बहुभुजों के आंतरिक और बाह्य कोण
सीखने का उद्देश्य
बहुभुज के कोणों का योग निकालना, सही बाह्य मोड़ पहचानना और समझना कि किसी कोण से भुजाओं की संख्या कब निकाली जा सकती है।
अवधारणाएँ और मान्यताएँ
यहाँ n ≥ 3 भुजाओं वाले सरल, पूर्णतः उत्तल बहुभुज लें: भुजाएँ एक-दूसरे को नहीं काटतीं, प्रत्येक आंतरिक कोण 0° और 180° के बीच है तथा क्रमागत भुजाएँ एक ही सीधी रेखा पर नहीं हैं।
एक शीर्ष से विकर्ण खींचने पर उत्तल बहुभुज n − 2 त्रिभुजों में बँट जाता है। इसलिए:
आंतरिक कोणों का योग = (n − 2) × 180°।
इस योग के लिए भुजाओं या कोणों का बराबर होना आवश्यक नहीं है। सामान्यतः कुल योग को n से भाग देकर किसी एक आंतरिक कोण का मान नहीं निकाला जा सकता।
बाह्य कोणों के लिए सीमा पर एक निश्चित दिशा में एक पूरा चक्कर लगाएँ। हर शीर्ष पर आने वाली भुजा को आगे बढ़ाएँ और वहाँ से निकलने वाली भुजा की ओर बनने वाला अप्रतिवर्ती मोड़ मापें। प्रत्येक शीर्ष पर एक ही मोड़ गिनें—या तो सभी दक्षिणावर्त या सभी वामावर्त। इन मोड़ों के परिमाणों का योग 360° होता है।
आंतरिक कोण + उससे संबंधित बाह्य मोड़ = 180°।
यहाँ “बाह्य कोण” का अर्थ यही मोड़ है, बहुभुज के बाहर बना कोई प्रतिवर्ती कोण नहीं। किसी शीर्ष के दोनों बाह्य कोण न गिनें। अवतल और स्वयं को काटने वाले पथ इस परिपाटी के दायरे में नहीं हैं।
समबहुभुज की सभी भुजाएँ और सभी कोण बराबर होते हैं। बराबर कोणों वाली गणनाएँ ऐसे उत्तल बहुभुज पर भी लागू होती हैं जिसके सभी कोण बराबर हों, भले ही भुजाएँ बराबर न हों:
प्रत्येक बाह्य मोड़ = 360° ÷ n।
प्रत्येक आंतरिक कोण = 180° − 360° ÷ n।
इसलिए n = 360° ÷ बाह्य मोड़ का उपयोग तभी करें जब सभी मोड़ बराबर हों; प्राप्त संख्या कम-से-कम 3 की पूर्णांक संख्या होनी चाहिए।
हल सहित उदाहरण
उदाहरण 1 — समबहुभुज होने की शर्त के बिना योग। किसी उत्तल बहुभुज के आंतरिक कोणों का योग 1,440° है। तब (n − 2) × 180 = 1,440, इसलिए n − 2 = 8 और n = 10। उसकी दस भुजाएँ हैं, लेकिन प्रत्येक आंतरिक कोण का 144° होना आवश्यक नहीं है।
उदाहरण 2 — आंतरिक और बाह्य कोण का अनुपात। एक समबहुभुज में आंतरिक कोण और उससे संबंधित बाह्य मोड़ का अनुपात 7:2 है। इन्हें 7k° और 2k° लिखें। चूँकि 9k = 180, इसलिए k = 20। दोनों कोण 140° और 40° हैं; अतः n = 360 ÷ 40 = 9।
उदाहरण 3 — असम पंचभुज। उत्तल पंचभुज ABCDE में A, B, C और D के आंतरिक कोण क्रमशः 110°, 125°, 100° और 130° हैं। कुल योग = (5 − 2) × 180° = 540°। इसलिए ∠E = 540° − 465° = 75°, और E का बाह्य मोड़ = 180° − 75° = 105°। बहुभुज के सम होने की कोई मान्यता नहीं ली गई है।
सामान्य गलतियाँ
आंतरिक कोणों के योग के लिए n × 180° का उपयोग न करें। बाह्य कोणों का कुल योग 360° होने का अर्थ यह नहीं है कि वे सभी बराबर हैं। भुजाओं की अपूर्णांक संख्या का पूर्णांकन करके उसे किसी वैध समबहुभुज की भुजा-संख्या न मानें।
अभ्यास प्रश्न
- एक उत्तल सप्तभुज के छह आंतरिक कोण 120°, 130°, 140°, 110°, 150° और 125° हैं। सातवाँ कोण निकालें।
- एक उत्तल समबहुभुज का बाह्य मोड़ 24° है। उसकी भुजाओं की संख्या और प्रत्येक आंतरिक कोण निकालें।
- एक उत्तल समबहुभुज का प्रत्येक आंतरिक कोण 165° है। उसकी भुजाओं की संख्या निकालें।
- क्या किसी उत्तल समबहुभुज का बाह्य मोड़ ठीक 32° हो सकता है? कारण बताएँ।
हल सहित उत्तर
- सात भुजाओं के लिए कुल योग = (7 − 2) × 180° = 900°। दिए गए छह कोणों का योग 775° है, इसलिए सातवाँ कोण = 900° − 775° = 125°।
- मोड़ बराबर हैं, इसलिए n = 360 ÷ 24 = 15। प्रत्येक आंतरिक कोण = 180° − 24° = 156°।
- प्रत्येक बाह्य मोड़ = 180° − 165° = 15°। अतः n = 360 ÷ 15 = 24।
- सभी मोड़ बराबर होने पर n = 360 ÷ 32 = 11.25 होना चाहिए। किसी बहुभुज की भुजाओं की संख्या भिन्नात्मक नहीं हो सकती, इसलिए ऐसा उत्तल समबहुभुज संभव नहीं है।
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