रोल प्रमेय, माध्य मान प्रमेय और परिणाम
लक्ष्य और पूर्वज्ञान
अस्तित्व प्रमेय लगाने से पहले शर्तें जाँचें। पूर्वज्ञान: सांतत्य, अवकलज और अंतराल संकेतन। यहाँ a<b वास्तविक सिरे हैं।
1. छेदक और स्पर्शरेखा की ढाल
(a,f(a)) और (b,f(b)) की छेदक ढाल [f(b)−f(a)]/(b−a) है। माध्य मान प्रमेय (MVT): यदि f, [a,b] पर सतत और (a,b) पर अवकलनीय है, तो कम से कम एक c∈(a,b) पर f′(c)=[f(b)−f(a)]/(b−a)। सिरों पर सांतत्य चाहिए, द्विपक्षीय अवकलज नहीं। c सख्ती से भीतर होना चाहिए।
यह अस्तित्व बताता है, अद्वितीयता नहीं; c मध्यबिंदु होना जरूरी नहीं। पहले शर्तें, फिर छेदक ढाल, फिर अवकलज समीकरण निकालें और केवल भीतर के हल रखें।
x² को [1,3] पर लें: ढाल (9−1)/2=4, अतः 2c=4 से c=2। x³ को [0,2] पर लें: ढाल 4, अतः 3c²=4 से अनुमत c=2/√3। मध्यबिंदु 1 और ऋणात्मक मूल सही नहीं।
2. रोल प्रमेय: शून्य ढाल का विशेष रूप
MVT की शर्तों के साथ f(a)=f(b) हो तो किसी c∈(a,b) पर f′(c)=0। [−2,2] पर x²−4 के दोनों सिरों का मान शून्य और c=0 पर अवकलज शून्य है।
कारण: बंद परिबद्ध अंतराल पर सांतत्य से चरम मान प्राप्त होते हैं। फलन अचर हो तो हर भीतरी अवकलज शून्य। अन्यथा बराबर सिरों के कारण कोई परम चरम भीतर होगा, जहाँ फ़र्मा की शर्त अवकलज शून्य देती है। सामान्य MVT के लिए छेदक रेखा घटाएँ: g(x)=f(x)−f(a)−[(f(b)−f(a))/(b−a)](x−a)। अब g(a)=g(b)=0 और रोल से आवश्यक समीकरण मिलता है।
3. शर्तें जरूरी हैं
[−1,1] पर |x| सतत है और सिरों के मान समान हैं, लेकिन शून्य पर अवकलनीय नहीं। अन्य बिंदुओं पर अवकलज −1 या 1 है, इसलिए अवकलज शून्य वाला c नहीं। रोल नहीं लगा सकते।
[−1,1] पर 1/x, शून्य पर परिभाषित ही नहीं। आवश्यक पूरे अंतराल पर न सांतत्य है न अवकलनीयता। केवल सिरों के मान देखकर प्रमेय न लगाएँ।
शर्त विफल होने का अर्थ है प्रमेय गारंटी नहीं देता। इसका अर्थ यह नहीं कि निष्कर्ष जरूर गलत होगा; अलग प्रत्यक्ष गणना से कभी उपयुक्त c मिल सकता है।
4. अवकलज से वैश्विक सीमाएँ
यदि f, [a,b] पर सतत, (a,b) पर अवकलनीय और हर भीतरी x पर m≤f′(x)≤M है, तो m(b−a)≤f(b)−f(a)≤M(b−a)। |f′|≤K से |f(b)−f(a)|≤K|b−a|। sin x में |cos x|≤1 से |sin b−sin a|≤|b−a|।
किसी पूरे अंतराल पर f′=0 हो तो f अचर है: किन्हीं दो बिंदुओं के बीच MVT लगाएँ। अंतराल की शर्त महत्वपूर्ण है। (−∞,0) तथा (0,∞) पर अलग-अलग अचर मानों वाला फलन अपने असंबद्ध क्षेत्र में हर जगह शून्य अवकलज रख सकता है।
इसी तरह पूरे अंतराल पर f′>0 से कठोर वृद्धि मिलती है। मूल की अद्वितीयता में अस्तित्व अलग सिद्ध करें। [0,1] पर x³+x−1 सतत है और सिरों पर विपरीत चिह्न हैं, अतः मूल है। f′=3x²+1>0 से अधिकतम एक मूल; इसलिए (0,1) में ठीक एक मूल है।
5. परीक्षा-जाँच
सांतत्य के लिए बंद, अवकलनीयता के लिए खुला अंतराल लिखें। समान सिरे केवल रोल में चाहिए। सिरे पर या क्षेत्र से बाहर के अवकलज-हल हटाएँ। MVT अकेले c की अद्वितीयता नहीं देता। “प्रमेय लागू है” और “निष्कर्ष संयोग से सही है” अलग बातें हैं।
मौलिक अभ्यास: छह एक-सही-विकल्प प्रश्न
ये मौलिक प्रश्न हैं, पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं। ठीक एक विकल्प चुनें।
CM01. [1,3] पर f(x)=x² में MVT वाला c क्या है?
