त्रिभुजों की सर्वांगसमता और समरूपता
सीखने का परिणाम
त्रिभुजों के मिलान की मान्य कसौटियाँ लागू करें और संगत लंबाइयों तथा क्षेत्रफलों को सही पैमाने से बदलें।
अवधारणाएँ और मान्यताएँ
सर्वांगसम त्रिभुजों को खिसकाने, घुमाने या परावर्तित करने पर वे एक-दूसरे पर पूरी तरह बैठ जाते हैं; आकार और माप दोनों समान होते हैं। त्रिभुज ABC ≅ त्रिभुज DEF में क्रम A↔D, B↔E, C↔F तय करता है। इसलिए AB↔DE, BC↔EF और AC↔DF।
सर्वांगसमता की कसौटियों में संगत माप बराबर चाहिए: SSS (तीन भुजाएँ), SAS (दो भुजाएँ और बीच का कोण), ASA (दो कोण और बीच की भुजा), AAS (दो कोण और उनके बीच न आने वाली भुजा), तथा RHS (समकोण, कर्ण और समकोण बनाने वाली एक भुजा)। दो कोण तीसरा तय करते हैं, जिससे AAS का कारण समझ आता है।
अंतर्विष्ट कोण दोनों ज्ञात भुजाओं के बीच होता है। SSA—दो भुजाएँ और उनके बीच न आने वाला कोण—सर्वांगसमता की सामान्य कसौटी नहीं है। कभी-कभी वही आँकड़े बनाए रखते हुए तीसरा शीर्ष दो जगह हो सकता है। RHS समकोण त्रिभुजों का विशेष मामला है।
समरूप त्रिभुजों के संगत कोण बराबर और संगत भुजाएँ समानुपाती होती हैं। कसौटियाँ हैं AA, तीन समानुपाती भुजाएँ (SSS), तथा दो समानुपाती भुजाएँ और बराबर अंतर्विष्ट कोण (SAS)। AAA से समरूपता मिलती है, सर्वांगसमता जरूरी नहीं।
पैमाना गुणक k, नई लंबाई को संगत मूल लंबाई से बाँटने पर मिलता है। तब k > 0; परिमाप k गुना, लेकिन क्षेत्रफल k² गुना होता है। आधार और लंबवत ऊँचाई दोनों k गुना होते हैं, इसलिए वर्ग आता है। समरूपता के बिना क्षेत्रफल का यह नियम न लगाएँ।
केवल बराबर क्षेत्रफल से न सर्वांगसमता सिद्ध होती है, न समरूपता। 3, 8 cm और 4, 6 cm की लंबवत भुजाओं वाले समकोण त्रिभुजों का क्षेत्रफल 12 cm² है, लेकिन उनकी भुजाओं के युग्म न बराबर हैं, न समान अनुपात में।
हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1 — संगति का क्रम महत्वपूर्ण है। त्रिभुज ABC में AB = 5 cm, BC = 7 cm, AC = 8 cm। त्रिभुज PQR में PR = 5 cm, PQ = 7 cm, QR = 8 cm। मिलान है AB↔RP, BC↔PQ और AC↔RQ। SSS से त्रिभुज ABC ≅ त्रिभुज RPQ मिलता है, त्रिभुज PQR नहीं।
उदाहरण 2 — लंबाई और क्षेत्रफल का पैमाना। त्रिभुज ABC और DEF में ∠B = ∠E = 90° तथा ∠A = ∠D। AB = 6 cm, BC = 8 cm और DE = 9 cm दिया है। AA से ABC ∼ DEF। पैमाना गुणक = 9/6 = 3/2, इसलिए EF = 8 × 3/2 = 12 cm। मूल क्षेत्रफल = 6 × 8/2 = 24 cm²; नया क्षेत्रफल = 24 × (3/2)² = 54 cm²।
उदाहरण 3 — क्षेत्रफल से लंबाई का अनुपात। समरूप त्रिभुजों में छोटे:बड़े क्षेत्रफल का अनुपात 9:25 है। लंबाइयों का अनुपात √9:√25 = 3:5 है। इसलिए छोटे त्रिभुज की 12 cm भुजा के संगत बड़ी भुजा 12 × 5/3 = 20 cm है।
आम गलतियाँ
पूरी गणना में संगति का क्रम बनाए रखें। क्षेत्रफलों का अनुपात लंबाइयों के अनुपात का वर्ग है, केवल लंबाइयों का अनुपात नहीं।
अभ्यास प्रश्न
- त्रिभुज ABC और DEF में A और D समकोण हैं। BC = EF = 13 cm तथा AB = DE = 5 cm। सर्वांगसमता का क्रम और कसौटी बताएँ।
- PQR ∼ XYZ, जहाँ PQ = 10 cm, XY = 15 cm और QR = 14 cm। YZ निकालें।
- समरूप त्रिभुजों की संगत भुजाएँ 5 cm और 8 cm हैं। छोटे का क्षेत्रफल 25 cm² है। बड़े का क्षेत्रफल निकालें।
- दो त्रिभुजों में प्रत्येक की दो भुजाएँ 7 cm और 10 cm हैं तथा 30° का कोण 7 cm भुजा के सामने है। क्या ये आँकड़े सर्वांगसमता निश्चित करते हैं?
हल सहित उत्तर
- समकोणों की संगति A↔D, कर्णों की BC↔EF और भुजाओं की AB↔DE है। इसलिए RHS से ABC ≅ DEF।
- संगति से QR↔YZ। पैमाना गुणक = 15/10 = 3/2, इसलिए YZ = 14 × 3/2 = 21 cm।
- क्षेत्रफल का गुणक = (8/5)² = 64/25। बड़ा क्षेत्रफल = 25 × 64/25 = 64 cm²।
- नहीं। यह SSA है, जिसमें दिया कोण दोनों ज्ञात भुजाओं के बीच नहीं है। इन आँकड़ों के लिए तीसरे शीर्ष की दो अलग स्थितियाँ संभव हैं, इसलिए सर्वांगसमता निश्चित नहीं है।
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