पूँजी, अवधि और लाभ-वितरण का अनुपात
सीखने का लक्ष्य
पूँजी और अवधि के आधार पर योगदान निकालना, साझेदारों में लाभ बाँटना और दिए गए लाभ-वितरण अनुपात से निवेश की अज्ञात अवधि ज्ञात करना।
अवधारणा और मान्यताएँ
इस पूरे पाठ में लेखा-अवधि 12 महीने है। प्रत्येक साझेदार की बताई गई पूँजी उसके सक्रिय महीनों के दौरान अपरिवर्तित रहती है। मानें कि समझौते के अनुसार वितरण के लिए उपलब्ध पूरा लाभ, पूँजी और अवधि के गुणनफल के अनुपात में बाँटा जाता है। कोई वेतन या कमीशन नहीं दिया जाता। वापस की जाने वाली मूल पूँजी इस लाभ का हिस्सा नहीं है।
अधिक पूँजी व्यवसाय को अधिक आर्थिक सहयोग देती है; उसे अधिक समय तक लगाए रखने से भी योगदान बढ़ता है। इस मॉडल में समान अवधि के लिए समान पूँजी लगाने पर समान लाभ मिलता है। इसलिए:
योगदान का भार = पूँजी × सक्रिय महीनों की संख्या। साझेदार का लाभ = कुल लाभ × उस साझेदार का भार ÷ सभी भारों का योग।
सभी अवधियाँ एक ही इकाई में लें। योगदान के भार की इकाई रुपया-महीना है; इनके अनुपात की कोई इकाई नहीं होती। अवधियाँ समान होने पर वे कट जाती हैं और केवल पूँजी का अनुपात बचता है। पूँजियाँ समान होने पर केवल अवधि का अनुपात महत्त्वपूर्ण होता है। सिर्फ कई साझेदार होने से इनमें से कोई भी छोटा तरीका लागू नहीं हो जाता।
सभी भारों को एक साथ सरल करें, अनुपात के भागों को जोड़ें और उस कुल के आधार पर लाभ बाँटें। सभी हिस्सों का योग मूल लाभ के बराबर होना चाहिए। यहाँ सभी उत्तर सटीक हैं।
हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1 — समान अवधियाँ। A ₹45,000 और B ₹75,000 लगाता है। दोनों की अवधि 12 महीने है। ₹36,000 का लाभ बाँटिए।
भारों का अनुपात = 45,000 × 12 : 75,000 × 12 = 3:5। कुल भाग = 3 + 5 = 8। A का लाभ = 36,000 × 3/8 = ₹13,500। B का लाभ = 36,000 × 5/8 = ₹22,500। जाँच: 13,500 + 22,500 = 36,000।
उदाहरण 2 — असमान अवधियाँ। 12 महीने की लेखा-अवधि में A ₹60,000 को 12 महीने और B ₹90,000 को 8 महीने के लिए लगाता है। लाभ ₹50,400 है।
A का भार = 60,000 × 12 = 720,000। B का भार = 90,000 × 8 = 720,000। अनुपात 1:1 है, इसलिए प्रत्येक को 50,400 ÷ 2 = ₹25,200 मिलते हैं। B की अधिक पूँजी का प्रभाव उसकी कम अवधि से ठीक संतुलित हो जाता है।
उदाहरण 3 — तीन साझेदार। A ₹40,000 को 12 महीने, B ₹60,000 को 9 महीने और C ₹80,000 को 6 महीने के लिए लगाता है। ₹75,000 का लाभ बाँटिए।
भार: A = 40,000 × 12 = 480,000; B = 60,000 × 9 = 540,000; C = 80,000 × 6 = 480,000। प्रत्येक को 60,000 से भाग देने पर अनुपात 8:9:8 मिलता है। कुल भाग = 25; एक भाग = 75,000 ÷ 25 = 3,000। A = 8 × 3,000 = ₹24,000; B = 9 × 3,000 = ₹27,000; C = 8 × 3,000 = ₹24,000। इनका योग ₹75,000 है।
आम गलतियाँ
अलग-अलग अवधियाँ होने पर भी केवल पूँजी का अनुपात लेना; किसी साझेदार के अनुपात-भाग को कुल भागों के बजाय दूसरे साझेदार के भाग से तुलना करके लाभ निकालना; महीनों और वर्षों को मिलाना; वापस मिलने वाली पूँजी को बाँटने योग्य लाभ में जोड़ देना।
अभ्यास प्रश्न
- A ₹28,000 और B ₹42,000 लगाता है। दोनों की अवधि 12 महीने है। ₹35,000 का लाभ बाँटिए।
- A ₹48,000 को 10 महीने और B ₹40,000 को 12 महीने के लिए लगाता है। ₹54,000 का लाभ बाँटिए।
- A ₹30,000 को 12 महीने, B ₹45,000 को 8 महीने और C ₹60,000 को 3 महीने के लिए लगाता है। ₹45,000 का लाभ बाँटिए।
- A ₹50,000 को 12 महीने के लिए लगाता है। B ₹75,000 को कुछ महीनों के लिए लगाता है। लाभ का अनुपात A:B = 4:3 है। B के निवेश की अवधि ज्ञात कीजिए।
चरणबद्ध हल
- समान अवधियाँ कट जाती हैं: 28,000:42,000 = 2:3। कुल भाग = 5। A = 35,000 × 2/5 = ₹14,000; B = 35,000 × 3/5 = ₹21,000।
- भार = 48,000 × 10 : 40,000 × 12 = 480,000:480,000 = 1:1। प्रत्येक को 54,000 ÷ 2 = ₹27,000 मिलते हैं।
- भार = (30,000 × 12):(45,000 × 8):(60,000 × 3) = 360,000:360,000:180,000 = 2:2:1। कुल भाग = 5; एक भाग = 45,000 ÷ 5 = 9,000। A और B में से प्रत्येक को 2 × 9,000 = ₹18,000 मिलते हैं; C को ₹9,000 मिलते हैं।
- मानें कि B की निवेश-अवधि t महीने है। तब 600,000/(75,000t) = 4/3। तिर्यक गुणा करने पर 1,800,000 = 300,000t, इसलिए t = 6 महीने। जाँच: 600,000:450,000 = 4:3।
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