A. 1 B. 2 C. 3 D. 4
उत्तर: B
A: सिरा अनुमत नहीं, ढाल 2 है।
B: छेदक ढाल 4, 2c के बराबर c=2 पर है।
C: सिरा अनुमत नहीं, ढाल 6 है।
D: यह छेदक ढाल है, c नहीं।
CM02. [−1,1] पर |x| में रोल क्यों नहीं लगता?
A. Unequal endpoint values / सिरों के मान अलग B. Not continuous / सतत नहीं C. Not differentiable at 0 / 0 पर अवकलनीय नहीं D. Interval is closed / अंतराल बंद है
उत्तर: C
A: दोनों मान 1 हैं।
B: फलन हर जगह सतत है।
C: शून्य पर बायाँ-दायाँ अवकलज अलग हैं।
D: सांतत्य के लिए बंद अंतराल चाहिए।
CM03. [a,b] पर MVT की शर्तों में c कहाँ मिलने की गारंटी है?
A. (a,b) B. {a,b} C. Only the midpoint / केवल मध्यबिंदु D. Outside [a,b] / [a,b] के बाहर
उत्तर: A
A: प्रमेय भीतरी बिंदु देता है।
B: सिरे बाहर हैं।
C: मध्यबिंदु सामान्यतः जरूरी बिंदु नहीं।
D: गारंटी वाला बिंदु भीतर है।
CM04. किसी अंतराल पर अवकलनीय f का f′ हर जगह 0 है। तब f है:
A. Necessarily zero / अनिवार्यतः शून्य B. Strictly increasing / कठोर बढ़ता C. Strictly decreasing / कठोर घटता D. Constant / अचर
उत्तर: D
A: हर अचर का अवकलज शून्य है, केवल 0 का नहीं।
B: MVT से किन्हीं दो मानों में बराबरी है।
C: MVT से किन्हीं दो मानों में बराबरी है।
D: दो बिंदुओं के बीच MVT परिवर्तन शून्य देता है।
CM05. f, [2,5] पर सतत, भीतर अवकलनीय और 1≤f′≤4 है। कौन-सी सीमा मिलेगी?
A. 1≤f(5)−f(2)≤4 B. 3≤f(5)−f(2)≤12 C. 2≤f(5)−f(2)≤5 D. f(5)−f(2)=3
उत्तर: B
A: अवकलज की सीमाओं को लंबाई 3 से गुणा करें।
B: MVT से f(5)−f(2)=3f′(c)।
C: सिरों के निर्देशांक अवकलज सीमाएँ नहीं।
D: केवल परास निश्चित है, बराबरी नहीं।
CM06. (0,1) में x³+x−1 के कितने वास्तविक मूल हैं?
A. 0 B. At least two / कम से कम दो C. Exactly one / ठीक एक D. Infinitely many / अनंत
उत्तर: C
A: सांतत्य और विपरीत सिरा-चिह्न मूल देते हैं।
B: धनात्मक अवकलज दो मूल रोकता है।
C: सांतत्य अस्तित्व और 3x²+1>0 अद्वितीयता देता है।
D: कठोर वृद्धि इसे रोकती है।
स्रोत और सीमा
आधिकारिक माध्य मान प्रमेय; रोल तथा अवकलज-परिणाम इसके उपयोग का आधार हैं।
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