पर बहुपद का सही मान नहीं है।
LE06. वास्तविक A=[[0,−1],[1,0]] के लिए कौन-सा कथन सही है?
A. वास्तविक आइगेनमान 1 और −1 हैं B. आइगेनमान 0 है C. C पर कोई आइगेनमान नहीं D. वास्तविक आइगेनमान नहीं, पर सम्मिश्र आइगेनमान i तथा −i हैं
उत्तर: D
A: अभिलाक्षणिक बहुपद t²+1 है, t²−1 नहीं।
B: सारणिक 1 है, इसलिए शून्य आइगेनमान नहीं।
C: C पर t²+1 के मूल i और −i हैं।
D: t²+1=0 का वास्तविक मूल नहीं और सम्मिश्र मूल i तथा −i हैं।
स्रोत और सीमा
आधिकारिक eigenvalues and eigenvectors शीर्षक का सीधा समर्थन। बहुलता और बहुपद रूपान्तरण इसी का विस्तार हैं; सभी प्रश्न मौलिक हैं।
Official GATE 2026 CS syllabus (verified 2026-10-14).
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