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Introduction to Number System

पाठ 1 / 222 मिनटमुफ़्त

संख्या पद्धति का परिचय

संख्या पद्धति वह तरीका है जिससे हम संख्याओं को वर्गीकृत करते हैं और उनके साथ काम करते हैं। RRB NTPC के लगभग हर गणित प्रश्न की नींव यही है।

संख्याओं के प्रकार

  • प्राकृत संख्याएँ: 1, 2, 3, 4, ...
  • पूर्ण संख्याएँ: 0, 1, 2, 3, ...
  • पूर्णांक: ..., -2, -1, 0, 1, 2, ...
  • परिमेय संख्याएँ: p/q के रूप की संख्याएँ जहाँ q शून्य नहीं है (जैसे 3/4, -2, 0.5)
  • अपरिमेय संख्याएँ: अनवसानी और अनावर्ती दशमलव (जैसे √2, π)
  • अभाज्य संख्याएँ: जिनके ठीक दो गुणनखंड हों, 1 और स्वयं (2, 3, 5, 7, 11, ...)

याद रखने योग्य मुख्य तथ्य

  • 2 एकमात्र सम अभाज्य संख्या है।
  • 1 न तो अभाज्य है और न ही भाज्य।
  • 1 से 100 के बीच 25 अभाज्य संख्याएँ हैं।

त्वरित उदाहरण

प्रश्न: इनमें से कौन-सी परिमेय संख्या है: √3, 0.75, π?

उत्तर: 0.75 = 3/4, इसलिए 0.75 परिमेय संख्या है।

उदाहरण से समझें

उपमा: संख्याओं का परिवार-वृक्ष

संख्याओं को एक बड़े परिवार-वृक्ष की तरह सोचें:

  • प्राकृत संख्याएँ (1, 2, 3 …) वे बच्चे हैं जो गिनती शुरू करते हैं।
  • इनमें 0 जोड़ दें तो ये पूर्ण संख्याएँ बन जाती हैं — परिवार में खाली कुर्सी भी शामिल हो गई।
  • ऋणात्मक रिश्तेदार जोड़ें तो पूर्णांक बनते हैं।
  • बाँटना (3/4 जैसी भिन्न) स्वीकार करें तो परिवार परिमेय संख्याओं तक बढ़ जाता है।
  • जिनके दशमलव न खत्म होते हैं, न दोहराते हैं (√2, π) वे अपरिमेय चचेरे भाई हैं।
  • सब मिलकर वास्तविक संख्याएँ बनाते हैं।

जैसे हर बच्चा पूरे परिवार का हिस्सा है, वैसे ही हर प्राकृत संख्या पूर्ण संख्या, पूर्णांक, परिमेय और वास्तविक संख्या भी है।

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