रेखाएँ, कोण और समांतर रेखाओं के संबंध
सीखने का परिणाम
कोणों के संबंध पहचानें, अज्ञात कोण निकालें और सही कोण-युग्म से रेखाओं की समांतरता जाँचें।
अवधारणाएँ और मान्यताएँ
समतल यूक्लिडीय ज्यामिति में काम करें। रेखा दोनों ओर बढ़ती है; किरण का एक अंतिम बिंदु और रेखाखंड के दो होते हैं। यहाँ निकाले जाने वाले कोण गैर-प्रतिवर्ती हैं, यानी 180° से अधिक नहीं हैं, और अंशों में मापे जाते हैं। ∠ABC में B शीर्ष है।
पूरा चक्कर 360°, सरल कोण 180° और समकोण 90° है। पूरक कोणों का योग 90° और संपूरक कोणों का योग 180° होता है। इन युग्मों के कोणों का आसन्न होना जरूरी नहीं।
रैखिक युग्म में दो आसन्न कोणों की बाकी भुजाएँ विपरीत किरणें होती हैं, इसलिए योग 180° है। दो अलग रेखाएँ प्रतिच्छेद करें तो शीर्षाभिमुख कोण बराबर होते हैं: दोनों उसी पड़ोसी कोण के संपूरक हैं। केवल आसन्न होने से कोण रैखिक युग्म नहीं बनते।
तिर्यक रेखा दो अलग रेखाओं को अलग बिंदुओं पर काटती है। संगत कोण दोनों प्रतिच्छेदों पर एक जैसी स्थितियों में होते हैं। एकांतर अंतःकोण दोनों रेखाओं के बीच और तिर्यक रेखा के विपरीत ओर होते हैं; एक ही ओर के अंतःकोण दोनों रेखाओं के बीच, तिर्यक रेखा की उसी ओर होते हैं।
समांतर रेखाओं में संगत कोण बराबर, एकांतर अंतःकोण बराबर और एक ही ओर के अंतःकोणों का योग 180° होता है। समांतर रेखाओं की दिशा समान होने से तिर्यक रेखा के साथ संगत कोण बराबर बनते हैं। सरल कोण और शीर्षाभिमुख कोणों के संबंधों से बाकी नियम मिलते हैं।
उलटे, सही पहचाने गए युग्म में इनमें से कोई एक संबंध दो समतलीय रेखाओं की समांतरता सिद्ध करता है। असंबंधित कोण-युग्म पर्याप्त नहीं है।
हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1 — रैखिक युग्म। A, O और B इसी क्रम में एक रेखा पर हैं। किरण OC, रेखा AB पर नहीं है और ∠AOC = 127°। OA और OB विपरीत किरणें हैं, इसलिए ∠COB = 180° - 127° = 53°।
उदाहरण 2 — प्रतिच्छेदी रेखाएँ। A, O, B और C, O, D क्रमशः इन्हीं क्रमों में एक-एक रेखा पर हैं। रेखाएँ O पर मिलती हैं। ∠AOC = (3x + 11)° और ∠BOD = (5x - 27)° दिया है। शीर्षाभिमुख कोण बराबर होने से 3x + 11 = 5x - 27। इसलिए 2x = 38 और x = 19। दोनों कोण 68° हैं; आसन्न ∠COB = 112°।
उदाहरण 3 — समांतर रेखाएँ। दो समांतर क्षैतिज रेखाओं पर क्रमशः A, P, B और C, Q, D बाएँ से दाएँ इसी क्रम में हैं। Q, P से नीचे और बाईं ओर है; PQ तिर्यक रेखा है। ∠DQP = (3x + 10)° और ∠BPQ = (5x + 10)° दिया है। ये एक ही ओर के अंतःकोण हैं, इसलिए 8x + 20 = 180। अतः x = 20, कोण 70° और 110° हैं, और ∠APQ = 180° - 110° = 70°।
आम गलतियाँ
रेखाएँ समांतर दिखें तो उन्हें समांतर न मान लें। कोण का नियम लगाने से पहले उसकी स्थिति पहचानें। रैखिक युग्म में विपरीत किरणें होना जरूरी है।
अभ्यास प्रश्न
- 37° का पूरक कोण निकालें।
- A, O, B इसी क्रम में एक रेखा पर हैं और OC उस रेखा पर नहीं है। ∠AOC = (3x + 15)° और ∠COB = (2x + 35)° हो तो x और दोनों कोण निकालें।
- रेखाएँ AB और CD, O पर मिलती हैं; बिंदुओं के क्रम A-O-B और C-O-D हैं। ∠AOC = 74° हो तो ∠BOD और ∠AOD निकालें।
- एक तिर्यक रेखा समतलीय रेखाओं l और m को P और Q पर काटती है। संगत कोणों का एक युग्म 68° और 112° है। क्या रेखाएँ समांतर हो सकती हैं?
हल सहित उत्तर
- पूरक कोणों का योग 90° है, इसलिए आवश्यक कोण 90° - 37° = 53° है।
- रैखिक युग्म से 5x + 50 = 180, इसलिए x = 26। मान रखने पर 93° और 87° मिलते हैं, जिनका योग 180° है।
- शीर्षाभिमुख कोण बराबर होने से ∠BOD = 74°। रैखिक युग्म से ∠AOD = 180° - 74° = 106°।
- नहीं। समांतर रेखाओं में संगत कोण बराबर होने चाहिए, लेकिन 68° ≠ 112°। उनका योग 180° होना संगत कोणों की समानता का विकल्प नहीं है।
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